Ater: Difference between revisions
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'''Ater (अटेर)''' or [[Atair]] (अटैर) or '''[[Attair]] (अटैर)''' is a town, in [[Bhind district]] in [[Madhya Pradesh]]. [[Ater]] clan is found in [[Afghanistan]].<ref>[[An Inquiry Into the Ethnography of Afghanistan]] By H. W. Bellew, The Oriental University Institute, Woking, 1891, p.145 </ref> | |||
== Variants == | |||
*[[Devagiri]] (देवगिरि) (जिला औरंगाबाद, महा.) ([[AS]], p.444) | |||
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It is 22 km from Bhind and is lacated in north-west of Bhind adjoining Morena district. | |||
== Pachaira War == | == Pachaira War == | ||
The ancestor of [[Bamrauli]]s '''Jagdeo Singh''' had come from [[Agra]] and stayed at [[Bhind]] which was ruled by Aniruddh Singh [[Bhadauria]] (1730-1741). There was war between Bamraulias and Bhadauria rulers at place called [[Pach'hara]] in which Bhadauria was defeated. This war was fought on ''bhado sudi'' 10 friday vikram samvat 1794 ('''1737 AD'''). 12000 soldiers of Bhadaurias and 7000 soldiers of Jats took part in this war. Bhim Singh captured 11 elephants, nishans of nagaras, big canons and kept them at [[Chitora]], [[Karwas]], [[Gohad]] etc places in his state.<ref>Dr. Ajay Kumar Agnihotri (1985) : Gohad ke Jaton ka Itihas (Hindi), p. 21</ref> In 1739 AD Peshwa accepted the rights of Rana rulers on Gohad. <ref>Dr. Ajay Kumar Agnihotri (1985) : Gohad ke Jaton ka Itihas (Hindi), p. 21</ref><ref>K.C.Luwai:Gwalior State Gazetteer, Part I, p. 217</ref> | The ancestor of [[Bamrauli]]s '''Jagdeo Singh''' had come from [[Agra]] and stayed at [[Bhind]] which was ruled by Aniruddh Singh [[Bhadauria]] (1730-1741). There was war between Bamraulias and Bhadauria rulers at place called [[Pach'hara]] in which Bhadauria was defeated. This war was fought on ''bhado sudi'' 10 friday vikram samvat 1794 ('''1737 AD'''). 12000 soldiers of Bhadaurias and 7000 soldiers of Jats took part in this war. Bhim Singh captured 11 elephants, nishans of nagaras, big canons and kept them at [[Chitora]], [[Karwas]], [[Gohad]] etc places in his state.<ref>Dr. Ajay Kumar Agnihotri (1985) : Gohad ke Jaton ka Itihas (Hindi), p. 21</ref> In 1739 AD Peshwa accepted the rights of Rana rulers on Gohad. <ref>Dr. Ajay Kumar Agnihotri (1985) : Gohad ke Jaton ka Itihas (Hindi), p. 21</ref><ref>K.C.Luwai:Gwalior State Gazetteer, Part I, p. 217</ref> | ||
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==Fort of Ater == | ==Fort of Ater == | ||
A beautiful fort near Ater village, 22 km from [[Bhind]], was built by the [[Bhadauria]] Jat kings Badan Singh, Maha Singh and Bakhat Singh in 1664-1668. The fort is situated on the banks of the Chambal River.<ref>http://www.experiencefestival.com/bhind_district_-_fort_of_ater</ref> | A beautiful fort near Ater village, 22 km from [[Bhind]], was built by the [[Bhadauria]] Jat kings Badan Singh, Maha Singh and Bakhat Singh in 1664-1668. The fort is situated on the banks of the Chambal River.<ref>http://www.experiencefestival.com/bhind_district_-_fort_of_ater</ref> | ||
== Villages in Ater Tahsil== | |||
[[File:Bhind District4.jpg|thumb|Villages around Ater]] | |||
1. Adhurjpura, | |||
2. Ahrolighat, | |||
3. Ahrolikali, | |||
4. Akon, | |||
5. [[Andhapura]], | |||
6. [[Anurudhapura]], | |||
7. Arjunpura, | |||
8. Ater, | |||
9. Badapura, | |||
10. Baderi, | |||
11. Badhpura, | |||
12. Badhpuri, | |||
13. Balarpura, | |||
14. Bamanpura, | |||
15. Barkapura, | |||
16. Bhagtuapura, | |||
17. Bhagwantpura, | |||
18. Bhimpura, | |||
19. Bijora, | |||
20. Bindwa, | |||
21. Biragwan Rani, | |||
22. Budhanpur, | |||
23. [[Chachar]], | |||
24. Chhidiyapura, | |||
25. Chhounda, | |||
26. Chilonga, | |||
27. [[Chitawali]], | |||
28. Chomho, | |||
29. Daipura, | |||
30. Dangsarkar, | |||
31. Datawali, | |||
32. Dulhagan, | |||
33. Gader, | |||
34. Gadha, | |||
35. Gajna, | |||
36. Ghinochi, | |||
37. Gohdupura, | |||
38. Hamirapura, | |||
39. Hetpura, | |||
40. Himmatpura, | |||
41. Hulapura, | |||
42. Jalpura, | |||
43. Jalpuri, | |||
44. Jaluapura, | |||
45. Jamhora, | |||
46. Jamsara, | |||
47. Janora, | |||
48. Jori Ahir, | |||
49. Jorikotwal, | |||
50. Kachhpura, | |||
51. Kadora, | |||
52. Kalyanpura, | |||
53. Kamai, | |||
54. Kanera, | |||
55. Karekapura, | |||
56. Kasahapura , | |||
57. Khaderi, | |||
58. Khadit, | |||
59. Kharika, | |||
60. Kheda Ater, | |||
61. Kherat, | |||
62. Kheri, | |||
63. Khipona, | |||
64. Kisupura, | |||
65. Koshath, | |||
66. Kyaripura, | |||
67. Madhaiyapura, | |||
68. Madhopura, | |||
69. [[Maghora]] , | |||
70. Maharajpura, | |||
71. Manepura, | |||
72. Matghana, | |||
73. Modhana, | |||
74. Mora, | |||
75. Nakhloli, | |||
76. Naripura, | |||
77. Nawali Brindawan, | |||
78. Nawalihar, | |||
79. Niwari, | |||
80. Pali, | |||
81. Para, | |||
82. Pariyaya, | |||
83. Pratappura, | |||
84. Rama, | |||
85. Rampura, | |||
86. Ramta, | |||
87. Ranipura, | |||
88. Ratnupura, | |||
89. Repura, | |||
90. Ridouli, | |||
91. Rohinda, | |||
92. Sakaraya, | |||
93. Salimpur, | |||
94. Sanglitor, | |||
95. Saura, | |||
96. Shukalpura, | |||
97. Soyee, | |||
98. Surajpura, | |||
99. [[Surpura]], | |||
100. Tarsokhar, | |||
101. Torkapura, | |||
102. Udannkheda, | |||
103. Udanpura, | |||
104. Udotgarh, | |||
== सुजस प्रबंध में राजा भीम सिंह का वर्णन == | == सुजस प्रबंध में राजा भीम सिंह का वर्णन == | ||
[[सुजस प्रबंध]] में '''छठे छंद से 68''' वें छंद तक राजा भीम सिंह राणा के युद्धों का विशद वर्णन किया है. | [[सुजस प्रबंध]] में '''छठे छंद से 68''' वें छंद तक राजा भीम सिंह राणा के युद्धों का विशद वर्णन किया है. | ||
16 वें छंद में, इसमें बड़े विस्तार के साथ, '''अनिरुद्ध''' या अनुरुद्ध ([[Ater|अटेर]] का शासक), सिरजा ('''महादजी सिंधिया''') आदि मराठा सरदारों के साथ राजा भीमसिंह राणा के भीषण संग्राम का वर्णन है. कवि राजा भीमसिंह और उनके सैनिकों को सूर्य के प्रकाश के समान और शत्रु सेना को अंधकार के समान बताता है. गोहद राजा भीम सिंह राणा ने अनुरुद्ध (अटेर का शासक) के दल पर जीत प्राप्त की. फलतः संसार में उनका यश असीम होकर स्थापित हुआ. <ref>सुजस प्रबंध:छन्द 16, p. 31</ref> १६ वें छंद में, राजा भीमसिंह राणा के भावसिंह तथा मदन सिंह नामक दो सरदारों के रण कौशल का भी वर्णन किया गया है. | 16 वें छंद में, इसमें बड़े विस्तार के साथ, '''अनिरुद्ध''' या अनुरुद्ध ([[Ater|अटेर]] का शासक), सिरजा ('''महादजी सिंधिया''') आदि मराठा सरदारों के साथ राजा भीमसिंह राणा के भीषण संग्राम का वर्णन है. कवि राजा भीमसिंह और उनके सैनिकों को सूर्य के प्रकाश के समान और शत्रु सेना को अंधकार के समान बताता है. गोहद राजा भीम सिंह राणा ने अनुरुद्ध (अटेर का शासक) के दल पर जीत प्राप्त की. फलतः संसार में उनका यश असीम होकर स्थापित हुआ. <ref>सुजस प्रबंध:छन्द 16, p. 31</ref> १६ वें छंद में, राजा भीमसिंह राणा के '''भावसिंह''' तथा '''मदन सिंह''' नामक दो सरदारों के रण कौशल का भी वर्णन किया गया है. | ||
== अटेर == | |||
[[Vijayendra Kumar Mathur|विजयेन्द्र कुमार माथुर]]<ref>[[Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur]], p.17</ref> ने लेख किया है ...अटेर ([[AS]], p.17) मध्य प्रदेश के ग्वालियर में चंबल नदी के दक्षिणी तट पर बसा हुआ प्राचीन नगर। अटेर का क़िला नदी की शाखाओं के बीच के एक ऊंचे स्थान पर स्थित है।अटेर का क़िला मिट्टी, ईंट और चूने का बना है। एक अभिलेख के अनुसार इसको भदौरिया राजा बदनसिंह ने बनवाया था। बदनसिंह के इस लेख में अटेर का प्राचीन नाम [[Devagiri|देवगिरि]] लिखा है। | |||
== अटेर का क़िला == | |||
अटेर का क़िला मध्य प्रदेश राज्य के ऐतिहासिक स्थानों में से एक है। यह भिंड ज़िले में स्थित है और प्रमुख पर्यटन स्थल है। यह क़िला भदौरिया राजा बदनसिंह ने 1664 से 1668 ई. के बीच बनवाया था। भदौरिया राजाओं के नाम पर ही भिंड क्षेत्र को पहले '[[Badhwar|बधवार]]' कहा जाता था। गहरी [[Chambal|चंबल नदी]] की घाटी में स्थित यह क़िला भिंड ज़िले से 35 कि.मी. पश्चिम में स्थित है। 'खूनी दरवाज़ा', 'बदन सिंह का महल', 'हथियापोर', 'राजा का बंगला', 'रानी का बंगला' और 'बारह खंबा महल' इस क़िले के मुख्य आकर्षण हैं। चंबल नदी के किनारे बना यह दुर्ग भदावर राजाओं के गौरवशाली इतिहास की कहानी बयां करता है। अटेर का क़िला अब काफ़ी जर्जर स्थिति में पहुँच चुका है। यदि इस क़िले का पूर्ण रूप से जीर्णोद्धार हो जाए तो यहां पर पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, क्योंकि अटेर से नजदीक ही आगरा पड़ता है। चंबल नदी पर पुल बन जाने के बाद यहां भी बड़ी संख्या में पर्यटक आ सकते हैं। क़िले के जीर्णोद्धार का काम रुक-रुक कर किया जा रहा है। '''[[Bhadarwar|भदावर राजाओं]]''' के इतिहास में इस क़िले का बहुत महत्व है। यह हिन्दू और मुग़ल स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है।<ref>[http://bharatdiscovery.org/india/%E0%A4%85%E0%A4%9F%E0%A5%87%E0%A4%B0_%E0%A4%95%E0%A4%BE_%E0%A4%95%E0%A4%BC%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE भारतकोश-अटेर का क़िला]</ref> | |||
== External links == | == External links == | ||
*[http://en.wikipedia.org/wiki/Bhaduria History of Bhadaurias of Ater] | *[http://en.wikipedia.org/wiki/Bhaduria History of Bhadaurias of Ater] | ||
*[http://www.uq.net.au/~zzhsoszy/ips/b/bhadawar.html BHADAWAR (Zamindari)] | *[http://www.uq.net.au/~zzhsoszy/ips/b/bhadawar.html BHADAWAR (Zamindari)] | ||
*[https://www.flickr.com/places/info/2273350 Ater on Flickr] | |||
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Latest revision as of 15:01, 22 February 2020
Author:Laxman Burdak, IFS (Retd.) |

Ater (अटेर) or Atair (अटैर) or Attair (अटैर) is a town, in Bhind district in Madhya Pradesh. Ater clan is found in Afghanistan.[1]
Variants
Location
It is 22 km from Bhind and is lacated in north-west of Bhind adjoining Morena district.
Pachaira War
The ancestor of Bamraulis Jagdeo Singh had come from Agra and stayed at Bhind which was ruled by Aniruddh Singh Bhadauria (1730-1741). There was war between Bamraulias and Bhadauria rulers at place called Pach'hara in which Bhadauria was defeated. This war was fought on bhado sudi 10 friday vikram samvat 1794 (1737 AD). 12000 soldiers of Bhadaurias and 7000 soldiers of Jats took part in this war. Bhim Singh captured 11 elephants, nishans of nagaras, big canons and kept them at Chitora, Karwas, Gohad etc places in his state.[2] In 1739 AD Peshwa accepted the rights of Rana rulers on Gohad. [3][4]
The Ranas kept their capital at Pach'hara for some time and later shifted the capital to Gohad. The brother of Gohad ruler Jagdeo Singh constructed a fort here in samvat 1680 (1623 AD). [5]
After the Pachaira war there was no powerful ruler left on the south of Chambal River who could compete with Raja Bhim Singh.[6]
Fort of Ater
A beautiful fort near Ater village, 22 km from Bhind, was built by the Bhadauria Jat kings Badan Singh, Maha Singh and Bakhat Singh in 1664-1668. The fort is situated on the banks of the Chambal River.[7]
Villages in Ater Tahsil

1. Adhurjpura, 2. Ahrolighat, 3. Ahrolikali, 4. Akon, 5. Andhapura, 6. Anurudhapura, 7. Arjunpura, 8. Ater, 9. Badapura, 10. Baderi, 11. Badhpura, 12. Badhpuri, 13. Balarpura, 14. Bamanpura, 15. Barkapura, 16. Bhagtuapura, 17. Bhagwantpura, 18. Bhimpura, 19. Bijora, 20. Bindwa, 21. Biragwan Rani, 22. Budhanpur, 23. Chachar, 24. Chhidiyapura, 25. Chhounda, 26. Chilonga, 27. Chitawali, 28. Chomho, 29. Daipura, 30. Dangsarkar, 31. Datawali, 32. Dulhagan, 33. Gader, 34. Gadha, 35. Gajna, 36. Ghinochi, 37. Gohdupura, 38. Hamirapura, 39. Hetpura, 40. Himmatpura, 41. Hulapura, 42. Jalpura, 43. Jalpuri, 44. Jaluapura, 45. Jamhora, 46. Jamsara, 47. Janora, 48. Jori Ahir, 49. Jorikotwal, 50. Kachhpura, 51. Kadora, 52. Kalyanpura, 53. Kamai, 54. Kanera, 55. Karekapura, 56. Kasahapura , 57. Khaderi, 58. Khadit, 59. Kharika, 60. Kheda Ater, 61. Kherat, 62. Kheri, 63. Khipona, 64. Kisupura, 65. Koshath, 66. Kyaripura, 67. Madhaiyapura, 68. Madhopura, 69. Maghora , 70. Maharajpura, 71. Manepura, 72. Matghana, 73. Modhana, 74. Mora, 75. Nakhloli, 76. Naripura, 77. Nawali Brindawan, 78. Nawalihar, 79. Niwari, 80. Pali, 81. Para, 82. Pariyaya, 83. Pratappura, 84. Rama, 85. Rampura, 86. Ramta, 87. Ranipura, 88. Ratnupura, 89. Repura, 90. Ridouli, 91. Rohinda, 92. Sakaraya, 93. Salimpur, 94. Sanglitor, 95. Saura, 96. Shukalpura, 97. Soyee, 98. Surajpura, 99. Surpura, 100. Tarsokhar, 101. Torkapura, 102. Udannkheda, 103. Udanpura, 104. Udotgarh,
सुजस प्रबंध में राजा भीम सिंह का वर्णन
सुजस प्रबंध में छठे छंद से 68 वें छंद तक राजा भीम सिंह राणा के युद्धों का विशद वर्णन किया है.
16 वें छंद में, इसमें बड़े विस्तार के साथ, अनिरुद्ध या अनुरुद्ध (अटेर का शासक), सिरजा (महादजी सिंधिया) आदि मराठा सरदारों के साथ राजा भीमसिंह राणा के भीषण संग्राम का वर्णन है. कवि राजा भीमसिंह और उनके सैनिकों को सूर्य के प्रकाश के समान और शत्रु सेना को अंधकार के समान बताता है. गोहद राजा भीम सिंह राणा ने अनुरुद्ध (अटेर का शासक) के दल पर जीत प्राप्त की. फलतः संसार में उनका यश असीम होकर स्थापित हुआ. [8] १६ वें छंद में, राजा भीमसिंह राणा के भावसिंह तथा मदन सिंह नामक दो सरदारों के रण कौशल का भी वर्णन किया गया है.
अटेर
विजयेन्द्र कुमार माथुर[9] ने लेख किया है ...अटेर (AS, p.17) मध्य प्रदेश के ग्वालियर में चंबल नदी के दक्षिणी तट पर बसा हुआ प्राचीन नगर। अटेर का क़िला नदी की शाखाओं के बीच के एक ऊंचे स्थान पर स्थित है।अटेर का क़िला मिट्टी, ईंट और चूने का बना है। एक अभिलेख के अनुसार इसको भदौरिया राजा बदनसिंह ने बनवाया था। बदनसिंह के इस लेख में अटेर का प्राचीन नाम देवगिरि लिखा है।
अटेर का क़िला
अटेर का क़िला मध्य प्रदेश राज्य के ऐतिहासिक स्थानों में से एक है। यह भिंड ज़िले में स्थित है और प्रमुख पर्यटन स्थल है। यह क़िला भदौरिया राजा बदनसिंह ने 1664 से 1668 ई. के बीच बनवाया था। भदौरिया राजाओं के नाम पर ही भिंड क्षेत्र को पहले 'बधवार' कहा जाता था। गहरी चंबल नदी की घाटी में स्थित यह क़िला भिंड ज़िले से 35 कि.मी. पश्चिम में स्थित है। 'खूनी दरवाज़ा', 'बदन सिंह का महल', 'हथियापोर', 'राजा का बंगला', 'रानी का बंगला' और 'बारह खंबा महल' इस क़िले के मुख्य आकर्षण हैं। चंबल नदी के किनारे बना यह दुर्ग भदावर राजाओं के गौरवशाली इतिहास की कहानी बयां करता है। अटेर का क़िला अब काफ़ी जर्जर स्थिति में पहुँच चुका है। यदि इस क़िले का पूर्ण रूप से जीर्णोद्धार हो जाए तो यहां पर पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, क्योंकि अटेर से नजदीक ही आगरा पड़ता है। चंबल नदी पर पुल बन जाने के बाद यहां भी बड़ी संख्या में पर्यटक आ सकते हैं। क़िले के जीर्णोद्धार का काम रुक-रुक कर किया जा रहा है। भदावर राजाओं के इतिहास में इस क़िले का बहुत महत्व है। यह हिन्दू और मुग़ल स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है।[10]
External links
References
- ↑ An Inquiry Into the Ethnography of Afghanistan By H. W. Bellew, The Oriental University Institute, Woking, 1891, p.145
- ↑ Dr. Ajay Kumar Agnihotri (1985) : Gohad ke Jaton ka Itihas (Hindi), p. 21
- ↑ Dr. Ajay Kumar Agnihotri (1985) : Gohad ke Jaton ka Itihas (Hindi), p. 21
- ↑ K.C.Luwai:Gwalior State Gazetteer, Part I, p. 217
- ↑ Bachchoo Singh Nauhwar: “Karwas Ki Garhi (Bhind), Jat-Veer Smarika, Gwalior. 1992, p. 48
- ↑ Dr. Ajay Kumar Agnihotri (1985) : Gohad ke Jaton ka Itihas (Hindi), p. 24
- ↑ http://www.experiencefestival.com/bhind_district_-_fort_of_ater
- ↑ सुजस प्रबंध:छन्द 16, p. 31
- ↑ Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.17
- ↑ भारतकोश-अटेर का क़िला
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