Varidhara: Difference between revisions
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[[Varidhara Parvata|वारिधार पर्वत]] ([[AS]], p.845) का उल्लेख श्रीमद्भागवत पुराण [5,19,16] में हुआ है- 'श्रीशैलोवेंकटो महेन्द्रो वारिधारो विंध्यः।' संदर्भ से यह दक्षिण भारत का कोई पर्वत जान पड़ता है। संभव है कि यह [[रामायण]] कालीन प्रसिद्ध नगरी [[Kishkindha|किष्किंधा]] का '''[[Prasravana|प्रस्रवण]]''' या [[Pravarshanagiri|प्रवर्षणगिरि]]) हो, क्योंकि वारिधार और प्रस्रवण (=Pravarshana|प्रवर्षण]]) समानार्थक जान पड़ते हैं। <ref>[[Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur]], p.845</ref> | [[Varidhara Parvata|वारिधार पर्वत]] ([[AS]], p.845) का उल्लेख श्रीमद्भागवत पुराण [5,19,16] में हुआ है- 'श्रीशैलोवेंकटो महेन्द्रो वारिधारो विंध्यः।' संदर्भ से यह दक्षिण भारत का कोई पर्वत जान पड़ता है। संभव है कि यह [[रामायण]] कालीन प्रसिद्ध नगरी [[Kishkindha|किष्किंधा]] का '''[[Prasravana|प्रस्रवण]]''' या [[Pravarshanagiri|प्रवर्षणगिरि]]) हो, क्योंकि वारिधार और प्रस्रवण (=[[Pravarshana|प्रवर्षण]]) समानार्थक जान पड़ते हैं। <ref>[[Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur]], p.845</ref> | ||
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Latest revision as of 12:26, 24 June 2020
Author:Laxman Burdak, IFS (R) |
Varidhara (वारिधार) is a mountain mentioned in Srimadbhagavata (5,19,16)
Origin
Variants
History
वारिधार पर्वत
वारिधार पर्वत (AS, p.845) का उल्लेख श्रीमद्भागवत पुराण [5,19,16] में हुआ है- 'श्रीशैलोवेंकटो महेन्द्रो वारिधारो विंध्यः।' संदर्भ से यह दक्षिण भारत का कोई पर्वत जान पड़ता है। संभव है कि यह रामायण कालीन प्रसिद्ध नगरी किष्किंधा का प्रस्रवण या प्रवर्षणगिरि) हो, क्योंकि वारिधार और प्रस्रवण (=प्रवर्षण) समानार्थक जान पड़ते हैं। [1]