sunitahooda
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Izzat afzayi ke liye tahe dil se shukriya
Sunita aaj to aapne "resham" bikher diya...
Sunita aaj to aapne "resham" bikher diya...
ज़िन्दग़ी की राह में टकरा गया कोई
Lyricist:kaleem Usmani
ज़िन्दग़ी की राह में टकरा गया कोई
इक रोशनी अँधेरे में दिखला गया कोई।
वो हादसा वो पहली मुलाक़ात क्या कहूँ,
कितनी अजब थी सूरत-ए-हालात क्या कहूँ।
वो क़हर, वो ग़ज़ब, वो जफ़ा मुझको याद है,
वो उसकी बेरुख़ी की अदा मुझको याद है।
मिटता नहीं है ज़ेहन से यूँ छा गया कोई।
पहले वो मुझको देखकर बरहम-सी हो गई,
फिर अपने ही हसीन ख़यालों में खो गई।
बेचारगी में मेरी उसे रहम आ गया,
शायद मेरे तड़पने का अंदाज़ भा गया।
साँसों से भी क़रीब मेरे आ गया कोई।
अब उस दिल-ए-तबाह की हालत ना पूछिए
बेनाम आरज़ुओं की लज़्ज़त ना पूछिए।
इक अजनबी था रूह का अरमान बन गया
इक हादसा था प्यार का उनवान बन गया।
मंज़िल का रास्ता मुझे दिखला गया कोई।
अब के बरस भी वो ना आया बहार में,
गुजरेगा और एक बरस इंतज़ार में.
ये आग इश्क की है बुझाने से क्या बुझे,
दिल तेरे बस है ना मेरे इख्तियार में.
है टूटे दिल तेरी मुहब्बत तेरा ख्याल,
खुश रंग है बहार जो गुजरी बहार में.
बे सबब बात बढाने की जरूरत क्या है,
हम खफा कब थे मन्नाने की जरूरत क्या है.
आपके दम से तो दुनिया का भ्रम है कायम,
आप जब हैं तो जमाने की जरूरत क्या है.
तेरा कुंचा, तेरा दर, तेरी गली काफी है,
बे-ठिकानों को ठिकाने की जरूरत क्या है.
दिल से मिलने की तमन्ना ही नहीं जब दिल में,
हाथ से हाथ मिलाने की जरूरत क्या है.
रंग आँखों के लिए, बू है दमागों के लिए,
फूल को हाथ लगाने की जरूरत क्या है...
beautiful romantic one .. one of my favorite !!
Apne hothon pe sajana chahta hoon,
Aa tujhe main gun-gunana chahta hoon.
koi aansoon tere daaman per giraker,
boond ko moti banana chahta hoon.
apne hothon per ..
Thak gaya main karte-karte yaad tujhko,
ub tujhe main yaad aana chahta hoon - 2.
apne hothon per ..
Cha raha hai saari basti main andhera,
roshni ko ghar jalana chahta hoon - 2.
apne hothon per ..
Aakhiri hichki tere jaanon pe aaye -2,
maut bhi mai shayarana chahta hoon.
apne hothon per sajana chahta hoon ..
aa tujhe main gungunana chahta hoon !!
Lyrics .. Sunita ji batayengi![]()
शायर-ए-फितरत हूँ मैं जब जिक्र फ़रमाता हूँ मैं,
रूह बन कर जर्रे जर्रे में समाँ जाता हूँ मैं.
आ! के तुझ बिन ए दोस्त घबराता हूँ मैं,
जैसे हर शै में किसी शै की कमी पाता हूँ मैं.
जिस कदर अफसाना-ए-हस्ती को दोहराता हूँ मैं,
और भी बेगाना-ए-हस्ती हुआ जाता हूँ मैं.
जब मकां-ओ-लामकां सब से गुजर जाता हूँ मैं,
अल्लाह अल्लाह तुझ को खुद अपनी जगह पाता हूँ मैं.
हाय री मजबूरियाँ तर्क-ए-मुहब्बत के लिये,
मुझको समझाते हैं वो और उनको समझाता हूँ मैं.
मेरी हिम्मत देखना और मेरी तबियत देखना,
जो सुलझ जाती है गुत्थी फिर से उलझाता हूँ मैं.
हुस्न को क्या दुश्मनी है इश्क को क्या बैर है,
अपने ही कदमों की खुद ही ठोकरें खाता हूँ मैं.
वाह रे शौक़-ए-शहादत, कुंचा-ए-कातिल की तरफ,
गुनगुनाता रक्स करता झूमता जाता हूँ मैं.
एक ही दिल है और तूफ़ान-ए-हवादिस है 'जिगर',
एक शीशा है के हर पत्थर से टकराता हूँ मैं...
Jigar Muradabadi
Apni haathon ki lakeeron mein basa le mujh ko
mai hoon tera to naseeb apna bana le mujhko
Mujhse tu poochney aaya hai wafa ke maane
Ye teri sada dili maar na dale mujh ko
Khud ko mai baant na dalun kahin daman-daman
Kar diya tune agar mere hawaley mujh ko
Wada phir waba hai mai Zahar bhi pee jaun Qateel
Shart ye hai koye bahon mein sambhale mujhko
Apne haathon ki lakeeron mein basa le mujhko
Mai hoon tera to naseeb apna bana le mujhko
Lyricist-Qateel Shifai
Irshaaad ... ek or aana de eeb toh laage haathon !!!
हाय री मजबूरियाँ तर्क-ए-मुहब्बत के लिये,
मुझको समझाते हैं वो और उनको समझाता हूँ मैं.
मेरी हिम्मत देखना और मेरी तबियत देखना,
जो सुलझ जाती है गुत्थी फिर से उलझाता हूँ मैं.
(It's my most desired Gazal, I find everything in it.)
आप तो छा गए जनाब![]()
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