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In Himachal Pradesh,Ghirth are not jat community. In North India, people talk in punjabi language say jatt and in Haryanavi language say jaat/jat. Not a ghirth or chang word . It is lower status community in Himachal Pradesh. Their occupation is labourer, carpenter and small farmer. Their traditions,rituals, behaviour,spelt language and DNA is different
Gomsa siyag bijrad
Gomaram_siyag
Gomaram_siyag
गोमाराम सियाग बीजराड एक मशहूर शोशल मिडिया हस्ती है
Hello, actually I was trying to update my fathers page "DHARAMPAL SINGH MALIK" but I could not. please help me with updating that page. thank you
Hello Everyone, logged in Jatland after years, feeling proud to see new changes here. Really loved it.... Keep Going bless you
Currently pursuing Btech in electrical engineering at Rajasthan Technical University, kota. Quite active towards social service for jat community
I am delighted to join the group, as a new member from Australia. I have been doing some research on my genealogy in the Nagaur and Bikaner regions of Rajasthan. It would be great to have inputs/feedback from members and colleagues engaged in such projects, currently or in past. - Prof. Rai Kookana, The University of Adelaide, Australia
पुरानाबास गाँव जाट परिवारों का केंद्र है, जहाँ साईँ गोत्र प्रमुख है। कैप्टेन उदय सिंह की मृत्यु के बाद भी उनका परिवार जाट समाज की गतिविधियों में सक्रिय है।
कैप्टेन उदय सिंह एक सादगीपूर्ण जीवन जीने वाले नेता थे, जिन्होंने स्थानीय स्तर पर जाट समुदाय को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।।
और सेवानिवृत्ति के बाद गाँव लौटकर सामाजिक कार्यों में लगे। जाट समुदाय में उनकी सैन्य पृष्ठभूमि के कारण विशेष सम्मान प्राप्त था।
परिवार और विरासत उनके परिवार में अन्य सदस्य भी सेना और सामाजिक सेवा से जुड़े रहे:
1. राज सिंह साईँ : राजस्थान ग्रामीण बैंक में अधिकारी
2. श्रीराम साईँ : एक्स-सार्जेंट, इंडियन एयर फोर्स।
3. स्व. ओमप्रकाश साईँ : नीमकाथाना जिला बनाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष
4. अमर सिंह साईँ : आर्मी एयर डिफेंस
उनकी अध्यक्षता में 1983 के आसपास जाट समाज में बाल विवाह रोकथाम और शिक्षा जागरूकता जैसे सुधारों पर काम हुआ, जो आर्य समाज के प्रभाव से प्रेरित था।
सैन्य पृष्ठभूमि कैप्टेन उदय सिंह भारतीय सेना की जाट रेजिमेंट (5 जाट रेजिमेंट) में कैप्टन के पद पर रहे। वे एक वीर सैनिक थे, 5th जाट रेजिमेंट ने 1965 व 1971 के युद्ध ओपरेशन, मेघदूत ओपरेशन, रहीनो ऑफ पराक्रम में विशेष योगदान किया, जाट बलवान, जय भगवान ।।
उस समय जाट महासभा का ग्वालियर अधिवेशन (1918) और दिल्ली अधिवेशन (1930) जैसे बड़े आयोजन हो चुके थे और जाट एकता पर जोर दिया था। श्री उदय सिंह ने स्थानीय स्तर पर इन विचारों को लागू किया, विशेषकर नीम का थाना क्षेत्र में जाट युवाओं को संगठित करने में वे जाट समाज की गतिविधियों में सक्रिय रहते थे और समुदाय के वरिष्ठ सदस्यों में गिने जाते थे।
जाट समाज सुधार अध्यक्ष 1983 में कैप्टेन उदय सिंह को जाट समाज सुधार संगठन (या जाट महासभा/जाट क्षत्रिय सभा के स्थानीय स्तर पर) का अध्यक्ष चुना गया था। यह भूमिका जाट समुदाय के सुधारों, जैसे शिक्षा, सामाजिक न्याय, विवाह प्रथा में बदलाव और आर्थिक उत्थान पर केंद्रित थी।
राजनीतिक और प्रशासनिक योगदान सरपंच के रूप में भूमिका:
कैप्टेन उदय सिंह पुरानाबास ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच थे। वे गाँव के विकास में सक्रिय रहे, जिसमें सड़क निर्माण, स्वच्छता और जल आपूर्ति जैसी योजनाओं पर जोर दिया गया। स्थानीय रिकॉर्ड्स में उन्हें पूर्व सरपंच के रूप में उल्लेखित किया गया है, वे गाँव के विकास के लिए समर्पित थे और जाट समुदाय के माध्यम से सामाजिक एकता को बढ़ावा देते थे।
श्री उदय सिंह साईँ राजस्थान के सीकर जिले के नीम का थाना तहसील में स्थित पुरानाबास गाँव के एक प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता, पूर्व सरपंच और समाज सुधार अध्यक्ष थे। गाँव के विकास सड़क निर्माण, स्वच्छता और जल आपूर्ति जैसी योजनाओं पर जोर दिया। नीम का थाना क्षेत्र में जाट समुदाय के सुधारों, जैसे शिक्षा, सामाजिक न्याय, विवाह प्रथा में बदलाव और आर्थिक उत्थान पर केंद्रित थी। भारतीय सेना की 5 जाट रेजिमेंट में कैप्टन के पद पर रहे।

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Mahesh Fadoliya is also a leading industrialist, social worker, and supporter of various educational institutions, with significant contributions to the Jat community
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