Hindi Kavita

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Not open for further replies.
One more for the day, lil melancholic but so true, happens with everybody sometimes!...

अतीत का अंधेरा - डॉ. सुषम बेदी


और उदास हो जाता है वर्तमान
जब अतीत भावी पर हावी हो जाता है

गुज़रा हुआ विस्मृत बन कर
जो लौट चुका था
भावी का प्रतीक बन कर स्थापित हो जाता है

आस्थाओं की भूमि पर
गढ़ों से निकले बरसाती
कीड़ों की तरह
भूले हुए दर्द भरे हुए घाव
फिर से बिसूर पड़ते हैं
छा देते हैं, कामनाओं का संसार

और दूभर हो जाता है जीना
जब जीने के सारे हथियार
आकांक्षाओं के जंग से
जख्म़ी और कुड़े हो जाते हैं
भविष्य पर चढ़ आता है
अतीत का अंधेरा |



Rock on
Jit
 
Di, ek nanhi si koshish ....

Open ended..... now who can continue it.... frm....per, mera gaon........


पर मेरा गाँव भी बुझा सा खड़ा है
कुछ दबा कुछ सकुचा सा
एक ओर को पड़ा है

न वो पहली सी बात रही
न वो शीतल छाँव रही
मनों मे ये कैसी कड़वाहट है
अब तो दूध मे भी मिलावट है

लगता है ज़मीन सिकुड़ गई है
ओर लोगो के दिल मे भी न पहले सा भाव है
खुली हवा चटपटा रही है
फसल खेतो मे अनमनी सी लहलहा रही है

कहा है वो भोलेपन के किस्से
क्यो गुम है वो ममता भरी आँखे
कही नही मिलता अब वो अपनापन
क्या गाँव क्या शहर

कहा जाऊ अब सोचता हूँ मैं
न शहर मे मन बसता था
न गाँव मे रही अब वो बात ........

 
Shweta, Gud effort....indeed a class act! :)
You represented it beautifuly n its so very true!..

keep writing..

Rock on
Jit


न वो पहली सी बात रही
न वो शीतल छाँव रही
मनों मे ये कैसी कड़वाहट है
अब तो दूध मे भी मिलावट है

लगता है ज़मीन सिकुड़ गई है
ओर लोगो के दिल मे भी न पहले सा भाव है
खुली हवा चटपटा रही है
फसल खेतो मे अनमनी सी लहलहा रही है
 
shwetadhaka said:
लगता है ज़मीन सिकुड़ गई है
ओर लोगो के दिल मे भी न पहले सा भाव है
खुली हवा चटपटा रही है
फसल खेतो मे अनमनी सी लहलहा रही है

कहा है वो भोलेपन के किस्से
क्यो गुम है वो ममता भरी आँखे
कही नही मिलता अब वो अपनापन
क्या गाँव क्या शहर

Bhoot acha Di :) isi to meri bi samaj maie aa jati hai :)
 
One priceless gem from the rare treasure of Great Harivans Rai Bachaan...:)
Words fall short to appreciate his deep classy matchless creations...speechless!


ऐसे मैं मन बहलाता हूँ - हरिवंशराय बच्चन


सोचा करता बैठ अकेले,
गत जीवन के सुख-दुख झेले,
दंशनकारी सुधियों से मैं उर के छाले सहलाता हूँ!
ऐसे मैं मन बहलाता हूँ!

नहीं खोजने जाता मरहम,
होकर अपने प्रति अति निर्मम,
उर के घावों को आँसू के खारे जल से नहलाता हूँ!
ऐसे मैं मन बहलाता हूँ!

आह निकल मुख से जाती है,
मानव की ही तो छाती है,
लाज नहीं मुझको देवों में यदि मैं दुर्बल कहलाता हूँ!
ऐसे मैं मन बहलाता हूँ!


Rock on
Jit
 
Kyon Ki ye Mera Gaon Hai....

Guys, enough pessimism about village.:)Its not that bad as poets has portrayed but still I tried something in new ray.Enjoy!

"Kyon ki Ye Mera Gaon Hai..


Thoda Ruka Sa Hi To Hai,
Thoda Sa Sahma Hi to Hai,
To Kya Hua,
Chahye Kuch Bhi Hai,
Chahye Kaisa Bhi ho,
Iske Sukh Bhi Mere The,
Aur Dukh Bhi Mere Hain,
Kyonki Ye Mera Hi Gaon Hai....

Bhula Nahi Hoon,
Na Hi Bhujha Hoon,
Na Hi Daba Hoon,
Bas Thodi Der Aur...
Mere Saathiyo, Mere Beliyo!!
Mai Aa Raha Hoon,
Mai La Raha Hoon;
Wo Masumiyat,
Wo Bholapan,Wahi Sadgi,
Har Chehre ke Liye

Phir Hukka Gudgudayega Chauplo Mein,
Phir Jamega Saang 'Jyani Chor' Ka,
Phir Mela Lagega Kuo Per,
Laherayegi Bahuo Ki Choti,
Phir Bachpan Marega Kilkariya,
Jam ke Khayega Barbanti Aur Nimboliya,
Lahlati Faslo Mein Jhumenge,
Jhumenge Nar Aur Nari,
Khilegi Khusi ki Dhoop Har Aangan Mein,
Rang Barsega Is Holi Per,
Man Nachega Is Diwali Per...


Shahar Mein Base Mere Saathiyo!!
Tum Aana Mere Ghar,
Chotta Sa Hai;
Meri Ma Banyegi Aur Khilayegi Tumko,
Mamta se Bani Chutni Aur Rotiya,
Phir Kahna,
Baat Karenge,
Raat Bhar,
Chaubare per,
Dekhenge,Ugte Suraj Ko,
Us Naye Savere Ko,
Yahin Na Rah Jao To Kahna,
Iski Khusboo Ke Na Ho Jao To Kahna,
Kyon ki Ye Mera Gaon Hai.......:)
[/SIZE]
 
Last edited:
for one moment i was in ur village. so nicely described. so beautifully praised. really, shahar ki bhagti hui life k comparison mein kitni shant aur thehri hui he gaon ki life. very soothing samar.
 
Bhai Samar,

Kudos to u, indeed classy lines...gaon always haunts!
beautiful poem indeed!

keep pourin'


Rock on
Jit


Guys, enough pessimism about village.:)Its not that bad as poets has portrayed but still I tried something in new ray.Enjoy!

"Kyon ki Ye Mera Gaon Hai..


Thoda Ruka Sa Hi To Hai,
Thoda Sa Sahma Hi to Hai,
To Kya Hua,
Chahye Kuch Bhi Hai,
Chahye Kaisa Bhi ho,
Iske Sukh Bhi Mere The,
Aur Dukh Bhi Mere Hain,
Kyonki Ye Mera Hi Gaon Hai....
 
One classy poem with deep thoughts!.. :)



अपने अन्तर का ख़ालीपन - नेमिचन्द्र जैन


अपने अन्तर का ख़ालीपन तेरे सुधि-सौरभ से भर लूँ
एककी मन पर तेरी छबि धीमे-धीमे अंकित कर लूँ
एक सहज ममता की छाया में मैं अपने प्राण बिछा दूँ
तेरे ही आकर्षण में अपना उद्धत अभिमान सुला दूँ ।

यह एकान्त अभेद अन्धेरे-सा मन पर घिरता आता है
जी का सब विश्वास अचानक ही मानो गिरता जाता है
घोर विवशता के मरु में ये भटक पड़े हैं प्राण अकेले
आज नहीं कोई जो मेरे मन की यह दुर्बलता झेले ।

शान्त हो गई है चुप हो कर मन की जो आहत पुकार थी
मन्द हो गई बुझती जी की ज्वाला वह जो दुर्निवार थी
एक रिक्त बस-प्राणों के इस तरु पर आ छाया है हिम-सा
सुधि का दीप दूर एकाकी होता जाता है मद्धिम-सा ।

मेरे अन्तर का रहस्य मुझ को ही आकर कौन बताए
कौन बिखरते-से प्राणों में जीवन का जादू भर जाए
मेरे पथदर्शक, खोलूँ कैसे ये उलझी गाँठें मन की
बोलो, कैसे जोड़ूँ बिखरी कड़ियाँ इस खुलते बन्धन की ।


Rock on
Jit
 
Nostalgia!!...indeed this simple n serene poem that reminds us of golden old childhood days!... :)


वो बचपन के दिन....


वो बचपन के दिन जब याद आते हैं,ये पल ये लम्हे मासूम से हो जाते हैं,
वो हलकी सी तक्रारें, वो मीठी सी नोंक-झोंक ,
वो रोज नए बहाने बनाना, वो कल के रूठे दोस्तो को मनाना,
वो स्कूल की घंटी ,वो खेल का मैदान,
वो झील के किनारे आम का बागान,
वो पत्थर उछालकर कच्चे आमों को गिराना,
वो दौड़ की होड़ मे दोस्तो को गिराना-उठाना,
वो सावन के झूले ,वो कोयल की कूक,
वो बारिश की रिमझिम में भीगना-भिगाना,
वो बारिश के पानी से आंगन का भर जाना,
फिर कागज की कस्तियाँ बनाकर पानी मे चलाना !
जाने ये अब कहॉ खो गए, शायद अब ये किसी और के हो गए
वो बचपन के दिन जब याद आते हैं, ये पल ये लम्हे मासूम से हो जाते हैं !


Rock on
Jit
 
Last edited:
cooljat said:
वो बचपन के दिन....
वो बचपन के दिन जब याद आते हैं,ये पल ये लम्हे मासूम से हो जाते हैं,
वो हलकी सी तक्रारें, वो मीठी सी नोंक-झोंक ,
वो रोज नए बहाने बनाना, वो कल के रूठे दोस्तो को मनाना,
वो स्कूल की घंटी ,वो खेल का मैदान,
वो झील के किनारे आम का बागान,
वो पत्थर उछालकर कच्चे आमों को गिराना,
वो दौड़ की होड़ मे दोस्तो को गिराना-उठाना,
वो सावन के झूले ,वो कोयल की कूक,
वो बारिश की रिमझिम में भीगना-भिगाना,
वो बारिश के पानी से आंगन का भर जाना,
फिर कागज की कस्तियाँ बनाकर पानी मे चलाना !
जाने ये अब कहॉ खो गए, शायद अब ये किसी और के हो गए
वो बचपन के दिन जब याद आते हैं, ये पल ये लम्हे मासूम से हो जाते हैं !


too good bhai..


वो बचपन के दिन जब याद आते हैं,ये पल ये लम्हे मासूम से हो जाते हैं,

हा बचपन के वो दिन

घर से स्कूल जाना और फिर रास्ते मे कही छिप जाना
प्रार्थना मे उबासे मारना और फिर सो जाना
टीचर की मार खाना और फिर घर आकर रोते रोते उसकी शिकायत करना !
टीचर की मार से बचने के लिए मारने से पहले ही जोर जोर से रोने का नाटक करना !
अपने से भारी से लड़ाई करना फिर उससे मार खा के दुर जाकर जोर जोर से उसको गाली देना !
स्कूल नही जाना पड़े इसके लिए भागवान से बीमार होने की प्रार्थना करना !

are wah maie to kavi ban gaya :rock
 
Gud Effort bhai Mukesh, Jee saa aa gaya! :)
waise Bachpan ke din yaad karke to har koi emotional kavi ho hi jata hai! :)

But indeed, very commendable effort by u, muje to pad ke tera bachpan yaad aa gaya ! ;)

Keep writin'...


Rock on
Jit



too good bhai..


वो बचपन के दिन जब याद आते हैं,ये पल ये लम्हे मासूम से हो जाते हैं,

हा बचपन के वो दिन

घर से स्कूल जाना और फिर रास्ते मे कही छिप जाना
प्रार्थना मे उबासे मारना और फिर सो जाना
टीचर की मार खाना और फिर घर आकर रोते रोते उसकी शिकायत करना !
टीचर की मार से बचने के लिए मारने से पहले ही जोर जोर से रोने का नाटक करना !
अपने से भारी से लड़ाई करना फिर उससे मार खा के दुर जाकर जोर जोर से उसको गाली देना !
स्कूल नही जाना पड़े इसके लिए भागवान से बीमार होने की प्रार्थना करना !

are wah maie to kavi ban gaya :rock
 
Nice Inspirin' poem... :)

जीवन, तू अविरल बहता रहे - तारा सिंह

जीवन तू पानी का कण नहीं
जो तिनके से लग जाए ठहर
तू तो जिन्दगी की नदिया में
है उठते लहरों की तरह
जीवन, तू अविरल बहता रह
जीवन, तू कोई गुलाब नहीं
जो डाली से हो जाये अलग
तू कोई आफताब नहीं
जब जी में आये, जाये घट
और जब चाहे, जाये बढ़
तू तो है, नीले अंबर के
सागर में उन सितारों की तरह
जो रहता है खिला उत्पल की तरह
जिसमें महक भी हो और हो ललक
जीवन, तू अविरल बहता रह
जिंदगी की पवित्र गंगा में
तू है तरंगित धारा की तरह
जिसके अंतःस्थल में है पवित्रता
और महक है चंदन की तरह
जीवन, तू अविरल बहता रह
जिंदगी– ताल के अंतःस्थल में
तू रह बादल में बिजली की तरह
प्रेमांलिगन बिना, जिंदगी शिथिल है
तू तैरते रह कुमुदिनी की तरह
जीवन, तू अविरल बहता रह
अगर दुख तूफान बन ढ़ाये कहर
तो तू किनारे से लगकर बह
दुर्गम हो डगर, कटीली हो सफर
तू सूरज की तरह चमकता रह
जीवन, तू अविरल बहता रह
जिंदगी कोई फूलों की सेज नहीं
जो तुझे सुलाकर रखे सुंदरी की तरह
जिंदगी तो काँटों की सेज है
तुझे रहना है गुलाब की तरह
जीवन, तू अविरल बहता रह
जिंदगी – घट रह सकता है, भरा
अगर अविरल तू बहता रह
तेरे सिवा किसको है फिकर
तू रह किसी प्रियतम की तरह
जीवन, तू अविरल बहता रह
जब भी निकले हृदय से आह
तू चातक की तरह मुँह खोले
रोके रख मेरी राह
यूँ ही मत रख, जिंदगी संग डाह
जीवन, तू अविरल बहता रह...


Rock on
Jit
 
Gud ones Jit.... the bachpan ke din is sor of adaptation frm jagjit singh ghazal..wo kagaz ki kashti, wo baarish ka paani......my all time fav .
 
Hindi litreature would have been impotent without Ramdhari Singh .None of his contemporary match him in Philosophy,spirtiuality.prowess, mascualinity,soul searching sensibility, zeal for humanity as he does.Since his death no one even gives the vague glimpse of a little greatness which he showered 'aise hi'.Thaty I call him 'Nirala' .Here is one of his creation which is one of my favourite.true to the core of life.ENjoy................:)




~~~~~~Shakti aur Akshma~~~~~~


क्षमा, दया, तप, त्याग, मनोबल
सबका लिया सहारा
पर नर व्याघ्र सुयोधन तुमसे
कहो, कहाँ कब हारा ?



क्षमाशील हो रिपु-समक्ष
तुम हुये विनीत जितना ही
दुष्ट कौरवों ने तुमको
कायर समझा उतना ही।



अत्याचार सहन करने का
कुफल यही होता है
पौरुष का आतंक मनुज
कोमल होकर खोता है।



क्षमा शोभती उस भुजंग को
जिसके पास गरल हो
उसको क्या जो दंतहीन
विषरहित, विनीत, सरल हो ।



तीन दिवस तक पंथ मांगते
रघुपति सिन्धु किनारे,
बैठे पढ़ते रहे छन्द
अनुनय के प्यारे-प्यारे ।



उत्तर में जब एक नाद भी
उठा नहीं सागर से
उठी अधीर धधक पौरुष की
आग राम के शर से ।



सिन्धु देह धर त्राहि-त्राहि
करता आ गिरा शरण में
चरण पूज दासता ग्रहण की
बँधा मूढ़ बन्धन में।



सच पूछो , तो शर में ही
बसती है दीप्ति विनय की
सन्धि-वचन संपूज्य उसी का
जिसमें शक्ति विजय की ।



सहनशीलता, क्षमा, दया को
तभी पूजता जग है
बल का दर्प चमकता उसके
पीछे जब जगमग है।
 
Matchless Indeed!! :)

Our Taekwondo Coach often address these very inspirin' lines in front of the Team!..

Thx man for posting sucha beautiful n inspirin Kavita!..


Rock on
Jit


Hindi litreature would have been impotent without Ramdhari Singh .None of his contemporary match him in Philosophy,spirtiuality.prowess, mascualinity,soul searching sensibility, zeal for humanity as he does.Since his death no one even gives the vague glimpse of a little greatness which he showered 'aise hi'.Thaty I call him 'Nirala' .Here is one of his creation which is one of my favourite.true to the core of life.ENjoy................:)




~~~~~~Shakti aur Akshma~~~~~~





क्षमा शोभती उस भुजंग को
जिसके पास गरल हो
उसको क्या जो दंतहीन
विषरहित, विनीत, सरल हो ।
 
Gulzaar, the name itself is mesmerizing! ...
one rare gem from his treasure.. matchless!!! :)


अफ़साने - गुलज़ार


खुशबू जैसे लोग मिले अफ़साने में
एक पुराना खत खोला अनजाने में

जाना किसका ज़िक्र है इस अफ़साने में
दर्द मज़े लेता है जो दुहराने में

शाम के साये बालिस्तों से नापे हैं
चाँद ने कितनी देर लगा दी आने में

रात गुज़रते शायद थोड़ा वक्त लगे
ज़रा सी धूप दे उन्हें मेरे पैमाने में

दिल पर दस्तक देने ये कौन आया है
किसकी आहट सुनता है वीराने मे ।


Rock on
Jit
 
Status
Not open for further replies.
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