jitendershooda
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एक बात याद आगी … दादा के धणिये के लाडू घाल राखे थे … दादी इस बात की पक्की थी, अक जिस खात्यर जो चीज होती उसे नै दिया करती … तेडकंए तडक रोज दादा म्हारे पै लाडू मंगवाता … छोटा भाई एक दिन आखं मियां सी करकै बोल्या … ओ ददा दादा हो … देखिये मनै वा खूटे के बंधी बेल जमा भी ना दीखती … मेरे भी धणिये के लाडू घलवा दे नै … हा हा हा हा :d:d