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नारद के अनुसार तो सगोत्र विवाह करने वाले पुरुष के लिए शिश्न-उत्कर्णन के अतिरिक्त कोई दंड नहीं है [नारद स्मृति 15.73-75]।
धर्मसूत्रों में कई निर्देश हैं। जैसे, आपस्तंब धर्मसूत्र [2.11.15], विष्णु धर्मसूत्र [24.9-10], वशिष्ठ धर्मसूत्र [8.1], बौधायन धर्मसूत्र [2.1.38] तथा गौतम धर्मसूत्र [4.2, 23.12] में इसका स्पष्ट निर्देश है। स्मृतियों में सगोत्र विवाह के विरुद्ध और अधिक कठोर व्यवस्था दी गई है। उदाहरण के लिए, नारद स्मृति [12.7, 15.73-75], मनुस्मृति [3.5], विष्णु स्मृति [24.9], पराशर स्मृति [10.13-14], आदि।
कुछ स्मृतियों में सगोत्र विवाह की संतान को चाडाल कहा गया है। अधिक जानने के लिए पुरुषोत्तम पंडित लिखित 12वीं सदी से पहले की रचना गोत्र प्रवरनिबंधकदम्बम् पढ़ सकते हैं। असगोत्र विवाह की प्रथा भारत में ई.पू. 8वीं शती से चल रही है। आज भी भारत में विवाह में गोत्र प्रतिबंध का पूरा पालन होता है। कई स्थानों पर गोत्रविषयक लौकिक प्रतिबंध शास्त्रीय मर्यादाओं की अपेक्षा अधिक कड़े हैं। कई विदेशी विद्वानों ने भी इसका आकलन किया है। इसलिए हरियाणा की खाप जो कर रही है, वह शास्त्रीय दृष्टि से अनुचित नहीं। चाहे विदेशी विचारों के प्रभाव में उसे कितना ही निंदित क्यों न किया जाए।
Good article but some thinks otherwise. They think the khap's demand is against the humanity, liberty, personal freedom or whatever.
Even our Judges thinks same. In this country if you are minority than you enjoy special treatment, seperate law, reservation etc. Its the only country in the world where minority are better treated and enjoy special rights.
यह परंपरा एक गांव के व्यक्तियों में विवाह अनुचित समझती है, क्योंकि उन्हें प्राय: एक परिवार का संबंधी सा समझा जाता है। गांव के लड़के-लड़कियां आपस में भाई-बहन और बुजुर्ग लोग उनके चाचा-चाची, दादा-दादी आदि जैसे समझे जाते हैं। नजदीकी संबंधियों की भांति एक गांव वालों में विवाह वर्जित रहा है। इसका शास्त्रीय संकेत यह है कि वैदिक युग से ही वधू को विवाह के बाद अपने ससुराल में आसानी से पहुंचने, मार्ग में कोई कष्ट न होने की अनेक प्रार्थनाएं हैं [ऋग्वेद, 10.85.23, तथा अनेक अन्य संदर्भ]। सारे लोकगीत विवाह के बाद लड़की के विदा होकर दूर चले जाने के संदर्भ से भरे हुए हैं। कहीं स्थानीय विवाह का संकेत तक नहीं मिलता। इसकी अनदेखी करना जानबूझ कर भारतीय परंपरा का तिरस्कार करना है।
अत: हिंदू ग्रंथों का संदर्भ ढूंढ़ने से पहले यह समझना चाहिए कि हिंदू धर्म में विवाह कोई निजी मामला नहीं अपितु एक सामाजिक-धार्मिक कार्य है। यह उन सोलह संस्कारों में एक है जो प्रत्येक हिंदू के लिए निर्धारित है। अत: खापों पर बिगड़ने से पहले उनकी भावना को हिंदू दृष्टि से देखें। ईसाई, व्यक्तिवादी, फिल्मी या मात्र कानूनी दृष्टि से देखकर खापों के विरुद्ध होना उचित नहीं माना जा सकता।
Well man, for most people: If you speak fluent english, you are modern and advanced not to mention more intelligent as well. The better u speak the more u are. Even in army(higher ranks) if you are poor in english u cant get in???????!!!!!!!!. Even in civil services interviews ur english is tested. OK english is now an international language and an added advantage if u have to work in foreign land and here in MNCs. But its just a language and doesnt tell ur IQ level or ur competancy. The more western outfit u wear the more Modern and advanced. If u eat with knief and forks same. If u celebrate christmas and go to church on 26th its also considered as a sign of being modern and advance by many people.
The base of our law was colonial. We follow westminister system because the colonial masters followed it.
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