ravinderjeet
New member
anjoo ji senwednaao key liye dhanayawaadRavinder ji,
Sorry to hear about your loss.
Regards
anjoo ji senwednaao key liye dhanayawaadRavinder ji,
Sorry to hear about your loss.
Regards
प्यारे शहद ,
ये सब लव में मोजूद ठरक को लेकर है , कोई बड़ी बात नहीं लेकिन क्या
---ओ प्यारे शहद, ''तुम इस ठरक नामक कसुती भावना को प्रेम जैसी दूसरी कसुत भावना से सफलता पूर्वक अलग कर सकते हो'' ?
क्यों की ठरक अर रोकेट आदमी को कहीं भी ले जा सकते हैं और कुछ भी बक बक करवा सकते हैं !
महान प्लेटो ने इसी ठरक को Platonic Love की संज्ञा दी है!
Uppe..meri aanbkhein bhar aayi aapki kahani sun ke...meri dua hai aapko wo mohabbat haasil ho jiski aapne juftjy ki hai.................iss thraed main kewal aap hai jisne apna jeevan khuli kitaab ki tarah saamne rakh diya hai..............baaki saare baat to likhe hai par bandook kisi aur ke kaandhe pe dhare....jissse ki .."meri saheli ke saath ye hua...ya fir............mere dost ke saath ye hua......................"मेरी लगातार मेहनत ने रंग दिखाया. इस बार मैंने कुछ नहीं किया. इस बार तो खुद एक बहुत ही अच्छी लड़की ने मुझे चुन लिया. मैं तो सोचता था कि मैं प्यार में चोट खाया नाकाम आशिक हूं, लेकिन प्यार तो मुझे अब हुआ था. मुझ पर इस लड़की का अहसान हो गया. इसने मुझे खुद पर गर्व करने का मौका दे दिया कि इतनी अच्छे परिवार की इतनी अच्छी लड़की ने मुझे प्यार किया. मैं ख़ुशी से पागल हो गया, लेकिन अनजान डर भी दिल में था. कहीं ये भी मेरी भावनाओं से तो नहीं खेल रही. 1992 से 1997 का समय मैंने यूं ही खराब किया था. पढ़ाई छोड़ दी थी. मेरे जीजा ने और भाई ने टेंपो ले रखे थे. मैंने भी ड्राइविंग सीख ली थी और टेंपो चलाने लगा था. फिर दुनिया का चलन समझ में आया और मेरे पिता ने मुझे समझाया कि तू पढ़ ले. उन दिनों कंप्यूटर सीखने का काफी जोर था. मेरे पिताजी ने मुझे आप्टेक में दाखिला दिलवा दिया, साथ ही मैंने प्राइवेट बी.ए. में भी दाखिला ले लिया. यह 1998 की बात है. वो लड़की (प्रीति) भी वहीं आप्टेक में कंप्यूटर सीखने आती थी.
होली के 2-3 दिन पहले क्लास के बाकी लड़कों का प्लान बना कि सभी लड़कियों को रंग लगाया जाएगा. उस इंस्टिट्यूट से बाहर आने का एक ही तंग सा दरवाजा था. मैं और 3-4 और लड़के हाथों में रंग लगाकर वहीं खड़े हो गए. जैसे ही लड़कियां क्लास से बाहर आने लगीं तो मुख्य दरवाजे पर लड़कों को खड़े पाया. सबसे आगे मैं खड़ा था. लड़कियां कुछ देर तक तो अंदर ही खड़ी सोचती रहीं, लेकिन फिर उस लड़की ने हिम्मत दिखाई. उसे शायद जल्दी थी. मैंने उसका रास्ता रोक लिया और उससे पूछा-'लगा दूं थोडा-सा रंग, आप नाराज तो नहीं होंगी?' उसने कोई जवाब नहीं दिया. पीछे से मेरे एक दोस्त ने कहा-"लगा दे." और मैंने उस लड़की के दोनों गालों पर रंग लगा दिया. उसने कुछ नहीं कहा. रुमाल से चेहरा पोंछती हुई चली गई. फिर होली के बाद मैं इंस्टिट्यूट गया तो पहले से पहुंची उस लड़की ने रास्ते पर नज़रें लगाईं हुई थीं. वो मेरा इंतजार कर रही थी. वो मेरी क्लास में नहीं थी. उसकी क्लास जल्दी छूटती तो वो मेरी क्लास के छूटने तक मेरा इंतजार करती थी, फिर अपनी सहेली के साथ घर जाती थी. जादुई अहसास था. वो ऐसे ही मुड़-मुड़कर मुझे देखने लगी. मन में फिर वो ही वर्षों पुराना अंधड़ शुरू हो गया. रातों की नींद उड़ गई, क्योंकि ये लड़की तो बहुत ही अच्छी थी और मेरे मन को बहुत ही ज्यादा भा गई थी. ये तो मेरे से कहीं ज्यादा अच्छे परिवार की भी थी. मैंने इस लड़की का पीछा करना शुरू कर दिया. मैंने मन-ही-मन फैसला किया था कि इस लड़की के साथ कुछ भी गलत नहीं करूंगा. इसने मुझे पसंद किया है. जिस चीज में इसकी ख़ुशी होगी, वही करूंगा. उसकी-मेरी 1 बार कुछ बात हुई, लेकिन उसकी सहेली उसके साथ थी इसलिए ज्यादा बात नहीं हो सकी. तभी इंस्टिट्यूट का 2 महीने का ब्रेक हो गया. मैंने उस लड़की का पता और फोन नंबर ले लिया. मैं उसके घर फोन करने लगा. उसने अपने घरवालों को भी मेरे बारे में बता दिया. उसके घरवालों से भी मेरी कुछ बातें हुईं. उसकी मम्मी ने मुझे कहा कि तुम अपना करिअर बनाने पर ध्यान दो. उस लड़की ने मुझसे पूछा था-'तुम मेरे लिए क्या कर सकते हो?' तो मैंने जवाब दिया था कि मैं तुम्हारे लिए इस धरती को फाड़ सकता हूं. उसी दौरान मेरे शरीर में भी चमत्कारिक परिवर्तन आने लगे थे. मैं हमेशा 9-10 बजे सोकर उठता था, लेकिन अचानक ही मेरी आंखें 4 बजे खुलने लगीं और उसके बाद नींद आनी बिलकुल ही बंद होने लगी. कहां तो मैं बस 400-500 दंड मारता था, कहां मैं 1500 दंड+1500 बैठकें मारने लगा. मेरा चेहरा पिचकने लगा और पेट में 6 पैक्स बनने लगे. वो तो चमत्कार था. दरअसल वो सब मेरी मेहनत का फल था, लेकिन वो तो एक नए संघर्ष की शुरुआत भी थी. मेरे दिमाग में विचार आने लगे, जो मेरे नहीं थे. एक विचार आया-"बिना संघर्ष किए प्यार पाना चाहते हो, उपेन्द्र सिंह?"
अचानक ही उस लड़की ने मुझसे फोन पर बात करना बंद कर दिया. मैं फोन उठाता, वो बिना कुछ कहे रख देती. खैर, 2 महीने बाद इंस्टिट्यूट खुला. वो लड़की तो बहुत ही कम आने लगी थी. 10-15 दिन में एकाध बार. फिर एक दिन सुनने को मिला कि उस लड़की की शादी है और वो अमेरिका जा रही है. इधर दिमाग में हलचल मचाते विचार और उधर उसकी बेरुखी. मैंने बात को एक तरफ करने का फैसला किया. वो लड़की इंस्टिट्यूट आई. मैं क्लास में नहीं गया. छुट्टी हुई तो मैं उससे पहले ही उसके फ्लैट के सामने जाकर खड़ा हो गया. मैं सोचता था जैसे पहले 'चुंबन' ने बात को एक तरफ कर दिया था, इस बार भी वैसा ही हो जाएगा, लेकिन मैं गलत था. मैंने उस लड़की के चुंबन के लिए मुंह आगे बढाया तो उसने बचने की कोई कोशिश ही नहीं की और मुझे चुंबन ले लेने दिया. फिर झूठा गुस्सा सा दिखाते हुए घर के अंदर चली गई. मैं बड़ा खुश हुआ और झूमता हुआ अपने घर आया. मेरी ख़ुशी जल्दी ही छिन गई, क्योंकि उस लड़की ने उसके बाद इंस्टिट्यूट आना बंद कर दिया. 2 महीने बहुत ही कष्ट में बीते. फोन करने का कोई फायदा नहीं था. मैं फिर उसके घर पहुंचा कि उसके घरवालों से बात करूंगा. लेकिन उसके घरवाले मेरे लिपट गए. मुझे थाने ले जाया गया. उसके पिता जो कि तब गाजियाबाद में डी.एस.पी. थे, उन्हें बुलाया गया. मेरे पिताजी को भी बुलाया गया. मुझसे गलती मनवाई गई और चूंकि मेरे पिता भी दिल्ली पुलिस में थे तो मुझे छोड़ दिया गया. मैंने इंस्टिट्यूट छोड़ दिया, क्योंकि वो मुझे खाने को दौड़ता था. फिर मुझे किसी अदृश्य ताकत ने इतनी अच्छी-अच्छी बातें बताईं कि मेरे जीवन की दिशा ही बदलने लगी. मुझे इस दुनिया का, जिंदगी का तमाम भेद समझाया गया. मैंने बी.ए. की पढ़ाई पूरी की. पत्रकारिता सीखी. उनके घर भी फोन करता रहता था, क्योंकि मैं समझ गया था कि वो लड़की नहीं, बल्कि कोई और ताकत अपना खेल खेल रही है. 2006 तक मुझे नहीं मालूम था कि उस लड़की की शादी हो गई है या नहीं. पता लगा कि उन्होंने केशवपुरम वाला अपना फ्लैट बेच दिया है और वे द्वारका रहने चले गए हैं. मेरे लिए चुनौती है उस लड़की से मिलने की. मैं उसके मौजूदा घर में जा पहुंचा था 09.08.08 को, लेकिन लड़की के पिता ने मुझे घर से निकाल दिया. पूछा, कौन है तू, अंदर क्यों आया, चल निकल यहां से. मार-पीट नहीं की. मजाक-सी करते हैं. उनका घर सोसाइटी अपार्टमेंट में है. बाहर गार्ड रहते हैं. उसके घरवालों ने गार्डों को कहा हुआ है कि ये शख्स अपार्टमेंट के आस-पास नहीं दिखना चाहिए. उस 11.03.98 से लेकर आज तक मैंने न तो शादी की है, न ही किसी से कोई दोस्ती की है, न कोई शारीरिक संबंध, न कोई गंदा इशारा. जब तक मेरी प्रीति मुझे उनके घर की रसोई की खिड़की में दिखती रहेंगी, मैं जिंदा रहूंगा और उन्हें पाने की कोशिश करता रहूंगा. या तो उपेन्द्र सिंह नाम का ये जाट नहीं या फिर ये प्यार रूपी इस दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती नहीं. अब देखो क्या होता है. इतना ज्यादा लिखने के लिए माफ़ी.
Uppe..meri aanbkhein bhar aayi aapki kahani sun ke...meri dua hai aapko wo mohabbat haasil ho jiski aapne juftjy ki hai.................iss thraed main kewal aap hai jisne apna jeevan khuli kitaab ki tarah saamne rakh diya hai..............baaki saare baat to likhe hai par bandook kisi aur ke kaandhe pe dhare....jissse ki .."meri saheli ke saath ye hua...ya fir............mere dost ke saath ye hua......................"
में इस तागे पे आणा कोणी चाहूँ था , पर विशाल भाई ने मेरे पि.ऍम मार-मार कें ले आया | में सारे भाई- भानाँ ( में सारे जट्टां नु भाई-भाण मानु सूं ,इतनी कोए रिश्ता नि हो जांदा , एर आड़े जे.अल पे हाम सारे दोस्त रूप में सां) नु कहू सूँ, अक विशाल भाई ने यो तागा सुरु तो नु कर्या था, अक हाम आपने प्यार के अनुभव लिखंगे | इब्ब इस्सा चाल रया स अक यो तागा "विचारों का संग्राम "बन्न ग्या | मेरा यो कहणा स, अक येह तागे नु "भावनाओं का सागर" बनाओ | नु कह्या करें अक "जितने सर उतने धरम " | तो आपसी संबंधों का विस्तार बन्दे के विचारों पे आधारित हो से | इस लिए, अगर हाम केवल अपनी भावनाएँ लिखें ,एर नु ना कहवे अक किः ने गलत कर्या, एर किस ने ठीक ,तो यो रोला ना होवेगा | बाकी आप सब की मर्जी | में तो सत्यपल सर जी की पोस्ट पढ़ें पाछे आशावान होया था, अक यो तागा इब्ब आपने ट्रेक पे आज्या गा |
Jai sare bha0bhaan hogey to rishta kade bvi na hove tera....arr jai JL aale dost sain to aadeye tohni padegi koye tere khatar
Ravinder....I'm enjoying posting a lot after such a long gap....Thanks to Vishal/ V.P./ Shibani/ You/ Upender....though
Upender-I still have to take time to read your posts which seem a very interesting read....Y'day i spent long long time in replying to Shibani's post, later I was upset as it pushed my schedule l'il further in my To-Do list.God this JL is so addictive
![]()
Shibani I love to communicate with you, its great to have broadminded, well learned,to be precise I would rather say like-minded people aroundStick around
Ravinder yo taga track paiye sai....Hum to maadi si khilari kar rey hain....Matlab brainstorming session tha yo. Nyu sari share na kareingey to bera kyukar pattega akk ke--ke chaal rehya hai duniya mai....Kulhiyan mai gudd na foddna humney....We are grown up enough to accomodate eachother's views![]()
प्यारे शहद ,
ये सब लव में मोजूद ठरक को लेकर है , कोई बड़ी बात नहीं लेकिन क्या
---ओ प्यारे शहद, ''तुम इस ठरक नामक कसुती भावना को प्रेम जैसी दूसरी कसुत भावना से सफलता पूर्वक अलग कर सकते हो'' ?
क्यों की ठरक अर रोकेट आदमी को कहीं भी ले जा सकते हैं और कुछ भी बक बक करवा सकते हैं !
महान प्लेटो ने इसी ठरक को Platonic Love की संज्ञा दी है!
सही कह्या आपने सुनीता जी, सारे बहन भाई हो ज्यांगे तो फेर तो रविंदर भाई ताएँ कोए तमिल, तेलुगु , मलयाली या मराठी छोरी/लुगाई ढूंढनी पडेगी Ioriginally poted by Sunita Hooda....
Jai sare bha0bhaan hogey to rishta kade bvi na hove tera....arr jai JL aale dost sain to aadeye tohni padegi koye tere khatar[/FONT][/B]
Upender-I still have to take time to read your posts which seem a very interesting read...
थोडा हांसी मखौल जरूरी सै जी इस तनावपूर्ण माहौल में. घना serious हो के भी के होज्यगा. न्यू ए १५०-२०० quintal चून फूंक के एक दिन दुनिया तैं रफूचक्कर हो ज्यांगे. प्यार मोहब्बत तैं रहंगे तो कोई भूले भटके चार आंसू भी म्हारे खातर पटक देगा नहीं तो लोग न्यू ए कहंगे अच्छा होया रोग कट्या.Ravinder yo taga track paiye sai....Hum to maadi si khilari kar rey hain....Matlab brainstorming session tha yo. Nyu sari share na kareingey to bera kyukar pattega akk ke--ke chaal rehya hai duniya mai....Kulhiyan mai gudd na foddna humney....We are grown up enough to accomodate eachother's views![]()
सही कह्या आपने सुनीता जी, सारे बहन भाई हो ज्यांगे तो फेर तो रविंदर भाई ताएँ कोए तमिल, तेलुगु , मलयाली या मराठी छोरी/लुगाई ढूंढनी पडेगी I
उपेंदर मैंने पहला आदमी लाग्या जिसके अरमानो मैं पाकीज़गी नज़र आयी ना तो मेरे जिसे सूक्के मज़े लेनिये सें.
थोडा हांसी मखौल जरूरी सै जी इस तनावपूर्ण माहौल में. घना serious हो के भी के होज्यगा. न्यू ए १५०-२०० quintal चून फूंक के एक दिन दुनिया तैं रफूचक्कर हो ज्यांगे. प्यार मोहब्बत तैं रहंगे तो कोई भूले भटके चार आंसू भी म्हारे खातर पटक देगा नहीं तो लोग न्यू ए कहंगे अच्छा होया रोग कट्या.
सुनीता जी, आपने बिलकुल सही कहा IAgar Tamil/Telugu/Malyali ya Bihari tonhi paddi to pehle Iski ILU kahan ki aadat ger dyo...ek to sudhi jatni thi maangi....ye south ki na bahkayi javein
Upender Jaisi sadgi aur spasht saleeka sab mein hota to Sibani aur Mere jaiso ko friends ki stories share na karni paddti....mai 1 to share kar letibina kise ke kandhey pai bandook dharey as Prashant said....auron ki kahani thi iss liye auron ka hi jikar kiya hai....aade aap jisse daran laag rey ho meri arr Shibani ki ke majaal
P.S.- Vishal n V.P. aap Ravinder ka ek badhiya sa Bio-Data bana kai Jatland ke matrimony section mai ger dyo arr ek Ad si bana dyo Facebook pai gerran tayi jo sabke profile pai chamkya kare![]()
मेरी लगातार मेहनत ने रंग दिखाया. इस बार मैंने कुछ नहीं किया. इस बार तो खुद एक बहुत ही ...
P.S.- Vishal n V.P. aap Ravinder ka ek badhiya sa Bio-Data bana kai Jatland ke matrimony section mai ger dyo arr ek Ad si bana dyo Facebook pai gerran tayi jo sabke profile pai chamkya kare![]()
में इस तागे पे आणा कोणी चाहूँ था , पर विशाल भाई ने मेरे पि.ऍम मार-मार कें ले आया | में सारे भाई- भानाँ ( में सारे जट्टां नु भाई-भाण मानु सूं ,इतनी कोए रिश्ता नि हो जांदा , एर आड़े जे.अल पे हाम सारे दोस्त रूप में सां) नु कहू सूँ, अक विशाल भाई ने यो तागा सुरु तो नु कर्या था, अक हाम आपने प्यार के अनुभव लिखंगे | इब्ब इस्सा चाल रया स अक यो तागा "विचारों का संग्राम "बन्न ग्या | मेरा यो कहणा स, अक येह तागे नु "भावनाओं का सागर" बनाओ | नु कह्या करें अक "जितने सर उतने धरम " | तो आपसी संबंधों का विस्तार बन्दे के विचारों पे आधारित हो से | इस लिए, अगर हाम केवल अपनी भावनाएँ लिखें ,एर नु ना कहवे अक किः ने गलत कर्या, एर किस ने ठीक ,तो यो रोला ना होवेगा | बाकी आप सब की मर्जी | में तो सत्यपल सर जी की पोस्ट पढ़ें पाछे आशावान होया था, अक यो तागा इब्ब आपने ट्रेक पे आज्या गा |
सुनीता जी, आपने बिलकुल सही कहा I
आप और शिबानी जी की स्पष्टवादिता, निर्भीक विचार और पारदर्शी व्यव्हार प्रसंशनीय है और आप दोनों का व्यक्तित्व दूसरी लड़कियों/महिलाओं के किये अनुकरणीय उदारहण है I अंग्रेजी में बोले तो Hats off या Kudos to both of you .
इसके साथ ही अपने छोटे मोटे प्रेम-प्रकरण या समर की भाषा में कहें तो ठरक आदि का वर्णन न कर पाने की असमर्थता के किये थोड़ी क्षमा याचना भी I
प्यारे शहद ,
ये सब लव में मोजूद ठरक को लेकर है , कोई बड़ी बात नहीं लेकिन क्या
---ओ प्यारे शहद, ''तुम इस ठरक नामक कसुती भावना को प्रेम जैसी दूसरी कसुत भावना से सफलता पूर्वक अलग कर सकते हो'' ?
क्यों की ठरक अर रोकेट आदमी को कहीं भी ले जा सकते हैं और कुछ भी बक बक करवा सकते हैं !
महान प्लेटो ने इसी ठरक को Platonic Love की संज्ञा दी है!
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