ye..arakshan arakshan...........kya hai.

हिसार. आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलनरत जाट समुदाय के लोगों ने रविवार को फिर रेलवे ट्रैक पर पड़ाव डाल दिया। हजारों की संख्या में लोग मय्यड़ गांव में इकट्ठे हुए और बलिदान रैली करने के बाद रामायण गांव के पास हिसार-दिल्ली ट्रैक पर बैठ गए।

आरक्षण लागू करने के लिए सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। बाद में निर्णायक आंदोलन की चेतावनी दी। आंदोलनकारियों के उग्र तेवर देखते हुए रेलवे ने इस मार्ग पर दोपहर को ट्रेनें बंद कर दीं। रोडवेज ने भी मय्यड़ के रास्ते किसी बस को दिल्ली नहीं भेजा।
यूपी में भी ट्रैक रोका

अमरोहा(उ.प्र.) आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलनरत जाट समुदाय के लोगों ने अमरोहा स्थित काफूरपुर रेलवे स्टेशन के निकट टैक को दूसरे दिन भी ठप रखा। आंदोलनकारियों ने रविवार को ट्रैक पर पशुओं को बांध दिया। इस रूट प्रतिदिन चार दर्जन ट्रेनें आती-जाती हैं। यही रूट आगे लखनऊ और फिर हावड़ा तक जाता है, इसलिए इस आंदोलन का असर लंबी दूरी की ट्रेनों पर भी पड़ रहा है।



JAT JAT ka dushman katai nahin hai..........
 
Good point , aarakshan ko khatam karane ki takat to hain nahi sarkaar me isase to achachha hain ki Gen category ko hi khatam kar do aur sari jatiyo ko aarkshan de do ... Voting % me ... jisake jitane % vote usako utna % aarakshan

Sabhi jaatiyon ko reservation dey do. Funny "24 ghante ka ultimatum, Andolankariyon key ugra tevar". Keep going.
 
Military without General

This movement has no leader to command.Trying to build there own kingdom.
Unity and Dignity are important necessity.
 
This movement has no leader to command.Trying to build there own kingdom.
Unity and Dignity are important necessity.


own kingdom ????????? do you read through papers or you know what exactly is happening on ground. Stop finding fault and as Prashant said its high time we support Yashpal malikji and Hawa singh Sangwanji
 
Abh agaar shuru hi kiya hai tou phir peeche naheen haatna. Keep going.


I am not able to understand why JATS from old Rohtak not supporting this movement. Is it a tactical move or selfish interest by them to support BHUPI BHAI instead of the community?
 
It is immaterial as to who is leading this movement. Leaders would become automatically irrelevant once the demands are met. The core issue is to get some benefit for the poor farming community who badly needs a share in the pool of jobs for their children due to pressure on land. I think, this demand is justified in view of the fact that no political party would ever be able to abolish reservations. Therefore, if other castes are getting this cake, why not to claim the share. The economic condition of a majority of jat farmers is pathetic and they need some respite. If it comes in the form of reservation in jobs/training for their children, it would be a welcome development. Moreover, this movement would also suitably convey a hidden message to the political powers that scrapping of all sorts of reservations in the name of castes is a need of the hour, if other communities are to be discouraged from demanding it. Either for all or for none. I have seen many people from the so called lower castes economically much better than the so called upper castes. Government would feel pressured and pilloried by the the kind of protests/movements as spearheaded by Jats, Gujjars and would be compelled to review the reservation policy. So, it is a right action in a right direction.
 
Last edited:
this tym jats are doing their level best 4 resr.,but this is in some confined regions.so theres a need 4 evyone 2 cum forward esp.frm jhajjar,rewari,rohtak,panipat,karnal n all ncr areas............
 
I am not able to understand why JATS from old Rohtak not supporting this movement. Is it a tactical move or selfish interest by them to support BHUPI BHAI instead of the community?
out of 42000 jobs 38000 are grabbed by rohtak only in last 6 years why the hell we need reservation??
 
जाटों ने दी गुरिल्ला युद्ध की चेतावनी
मेरठ (जेएनएन) : जेपीनगर के काफूरपुर रेलवे स्टेशन से शुरू हुए जाट आंदोलन को नए साथी मिल रहे हैं। रालोद और भारतीय किसान संघ ने आंदोलन के पूरे समर्थन की घोषणा की है। उधर, गाजियाबाद के मुरादनगर में हुई महापंचायत में दिल्ली का पानी रोकने के लिए 17 मार्च तक का अल्टीमेटम दिया गया। जाटों को आरक्षण की मांग न मानने पर गुरिल्ला युद्ध की चेतावनी भी दी। महापंचायत में तय हुआ कि अखिल भारतीय जाट आरक्षण समिति से जुड़े लोग अपने अपने इलाकों में केंद्रीय कार्यालयों पर ताला जड़ देंगे। अमरोहा के काफूरपुर रटेशन पर आंदोलन को समर्थन देने रोजाना एक गांव के लोग पहुचेंगे। काफूरपुर में रेल ट्रैक पर रविवार को नवें दिन भी धरना जारी रहा। संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने बताया कि आंदोलन के समर्थन में अधिवक्ता सोमवार को जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेंगे। रेलवे ट्रैक जाम करने एवं दिल्ली को गंगाजल की आपूर्ति ठप करने की सूचना पर पुलिस व प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी पूरे दिन फोर्स के साथ जमे रहे। दूसरी ओर, बिजनौर में रालोद नेता अनुराधा चौधरी ने कहा कि रालोद का न सिर्फ जाट आंदोलन का समर्थन है, बल्कि पार्टी 15 मार्च को दिल्ली में प्रदर्शन भी करेगी। चौ.अजित सिंह ने पार्टी के सभी सांसदों को जाट आरक्षण का मुद्दा संसद में जोरशोर से उठाने को कहा है। जाटों के आंदोलन के समर्थन में भाकियू ने अपने कार्यकर्ताओं से 14 मार्च को काफूरपुर रेलवे ट्रैक पर पहुंचने का आ ान किया गया है।
 
केंद्र पर निगाहें, चुनाव पर निशाना
अवनीश त्यागी,लखनऊ केंद्रीय सेवा में आरक्षण के सवाल पर उत्तर प्रदेश में जाट आंदोलन लम्बा खिंचता जा रहा है। निशाने पर भले ही केंद्र सरकार है परन्तु विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे अधिकांश राजनीतिक दल आंदोलन से वोटों के गणित का नफा नुकसान भी देख रहे हैं। इसी कारण ट्रैक जाम आंदोलन का खुला समर्थन करने से बसपा को छोड़ अन्य पार्टियां कन्नी काट रही है। नौ दिन बाद भी कोई नामचीन नेता आंदोलनकारियों के बीच नहीं पहुंचा। जाट आरक्षण के मुद्दे पर सबसे बड़ी उलझन राष्ट्रीय लोकदल के सामने है। आंदोलन का विरोध करना किसी सूरत में संभव नहीं है तो काफूरपुर जाने से विरोधी खेमें के ताकतवर हो जाने का खतरा भी कमतर नहीं है। वोट बैंक को कायम रखने के लिए समानांतर आंदोलन चलाने की तैयारी है। जिसके संकेत महासचिव जयंत चौधरी ने लोस में मुद्दा उठाकर दिए। उधर प्रदेशाध्यक्ष बाबा हरदेव सिंह कहते है कि जल्द ही निर्णायक मुहिम छेड़ी जायेगी। सोमवार को दिल्ली में जंतर मंतर पर प्रदर्शन होगा। आंदोलन में साथ आने के सवाल का जवाब सीधे न देकर भाजपा नेता यूपी में जाटों को आरक्षण देने के लिए अपनी पीठ ठोंकते दिखते है और गेंद केंद्र के पाले में डाल कन्नी काटते है। गुर्जर आंदोलन का नुकसान राजस्थान में भुगत चुकी भाजपा यूपी को लेकर काफी सतर्कता बरत रही है। समर्थन में बडे़ नेताओं के खुलकर मैदान में आने से अन्य बिरादरियों का गणित बिगड़ने का खतरा जो है। अध्यक्ष सूर्यप्रताप शाही कहते है कि कांग्रेस सरकार को चाहिए कि जल्द फैसला करें ताकि आंदोलन से हो रही परेशानी से निजात पा सके। केंद्र में सरकार होने के कारण कांग्रेस के सामने ही सबसे बड़ी मुश्किल है। विरोध या समर्थन के सवाल पर कांग्रेसियों के पास चुप्पी के अलावा कोई जवाब नहीं है। उधर सरकार विरोधी आंदोलन में जुटा सपा नेतृत्व भी जाट आरक्षण मुद्दे पर खामोशी अख्तियार किए है। सूत्रों का कहना है कि आरक्षित पिछड़ा वर्ग में जातियों की संख्या बढ़ाने के बजाए सपा अनुसूचित जाति वर्ग में बढ़ोत्तरी की पक्षधर रहती है। मौजूदा आंदोलन के बारे में पूछे जाने पर प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी केवल इतना कहते है कि सपा आरक्षण के विरोध में नहीं है। आंदोलन का रूख दिल्ली की ओर संयुक्त आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक एचपी परिहार काफूरपुर आंदोलन के तरीके का विरोध करते है। कहते है कि किसी से प्रेरित होकर अराजक आंदोलन चलाना जाटों की मर्यादा के अनुरूप नहीं है। लड़ाई संसद के भीतर व बाहर हो। प्रथम चरण में दिल्ली के जंतर मंतर पर 15 मार्च से तीन दिन का अनशन होगा।
 
16 तक का अल्टीमेटम
हिसार, जागरण संवाद केंद्र : आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलनरत जाट आठवें दिन रविवार को हिसार के मय्यड़ के पास ट्रैक पर जमे रहे। दिल्ली-बठिंडा, भिवानी के बामल, नरवाना, कलायत व फतेहाबाद के मेहूवाला व टोहाना के गाजूवाला तथा सिवानी के झूंपा में लोगों ने ट्रैक जाम कर रखा है। जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने 16 मार्च तक का अल्टीमेटम देते हुए मांग पूरी न होने पर प्रदेशभर की रेलवे ट्रैक जाम करने की चेतावनी दी है। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के नेता दलजीत पंघाल ने कहा कि आंदोलनकारियों ने प्रदेश में अलग-अलग नौ जगह ट्रैक घेर लिए हैं। रविवार को भी बठिंडा-हिसार-दिल्ली रेल ट्रैक पर मय्यड़ के समीप प्रदर्शनकारी अड़े रहे। पंजाब, दिल्ली व राजस्थान से पूरी तरह कट चुके हिसार ट्रैक पर बैठे प्रदर्शनकारियों ने मांग न माने जाने पर इसी तरह ट्रैक जाम रखने का एलान किया है। उधर, भिवानी-रोहतक रेल मार्ग भी अवरुद्ध रहा। भिवानी-रोहतक के बीच रेलमार्ग बंद होने के कारण रोहतक भिवानी के बीच आवागमन करने वाली सभी गाडि़यां रद कर दी गई हैं। लोग इसराना स्टेशन के पास भी पटरियों पर धरने पर बैठ गए।
 
सिवानीमंडी, संवाद सहयोगी : प्रदेश में आरक्षण की मांग को लेकर रेलवे टै्रक पर जमे जाटों ने आज प्रधानमंत्री मनमोहन ¨सह का पुतला जलाकर अपने रोष का इजहार किया। गुस्साए जाटों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की साथ ही चेतावनी दी कि सरकार ने अगर उनकी मांगे नहीं मानी तो वे इसी तरह से टै्रक पर जाम किए बैठे रहेंगे। उधर, आमरण अनशन पर बैठे तीन जाट नेताओं की अचानक तबीयत बिगड़ गई। सूचना के बाद डीएसपी ईश्वर ¨सह चिकित्सकों की टीम के साथ जाम स्थल पर पहुंचे और तीनों की स्वास्थ्य की जांच करवाने के बाद उन्हें अस्पताल में दाखिल करने की बात कही लेकिन जाट नेताओं ने दाखिल करवाने से मना कर दिया। जाटों के इस आंदोलन में राजस्थान के सैकड़ों जाटों ने भाग लिया। संघर्ष समिति के ब्लॉक प्रधान रामकुमार धुआं के नेतृत्व में आमरण अनशन पर बैठे जाट नेता प्रताप सिंह सूरा, फूल¨सह सिवाच और दलीप ¨सह की तबीयत बिगड़ गई। बाद में एक निजी चिकित्सक को जाम स्थल पर बुलवाकर उनका उपचार किया गया। पांचवें दिन इस धरने में श्योराण खाप बावनी के प्रधान कप्तान सोहन लाल श्योराण, लाखलान खाप के प्रधान बलबीर ¨सह मिट्ठी के अलावा टेई खाप के नेताओं ने भी रेलवे टै्रक जाम में हिस्सा लिया। राजस्थान से आए ओमप्रकाश पूनिया, पूर्व सरपंच लीलू राम, राजकुमार ओबरा, चिरंजीव ठोलिया और झुंपा के जाट नेता विजय लाठर ने कहा कि जाट सरकार से अपना हक लेकर हटेंगे। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार आरक्षण की घोषणा नहीं करती वे जामस्थल से नहीं हटेंगे। जाटों के इस रेलवे टै्रक जाम का नेतृत्व रविवार को नन्हें बच्चों रवि और सचिन ने किया। दोनों बच्चों ने कहा कि हरियाणा सरकार को राजस्थान की तरह हरियाणा में भी आरक्षण लागू कर देना चाहिए ताकि उन्हें इसका लाभ मिल सके। इस मौके पर विजय सिंह लाठर, सूबेदार महाबीर काजला, रिसाल ¨सह कस्वां, हरफूल ¨सह सिंधू, पवन श्योराण, रोहताश दहिया, सूबेदार प्रताप ¨सह, फूल¨सह, दारा सिंह आदि मौजूद थे।
 
HISAR: Stepping up their over weeklong agitation, Jat leaders, who are demanding reservation in government jobs under OBC category, have called for a siege of railway tracks across the state beginning Monday.

Their main targets would be tracks in Ambala-New Delhi and Rohtak-Bhiwani-Hisar section. Haryana DGP has asked for additional central police forces to deal with the situation. On Sunday, protesting community activists laid blockades in 7 areas, holding up railway traffic and making the situation more bad for passengers and the looming power crisis in the state. In Ramadan village, Jats burned the effigy of chief minister Bhupinder Singh Hooda.

"The chief minister has not listened to our demands, so we are protesting by burning his effigy. He (CM) has to listen our demands. We will fight till our demands are met," Hawa Singh Sangwan, state president of Jat Arakshan Sangharsh Samiti, said. "We have decided to lay siege on all rail routes across Haryana, but peacefully, on March 14. We will not disclose our further action," he added.

Hisar and Jind districts remained cut off from Rajsthan, Punjab, Uttar Pradesh, Delhi and some parts of Haryana.

With over 60 long distance passenger and goods trains remaining disrupted for the eighth day, private cab operators could be seen fleecing hapless passengers The railways claim to be losing Rs 80 lakh daily on the account of loss of freight and passenger ticket revenue.

Also, with coal supplies snapped, Khedar thermal plant remains critical as 2 of its 600MW feeder having stopped functioning for want of fuel.

"We are unable to do anything for Khedar thermal plant. Even the GPR and RPF is not doing anything to unblock the railway lines so that we can send coal to the power plant," station superintendent Radhey Shyam Meena told TOI.
 
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हरियाणा. आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे जाटों का प्रदर्शन आठवें दिन भी जारी रहा। उनके आंदोलन के कारण रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित है और प्रदेश में आने जाने वाली कई ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के आह्वान पर बड़ी संख्या में महिलाएं भी रेल लाइन पर बैठी हुई हैं।

जाट नेताओं ने आर पार की जंग की एलान करते हुए कहा कि हम तब तक आंदोलन वापस लेने वाले नहीं हैं, जब तक कि हमें आरक्षण नहीं मिल जाता। उल्लेखनीय है कि जाटों का आंदोलन 5 मार्च से शुरू हुआ था। उनकी मांग है कि उन्हें 27 फीसदी आरक्षण ओबीसी कैटेगरी में दिया जाए। जाट समुदाय के लोग हिसार के हांसी,मय्यड़, झुप्पा, गाजूपुर, भिवानी में बामला, फतेहाबाद में मेहूवाला,पानीपत में इसराना और जींद में नरवाना में ट्रैक पर धरना दे रहे हैं।

तीन दर्जन ट्रेनें रद्द

आंदोलन से दिल्ली-फिरोजपुर रेल सेक्शन ठप हो गया है। जाखल से दिल्ली के अलावा बठिंडा जाने के लिए भी कोई ट्रेन नहीं है। रेलवे प्रशासन ने दिल्ली-बठिंडा व हिसार की ओर जाने वाली ट्रेनों को अनिश्चितकाल के लिए रद्द कर दिया है। जाखल के स्टेशन अधीक्षक पीसी ओझा ने बताया कि इस समय तीन दर्जन ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं।

सीएम-पीएम का पुतला फूंका

प्रदर्शनकारियों ने रविवार को हांसी में रेलवे ट्रैक पर सात बास खाप के प्रधान धारा सिंह के नेतृत्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का पुतला फूंका। हालांकि पत्रकारों से बातचीत में जाट संघर्ष समिति के प्रांतीय अध्यक्ष हवा सिंह सांगवान ने कहा कि उन्होंने पुतला फूंकने के निर्देश नहीं दिए थे। लेकिन उनके साथ मौजूद धारा सिंह ने कहा कि उन्हें इस बारे में ऊपर से निर्देश मिले थे। उधर, भिवानी जिले में सिवानी मंडी में धरना दे रहे लोगों ने प्रधानमंत्री का पुतला फूंका।

सरकार के सामने नैतिक संकट

कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई ने हरियाणा सरकार को नैतिक संकट में डाल दिया है। दरअसल, उत्तर प्रदेश में कांग्रेस जाटों के आंदोलन का समर्थन कर रही है। इससे हरियाणा सरकार के सामने भी आंदोलन का समर्थन करने की मजबूरी है, लेकिन कानून व्यवस्था बनाए रखने की भी उसकी जिम्मेदारी है। बता दें कि जाटों के आंदोलन को उत्तर प्रदेश में भाजपा और सत्तारूढ़ बसपा भी समर्थन दे रही हैं।

आंदोलन में एक करोड़ लोग हैं शामिल

अमरोहा. आरक्षण दिए जाने की मांग को लेकर चल रहा जाटों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। लगातार नौ दिनों से दिल्ली-लखनऊ रेलमार्ग पर यातायात जाम किए बैठे जाटों ने आर-पार की जंग की घोषणा कर दी है। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने रविवार को यहां कहा कि इस बार आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। मलिक ने कहा, ‘आरक्षण की हमारी मांग करीब 20 साल पुरानी है।

केंद्र सरकार की तरफ से हमें केवल भरोसा ही मिलता आया है, लेकिन इस बार हम अपना हक लेकर रहेंगे।’ उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब व अन्य राज्यों में लगभग एक करोड़ से अधिक लोग आंदोलन में शामिल हैं।
 
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Hats off to these people who can see the future of the next generations, they themselves will not get any benefit but still they are making every effort so that it benefits the people in future.
 
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