jat duniyaa ki najar mey

"इन जट्टों को नहीं छेड़ना चाहिए | ये बहादुर लोग ततैये के छत्ते की तरह हैं ,एक बार छिड़ने पर पीछा नहीं छोड़ते |"----अलाउदीन खीलजी
 
"जाट वीर जाती सदेव से एक तंत्री शाशन सत्ता की विरोधी रही हे तथा ये प्रजातांत्रि हैं "|----इतिहासकार मो, iliyat
 
"जाट सोई पांचो झटके ,खाशी मन ज्यों निशदिन अटके "इस का मतलब स --जो पांचो इन्द्रियों का दमन कर के बुराई से दूर रह कर भक्ति करे ,वासतव में जाट हे |-संत कवी गरीब दास |
 
"ज्यादा से ज्यादा गुट्टा सेनिकों की टुकड़ियां भेजो " ---जर्मन अरिया कमांडर (दुसरा विशव यूद्ध ) जब जर्मनी फरांस की लड़ाई हारने लगा | विशेष -- जर्मनी में जट्टों को गुट्टा बोला जाता हे |
 
"जाट एक ऐसी जाती हे जो इतनी अधिक व्यापक और संख्या की दर्ष्टि से इतनी अधिक हे की उसे एक राष्ट्र जी संज्ञा प्रदान की जा सकती हे "|--------इतिहासकार कालिकारंजन कानूनगो
 
"जट्टों को प्रेम से वश में करना जेसा सरल हे , आँख दिखा कर दबाना उतना ही कठिन हे |"---- पंडित इन्दर विद्या वाचस्पति
 
"एतिहासिक काल से जाट बिरादरी हिन्दू समाज के अत्यचारों से भाग कर निकलने वाले लोगों को शरण देती आई ,इन्होने दलितों और अछूतों को उप्पर उठाया हे | उनको समाज में सम्मानित स्थान प्रदान कराया हे |" ---------महान इतिहासकार कालिकारंजन कानूनगो
 
" जट्टों को मुगलों ने परखा ,पठानों ने इनकी चाशनी ली ,अंग्रेजों ने पेंतरे देखे और इन्होने फ़्रांस एवम जर्मनी की भूमि पर बहादुरी दिखा कर सिद्ध किया की जाट महान क्षत्रिय हें|" -------- इतिहासकार ठाकुर देशराज
 
राजपाल जी आपने मेरा समर्थन किया धन्यवाद | वरना यहाँ पर टांग खीचने वाले जयादा हैं |

Ravindra Jeet Singhi isme samartahn dene wali koi baat nahi hai....jo bat satya hai....vo satya hai......Jat vastav me ek mahan jaati hai....mujhe garva hai ki mai bhee ek "Jat" hoon....
 
"जाट विभिन्न धार्मिक संघटनों व् मतों के अनुयायी होने पर भी जातीय अभिमान से ओत-प्रोत हैं | भूमि के सफल जोता ,क्रांतिकारी ,मेहनती जंमिदार तथा यूद्ध योद्धा हैं |" ----विलियम क्रूक
 
"जाटनियाँ ,राजनेतिक रंग मंच पर समान रूप से उत्तर दायित्व निभाती हैं | खेत में व् रणक्षेत्र में अपने पति का साथ देती हैं और आपातकाल के समय अपने धरम की रक्षआ में प्राण त्याग करना अपना पवित्र धरम समझती हैं "| ------इतिहासकार मनुची
 
"हिन्दुओं की तीनो बड़ी जातियों में जाट कोम वर्तमान में सबसे बेहतर पुराने आर्य हैं "|----इतिहासकार कालिका रंजन कानूनगो
 
"स्पेन , गाल , जटलेंड , स्काट्लेंड, और रोम पर जट्टों ने फतह कर बस्तियां बसाई "|-------विलियम कूक
 
"जाट शब्द की व्याख्या करने की आवश्यकता नहीं हे | यह ऋगवेद ,पुराण और मनुस्मर्ति आदि अत्यंत प्राचीन गर्न्थों में सवयं सिद्ध हे | यह तो वह वृक्ष हे जिस से समय-समय पर जातियों की उत्त्पत्ति हुई |"-----ए. अच् . बिगले
 
" प्राय देखा गया हे जाट के मुकाबले राजपूत विलासप्रिय ,भूस्वामी गुजर और मीणा सुस्त अथवा गरीब कास्तकार तथा पशुपालन के स्वाभाविक शोकीन,पशु चराने में सिद्धहस्त हैं , जब की जाट मेहनती जमींदार तथा पशु पालक हैं "|---------विद्वान कनिंघम
 
" जाट समाज में जाटनियाँ परिशरम करना अपना राष्ट्रीय धरम समझती हैं ,इसलिए वे सदेव जट्टों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करती हैं | वे आलसी जीवन के प्रति मोह नहीं रखती |"---- विख्यात इतिहासकार यदुनाथ सरकार
 
"महाराजा रणजीत सिंह पहला भारतीय हे जो जिज्ञासा व्रती में सम्पुरण राजाओं से बढाचढा हे | वह इतना बड़ा जिज्ञासु कहा जाना चाहिए मानो अपनी सम्पुरण जाती की उदासीनता को वो पूरा करता हे | वह असीम साहसी व शूरवीर हे | उसकी बातचीत से सदा भय सा लगता हे | उह्न्होने अपनी किसी भी विजय यात्रा में कहीं भी निर्दयता का वाय्वाहर नहीं किया |"------- फ्रांससीशी यात्री एवम इतिहासकार जेक्मो
 
"एक अकेले आदमी द्वारा इतना विशाल राज्य इतने कम अत्याचारों से कभी स्थापित नहीं किया गया | अद्भुत वीरता ,धीरता ,शूरता में समकालीन सभी भारतीय नरेशों के सिरमोर थे "|(महाराजा रणजीत सिंह के बारे में )----यूरोपीय यात्री प्रिन्षेप
 
"महाराजा रणजीत सिंह भारत का नेपोलियन था"--------पंजाब केशरी
 
" जाट जाती करोड़ों की संख्या में परगतिशील उत्पादक और राष्ट्ररक्षक सेनिक के रूप में विशाल भूखंड पर बसी हुई हे | इनकी उतपादक भूमि स्वयं एक विशाल राष्ट्र का प्रतीक हे |"-------------- इतिहासकार उपेंदर नाथ शर्मा
 
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