कभी सोचा भी न था की अनशन भी बिकाऊ हो सकता है ..
कभी सोचा भी न था की अनशन भी बिकाऊ हो सकता है .... एक बूढ़े लालची व्यक्ति ने अपनी भूख बेच दी पूंजीपतियो के हाथ ! हाय रे गांधी , जैसा तू वैसे ही तेरे भक्त !!
जब गधे के कानो में हवा भर जाती है तो वो इधर से उधर दौड़ने लगता है ....यही हाल भारत की मूर्ख जनता का हो चला है ..... इन निष्कृष्टों को हमेशा कुछ ऐसा चाहिए जिसमे कुछ करना न पड़े और इनकी देशभक्ति के ढोंग को दिखाने के लिए आयाम मिल जाये। गांधी ने ...भी यही सोचकर चरखा घुमाते हुये ,बकरी का दूध पीते हुये,विनम्रता के चार बोल सुना दिये थे तो बुद्धिहीन मूर्ख हिन्दू जनता ने भी देखा कि क्रांतिकारी बनने के लिए जरूरी नहीं कि लड़ना पड़ता हो,जुल्म सहने पड़ते हो , फांसी पर चढ़ना पड़ता हो तो बस पहन ली गांधीटोपी ,लगे सूत काटने ,और बन गए क्रांतिकारी .... पर गांधी और ऐसे क्रांतिकारियों से देश को मिला क्या था - भारत माता का खंड खंड होना , हिन्दुओ कि लाशे और हिन्दुओ के खून से भरी नालिया,हिन्दुओ कि बहन बेटियो के भंग सतीत्व, तब भी ये नपुंसक जनता कुछ नहीं बोली , और करवा दिया घोषित उस देशद्रोही, हिन्दू द्रोही, गांधी को राष्ट्रपिता ...... उस गांधी कि विचारधारा से अभी जनता का नपुंसकत्व गया भी न था ,कि एक और गांधी कि औलाद आ गयी है....... फिर वही मूर्ख अंधी, हिन्दू जनता चल पड़ी है मोमबत्ती लेकर क्रांतिकारी बनने । क्यो कि जब सड़क पर जाकर मोमबत्ती जलाने से क्रांतिकारी बनाने कि उपाधि मिल रही है तो क्या हर्ज है भाई ?
कोई औस्ट्रालियन चुड़ैल माता लक्ष्मी जी कि फोटो ,बिकनी पर छाप देती है , तो कोई अमरनाथ यात्रा को ढोंग बताता है , हिन्दुओ और हिन्दुत्व का सत्यानाश हो रहा है दिन ब दिन तब क्यो नहीं निकलते ? फिर वही क्यो निकलोगे गांधी और अन्ना है न
फिर से तैयार हो जाओ एक नए छोटे गांधी कि विचार धारा को अगले बीस से पच्चीस साल तक झेलने के लिए ..... बस देखना ये है ये लेटैस्ट गांधी , कितनी हानि कर के मरेगा ?.?
कभी सोचा भी न था की अनशन भी बिकाऊ हो सकता है .... एक बूढ़े लालची व्यक्ति ने अपनी भूख बेच दी पूंजीपतियो के हाथ ! हाय रे गांधी , जैसा तू वैसे ही तेरे भक्त !!
जब गधे के कानो में हवा भर जाती है तो वो इधर से उधर दौड़ने लगता है ....यही हाल भारत की मूर्ख जनता का हो चला है ..... इन निष्कृष्टों को हमेशा कुछ ऐसा चाहिए जिसमे कुछ करना न पड़े और इनकी देशभक्ति के ढोंग को दिखाने के लिए आयाम मिल जाये। गांधी ने ...भी यही सोचकर चरखा घुमाते हुये ,बकरी का दूध पीते हुये,विनम्रता के चार बोल सुना दिये थे तो बुद्धिहीन मूर्ख हिन्दू जनता ने भी देखा कि क्रांतिकारी बनने के लिए जरूरी नहीं कि लड़ना पड़ता हो,जुल्म सहने पड़ते हो , फांसी पर चढ़ना पड़ता हो तो बस पहन ली गांधीटोपी ,लगे सूत काटने ,और बन गए क्रांतिकारी .... पर गांधी और ऐसे क्रांतिकारियों से देश को मिला क्या था - भारत माता का खंड खंड होना , हिन्दुओ कि लाशे और हिन्दुओ के खून से भरी नालिया,हिन्दुओ कि बहन बेटियो के भंग सतीत्व, तब भी ये नपुंसक जनता कुछ नहीं बोली , और करवा दिया घोषित उस देशद्रोही, हिन्दू द्रोही, गांधी को राष्ट्रपिता ...... उस गांधी कि विचारधारा से अभी जनता का नपुंसकत्व गया भी न था ,कि एक और गांधी कि औलाद आ गयी है....... फिर वही मूर्ख अंधी, हिन्दू जनता चल पड़ी है मोमबत्ती लेकर क्रांतिकारी बनने । क्यो कि जब सड़क पर जाकर मोमबत्ती जलाने से क्रांतिकारी बनाने कि उपाधि मिल रही है तो क्या हर्ज है भाई ?
कोई औस्ट्रालियन चुड़ैल माता लक्ष्मी जी कि फोटो ,बिकनी पर छाप देती है , तो कोई अमरनाथ यात्रा को ढोंग बताता है , हिन्दुओ और हिन्दुत्व का सत्यानाश हो रहा है दिन ब दिन तब क्यो नहीं निकलते ? फिर वही क्यो निकलोगे गांधी और अन्ना है न
फिर से तैयार हो जाओ एक नए छोटे गांधी कि विचार धारा को अगले बीस से पच्चीस साल तक झेलने के लिए ..... बस देखना ये है ये लेटैस्ट गांधी , कितनी हानि कर के मरेगा ?.?