What love is?

duniya ki koi bhi cheej jise samajik satar(social status)
na diya jaye vo pyaar to ho nahi sakti.
pyaar kisi b riste me ho skta hai.
i jst presented my point of view,
what others think is none of my business.
sabki apni soch hai sahi ya galat.
socially jo sahi h vo hi sahi kahlata hai.
 
ek kitab main pada tha

Love has no relation, no word

1. wasie dunia main sabse bada rista inaasniyat ka hota hai .....
2. or ye Samaj to hamesha payar karne walo ke khilf rha hai ..............socially aaj tak kisi ne isko sahi kha hi nhi

:rock
 
ek kitab main pada tha

Love has no relation, no word

1. wasie dunia main sabse bada rista inaasniyat ka hota hai .....
2. or ye Samaj to hamesha payar karne walo ke khilf rha hai ..............socially aaj tak kisi ne isko sahi kha hi nhi

:rock

Aman, who is she with u ?:cool:
 
हरयाणे के देहात में अंग्रेजी की कहावत कद तें बणण लागी र: |

bhai saab main tho bachpann tai sundaa aayaa hoon !

badde buddhe kayaa karain !

(kitnee baar yaad diwanaa padaiga aap taee Haryana's first language is sanskritt
second german)
 
bhai saab main tho bachpann tai sundaa aayaa hoon !

badde buddhe kayaa karain !

(kitnee baar yaad diwanaa padaiga aap taee Haryana's first language is sanskritt
second german)

मन्ने ते इब इ जाण पाटी स अक मै जर्मन लिखन बोलन लाग रा सु!! विकी लीक्स त भी खतरनाक खुलासा स मान भाई यो त ! माड़ा सा और प्रकाश गेर जितेंदर इस बात प त
 
Love as defined by some one her death bed

‘I don’t know what love is, but I can’t live without you even for a short time’ as she confessed, in her now faint and hardly audible voice the day prior to when the cruel hand of death snatched her from me.



An extract from my book bls31
 
Love as defined by some one her death bed

‘I don’t know what love is, but I can’t live without you even for a short time’ as she confessed, in her now faint and hardly audible voice the day prior to when the cruel hand of death snatched her from me.



An extract from my book bls31

जब दोनों की जिंदगियां को एक ही शरीर में जीया जाएँ |
 
kyo pyaaar vyaar ke chakkar mai time barbadd karnaaa...kaam woo karo jiske liyee duniyaa jaaat ko jaanti hai...jaise badmashi....ladai...murder..daaru pinaaa pherr duniyaa ko taang karnaa...agar hum pyaar ke chakkar mai paad gee to hamari to pechaan khatam ho jaagi:) m i rite miss khatri:)


Ma Ki Sun Sehrawat Sahab kasutaa likh Deyaaaaa......Eke Ek Word Deemak M Baith Gaya .......... Keetab Katub Likhaan Ka ji Nahi kerta Ke..............
 
love is an eternal feeling, it can be towards anybody and anything around you ................love for nature , love for animals, love for parents, love for siblings, love for you loved ones , love for humanity...........................and many many more. It can be felt and expressed by your action but mere word of love is meaningless. love inspires you , motivates you and makes your life colourful and full of satisfaction.
 
प्यार एक एहसास है जो किसी चीज़ की भूख या चाहत के साथ पैदा होता है और उसके साथ ही मर भी जाता है i
भूखे आदमी को रोटी से बेहद प्यार होता है मगर ज्यों ही भूख मिट जाती है रोटी के प्रति प्यार ख़तम हो जाता है i रोटी को सूंघने को भी मन नहीं करेगा,खाने की तो बात अलग I शादी से पहले लड़के और लडकी का परस्पर आकर्षण या प्यार अपनी चरम सीमा पर होता है I जानम,जानू, सनम, प्रिय, दिल-रूबा, हनी कहकर एक दूसरे पर प्यार की बौछार की जाती है, साथ जीने मरने की झूठी कसमें खाई जाती हैं क्योंकि कोई भूख इसके पीछे काम कर रही होती है i परन्तु शादी के बाद धीरे धीरे खुमार ढलने लगता है और फिर एक अवस्था ऐसी आती है कि पति पत्नी में जरा जरा सी बातों पर तकरार और कुत्ते बिल्ली वाली लड़ाई शुरू हो जाती है i पत्नी हरामजादी बन जाती है और पति कुत्ता कमीना और ढेढ़ का बीज बन जाता है i लड़का जब तक कुंवारा है और माँ बाप को तनखाह देता है तो वो सपूत है , मगर शादी के कुछ साल बाद कपूत हो जाता है i दुनिया में थोड़े बहुत सपूत भी होंगे मगर शादी के बाद प्यार कम अवश्य हो जाता है i लड़के लडकी जब तक माँ बाप पर निर्भर करते हैं उन के दिल में उनके प्रति काफी प्यार होता है मगर ज्यों ही माँ बाप बूढ़े, विवश और अर्थहीन हो जाते हैं वे उनको बोझ लगने लगते हैं और उनका प्यार पलटी मार के अपने जीवन साथी और बच्चों के पास चला जाता है क्योंकि उनमे सुनहरे भविष्य की चमक नज़र आती है i सो यह इंसान की चाहत ही हो जो प्यार को जनम देती है i अगर एसा नहीं होता तो हमें उन्ही व्यक्तियों या चीज़ों से प्यार क्यों होता है जो दिखने में सुन्दर और सुडौल, यौवन से भरपूर, (लड़का या लडकी) खाने में स्वादिष्ट (खाना आदि), छूने में मुलायम, कोमल व् सूंघने में सुगन्धित ( जैसे गुलाब का फूल) होती हैं i इस सबके पीछे हमारी ज्ञानेन्द्रियों की छुपी हुई हवस ही काम कर रही है जो स्वार्थ के सोफ्टवेयर से संचालित हैं और ऑटो मोड में फिक्स हैं
 
Last edited:
वी पी भाई साहब आप बिलकुल सही बात कह रहे हैं परन्तु ये चीजें तजुर्बा होने के बाद ही समझ मैं आती हैं |कहते हैं न की प्यार अँधा होता और मैं तो कहता हूँ की बहरा भी होता है | इस समय मन दीमाग पर चढ़ बैठता है
और सोचने समझने की शक्ति को क्षीण कर देता है |


फिर भी मेरा मानना है कि एक समय मैं ये जरूरी है ताकि रिश्तों की अहमियत बनी रहे नहीं तो
अव्यवस्था फ़ैल सकती है |
 
प्यार एक एहसास है जो किसी चीज़ की भूख या चाहत के साथ पैदा होता है और उसके साथ ही मर भी जाता है i
भूखे आदमी को रोटी से बेहद प्यार होता है मगर ज्यों ही भूख मिट जाती है रोटी के प्रति प्यार ख़तम हो जाता है i रोटी को सूंघने को भी मन नहीं करेगा,खाने की तो बात अलग I शादी से पहले लड़के और लडकी का परस्पर आकर्षण या प्यार अपनी चरम सीमा पर होता है I जानम,जानू, सनम, प्रिय, दिल-रूबा, हनी कहकर एक दूसरे पर प्यार की बौछार की जाती है, साथ जीने मरने की झूठी कसमें खाई जाती हैं क्योंकि कोई भूख इसके पीछे काम कर रही होती है i परन्तु शादी के बाद धीरे धीरे खुमार ढलने लगता है और फिर एक अवस्था ऐसी आती है कि पति पत्नी में जरा जरा सी बातों पर तकरार और कुत्ते बिल्ली वाली लड़ाई शुरू हो जाती है i पत्नी हरामजादी बन जाती है और पति कुत्ता कमीना और ढेढ़ का बीज बन जाता है i लड़का जब तक कुंवारा है और माँ बाप को तनखाह देता है तो वो सपूत है , मगर शादी के कुछ साल बाद कपूत हो जाता है i दुनिया में थोड़े बहुत सपूत भी होंगे मगर शादी के बाद प्यार कम अवश्य हो जाता है i लड़के लडकी जब तक माँ बाप पर निर्भर करते हैं उन के दिल में उनके प्रति काफी प्यार होता है मगर ज्यों ही माँ बाप बूढ़े, विवश और अर्थहीन हो जाते हैं वे उनको बोझ लगने लगते हैं और उनका प्यार पलटी मार के अपने जीवन साथी और बच्चों के पास चला जाता है क्योंकि उनमे सुनहरे भविष्य की चमक नज़र आती है i सो यह इंसान की चाहत ही हो जो प्यार को जनम देती है i अगर एसा नहीं होता तो हमें उन्ही व्यक्तियों या चीज़ों से प्यार क्यों होता है जो दिखने में सुन्दर और सुडौल, यौवन से भरपूर, (लड़का या लडकी) खाने में स्वादिष्ट (खाना आदि), छूने में मुलायम, कोमल व् सूंघने में सुगन्धित ( जैसे गुलाब का फूल) होती हैं i इस सबके पीछे हमारी ज्ञानेन्द्रियों की छुपी हुई हवस ही काम कर रही है जो स्वार्थ के सोफ्टवेयर से संचालित हैं और ऑटो मोड में फिक्स हैं

बहौत बढ़िया से बताया आपने ......................................
 
Ma Ki Sun Sehrawat Sahab kasutaa likh Deyaaaaa......Eke Ek Word Deemak M Baith Gaya .......... Keetab Katub Likhaan Ka ji Nahi kerta Ke..............
bhai dil tee batauu too leekhann ka ji too se time ni see.....maane to meree hisaab te thik leekhyaa seee..apne jaataa ke baskii see kee yoo pyaar vyaar karnaa...eek chori tee eek jaat bolyaa..i luv u chori....chori bolii ghaani bakwas na kar jutt khayogaa..jat bolyaa pherr tu ghussand ni khaayogii....soo kaam waa karo jiskee liyee aapp badnaam ho.....:)
 
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