डा साहब जी,
काम करने वाले तो बहुत है हमारे देश में,ज्ञान की भी कोई कमी नहीं है,होंसला और हिम्मत भी है!
मगर एक समस्या बहुत बड़ी है हमारे देश में जिसकी वजह से कोई भी अच्छा काम उतना बड़े पैमाने पे नहीं हो पाता जितना की किसी बदलाव के लिए उसे होना चाहिए!
वो समस्या है आम आदमी की मानसिकता !
मै ये बात अपने खुद के वास्तविक अनुभवों के आधार पे कह रहा हु जो मैंने महसूस किये है कई बार !
मै कोशिश करता हु आप लोगो को समझाने की....
जैसे की आप कोई भी काम अच्छा जिसमे आपका व्यक्तिगत कोई भी फायदा न हो,आप का समय,पैसा और आपके पुरे साधन आप उस काम में
लगा रहे हों, आप दिलो जान से उसमे लगे हों तब ये समस्या आपके आगे आती है !
आप काम बड़े पैमाने पे करते हों तो जाहिर सी बात है बड़ी तादाद में लोगो का साथ चाहिए मै विश्वास के साथ कह सकता हूँ की अगर सौ लोग आपके साथ होंगे तो एक हजार लोग आपके खिलाफ खड़े मिलेंगे आप को और वो वो लोग होंगे जिन्हें खुद तो कुछ करना नहीं है अच्छा काम और दुसरो को भी करने नहीं देना है !
वो लोग बहोत ही अच्छी अच्छी बाते निकाल कर लायेंगे,और ऐसी बाते लायेंगे जिनका कोई मतलब और कोई जवाब आप के पास नहीं होगा !
ये लोग पीछे लग जाते है उस आदमी के जो भी कुछ अच्छा करना चाहेगा.
सबसे पहले इनकी कोशिश रहेगी ये ढूँढना की इसमें इस आदमी का कहा पे जरा सा भी फायदा है और जब कोई भी फायदा समझ नहीं आएगा तो कहेंगे पब्लिकसिटी के लिए कर रहा है,ज्यादा समाजसेवक बन रहा है,कोई कहेगा
बहोत देखे है इसे नेता,कोए कहेगा यो हिन्दू वादी है,कोए कहेगा आर अस अस का पर्चार करे है,कोए कह देगा जातिवाद फेला रहा है!
और गलती से भी कोई राजनेतिक पार्टी के नेता ने किते जीकर कर दिया उस काम का तो फेर तो इनके मजे आ जा स !
और गलती से अगर थोड़े बहोत आपके संपर्क हों किसे पार्टी से तो और भी मजा आ जा है !
इतने बढ़िया बढ़िया किस्से आर कहानी सुनावेगे बैठ के सुबह श्याम बढ़िया टेम पास होज्यगा !
ये असली मानसिकता है हमारे देश के लोगो की जो सबसे बुरी चीज है!
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ये लोग किसी अपने फायदे के लिए काम नहीं कर रहे है हमे सभी चीजे भूल कर इनका जो मकसद ह उसे देखना चाहिए !
इनका मकसद नेक ह तो अगर इनमे कोई बुरे भी ह तो भी हमें इनका साथ देना चाहिए न की इनकी टांग खीचनी चाहिए !
जब तक हमारी मानसिकता में बदलाव नहीं होगा तब तक कुछ नहीं होने वाला,ये सबसे जरुरी है !
पहले समय कुछ और था,हमारी मानसिकता कुछ और थी,उस समय जो महापुरुस हुए उनको लोगो ने माना,उनकी बातो पे गोर किया,समझा और समर्थन दिया इसलिए वो सुधार कर पाए !
आज का समय तो ऐसा ह अगर भगवान् भी आ के कुछ समझाना चाहे तो लोग उसमे भी घनिये कमी काढ की भजा दे !
मै अभी इतना ज्यादा साफ नहीं लिख पाता हूँ अपनी बात को,
इसलिए आशा करता हूँ मै जो कहना चाहता हूँ वो थोडा बहोत तो समझ आया ही होगा आप लोगो को !
धन्यवाद्