आमिर खान के इस प्रोग्राम से खाप का मुद्दा एक बार फिर से गरमा गया हैं | हालांकि खाप अकेली जाटों की नहीं हैं , हर बिरादरी की अपनी खापे हैं , जैसे भिवानी जिले में श्योरान बावनी जिसका हेडक्वाटर सिधनवा गाँव, श्योरान पच्चीसी जिसका हेडक्वाटर बेरला , फौगाट दादरी खाप , सांगवान चालीस जिसका हेडक्वाटर चरखी , जाटू खाप चौरासी जिसका हेडक्वाटर धनाना गाँव हैं , यह सभी जाटों की खापे हैं इनके मुख्या जाट जाति से होंगे , इसमें चाहे किसी भी जाति का व्यक्ति हो या किसी भी अन्य जाति का गाँव हो वो इन खापो में गिने जायेंगे , भिवानी में एक ''पवार बतिश (32)खाप '' हैं जो की राजपूतो की खाप हैं , इस खाप का हेडक्वाटर बौंद गाँव हैं व इस खाप का प्रधान राजपूत ही बनेगा , इस खाप में जाटों के गाँव '''इमलोटा, लोहरवाडा , भागवी, सुरुप्गढ़ , सांतोर , निमली , मोरवाला '' आदि सात गाँव आते हैं जिन्हें सतगामा भी कहा जाता हैं , इसके इलावा भी कई जाटों के गाँव हैं जो इस खाप में पड़ते हैं पर इनको ''पवार खाप'' में ही गिना जाता हैं | ऐसे ही ब्राह्मण , अहीर , गुर्जर आदि जातियों की खापे हैं | खाप का एक अपना तौर तरीका हैं , कोर्ट की तरह ही खाप काम करती हैं सर्वखाप , खाप , कन्नी, उप-कन्नी , लघु-कन्नी आदि | कोई भी समस्या जिसका गाँव में हल ना हो वह लघु-कन्नी से होती हुई आखिर में सर्वखाप तक जाती हैं , अंतिम में सर्खाप का फैसला सर्वमान्य होता हैं | अगर कोई गाँव की पंचायत गलत फैसला सुना दे या कोई उस फैसले से संतुष्ट ना हो तो वह लघु-कन्नी या कन्नी के पास जाता हैं उसके बाद खाप के पास आखिर में सर्वखाप | फैसला देने में किसी से भी गलती हो सकती , हमारी कुछ खापों के द्वारा कुछ गलत फैसले लिए गए पर उन फैसलों को बाद में बड़ी खाप पंचायत ने पलटा भी हैं | इन्ही कुछ गलत फैसलों के कारण कुछ लोगो ने व इस मीडिया ने चिल्लाना शुरू कर दिया की खापों पर प्रतिबन्ध लगाओ , अगर ऐसे कुछ गलत फैसलों के कारण इन पर प्रतिबन्ध की बात हैं तो फिर न्यायालयों पर भी प्रतिबन्ध लगना चाहिए , एक न्यायालय कुछ फैसला देता हैं तो दूसरा उस फैसले को पलट कर कुछ और दे देता हैं , अब इनमे दोनों तो सही नहीं हो सकते एक तो गलत हैं फिर तो इन पर प्रतिबन्ध लगाना चाहिए |
अब बात यह हैं की इस मीडिया ने खाप का मुद्दा उठाया तो जाटों ने हनुमान वाली करदी , दूसरी जातियों को साथ लेने की बजाय खुद ही हंगामा शुरू कर दिया जैसे की खाप सिर्फ जाटों की हैं और जातियों की नहीं | देश में 650 के करीब खापे हैं जो की सिर्फ अकेली जाट जाति की नहीं हैं अन्य जातियों की भी खापे हैं | दूसरी जातियों की खापों ने सोच लिया की ठीक हैं ये बावले जाट खुद ही सर फुडवा लेंगे बदनाम हो लेंगे , तुम क्यों बदनाम हुए और वहीँ हुआ जाट आगे आ गए दुसरो को साथ लिया नहीं , मीडिया भी यही चाहता था इनको भी मौका मिल गया जाटों को बदनाम करने का , रही सही कसर कौम में मौजूद जयचंदो ने पूरी कर दी , जिन लोगो ने ऐसी शादिया की या जिनमे कुछ सामाजिक कमी थी उनको इस मीडिया का सहारा मिल गया | इस प्रोग्राम में हमारी खापो के प्रमुखों ने अपना पक्ष ठीक ढंग से रखा होगा पर वह इन बकालों ने एडिटिंग में काट दिया होगा , ये तो वहीँ दिखाएंगे जिससे इनकी कमाई हो सके , इनको इस बात से कुछ लेना देना नहीं की इनकी इन हरकतों से किसी समाज के सामाजिक ताने बाने पर क्या असर पड़ता हैं |
जैसे सवाल आमिर कर रहा था उससे यही जाहिर होता हैं की उसे नहीं पता समाज क्या होता हैं , जिस दिन यह सामाजिक व्यवस्था टूट जायेगी उस दिन न्यायालयों में मुक़दमों की भरमार हो जाएगी | समाज की इस शर्म के कारण ही कितने गलत काम होने से रुक जाते हैं | शहरों में आये दिन इतने उलटे सीधे काम सिर्फ इस सामाजिक ताने बाने के टूटने के कारण हो रहे हैं , वहा किसी की आँखों की शर्म तो रही नहीं | वकालत करता हैं प्रेम की , इसे खुद ही नहीं पता प्रेम क्या हैं | इसको पहले एक से प्रेम से होता हैं शादी करता हैं फिर किसी और पर दिल आ जाता हैं पहली वाली से प्रेम खत्म हो जाता हैं दूसरी से शादी रचा लेता हैं , वासना को यह प्रेम बता रहा हैं |
बाकी इससे यह जरुर सिद्ध हो गया की जाट हिन्दू नहीं हैं क्योंकि वह देश के मौजूदा हिन्दू विवाह अधिनियम की खिलाफत करता हैं , अगर जाट हिन्दू हैं तो फिर इसकी खिलाफत क्यों ?
इन हिन्दू भाइयों के बनाए हुए इस क़ानून के कारण ही आज जाट कौम की किरकरी हो रही हैं |