The famous Jat people

Famous person of my village

Dear all

Its my pleasure to write here that my village hero and my neighbour who sacrificed his life to save our motherland .........gets ASHOK CHAKRA ON 26TH January .

Award is given by honable president of india

गोहाना, संवाद सहयोगी : जिले के लाठ गांव के शहीद हवलदार राजेश कुमार को गणतंत्र दिवस पर अशोक चक्र से सम्मानित किए जाने पर उसके परिजन व ग्रामीण गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों के मुंह से बरबस यह शब्द निकल रहा था कि उनके गांव का लाल युवा पीढ़ी के लिए आदर्श बनेगा व युवाओं में देशभक्ति की भावना जागृत होगी। मंगलवार को शहीद की पत्नी बबीता व दोनों बच्चे ज्योति व नीरज दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल हुए। राष्ट्रीय समारोह में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने शहीद राजेश को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया।
उल्लेखनीय है कि पिछले साल एक अगस्त को जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में लाठ गांव के हवलदार राजेश कुमार ने अदम्य साहस व वीरता का परिचय दिया था। मरते दम तक उसने आतंकवादियों का कड़ा मुकाबला किया। 11 बटालियन राजपूताना राइफल के इस हवलदार ने चार आतंकवादियों को ढेर कर दिया था। तभी एक आतंकवादी की बंदूक से निकली गोलियां राजेश के पेट में आकर लगी। इसके बाद भी काफी देर तक राजेश लहूलुहान हालत में आतंकवादियों की गोलीबारी का जवाब देता रहा। शाम पौने सात बजे राजेश के शरीर से अधिक खून बह जाने के कारण उसने दम तोड़ दिया। गौरतलब है कि शहीद राजेश कुमार ने कारगिल युद्ध में भी सक्रिय रूप से भाग लिया था। कारगिल युद्ध में राजेश के उत्कृष्ट कायरें को देखते हुए उसे प्रशसा पत्र भी दिया गया था। इसके अलावा भी कई अवसरों पर आतंकवादियों से उसकी मुठभेड़ हुई, जिसमें उसने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर जमकर लोहा लिया था। शहीद की पत्**नी बबीता ने कहा था कि जहा उसे पति के शहीद होने पर गर्व है, वहीं उनकी पारिवारिक जिंदगी में भूचाल सा आ गया है। शहीद की मा और पिता का काफी समय पहले ही निधन हो चुका है। दरअसल गाव लाठ निवासी रामकिशन के दो बेटे थे, जिनमें बड़ा सुरेद्र व छोटा राजेश था। सुरेद्र भी सेना में था। उसकी रिटायर्ड होने के बाद मौत हो चुकी है। रामकिशन भी कई साल पहले दुनिया छोड़ चल बसे थे। राजेश की मा पनवेश्वरी का भी निधन हो चुका था।
इनसेट..
अपने भाई पर गर्व है : राजपति
गाव लाठ निवासी शहीद राजेश कुमार को गणतंत्र दिवस पर अशोक चक्र से सम्मानित होने से उसकी सबसे बड़ी बहन राजपति गमगीन आखों से कहती है कि उसे अपने भाई पर गर्व है, लेकिन वे अब रक्षाबंधन पर्व पर किसका इतजार करेगी। राजेश कुमार की तीन बहने है जिनमें सबसे बड़ी राजपति है और उसके बाद दर्शन व वीरमति है। गाव में महिलाओं, बुजुर्गाें व बच्चों में काफी उत्साह था। राजेश की भाभी दर्शना ने कहा कि उसे अपने देवर पर गर्व है, उसके देवर ने हरियाणा का गौरव बढ़ाया है। गांव के प्रधान बलवीर सिंह, जगवीर सिंह, विनोद कुमार, सतपाल, पवन, सोनू, रमला आदि ने एक स्वर में कहा कि शहीद ने अपनी वीरता से ग्रामीणों को देशभक्ति का पाठ पढ़ाया है।


salute to real hero of my village and nation...............:rock
 
There are countless Jats. The list will be very long. You forgot my name. I am also a jat and by no means a less Jat than anyone else. By the way what is the criteria for inclusion in this Royal List. I see names of some politicians who are famous for corruption and goodnagardi only.
 
There are thousands of unknown Jats in the countryside whose dedication to the society or community is not less than anyone listed above. Let us stop "glorification of a few rich and famous" who were able to come to the limelight by sheer luck. Keshwa Nand, Thakur Desraj and Veer Teja are quite unheard of. There is no need to eulogize all of them. Let us stop paying obeisance to the Havelis of Feudal Lords.
 
The people mentioned by Vijay Pal Singh Saheb are

Swami Keshwa Nand - Kindly go to page on Jatland Wiki http://www.jatland.com/home/Swami_Keshwanand

दैनिक भास्कर[1] ने स्वामी केशवानंद के जीवन दर्शन पर लिखा है कि स्वामी केशवानंद सच्चे समाजसेवी थे। समाज के हित में उनसे यथाशक्ति जो भी बन पड़ता वे करते थे। इस कार्य में आने वाली परेशानियों का सामना भी वे उत्साह से करते और इनसे घबराकर कभी पीछे नहीं हटते थे। समाज कल्याण के कार्यो के अतिरिक्त शिक्षा प्रचार का कार्य स्वामी केशवानंद को अतिप्रिय था।

वे मानते थे कि भारत के पिछड़ा राष्ट्र होने के लिए अशिक्षा सर्वाधिक जिम्मेदार कारण है और यदि इसे दूर कर लिया जाए तो भारत की उन्नति शीघ्र होगी। अत: स्वामी केशवानंद शिक्षा प्रचार के कार्य में बहुत सक्रिय रहते थे। एक दिन इसी कार्य के सिलसिले में उन्हें कहीं जाना था और गाड़ी छूटने में समय कम रह गया था। वे दिनभर से भूखे थे। उन्होंने तत्काल दो-तीन सूखी व ठंडी रोटियां निकालीं, दाल खरीदी और जल्दी-जल्दी चबाकर खाने लगे।

उनके एक सहयोगी ने इस पर आपत्ति की तो वे बोले- मुझे कई जगह जाना है भाई। फिर रात की गाड़ी पकड़ना है। इसलिए मैंने ये रोटियां मंगवाकर रख ली थीं। सहयोगी ने कहा- इस उम्र में आपको ठंडा व बासी भोजन नहीं करना चाहिए। कुछ नहीं तो सूखे मेवे, फल व मक्खन ही ले लिया करें। तब स्वामीजी मुस्कराकर बोले- बात तो ठीक है किंतु यदि इन्हीं बातों की चिंता मुझे करनी होती तो संन्यासी बनकर समाजसेवा करने का व्रत ही क्यों लेता?

उक्त घटना में समाजसेवा का मर्म इंगित किया गया है। सच्चा समाजसेवक मात्र अपने लक्ष्य को दृष्टि में रखता है, मार्ग की बाधाओं को नहीं। समाजसेवा का व्रत लेने वाला व्यक्ति रुकावटों की चिंता नहीं करता।
*************************************************
1. ↑ दैनिक भास्कर, दिनांक 25 जून 2010: स्वामी केशवानंद ने समाज सेवा का मर्म समझाया

स्वामी केशवानंद द्वारा संस्थापित, संचालित एवं प्रेरित संस्थाएं

* Gramotthan Vidyapeeth Sangaria (ग्रामोत्थान विद्यापीठ संगरिया) is an educational Institute situated in town Sangaria in Hanumangarh, Rajasthan.
* Swami Keshwanand G.V. College, Sangaria [2]
* ग्रामोत्थान विद्यापीठ संगरिया द्वारा तत्कालीन बीकानेर राज्य के २८५ ग्रामीण विद्यालय संचालित होते थे. १ नवम्बर १९५६ को ये विद्यालय राजस्थान सर्कार को सुपुर्द कर दिए गए.
* १५ अगस्त २००८ को राजस्थान सर्कार ने बीकानेर में राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय का नाम "स्वामी केशवानंद विश्वविद्यालय, बीकानेर" किया गया. Swami Keshwanand Rajasthan Agriculture University, BIKANER Rajasthan, India 334006, Tel: 0151-2250025, Fax: 0151-2250025, Email Address: reg@raubikaner.org URL: www.raubikaner.org

* स्वामी केशवानंद द्वारा संस्थापित, संचालित एवं प्रेरित संस्थाएं इस प्रकार हैं:
o Swami Keshvanand Institute of Technology, M&G, Jaipur, SKIT Campus Ramnageria, Jagatpura, Jaipur-303 025, (Rajasthan) INDIA[3]
o Swami Keshwanand Engineering College[4]
o Swami Keshwanand Nursary Teachers Training Institute. Badhadhar, NH-11, Sikar .
o Swami Keshvanand Institute of Pharmacy , Raisar, Bikaner, Rajasthan
o Swami Keshwanand Mahila College-Colleges, Abohar,India
o Swami Keshwanand Sr. Sec. School-Schools, Abohar,India
o Swami Keshwanand Memorial Public School - Hanumangarh - Rajasthan
o फाजिल्का डेरा उदासी पंथ
o अबोहर साहित्य सदन
o महाजन कस्तूरबा गाँधी महिला विद्यापीठ
o रतनगढ़ एवं राजगढ़ विद्यार्थी आश्रम
o खिचीवाला सुजन गढ़ शिक्षण संस्थान
o अमृतसर स्वर्ण पात्र स्वामीजी द्वारा चढाया गया था
o सरदार शहर गाँधी विद्या मंदिर स्वामीजी की प्रेरणा से खोला गया था.

Department of Posts, Government of India, has issued a commemorative postage stamp on "India's Struggle for Freedom" on Swami Keshwanand on August 15, 1999.

Is he unheard of ? Is he not famous ? How can we forget their contribution for the society ?

(To be contd)
 
Last edited:
Keshwa Nand, Thakur Desraj and Veer Teja are quite unheard of. There is no need to eulogize all of them.

As Burdak Ji Already mentioned a lot about Swami Keshwa Nand Ji, but apart from that let me tell you the general thinking of people about him. The status of Swami Keshwa Nand Ji in Rajasthan and surrounding areas of Punjab and Haryana is more than anybody. He is still remembered as an emblem of Education and Social Reforms.

Thakur Desraj was one of the best Historian, Freedom Fighter and Social Worker.

Veer Teja Ji is worshiped as a God in Rajasthan. Hundreds of poems, songs, stories and folk-lores are associated with him. More than 20 places are famous as pilgrim places where Teja Ji's fairs are held every year since 12th century.

I suppose that you should read about them before commenting. :)

 
Thakur Deshraj

Kindly go to page on Jatland Wiki http://www.jatland.com/home/Thakur Deshraj

Some salient points:

He was the main leader and force behind the Shekhawati farmers movement from 1931 to 1935. One has to understand the condition of farmers in Shekhawati region prior to independence. There was not a single School from Ganganagar to Jaipur for the farmers. If one had been to this part of Rajasthan about 65 years back and one goes now you can understand the difference. Now the Jat boys and girls from Shekhawati top the merit list. about 40 years back all teachers in Shekhawati were from UP. All nurses were from Kerala. Now all these posts are flooded with Jats. IAS results 2009 tell us that there are 8 IAS (Jats) selected from Rajasthan and they are all from Shekhawati !!! This was due to the efforts of people like Thakur Deshraj.

Vijayji has already told about his efforts in writing Jat history. Thakur Deshraj is author of the book on History of Jats in Hindi Jat-Itihas (जाट इतिहास) published in 1934. He also published local newspapers to promote the farmers to fight for their rights and awakened them to realize the self-respect. He started a newspaper named ‘Rajasthan Sandesh’ in 1931 for this purpose. He published a series of articles in ‘Jatveer’ on the acts of oppression on farmers, which awakened them. Later ‘Jatveer’ paper was also published from Jhunjhunu. The paper ‘Ganesh’ was published by him from Agra. Thakur Deshraj along with Pundit Tarkeshwar Sharma circulated hand written newspaper called ‘Gram Samachar’ started in 1929. Later he also published newspaper ‘Kisan’. All these papers created a revolutionary change in the farmers. He published History of Jats of Marwar in 1954 and 'Sikh Itihas' in 1954.

लेखक हरभान सिंह 'जिन्दा ने वर्ष २००३ में. राजस्थान स्वर्ण जयंती प्रकाशन समिति जयपुर के लिए राजस्थान हिंदी ग्रन्थ अकादमी जयपुर ने 'राजस्थान में स्वतंत्रता संग्राम के अमर पुरोधा' पुस्तक माला में अमर स्वाधीनता सेनानी ठाकुर देशराज के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला गया है.

हमें इन महान विभूतियों को समझना और नमन करना पड़ेगा जिनकी वजह से आज हम इस मुकाम पर पहुंचे है. हमें अपने प्रदेश से बाहर निकल कर अपने समाज को भी समझना पड़ेगा.
 
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Saheed Bhagat Singh

Its very awful that many of us have forgotten Saheed Bhagat Singh.

He sacrificed his life, for the freedom of the nation. A great freedom fighter, he was the founder of Revolutionary party.
I would request all the jats to write to the govt of West Bengal and Govt. of India to turn the house of Seth Chhaju Ram at Kolkatta into a historical building where Saheed Bhagat Singh stayed there on the top floor which was considered safe during thatr time.Seth Chhaju ram was a real Patriot .
 
देवेन्द्र झाझड़िया का जीवन परिचय

देवेन्द्र झाझड़िया का प्रारंभिक जीवन - देवेन्द्र झाझड़िया का जन्म गाँव झाझड़िया की ढाणी, तहसील राजगढ़, जिला चुरू राजस्थान में हुआ. आपके पिता का नाम रामसिंह झाझड़िया तथा माता का नाम जीवनी देवी है. जब वह 7-8 वर्ष के थे तो उनका बायाँ हाथ बिजली दुर्घटना में गमाना पड़ा. आपके पिता ने पढ़ने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग-65 पर स्थित रतनपुरा गाँव में भेजा. रतनपुरा को हडियाल स्टेशन के नाम से जाना जाता है. वहां से आपने 10 वीं तक की पढाई की.

कुछ कर गुजरने के जज्बात - देवेन्द्र के विकलांग होते हुए भी उनके मन में कुछ कर गुजरने के जज्बात थे. पढाई के साथ-साथ आपको अभावपूर्ण तथा सुविधाहीन स्थिति में भी रेत के धोरों के बीच भाला फैंकने का सनक सवार हुआ. पहले खेत से सरकंडे तोड़ उन्हें भाले की तरह फैंकना शुरू किया, फिर उसके साथ -साथ खेजड़ी पेड़ की लकड़ियों से भाला बनाकर एकलव्य की भांति अभ्यास शुरू किया. गाँव के स्कूल में भाला नहीं था. पिता रामसिंह की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि भला खरीद सकें. देवेन्द्र रोजाना स्थानीय रूप से बनाया गया भाला फैंकने का 5-6 घंटे प्रयास करने लगा. धीरे-धीरे वह भाला फेंकने में पारंगत हो गया और कक्षा 10 वीं में ही जिलास्तरीय एथलेटिक्स टूर्नामेंट में पहली बार स्वर्ण पदक हासिल किया. प्रथम बार स्वर्ण पदक हासिल करने के बाद उसने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा. देवेन्द्र के 10 वीं परीक्षा उत्तीर्ण होते ही आर.डी. सिंह कोच उसको अपने साथ ले गए और हनुमानगढ़ कस्बे की नेहरू कालेज में भर्ती कराया और कोच ने तैयारी शुरू करवादी. यहाँ से देवेन्द्र नें बी.ए. वाई. एम.डी.एस. अजमेर यूनिवर्सिटी से सन 2001 में पास की.

सन 1995 में आल इण्डिया यूनिवर्सिटी गेम्स में 67 मीटर की दूरी तक भाला फेंकने का रिकार्ड बनाया तो एक नयी पहचान मिली. उसके बाद 1998 तक विश्वविद्यालय स्तर पर प्रथम रहने से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक की विकलांग स्पर्धाओं तथा वर्ष 2002 में 8 वें बुसान एसियाड में स्वर्ण जीतकर भारत का परचम लहराया. वर्ष 2003 में ब्रिटिश थ्रो, ट्रिपल जम्प और शाट-फूट तीनों स्पर्धाओं में तीन स्वरण पदक जीते.

देवेन्द्र का दुर्भाग्य - पिछले दो वर्षों में देवेन्द्र के उत्कृष्ट प्रदर्शन से ही उनका चयन ओलम्पिक खेलों के लिए हुआ था. देवेन्द्र के पिता कहते हैं कि अच्छी रेंज की प्रतियोगिता के लिए उपयोग किया जाने वाला भाला 4-5 लाख रुपये में आता है जिसे खरीद पाना हमारे बस में नहीं है. देवेन्द्र का यह दुर्भाग्य रहा कि उसने शुरू में सहायता के लिए प्रयास किये परन्तु न तो राजस्थान सरकार ने और न खेल संस्थाओं ने उसको सगयोग किया.

रामस्वरूप जी आर्य ने प्रथम बार 2002 के बुसान एसियाड में खेलने जाने के लिए 75 हजार रुपये की सहायता भेजी. बुसान स्वर्ण पदक पाने के बाद अमेरिका प्रवासी खेल प्रेमी रामस्वरूप आर्य, कालीरावण, हरयाणा ने देवेन्द्र के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर का भाला भेजा. जिसे 26 सितम्बर 2002 को रुस्तमे हिंद दारासिंह ने यह भाला देवेन्द्र को राजगढ़ में भेंट किया. देवेन्द्र ने ब्रिटिश ओलम्पिक 2003 और एथेंस ओलम्पिक 2004 में इस भाले की लाज रखी.

रेतीले धोरों पर नंगे पैरों के अभ्यस्त देवेन्द्र के लिए केवल भाले का अभाव ही समस्या नहीं थी उसके लिए जूते पहन कर सिंथेटिक टर्फ पर दौड़ लगाना भी बहुत बड़ी बाधा थी. लेकिन सभी अभाओं और बाधाओं के बावजूद भी कुछ कर दिखाया, नया रिकार्ड बनाया, राष्ट्र के लिए स्वर्ण पदक जुटाया, और देश का नाम रोशन किया.

एथेंस ओलम्पिक में स्वर्ण पदक - देवेन्द्र ने 21 सितम्बर 2004 में एथेंस ओलम्पिक में जेवलियन थ्रो में नया विश्व रिकार्ड बनाया, राष्ट्र के लिए पहली बार ओलम्पिक में 1945 के बाद पिछले 50 वर्ष में स्वर्ण पदक दिलाकर राष्ट्र को गौरवान्वित किया. पूर्व के अपने ही रिकार्ड 59.77 मीटर को तोड़कर पांचवें राऊंड में 62.15 मीटर भाला फेंका. राष्ट्रीय धुन के साथ वहां उपस्थित भारतीय मूल के लोग ख़ुशी के मारे झूम उठे. देवेन्द्र के एथेंस पैरा ओलम्पिक 2004 में स्वर्ण पदक पाने के समाचार की पहले पहल बीबीसी ने खबर प्रसारित की थी, लेकिन भारतीय मीडिया सोया रहा. राष्ट्रपति ए. पी. जे. अब्दुल कलाम, प्रधानमंत्री, खेलमंत्री सुनीलदत्त आदि ने बधाई सन्देश भेजे.

झाझड़िया को क्यों भूली सरकार - लेकिन राजस्थान सरकार ने बधाई सन्देश का कष्ट नहीं उठाया. देवेन्द्र झाझड़िया को बधाई तो दूर की बात है देश के प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया ने भी एक अक्षर तक नहीं लिखा जबकि एक अन्य उच्च खानदानी 'रजत पदक' विजेता के घर, परिवार, गाँव, शयन-कक्ष आदि के चित्र छापकर गुणगान करने में कोई कसर नहीं छोडी. देवेन्द्र झाझडिया एक गाँव का किसान का बेटा था. उसको स्वर्ण पदक लाने पर जो सुविधाएँ मिलनी चाहिए थीं वे नहीं मिली तब प्रिंट मीडिया, महानगर टाइम्स, इवनिंग पोस्ट जयपुर ने अपने सम्पादकीय में लिखा 'झाझड़िया को क्यों भूली सरकार'. तब राजस्थान सरकार चेती और वहां के खेलमंत्री युनूस खान ने 133 देशों में पैरा ओलम्पिक में 50 साल बाद पहली बार स्वर्ण पदक दिलाने वाले देवेन्द्र झाझडिया को 21 अक्टूबर 2004 को 11 लाख रुपये का चेक दिया और सम्मानित किया. बाद में उसको अर्जुन अवार्ड भी दिया गया.


अर्जुन अवार्ड - राष्ट्रपति भवन में देवेन्द्र झाझडिया को अर्जुन अवार्ड 29 अगस्त 2005 में राष्ट्रपति ए.पी.जे अब्दुल कलाम द्वारा दिया गया. महाराणा प्रताप पुरस्कार-स्टेट स्पोर्ट्स अवार्ड 2004 तथा पीसीआई आउट स्टैंडिंग स्पोर्ट्स पर्सन अवार्ड 2005 भी मिला.

देवेन्द्र झाझडिया बिलासपुर (छत्तीसगढ़) रेलवे में ओ.एस. कर्मचारी लगे हैं. बिलासपुर रेलवे ने देवेन्द्र को एक लाख रुपये, निशुल्क क्वार्टर तथा खेलों की तैयारी की पूरी छोट दे रखी है.

पद्मश्री अवार्ड

पद्मश्री अवार्ड दिए जाने की सूचना देवेन्द्र को 25 जनवरी 2012 को 2 बजे दोपहर भारत सरकार गृह मंत्रालय से दूरभास पर मिली. गुरुवार 22 मार्च 2012 को महामहिम श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने राष्ट्रपति भवन नई दिल्ली में शाम को आयोजित समारोह में खेल के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए देवेन्द्र झाझडिया को पद्मश्री से सम्मानित किया गया. समारोह में राष्ट्रपति महोदया देवेन्द्र की पत्नी मंजू श्री को राजस्थानी वेशभूषा में देखकर बेहद खुश हुई. शाम को टी.वी. पर समारोह का कार्यक्रम दिखाया गया तो उसके पैतृक गाँव झाझडिया की ढाणी मेंउत्सव का माहौल था और मिठाइयाँ बांटी गयीं.

30 लाख का पुरस्कार

नई दिल्ली के शास्त्री भवन में पैरा ओलम्पिक खिलाड़ी देवेन्द्र झाझडिया को 30 लाख का पुरस्कार खेल विभाग भारत सरकार के संयुक्त सचिव आई. श्री निवास ने प्रदान किया. एथेंस पैरा ओलम्पिक-2004 में भारत को विश्व रिकोर्ड के साथ स्वर्ण पदक दिलवाने वाले खिलाड़ी को यह पुरस्कार 2004 में न मिलकर 6 वर्ष बाद वर्ष 2010 में मिला !!!

सन्दर्भ - यह लेख मुख्य रूप से श्री लक्ष्मणराम महला, जाट कीर्ति संसथान चुरू, के जाट बन्धु पत्र आगरा, दिनांक 25 जून 2012 को प्रकाशित लेख 'चुरू जनपद के जाट गौरव' पर आधारित है.

प्रेरणा - देवेन्द्र झाझडिया एक नयन उदहारण हैं जो यह प्रमाणित करते हैं कि कुछ कर गुजरने का जज्बा आपके दिल में हो तो कोई बाधा या अभाव आपको सफल होने से और शीर्ष पर पहुँचने से नहींरोक सकती !!!

आप यह लेख जाटलैंड विकी पर भी यहाँ पढ़ सकते हैं - [Wiki]Devendra Jhajharia[/Wiki]
 
please remove

Please remove this first name from the list, this person was the mastermind of most shameful crime in indian history known as Riwasa Kaand. if he & his son didn't get any punishment, it doesn't mean that crime never happened. Thanks in advance.

I add the following :

1. Ch. Bansi Lal
2. Ch. Ranveer Singh, Member of Constituent Assembly and father of the present CM of Haryana.
3. Ch. Nathu Ram Mirdha
4. Ch. Daulat Ram Saran, MP and social activist
5. Ch. Hardwari Lal
6. Ch. Priyavrat, (the Bhatta King)
7. Virender Sehwag
8. Principal Hoshyar Singh (a dedicated teacher, whose several students reached high positions)
9. Dr. Lal Chand Kajla (a famous doctor and unfortunately grand father (nana)
of Pamela Bordes)
10. Som Pal Shastri
11. Master Chandgi Ram - Pahalwan
12. Dr. S.S. Rana, (Principal of Shivaji College and Dean of Colleges, Delhi University)
13. Ch. Om Prakash Chautala
14. Raja Nahar Singh of Ballabh Garh
15. Brig. Hoshiyar Singh
16. Col. Hoshyar Singh, PVC
 
Please remove this first name from the list, this person was the mastermind of most shameful crime in indian history known as Riwasa Kaand. if he & his son didn't get any punishment, it doesn't mean that crime never happened. Thanks in advance.
रिवासा कांड त बहुत हमदर्दी स , के बात !!!!!!!
जितना अफोस तैने जताया स इतना तो मैंने भिवानी और खासकर तोसाम हल्के के लोग भी जताते ना देखे जित यो कांड होया था .....
 
रिवासा कांड त बहुत हमदर्दी स , के बात !!!!!!!
जितना अफोस तैने जताया स इतना तो मैंने भिवानी और खासकर तोसाम हल्के के लोग भी जताते ना देखे जित यो कांड होया था .....

या के बात होई, इब हमदर्दी का भी comparison होवेगा के ?
 
humdardi...

humdardi to bhaiya maine jab bhi hoti... tab aapki maa k saath aisa hoya hota... aise girre huye logo ko koi support karta hai jo aaurto k khilaaf itne heinous crime mein involve ho... to bahot feel hota hai... aap ek baat bataye... aapki maa k saath koi gang rape kare aur phir aapke gaanv mein neher aur roads ka jaal bichaa deve... to aap aapki maa k saath jo hua usse dekhenge yaa phir neher aur roads ko dekh kar khush hote rehenge?

रिवासा कांड त बहुत हमदर्दी स , के बात !!!!!!!
जितना अफोस तैने जताया स इतना तो मैंने भिवानी और खासकर तोसाम हल्के के लोग भी जताते ना देखे जित यो कांड होया था .....
 
baat humdardi ki nahi... baat girre huye logo ko Bhagwaan ka Darja dene ki hai. kya True Jat Leader wo hota hai jo aaurto ki ijjat k saath khele?

रिवासा कांड त बहुत हमदर्दी स , के बात !!!!!!!
जितना अफोस तैने जताया स इतना तो मैंने भिवानी और खासकर तोसाम हल्के के लोग भी जताते ना देखे जित यो कांड होया था .....
 
baat humdardi ki nahi... baat girre huye logo ko Bhagwaan ka Darja dene ki hai. kya True Jat Leader wo hota hai jo aaurto ki ijjat k saath khele?

I fully agree with you, But now in these days people become famous more easily and faster by doing some thing wrong, secondly what good Hardawari lal and priyavart has done many must be knowing about their character also, In fact putting all above with Raja Nahar, Brigadier and Col Hoshiar singh is insult of these three. I feel the title (the famous jat) is not suitable
 
Last edited:
रिवासा कांड त बहुत हमदर्दी स , के बात !!!!!!!
जितना अफोस तैने जताया स इतना तो मैंने भिवानी और खासकर तोसाम हल्के के लोग भी जताते ना देखे जित यो कांड होया था .....

Rakesh, really speaking there was no requirement of your coments
 
What is the Riwasa issue? Can anyone share a link?

Edit: Never mind.. Read previous posts.
 
Last edited:
There is differenece between being famous and being well known. I am not sure if all the nemes mentioned by members fall in the catagory of famous. Getting elected as MP or making it to the post of Principal of a college does not make one famous. If I am asked to pick up the names of famous Jats, I would pick up only the following ones;

1. Sir Chotu Ram
2. Ch Charan Singh
3. Maharaja Suraj Mal
4. Ch Devi Lal
5. Dara Singh
6. Col. Hoshyar Singh, PVC
7. Virendra Sehwag

Famous can be considered only those whom common men from all castes know and those who inspired others very significantly..

Rajendra

What about Film Star Dharmender & his sons/daughters!
We need to elaborate on Jat personalities who have contributed for the betterment of our society in one way or the other. Unless we know our well known/famous persons we shall remain ignorant. The best solution is to spread our knowledge by interaction and internet is the best medium.
 
What about Film Star Dharmender & his sons/daughters!
We need to elaborate on Jat personalities who have contributed for the betterment of our society in one way or the other. Unless we know our well known/famous persons we shall remain ignorant. The best solution is to spread our knowledge by interaction and internet is the best medium.


Right approach to commemorate the services of the past heroes to the society.
 
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