ग्याहरवी लोकसभा के लिए 1996 में आम चुनाव हुए । इसमें एच .डी .देवे .गोवडा की जनता दल को 29% मतों के साथ 192 सीट मिली , भाजपा + 20.29% मतों के साथ 187 सीट लेकर दुसरे स्थान पर रही , कांग्रेस 28.80% मतों के साथ 140 सीट लेकर तीसरे स्थान पर रही । 15 मई को राष्ट्रपति ने भाजपा के अटल बिहारी वाजपेयी को सरकार बनाने का न्योता दिया और उन्हें बहुमत सिद्ध करने के लिए 31 मई का वक़्त दिया परन्तु अटल बिहारी वाजपेयी ने बहुमत हासिल न होता देख 28 मई को ही इस्तीफा दे दिया । कांग्रेस के समर्थन से यूनाइटेड फ्रंट के देवे गोवडा को प्रधान मंत्री बनाया गया परन्तु कुछ महीनो बाद अप्रैल 1997 में कांग्रेस ने गोवडा सरकार से समर्थन वापिस ले लिया । कांग्रेस अभी चुनाव लड़ने की हालत में नहीं थी इसलिए वह यूनाइटेड फ्रंट के नए नेतृत्व को समर्थन देने के लिए तैयार हो गई और 21 अप्रैल 1997 को आई .के .गुजराल को प्रधान मंत्री बनाया गया । गुजराल साहब की भी डगर आसान न थी परन्तु इस बार समस्या कांग्रेस से नहीं खुद की जनता दल से थी । बिहार में cbi ने गवर्नर किदवई से मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के खिलाफ चारा घौटाले में जांच की अनुमति मांगी । गवर्नर ने जाच की अनुमति प्रदान कर दी व यूनाइटेड फ्रोंटके बाहर व भीतर लालू के इस्तीफे के मांग उठाने लगी । प्रधान मंत्री के समझाने के बाद भी लालू प्रसाद ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया । प्रधान मंत्री ने तत्कालीन cbi डायरेक्टर जोगिन्दर सिंह का तबादला कर दिया लोगो को लगा की यह लालू को बचाने के लिए किया हैं तो बवाल मच गया । जब लालू ने देखा की अब कोई चारा नहीं रहा तो उन्होंने एक नया पैंतरा खेला लालू ने जनता दल छोड़ अपनी एक नई पार्टी rjd का गठन किया । जनता दल के 45 सांसदों में 17 सांसद लालू के साथ चले गए परन्तु लालू ने केंद्र सरकार को कोई नुकसान नहीं पहुचाया सरकार को अपना समर्थन जारी रखा । 11 महीने बाद गुजराल सरकार भंग हो गई ।
बाहरवी लोकसभा के लिए 1998 में आम चुनाव हुए । इसमें भाजपा + (nda ) को 37.21% मतों के साथ 254 सीट हासिल हुई , कांग्रेस को 26.14% मतों के साथ 144 सीट हासिल हुई । कांग्रेस ने यह चुनाव सीताराम केसरी की अध्यक्षता में लड़ा था । 286 सांसदों का समर्थन हासिल कर अटल एक बार फिर से प्रधान मंत्री चुने गए परन्तु 13 महीनो बाद की aiadmk के 18 सांसदों के समथन वापसी से भाजपा सरकार भंग हो गई ।
तेहरवी लोकसभा के 1999 में आम चुनाव हुए । इसमें भाजपा+ को 37.06% मतों के साथ 274 सीट हासिल हुई , कांग्रेस को 28.30% मतों के साथ 156 सीट हासिल हुई । अटल बिहारी वाजपेयी को प्रधान मंत्री चुना गया । अटल बिहारी वाजपेयी ने 5 साल का अपना यह कार्यकाल पूरा किया ।
चौहदवी लोकसभा के लिए 2004 में आम चुनाव हुए । इसमें कांग्रेस को 35.4% मतों के साथ 218 सीट हासिल हुई , भाजपा+ को 33.3% मतों के साथ 181 सीट हासिल हुई । इस चुनाव में देशी-विदेशी का नारा चला जिस कारण सोनिया गाँधी ने मनमोहन सिंह को प्रधान मंत्री बनाया ।
पंद्रहवी लोकसभा के लिए 2009 में आम चुनाव हुए । इसमें कांग्रेस को 37.22% मतों के साथ 262 सीट हासिल हुई , भाजपा 24.63% मतों के साथ 159 सीट लेकर दुसरे स्थान पर रही , cpi (m) 21.15% मतों के साथ 79 सीट लेकर दुसरे स्थान पर रही । इस चुनाव में महंगाई मुख्या मुद्दा रहा फिर भी कांग्रेस सरकार बनाने में कामयाब रही और मनमोहन सिंह एक बार फिर से प्रधान मंत्री चुने गए ।
ऊपर दिए आकड़ो से पता चलता हैं की कांग्रेस 1971 में दो फाड़ हुई और इसमें इंदिरा कांग्रेस को 44% मत हासिल हुए 352 सीट हासिल हुई । उसके बाद इंदिरा गाँधी के खिलाफ जबरदस्त आन्दोलन हुआ , देश में कल हुआ । कांग्रेस के इस राज के दौरान बड़ा आन्दोलन हुआ , नेता जेल गए , इंदिरा व संजय जैसे दिग्गज चुनाव हार गए इसके बावजूद भी कांग्रेस को 40.98% मत हासिल हुए । जिन लोगो ने आन्दोलन किये जेल गए वह सरकार 3 साल भी नहीं चल पाई । लोग 3 साल में ही कांग्रेस के किये अत्याचार गई और 1980 के चुनाव में कांग्रेस को 43% मतों के साथ 374 सीट मिली । उसके बाद में 1989 के चुनाव में कांग्रेस को न के बावजूद भी उसको 39.53% मत मिले । 1996 का चुनाव जो की गाँधी परिवार की अध्यक्षता में नहीं लड़ा गया उसमे 29% मत हासिल हुए ।
देश में आज तक जितनी भी गैर कांग्रेसी सरकार बनी हैं उनमे से सिर्फ 1999-2004 का ऐसा कार्यकाल हैं जो nda ने पूरा किया ।
इस देश में सिर्फ दो पार्टी भी समस्या का कोई समाधान नहीं हैं । खिलाड़ी तो वहीँ हैं बस पाले बदलते रहते हैं , पाला बदलते ही जनता समझती हैं की अब ठीक हैं वो तो जिस पार्टी में नेता जी पहले थे उसकी नीति उसकी सोच गलत थी । असल में जरुरत हैं लोगो की मानसिकता बदलने की ।
भारत देश एक कृषि प्रधान देश हैं इसकी 80% आबादी खेती पर आधारित हैं और सबसे ताज्जुब की बात हैं की एक किसान को ही इसका प्रधान मंत्री नहीं बनने दिया जाता । देश आजाद हुए 65 वर्ष हो गए , इन 65 वर्षो में देश पर कांग्रेस का 50 साल राज रहा हैं । कांग्रेस राज में किसान प्रधान मंत्री का सवाल ही नहीं और बाकी 13 साल गैर कांग्रेस के राज में भी किसान प्रधान मंत्री सिर्फ बड़ी मुश्किल से 3 साल रहे होंगे । असल में किसान जाति के जो लोग पढ़ लिख के शहरो में बस जाते वे लोग भी गाँव की मूल भुत जरूरतों को भूल जाते हैं , ये लोग नए ज़माने की बात करते हैं । अपने आप को पढ़ा लिखा समझदार दिखाने के लिए अजीब लोगो की अजीब सोच की वकालत करते हैं । आज जिसका भी कभी गाँव देहात से वास्ता रहा उसको किसान नेता कहा जाता हैं जबकि हकीक़त यह हैं की इनमे से आधो को तो यह भी नहीं पता होगा की हरी मिर्च और लाल मिर्च एक हैं या अलग अलग पौधो पर लगती हैं । दादा परदादा किसान होने से हम किसान नहीं हो जाते और ना ही कोई ज़मीन का मालिक होने से किसान होता । चौधरी चरण सिंह ने बहुत सही कहा था की "" देश का विकास गाँव की गलियों से हो कर गुजरता हैं "" । यह हकीक़त भी हैं हम आईटी में जितनी मर्जी तरक्की कर ले परन्तु जब तक गाँव का किसान का विकास नहीं होगा तब तक इस देश का कुछ नहीं हो सकता और गाँव के, किसान के दुःख दर्द को एक किसान ही समझ सकता हैं ।