Incident that shocked Delhi

riyaa

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BBC News - Delhi bus gang rape: Victim 'still not out of danger'


What happen on sunday night, with that girl was seriously shocking thing for all of us, But still some Sick ppl think that this was girls fault becoz she was on the wrong place on wrong time with her boyfriend, No there is no mistake of any girl who get raped by basturds, ppl always have excuses...

Less or short Clothes
Wearing short clothes is not a invitation, Don't tell gals what to wear,
teach boys how to behave...becoz if girls clothing is only the issue they
mite have attacked there mother n sisters tooo...so Clothes ni thinking
matters....

Drunk
I was drunk so i did that wrong thing, nashe mai kabhi apni maa ko
yaa behan ko chedha hai, n if girl is drunk usae tou invitation mante hai,
aur next moment usko prostitute bol dete hai, kyun bhai woh ni pee skti
kya, yeah i know abhi itna modern bi ni hai india but wt the use of freedom
if you cant have the things in your way.

Late Night Travelling
Ladke kare tou tafri, enjoyment ladkiyan kare tou, woh acche ghar ki ni
hoti...aisa environment bana diya hai ki, woh din wapus aayega jismae
ladkiyan unpadh ghar mai rehangi...


Solution kya hai pata hai, abhi bahut ho gaya ladkiyon ko blame, ladko ko
control karo, yeh kya baat hui "bhai hamara tou ladka hai woh tou rape
karega hi tum apni ladkiyon ko roko" that is what actually happening
here!!! YAA TOU apne beto ko tameez sikhao yaa phir
give them pants with lock, n key apne pass rakh lena.
 
In agreement-----dear

Majority blame the gal for being out at odd hours or her clothing n life style .
Rather they should be criticizing men who have such sick mentality

PS: Some terms and phrases were used in your post which I find inappropriate (right word is profane) , I m sure you know what I meant .
 
It is because of the sick mentality of the people and people who say it is because of the clothing of girls or western culture influence are even more sick.

For crime like this we should follow Islam law.
 
यह दुनिया एक नर्क के समान है। इस दुनिया में सभी लोग सभ्य नहीं हैं, सभी लोग खुश नहीं हैं। जब कोई इंसान बहुत दुखी हो जाता है तो फिर वो दूसरों को भी दुखी देखना चाहता है। जिन लोगों के लिए लड़की का साथ पाना एक बहुत बड़ा ख़्वाब है, वे भी तो इस दुनिया में हैं। झुग्गी-झोंपड़ी में रहने वाले, अनपढ़, गरीब, असभ्य, मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों के लिए किसी सुंदर लड़की का साथ पाना एक ख्वाब है। चाहे कितने ही सख्त क़ानून बन जाएं, बलात्कार जैसे अपराध सदियों से होते रहे हैं और आगे भी होते रहेंगे। समझदारी इसी में है कि संभलकर रहा जाए। जब देर रात कोई लड़की दुखी, जंगली लोगों को किसी एकांत इलाके में मिलेगी तो वारदात होगी ही। लड़की की ही क्या बात करें। कोई पुरुष भी यदि ऐर-गैर समय बहुत ज्यादा सोना पहनकर चलेगा या बड़ी रकम लेकर चलेगा तो उसके लुटने के अवसर बढ़ जाएंगे। दुखी, जंगली लोगों के लिए वारदात करने की वजह एक लड़की के पास जिस तरह से उसकी इज्जत है, उसी तरह से ज्यादा सोना पहनकर/धन लेकर चलने वाले के पास वारदात की वजह उसका सोना/धन है। संभलकर रहने में ही भलाई है।
 
In agreement------we all have to be very careful .

"जब देर रात कोई लड़की दुखी, जंगली लोगों को किसी एकांत इलाके में मिलेगी तो वारदात होगी ही"

However I do not understand , instead of doing something against such people , we should rather lock ourselves in.

" एक लड़की के पास जिस तरह से उसकी इज्जत है, उसी तरह से ज्यादा सोना पहनकर/धन लेकर चलने वाले के पास वारदात की वजह उसका सोना/धन है"
I absolutely disagree with your comparison---u r comparing some body's esteem with some commodity like money or gold . This perception has to changed its not some commodity .

I m sure you must have heard about this term : Sterilization , this process kills the disease causing microbes .
We are in desperate need of such process in our society

"यदि ऐर-गैर समय "
What is an odd time ? None
If there is any-----who will take the responsibility that such hideous things won't happen . Agar aisa hota toh , toh I m sure all gals would gladly submit their freedom and locked themselves in for ever .
 
Same thing happened with a swiss diplomat in Delhi couple of years back ....... i think the real problem is chalta hai type attitude after some time of incident
 
Need of the hour is to set an example by giving death sentence for the henious crime. Excuses mentioned are utter non-sense, all we need to change is the mentality. People take it light when it happens to others, but they forget if same attitude continues next can be your turn. A stringent punishment, that too in a given timeframe, a month or so.
Our poor law structure is root cause of all such evils.
 
कुछ दिनो तक हल्ला मचेगा | सब गलिया देंगे ओर धीरे -२ सब भूल जायेंगे | फिर कुछ ऐसा ही होगा ओर फिर से यही रिपीट होगा | जब तक कानून व्यस्था ऐसे घर्णित लोगो को इतनी कड़ी सजा नहीं देती की ऐसे लोगो में दहशत फ़ैल जाये तब तक ये सब कुछ नहीं रुकेगा | किसी की मानसिकता को बदलना तो संभव नहीं है पर कठोर कानून से उस पर अंकुश जरुर लगाया जा सकता है | आज सभी लोग उन कमीनो पर थू -२ कर रहे है ओर इस घटना को बच्चा -२ जानता है चाहे वो कही भी रहता हो इसके बावजूद काल मेरठ में सिटी स्टेशन (रेलवे) पर इसी तरह की घटना को दोहराया गया |

सिटी रेलवे स्टेशन पर ऐसे बेलगाम मनचलों की शिकार युवती बुधवार रात भर परेशान रही, लेकिन उसे कोई शिकायत सुनने वाला भी नहीं मिला,मदद तो दूर की बात है। लखनऊ से चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में बीएड की डिग्री लेने आई एक युवती बुधवार रात में सिटी स्टेशन पर ही रुक गई। रात में उसे अकेले देखकर कई मनचले उसके पीछे लग गए। लड़की ने स्टेशन पर सुरक्षा के लिए जगह तलाशी। लोगों से मदद मांगी, लेकिन सब अपने में मशगूल थे। रेलवे पर तैनात कर्मचारी सब कुछ देखकर भी नजरांदाज करते रहे। युवती से रात भर छीटाकशी की गई, लेकिन उसे कोई सहायता नहीं मिली।



जीआरपी थाना प्रभारी का कहना है कि उनके पास इस तरह की कोई शिकायत नहीं आई, मामला उनके संज्ञान में नहीं है। सवाल है कि जीआरपी आखिर स्टेशन पर कहां थी? युवती के मुताबिक पूरी रात वह परेशान रही, लेकिन जीआरपी या पुलिस कहीं नहीं नजर आई। दिल्ली की वारदात के बाद पूरे देश में इस बात की चर्चा है कि शहरों की पुलिसिंग को कैसे दुरुस्त किया जाए कि हमारे शहर महिलाओं के लिए महफूज हों सकें, लेकिन मेरठ पुलिस तो इस तरफ प्राथमिक कदम उठाती भी नहीं दिखती। रेलवे स्टेशन जैसे जगहों पर भी युवती रात भर मनचलों से परेशान रही और मदद के लिए उसे किसी पुलिसकर्मी के दर्शन तक नहीं हुए।

लानत है ऐसे लोगो पर शायद दिन में वो कमीने भी दिल्ली वाले कमीनो को कोस रहे होंगे ओर रात होते ही ....................................................
 
Last edited:
For crime like this we should follow Islam law.

Law bana diya tou aur jyada problems hongi, jis tarah se kuch ladkiyan dowry case ka galat use karti hai usi tarah iska bi misuse honae lagega


यह दुनिया एक नर्क के समान है। इस दुनिया में सभी लोग सभ्य नहीं हैं, सभी लोग खुश नहीं हैं। जब कोई इंसान बहुत दुखी हो जाता है तो फिर वो दूसरों को भी दुखी देखना चाहता है।


Aur unhe physco kehte hai!!

जिन लोगों के लिए लड़की का साथ पाना एक बहुत बड़ा ख़्वाब है, वे भी तो इस दुनिया में हैं। झुग्गी-झोंपड़ी में रहने वाले, अनपढ़, गरीब, असभ्य, मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों के लिए किसी सुंदर लड़की का साथ पाना एक ख्वाब है। चाहे कितने ही सख्त क़ानून बन जाएं, बलात्कार जैसे अपराध सदियों से होते रहे हैं और आगे भी होते रहेंगे।

apni soch tou badlo duniya bi badal jayegi, waise sundar ladkiyan ameer hi hoti hai kya...rape karwane ni hai rokne hai ..

समझदारी इसी में है कि संभलकर रहा जाए। जब देर रात कोई लड़की दुखी, जंगली लोगों को किसी एकांत इलाके में मिलेगी तो वारदात होगी ही।

Jo ladke aisa sochte hai unke ghar mai bi tou maa behan akelae rehti hongi, un par kyun ni try karte, sunsaan raaste mai mil ne wali private property ni hoti, BTW yeh precaution hai solution ni, whi baat aa gyi naa ladke tou rape karengae ladkiyon ko roklo...wah wah wah


लड़की की ही क्या बात करें। कोई पुरुष भी यदि ऐर-गैर समय बहुत ज्यादा सोना पहनकर चलेगा या बड़ी रकम लेकर चलेगा तो उसके लुटने के अवसर बढ़ जाएंगे। दुखी, जंगली लोगों के लिए वारदात करने की वजह एक लड़की के पास जिस तरह से उसकी इज्जत है, उसी तरह से ज्यादा सोना पहनकर/धन लेकर चलने वाले के पास वारदात की वजह उसका सोना/धन है। संभलकर रहने में ही भलाई है।

Akeli ladki khuli tijori, kaisi soch hai aapki...
 
Another Incident Exhibiting Mental Blocks of our Social Structure.

[FONT=Bhaskar_WEB_Intro_Test]
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[FONT=Bhaskar_WEB_Intro_Test][/FONT]
[FONT=Bhaskar_WEB_Intro_Test]
[h=1]तीन दि*न तक होता रहा बलात्*कार, पंचायत ने लगाई इज्*जत की बोली |[/h]
मुजफ्फरनगर. जि*ले में एक बलात्कार की कीमत लगाने का मामला सामने आया है। एक रेप पीड़ित महिला की इज्जत का सौदा करते हुए उस की अस्मत की कीमत महज डेढ़ लाख रूपये लगाई गई है। पंचायत का अजीबो गरीब फरमान उस समय देखने को मिला जब एक युवती के साथ जबरन बलात्कार करने के बाद आरोपी पक्ष के लोगो ने गांव में पंचायत बुलाकर बलात्कार पीड़ित लड़की की इज्जत की बोली लगा डाली। पीड़ित युवती ने पंचायत के फरमान को ना मानते हुये पुलिस से शिकायत की। नतीजतन मामले को गंभीर मानते हुये पुलिस ने कार्रवाई करते हुये युवती से हुए बलात्कार के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

For Full Story please see the link below:

http://www.bhaskar.com/article/UP-r...hree-days-of-teenager-4120901-PHO.html?C3-UP=


[/FONT]
 
इस पोस्ट को पढने से पहले मैं स्पष्ट कर
देना चाहता हूँ की हमारी बहन जो दिल्ली में
जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है हमारी और
पूरे भारत की दुआएं उसकी रक्षा करे!!
शायद
आज से ज्यादा सही समय इस पोस्ट के लिए
नहीं होगा इसलिए मैं ये पोस्ट डाल रहा हूँ
किसी को इस पोस्ट से दुःख हो तो अग्रिम
क्षमा प्रार्थी हूँ!!
मित्रों आज हमारी बहनों और भाइयों द्वारा हर
राज्य और हर शहर में
जो दिल्ली की घटना को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं
वो तारीफ़ के काबिल हैं और उनका मैं भी समर्थन
करता हूँ !!
पर मेरा एक सवाल ये है की ऐसे प्रदर्शन तब
क्यों नहीं होते जब फिल्मों और विज्ञापनों में
महिलाओं को व्यावसायिक लाभ की प्राप्ति के
लिए भोग की वस्तु के रूप में
दिखाया जाता है ???
ऐसे प्रदर्शन तब क्यों नहीं होते हैं जब राष्ट्रीय
महिला आयोग की अध्यक्षा कहती है
की महिलाओं को सेक्सी कहे जाने
का बुरा नहीं मानना चाहिए ???
ऐसे प्रदर्शन तब क्यों नहीं होते जब इमरान
हाश्मी की चुम्मा-चाटी वाली फिल्मो की कमाई से
अधिभूत होकर भट्ट कैंप सनी लेओने को भारत में
लाकर महिलाओं के सम्मान में वृद्धि करता है ???
ऐसे प्रदर्शन तब क्यों नहीं होते जब
डर्टी पिक्चर जैसी फिल्मो को राष्ट्रीय
पुरस्कार दिया जाता है ???
प्रदर्शन तो दूर कहीं विरोध भी नज़र
नहीं आता है तो क्या ये हमारी मौन
सहमती नहीं कहलाएगी???
मुझे तो ये प्रदर्शन देख कर ऐसा लग रहा है
की हड्डी टूटी हुई है और हम पैन किलर(दर्द
निवारक औषधि) से काम चला रहे हैं !!
 
जो ये घटना दिल्ली में घटी है ये तो बहुत ही दर्दनाक है। उस बस में जो हुआ, उसके बारे में सोचकर ही रूह थर्रा जाती है। यह उन आरोपियों ने बहुत ही बुरा किया कि केवल बलात्कार ही नहीं किया, बल्कि लोहे की रॉड से उस लड़की के अंदरूनी अंगों को भी बहुत ही ज्यादा नुकसान पहुंचाया और दोनों को मारने का प्रयास किया। इस घटना के बाद बलात्कारियों को सख्त से सख्त सजा देने की बात कही जा रही है। जो 6 आरोपी हैं, उन्हें बेशक कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। यदि इन आरोपियों के अंग काटकर इन्हें छोड़ दिया जाता है तो फिर तो ये अपने आस-पास के लोगों के लिए और भी दुखदायी सिद्ध होंगे, क्योंकि दुखी आदमी दूसरों को भी दुखी करने का प्रयास करता है। इन आरोपियों को अगर सार्वजनिक रूप से फांसी पर चढ़ा दिया जाता है तो वो भी कम है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या फिर क्या बलात्कार नहीं होंगे?
इन बलात्कारियों को कड़ी से कड़ी सजा देने पर बलात्कार रुकें या न रुकें, लेकिन एक बात तो तय है कि जिस तरह के रास्ते पर वर्तमान में अधिकतर लड़के-लड़कियां चल रहे हैं, उससे लड़कियों पर बलात्कार की घटनाएं जरूर बढ़ेंगी। पार्कों में, सिनेमा हॉल में, अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लड़के-लड़कियों को अश्लील हरकतें करते साफ़ देखा जा सकता है। ठीक है कुछ लोग ऐसा सोचते हैं कि लड़के-लड़की में मित्रता बुरी बात नहीं है, लेकिन सार्वजनिक रूप से अश्लील हरकतें करना कहां तक जायज है। यह जो पीड़ित लड़की है, यह भी अपने दोस्त के साथ फिल्म देखकर आई थी और जब ये दोनों उस बस में चढ़े तो आरोपियों में से एक ने इनसे यही पूछा था कि इतनी देर रात तुम दोनों क्या कर रहे हो?
अगर बलात्कार की घटनाओं पर अंकुश लगाना है तो सार्वजनिक रूप से हो रही बेशर्मी को सबसे पहले रोकना होगा।
 
Kahin suna tha " When a gal says NO that means NO " . Let a gal choose her company .

" यह भी अपने दोस्त के साथ फिल्म देखकर आई थी" -------

Think again n read again , you have again behaved like any other A B c d ------blamed the gal as usual .

How hard is to understand -whats the assurance , if we do not go out n stay locked such crimes won't happen .

Humare yahan kahawat hai " Jismei jitni samajh hoti hai woh utni hi bat bolta hai " .

"अगर बलात्कार की घटनाओं पर अंकुश लगाना है तो सार्वजनिक रूप से हो रही बेशर्मी को सबसे पहले रोकना होगा।"
I disagree , CHANGE THE ATTITUDE has to be the first step

No more replies on this thread from my side
 
rekhaji aapse kisne kaha aap reply dijiye aap samaaj ki jimmeddar sadsayaa hain to aapko samaaj ke halaat ke baare me sochna padega... baten bhi karni padegi... sachh hamesha kadwa hota hain aisi ghatnaon ka virodh bhi karna padega.
bhartiya sanskriti aur sabhyata ke hisaab se ladke ladkiyan chale to aisi ghatnayen kabhi nahin hogi...
 
bharat ki yuvaa pidhi imraan hasmi ke kissing seen aur sunny liyon ki adaon ki diwani hain yadi itani diwangi jis din se iss yuvaa pidhi ne samaaj sudhaar me laga di to uss din se samaaj hi nahin desh bhar har kukrtaya band ho jayenge....
 
ऐसे हज़ारों ब्लातकार होते हैं कोई केस सुर्खियों मे आ
जाता है और बाकी सारे गुमनामी मे खो जाते हैं. लोग
जितना जोश धारना प्रदर्शन मे दिखा रहे हैं
उसका आधा भी उस वक़्त दिखा दे जब किसी लड़की और
किसी महिला की इज़्ज़त पर हाथ डाला जाता है. एक
बदमाश किसी लड़की या महिला को सरेआम परेशन कर
रहा होता है और 100-200 लोग खड़े होके तमाशा देख रहे
होते हैं. घटना के बाद जागने से अच्छा है की घटना के वक़्त
जागो और पुलिस के आने से पहले ही फैसला कर
दो ना कोर्ट ना कचेहरी. इतना हो हल्ला होने के बाद
भी कल दिल्ली मे विदेशी लड़की से रेप हो गया अब
वो लड़की अपने देश जाएगी और बोलेगी मैं महान देश भारत
गयी थी वहा मेरा ब्लातकार किया गया. बड़े महान है
भारतवासी ब्लातकार करने मे.
 
Aisi ghatnao ko rokne ka ek aakhri rasta hai.........UN LADKO KO SADAK PER PUBLIC K BICH ME KHADA KAR K GOLI SE UDDA DO.....
 
देश के गृह मंत्री अभी प्रेस कोंफ्रेंस में कह रहे थे
मेरी भी तिन लड़कियां हैं और मै चिंतित रहता हूँ
कहीं मेरी लड़की के साथ भी ऐसा नहीं होजाये,!!
मित्रो ऐसा कह कर देश का गृह मंत्री आप को लाचार
नहीं लग रहा?? देश ऐसे गृह मंत्री से
क्या सुरक्षा की उम्मीद लगा पायेगा?
 
बच्चों पर लाठियां , पानी की बोछार , आंसू गैस के गोले ...
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है ...देखना है जोर
कितना बाजुए कातिल में है ...
वाह रे कांग्रेस .... ताकत भी दिखाई तो निर्दोष और
निहत्ते बच्चों पर ...
वक्त आने पर दिखा दें तुझे ऐ आसमान ...
धिक्कार है इस सरकार पर ...
 
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