ravindersura
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हरियाणा मे जाटों की आरक्षण की मांग कैबिनेट ने स्वीकार कर ली हैं इसके लिए हुड्डा जी का धन्यवाद दिया हैं और आंदोलन खापों का था उन लोगो ने भी हुड्डा जी से मुलाक़ात के बाद आंदोलन वापिस ले लिया | कल जो मीटिंग बुलाई हैं वह केंद्र की मांग पर चर्चा के लिए बुलाई हैं | सारे ब्यान यही हैं एक बार फिर पढ़ लो | आप जैसा पढ़ा लिखा भी अगर कनफ्यूज हैं तो फिर कोई इलाज भी नहीं | और जो लोग कन्फ़्यूजन की बात कर रहे हैं उनकी वो जाने किस बात पर कनफ्यूज हैं , जबकि हर समझदार आदमी को पता हैं की जो हमारी मांग हैं वह कुछ आगे ही बढ़ी हैं और जब हमारी मांग की सुनवाई हो रही हैं तो अड़ियल रवैया क्यू अपनाए | काम काम के तरीके से होता हैं खामखा लोग मरवाने जरूरी हैं ?
वैसे यह आंदोलन तो खापों की तरफ से था जो की उन्होने मुख्यमंत्री से बातचीत के बाद वापिस ले लिया परंतु मुझे यह समझ नहीं आया की दूसरी संघर्ष समिति के धर्मपाल छोत ने मीटिंग के बाद यह बात मीडिया के सामने क्यू नहीं कही की हम सहमत नहीं हैं ? अगले दिन उनको ध्यान आई की वो इस फैसले से सहमत नहीं हैं | वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दु की ऐसी हरकतों के कारण ही खाप ने छोत से लिखित मे लिया था की आगे से आंदोलन खाप चलाएंगी | ऐसे लोग सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए समाज को कनफ्यूज कर रहे हैं | और यह बेल्म गेम नहीं जो हक़ीक़त हैं वहीं बताई जा रही हैं |
रजनीश जी आप एक बात का जवाब दे दो की आंदोलन हर बार हरियाणा की तरफ से क्यों शुरुआत होता हैं जबकि यू पी की मांग केंद्र से वह क्यों कुछ नहीं होता ? अब भी हरियाणा की खापों की तरफ से आंदोलन किया गया था , हरियाणा मे मांग पूरी होने की वजह से वापिस ले लिया पर उत्तर प्रदेश मे क्या ??? दो साल मे तीन बार आंदोलन हो लिया , पहला आंदोलन हरियाणा यू पी के जाटों ने मिलके शुरू किया था परंतु एक बात का जवाब दे दो की यू पी वाले बीच मे ही क्यों उठ गए थे ? दूसरी बार की शुरुआत भी हरियाणा से आर-पार की बोलके शुरू किया जिसमे एक लड़का शहीद हुआ जबकि यू पी मे कुछ भी नहीं किया , बड़ी बड़ी बाते की थी की हरियाणा मे कुछ हुआ तो देश जाम हो जाएगा | तीसरी बार की शुरुआत भी हरियाणा से ही हुई इस बार आंदोलन की तारीख 16 की थी परंतु सरकार ने 12 को ही आयोग की सिफ़ारिश मान ली इसलिए आंदोलन वापिस ले लिया परंतु आप लोगो ने क्या किया ????
थाम कर लो आंदोलन कौन मना करता हैं ????
वैसे यह आंदोलन तो खापों की तरफ से था जो की उन्होने मुख्यमंत्री से बातचीत के बाद वापिस ले लिया परंतु मुझे यह समझ नहीं आया की दूसरी संघर्ष समिति के धर्मपाल छोत ने मीटिंग के बाद यह बात मीडिया के सामने क्यू नहीं कही की हम सहमत नहीं हैं ? अगले दिन उनको ध्यान आई की वो इस फैसले से सहमत नहीं हैं | वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दु की ऐसी हरकतों के कारण ही खाप ने छोत से लिखित मे लिया था की आगे से आंदोलन खाप चलाएंगी | ऐसे लोग सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए समाज को कनफ्यूज कर रहे हैं | और यह बेल्म गेम नहीं जो हक़ीक़त हैं वहीं बताई जा रही हैं |
रजनीश जी आप एक बात का जवाब दे दो की आंदोलन हर बार हरियाणा की तरफ से क्यों शुरुआत होता हैं जबकि यू पी की मांग केंद्र से वह क्यों कुछ नहीं होता ? अब भी हरियाणा की खापों की तरफ से आंदोलन किया गया था , हरियाणा मे मांग पूरी होने की वजह से वापिस ले लिया पर उत्तर प्रदेश मे क्या ??? दो साल मे तीन बार आंदोलन हो लिया , पहला आंदोलन हरियाणा यू पी के जाटों ने मिलके शुरू किया था परंतु एक बात का जवाब दे दो की यू पी वाले बीच मे ही क्यों उठ गए थे ? दूसरी बार की शुरुआत भी हरियाणा से आर-पार की बोलके शुरू किया जिसमे एक लड़का शहीद हुआ जबकि यू पी मे कुछ भी नहीं किया , बड़ी बड़ी बाते की थी की हरियाणा मे कुछ हुआ तो देश जाम हो जाएगा | तीसरी बार की शुरुआत भी हरियाणा से ही हुई इस बार आंदोलन की तारीख 16 की थी परंतु सरकार ने 12 को ही आयोग की सिफ़ारिश मान ली इसलिए आंदोलन वापिस ले लिया परंतु आप लोगो ने क्या किया ????
थाम कर लो आंदोलन कौन मना करता हैं ????
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