Shayri (Continued)

न हारी है मोहब्बत, न थकी है दुनिया !
हवा चल रही है , दिया जल रहा है !!
 
Guys, tham toh ghane serious sher-shar maran lag ge ... gimme some "sadak-chaap" fun sher the kinda one sees behind auto and trucks :p

Tinku, pinku te tinku di gaddi :p

hans mat pagli, pyar ho jayega :p

Jat di gaddi jandi hai chalanga mardi :p

etc etc

Funniest ever I read; "Dabar ki dawayee leti jaa, ja ghar pe tera pati beemar mile"

RK^2
 
"बिना लिबास के आये थे इस जहाँ में
एक कफ़न की ख़ातिर इतना सफ़र करना पड़ा"
 
न हारी है मोहब्बत, न थकी है दुनिया !
हवा चल रही है , दिया जल रहा है !!

Kadian Saheb! Excellent!
बहुत दिन बाद Exclusive चीज हाथ लगी है।

"हुए इस कदर मुहज़्ज़ब, कभी घर का मुँह न देखा
कटी उम्र होटलों में, मरे अस्पताल जाकर"


मुहज्जब = सभ्य, शिष्ट, Civilized
 
भैंस अगर हाथल जो जाए उसे बेचना बेहतर
जिस ताले की चाबी खो जाए उसे तोडना अच्छा
ना साकी ना शबाब, ना पाजेब की झंकार जहां,
उस महफ़िल को तो 'मासूम' छोड़ना अच्छा
 
हो अङिग विश्वास तो सम्भव जहाँ हो जायेगा।
हो निराशा के तिमिर तो भोर कब हो पायेगा।
एक दीपक तुम जलाओ एक दीपक हम जलाएँ
देखते ही देखते रोशन जहाँ हो जायेगा।। ।
 
भैंस अगर हाथल जो जाए उसे बेचना बेहतर
जिस ताले की चाबी खो जाए उसे तोडना अच्छा
ना साकी ना शबाब, ना पाजेब की झंकार जहां,
उस महफ़िल को तो 'मासूम' छोड़ना अच्छा

Superb... Chaa gaye guru.... wah wah wah kiya bat hai...
Duniya ka sabse pehla sher jisma bhens ka kitna khoobsoorta istemaal kiyaa hai... wah wah... love it all the way...
pehlee line sunke to Sahir Ludhyanvi bhi phoosar phoosar karta hoga ki ye kiya kah gayee massom sahib...
So Sahir ki aur ek Jat ki.....wah...wah.. Love it.

RK^2
 
Last edited:
बेशक थोड़ी सी लंबी है, मगर ये नज़्म मुझे बहुत अच्छी लगी। Unfortunately इसके Writer का नाम भी मैं पता नहीं कर पाया। मगर हम इसका लुत्फ जरूर उठा सकते हैं। पेश है. . . . .

"उठके कपडे बदल, बाहर निकल
जो हुआ सो हुआ
रात के बाद दिन, आज के बाद कल
जो हुआ सो हुआ

जब तलक सांस है, भूख है प्यास है
ये ही इतिहास है
रख काँधे पै हल, खेत की और चल
जो हुआ सो हुआ

खून से तर-ब-तर करके हर रहगुजर
थक चुके जानवर
लकड़ियों की तरह, फिर से चूल्हे में जल
जो हुआ सो हुआ

जो मरा क्यों मरा, जो जला क्यों जला
जो लुटा क्यों लुटा
मुद्दतों से है गुम, इन सवालों के हल
जो हुआ सो हुआ

मंदिरों में भजन, मस्जिदों में अजां
आदमी है कहाँ????????????
आदमी के लिए एक ताजा गजल
जो हुआ सो हुआ"
 
भैंस अगर हाथल जो जाए उसे बेचना बेहतर
जिस ताले की चाबी खो जाए उसे तोडना अच्छा
ना साकी ना शबाब, ना पाजेब की झंकार जहां,
उस महफ़िल को तो 'मासूम' छोड़ना अच्छा


Singh Saheb!

"न तुम होश में हो, न हम होश में हैं
चलो मयकदे में , वहीं बात होगी"
 

Singh Saheb!

"न तुम होश में हो, न हम होश में हैं
चलो मयकदे में , वहीं बात होगी"

ठीक फरमाया आपने प्रदीप साहब, महकदे से बेहतर जगह गुफ्तगू के लिए हो ही नहीं सकती क्योंकि:

जब भी ज़िक्र हुआ ज़न्नत का तो याद महकदा आया,
क्यों ज़हमत करें सफ़र की जब ज़न्नत धरती पर आया

हम भी होंगे मदहोश वहां, ना उन्हें होश कोई होगा,
हसीन बेखुदी के आलम में हर लम्हा खामोश रहेगा

शोख हसीना के नाज़ुक हाथों से प्याला अपनी और बढेगा
साकी होगा चारागर तो 'मासूम' दवा का दुगना नशा चढ़ेगा

फिरदोश साहब ने भी महकदे की काफी तारीफ की है :

कौन ज़न्नत तक मुसाफ़त तय करे
महकदा फिरदोश के नज़दीक है
 
ठीक फरमाया आपने प्रदीप साहब, महकदे से बेहतर जगह गुफ्तगू के लिए हो ही नहीं सकती क्योंकि:

जब भी ज़िक्र हुआ ज़न्नत का तो याद महकदा आया,
क्यों ज़हमत करें सफ़र की जब ज़न्नत धरती पर आया

हम भी होंगे मदहोश वहां, ना उन्हें होश कोई होगा,
हसीन बेखुदी के आलम में हर लम्हा खामोश रहेगा

शोख हसीना के नाज़ुक हाथों से प्याला अपनी और बढेगा
साकी होगा चारागर तो 'मासूम' दवा का दुगना नशा चढ़ेगा

फिरदोश साहब ने भी महकदे की काफी तारीफ की है :

कौन ज़न्नत तक मुसाफ़त तय करे
महकदा फिरदोश के नज़दीक है

Beautiful !!!!!
 
बेशक थोड़ी सी लंबी है, मगर ये नज़्म मुझे बहुत अच्छी लगी। Unfortunately इसके Writer का नाम भी मैं पता नहीं कर पाया। मगर हम इसका लुत्फ जरूर उठा सकते हैं। पेश है. . . . .

"उठके कपडे बदल, बाहर निकल
जो हुआ सो हुआ
रात के बाद दिन, आज के बाद कल
जो हुआ सो हुआ

जब तलक सांस है, भूख है प्यास है
ये ही इतिहास है
रख काँधे पै हल, खेत की और चल
जो हुआ सो हुआ

खून से तर-ब-तर करके हर रहगुजर
थक चुके जानवर
लकड़ियों की तरह, फिर से चूल्हे में जल
जो हुआ सो हुआ

जो मरा क्यों मरा, जो जला क्यों जला
जो लुटा क्यों लुटा
मुद्दतों से है गुम, इन सवालों के हल
जो हुआ सो हुआ

मंदिरों में भजन, मस्जिदों में अजां
आदमी है कहाँ????????????
आदमी के लिए एक ताजा गजल
जो हुआ सो हुआ"


AAdmi Hai Kahan?

Kya Baat Hai; Bahoot Khub.
 
बेशक थोड़ी सी लंबी है, मगर ये नज़्म मुझे बहुत अच्छी लगी। unfortunately इसके writer का नाम भी मैं पता नहीं कर पाया। मगर हम इसका लुत्फ जरूर उठा सकते हैं। पेश है. . . . .
"उठके कपडे बदल, बाहर निकल
जो हुआ सो हुआ
रात के बाद दिन, आज के बाद कल
जो हुआ सो हुआ "

इस नज्म के लेखक है निदा फाजली
 
मुझे मालूम है गुरबत अभी बनने नहीं देगी
बना के रोज़ लेकिन घर का नक्शा देखता हूँ |
 
इलाही कैसी-कैसी सूरतें तूने बनाई हैं,
हर सूरत कलेजे से लगा लेने के क़ाबिल है।



ये दिल लेते ही शीशे की तरह पत्थर पे दे मारा,
मैं कहता रह गया, ज़ालिम मेरा दिल है, मेरा दिल है ।


हज़ारों दिल मसल कर पाँवों से, झुँझला के फ़रमाया,
लो पहचानो, तुम्हारा इन दिलों में कौन सा दिल है ।
 
Last edited:
जिन्हें मंजिल पर जाना है वो शिकवे नहीं करते !
जो शिकवो में उलझे हैं वो कभी पहुंचा नहीं करते !!
 
जीवन में कभी ऐसा समय भी आएगा,
आपका चाहने वाला ही आपको रुलाएगा,
फिर भी आप उसी से अटूट प्रेम करना,
क्योंकि वो अकेले में आपसे भी
अधिक आँसू बहायेगा।
 
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