Communal Tension in Muzaffarnagar, Shamli of west UP

http://ibnlive.in.com/news/pakistan...arnagar-riot-victims-rahul/430263-80-260.html

Raul-gandhi apne pair par hi kulhadi maar raha hai..rahul ganhdi ne kaha tha ki ISI riot victims ko target kar rahi hai ..terrorist bananae ke liye


Saare MZN ke muslims naarza ho gaye hai gandhi se..gaali bak rahe hai usee.

And when Rahul Gandhi will answer these questions

Who told him about this ? IB or ISI ?

Was there any action taken in this regard if yes what ?

Why ISI can only recruit muslims ? Why they can't woo Hindus/Jats even they are affected by riots ?

What action govt has taken against those muslims youth who are in contact with ISI ?
 
So bhai basically, one must support the leader who caters to the Jat issues and rises to the occasion, waqt pe jo saath de aur kaam aye, chahe wo non-jat leader ho, Na ki us leader ke picchelag jao jo sirf janam se jat hai lekin karam jaton ke liye nhi?

bhai mere, main maanta hoon ki main UP mei nahi gaya, aur ho sakta hai reality bilkul different ho jo. Wo to West UP ke log hi jaante hain. Merko bhi bahut bura lagta hai jab main ye sab sunta hoon ke jaaton ke saath bura hua hai. Merko sirf ek baat ye problem hai. Aur wo ye hai ki, isme kuch log rajiniti kar rahe hain. Apne leader, Ajit Singh ki kaami ki wagah se kuch aur log iska fayda utha rahe hain.

Merko buss ek baat samagh nahi aati, kya jaaton ne har jagah doosron ke liye marne ka theka le rakha hai? Kuch BJP ke leader jaise ki Sangeet Som, jo ki ek dum wahiyaat kisam ka aadmi hai, Jaaton ke panchayats ko highjack karke, Jaaton ko uksa ke, apni Rajniti chamka rahe hain. Kaafi fake baatein banayi jaati hain. Ye kuch aadmi pehle to jaaton ko bhadkate hain aur phir Jaaton ko aage kar dete hain marne ke liye. Kya humne desh ke liye marne ka jayada theka le rakha hai kya. Jaat ko apni energy mere hisab se valuable kaamo mei lagani chahiye, na ki in dogle leaders ke liye.
 
Oh yeah bhai, our beloved future projected PM just puked that the govt needs to act with the speed of the escape velocity of the Jupiter (lolz ... wonder what kind of jargon is this, Jupiter isn't escaping the solar system) because ISI agents are courting the Muslims in MZN ... lolz ... talk about communalizing the riots. But seems no one took note of it as it came from projected PM Pappu ji the cry baby (mera khanDan mar gya, gimme votes, oh yeah baby Owl, if you can't talk at least be MuteMaun SInghLENCE ... comedy circus nhi hai ye ... hurrrr hurrr :p

I want an opinion of the future projected PM of India on importants issues like riots and economy, where is stand and what different would he have done, isnt it a fair expectation?
I have heard nothing yet.
 
फेरीवाले को गोलियों से भून डाला
दून हाईवे के किनारे मिला शव
छपार। फेरी लगाकर दाल बेचने वाले एक व्यापारी की दिल्ली-दून हाईवे पर गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने हादसा बताते हुए परिजनों को समझा-बुझाकर शांत कर दिया। कोई कार्रवाई न करने के अनुरोध पर घर ले जाकर परिजनों ने जब शव को नहलाया, तो गोलियों के दो निशान मिले। सूचना पर पुलिस दोबारा गांव पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। मृतक के बेटे ने अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
छपार निवासी यामीन पुत्र मुनीर (58) रेहडे़ पर चावल-दाल बेचता था। गुरुवार को भी वह सुबह फेरी लगाने के लिए बझेड़ी गांव गया था, लेकिन वापस नहीं लौटा। देर रात बढेड़ी बाईपास के पास दिल्ली-दून हाईवे पर सड़क किनारे यामीन का शव पड़ा मिला। सूचना पर पुलिस पहुंची और परिजनों को हादसे में होने की आशंका जताई। हादसे में मौत मानकर परिजनों ने भी पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया और बिना कोई कार्रवाई किए शव को घर ले गए। सुपुर्द-ए-खाक करने से पहले परिजन शव को नहला रहे थे, इसी दौरान परिवार के एक चिकित्सक की नजर मृतक की छाती पर पड़ी। गौर से देखा तो पता लगा कि गोली लगी हुई है, जो सीना चीरकर पीछे की तरफ से निकली हुई थी। दूसरी गोली चेहरे पर मारी गई थी। यह देकर परिजन आगबबूला हो गए और उन्होंने पुलिस पर हत्या को दुर्घटना में दर्शाने का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को समझा-बुझाकर शांत किया और शव का पोस्टमार्टम कराया। बाद में शव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया। शाम को गमगीन माहौल में शव को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। इस संबंध में मृतक के बेटे भूरे ने अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
गहराया हत्या का राज
मृतक की जेब में दिनभर की बिक्री के पैसे और अन्य सामान ज्यों का त्यों मिला है। रेहड़े में भी खरोंच तक नहीं थी। बरामद सामान से जाहिर है कि हत्या लूट के इरादे से नहीं की गई। घटना ‘साइलेंट वार’ से भी जोड़कर देखी जा रही है। परिजनों ने रंजिश से इंकार किया है। एसओ छपार राकेश शर्मा का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।
 
दंगे में घायल वकील ने दम तोड़ा
मेरठ रोड पर लगी थी गोली, गमगीन माहौल में सुपुर्द-ए-खाक
मुजफ्फरनगर। दंगे के पहले दिन मेरठ रोड पर बलवाईयों की गोली से घायल हुए अधिवक्ता इकबाल अहमद सिद्दीकी की मौत हो गई। शहर में शोक छा गया। देर शाम अधिवक्ता को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने के लिए जनप्रतिनिधि, पुलिस और प्रशासन के अधिकारी पहुंचे।
सात सितंबर की शाम को सब्जी मंडी निवासी अधिवक्ता इकबाल अहमद सिद्दीकी मेरठ रोड स्थित पेट्रोल पंप के पास गोली मार दी गई थी। गंभीर घायल इकबाल को मेरठ रेफर कर दिया गया था। 47 दिन तक जिंदगी और मौत के बीच जूझते अधिवक्ता ने बृहस्पतिवार को मेरठ में दम तोड़ दिया। शहर में सूचना मिलते ही गम का माहौल बन गया। शव को उनके सब्जी मंडी स्थित आवास पर लाया गया। पीड़ित परिवार ने पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया था, लेकिन जिला बार संघ के पदाधिकारियों के हस्तक्षेप से गमजदा परिवार सहमत हुआ। एडीएम प्रशासन इंद्रमणि त्रिपाठी, एसपी सिटी आदि अधिकारी पहुंचे। पूर्व सांसद अमीर आलम, विधायक नवाजिश आलम, सपा जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी, काजी जहीर आलम और जिला बार संघ अध्यक्ष ठाकुर अनूप सिंह ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया।
पोस्टमार्टम के बाद देर शाम अधिवक्ता के शव को गमगीन माहौल में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।
प्रत्येक दंगा पीड़ित की तरह मुआवजा और पीड़ित परिवार के सदस्य को नौकरी दी जाएगी। कौशलराज शर्मा, डीएम
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दंगे में मारे गए अधिवक्ता के जनाजे में शामिल लोग।
 
दंगे का दहशत कनेक्*शन!
हालिया वारदातें कर रही हैं इस ओर इशारा
मुजफ्फरनगर(ब्यूरो)। दंगा पीड़ितों के पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से कनेक्शन पर बखेड़ा खड़ा हो गया है। जिले में भड़की हिंसा के सूत्रधार कहीं दहशतगर्द तो नहीं थे। हाल के दिनों में हुईं हत्या की कई वारदातें भी इस ओर इशारा करती हैं। मुकंदपुर में बेगुनाह किसान की हत्या ‘तालिबानी’ तरीके से की गई।
राहत शिविरों में कुछ युवकों से आईएसआई के तार जुड़ने के खुलासे से राज्य सरकार भले ही इंकार करे, लेकिन कुछ तो है, जिसके चलते राहुल गांधी ने यह बात कही। कवाल प्रकरण के बाद जिस तरह नफरत का जहर फैला, इसका अनुमान किसी को नहीं था। सात सितंबर की नंगला मंदौड़ महापंचायत के बाद एक ही वक्त और एक ही तरीके से हुए हमलों पर पहले से ही सवाल खड़े हैं। दंगों की जांच कर रहे सहाय आयोग को कई लोगों ने लिखित बयानों में यह इशारा किया है कि जौली, पुरबालियान, मुझेड़ा में हुए हमलों की जांच की जाए तो कुछ और ही सच सामने आएगा। हिंसाग्रस्त गांव कुटबा, लिसाढ़, लांक और बहावड़ी के लोग पहले ही बयान दे चुके हैं कि हमलावर बाहरी और नकाबपोश थे। क्या हमलों को ऑपरेट किया गया था? उन्माद फैलाने के सूत्रधार कोई और तो नहीं थे? हालांकि इन बयानों को तवज्जो नहीं दी गई। दंगे के बाद भी सांप्रदायिकता की रंजिशों को हवा दी गई। साइलेंट वार होते रहे, बेकसूरों की जानें जाती रहीं।
पहले रतनपुरी में कंपाउंडर की पहचान देखकर हत्या की गई। इसके बाद तितावी शुगर मिल के सामने भी इसी तरीके से वारदात की गई।
तीन दिन पहले मुकुंदपुर गांव में खेत पर गए किसान बोहरम की निर्दयता से हत्या की गई। तालिबानी तरीके से मुंह और हाथ बांधकर गर्दन काटी गई। बोहरम की किसी से कोई रंजिश नहीं थी। प्रशासन भी इसे सांप्रदायिक हिंसा में मौत घोषित कर चुका है।
अत्याधुनिक हथियार से हुई थी फायरिंग
मामले की जांच कर रहे आयोग को कई चश्मदीदों ने यह जानकारी दी कि सात सितंबर को जौली गंगनहर हमले में ऐसा हथियार था, जो अंधाधुंध गोलियां बरसा रहा था। बसेड़ा, भोकरहेड़ी और रहमतपुर के पीड़ितों ने भी अपने बयानों में यह बात उठाई है। बताते चलें कि 50 राउंड फायरिंग कर पुलिस ने उन्मादियों को खदेड़ा था। इस हमले में दोनों तरफ से छह लोग मारे गए थे।
 
What i think the problems of Jats of Muzzafranagr,Shamli and baghpat and surrounding area is very citical there is 50:50 percent population of Hindus and Muslim in which there is only 15to 30 percent population of Jats in this area and they have to remain united with all other hindus because in the coming years muslim population the upper western uttar pradesh will definetly going to increase which will increase the tension in the region.All other jats of Western Uttar Pradesh like jats oif Mathura,Aligarh,hathras and Agra should also support them.

I am also asking support from the Jats of Haryana,Rajasthan,Punjab and Delhi to support Jat and Hindu brothers of Muzzafranagr,Shamli,baghpat and surrounding area
 
Almost Each and every village of jats in M.nagar, shamli, baghpat is doing this. No diwlai, bhayya-doz for jat this time.. sad!!

निज प्रतिनिधि, कांधला : दंगों में शासन-प्रशासन की एकपक्षीय कार्रवाई के विरोध में भभीसा में आयोजित पंचायत में ग्रामीणों ने दीपावली पर आतिशबाजी न कर केवल पांच दीपक जलाने का निर्णय लिया। 1कवाल कांड के बाद सांप्रदायिक दंगों में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए क्षेत्र के गांव भभीसा में रविवार को पंचायत आयोजित की गई। मृतकों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया। दंगे में हुई एकतरफा कार्रवाई के विरोध में जाट बाहुल्य गांवों में जबरदस्त आक्रोश है। पंचायत में ग्राम प्रधान सुरेशपाल ने कहा कि दंगों के बाद भी शासन और प्रशासन की एकतरफा कार्रवाई बंद नहीं हुई है। फर्जी रिपोर्ट लिखवा कर नौजवानों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। गिरफ्तारी व जेल जाने के भय के कारण नौजवान लड़के घर छोड़कर इधर-उधर छिप रहे हैं। पंचायत में फैसला लिया कि दीपावली पर शासन व प्रशासन की गलत नीतियों के विरोध में गांव में आतिशबाजी नहीं होगी। सभी घरों में पांच दीपक ही जलाए जाएंगे। पंचायत में कृष्णपाल, पिंटू, प्रेमपाल, हरपाल, मुकेश, बलबीर, पूर्व प्रधान साहब सिंह, सतबीर, शीतल सिंह, बाबा लहरी आदि मौजूद रहे।निज प्रतिनिधि, कांधला : दंगों में शासन-प्रशासन की एकपक्षीय कार्रवाई के विरोध में भभीसा में आयोजित पंचायत में ग्रामीणों ने दीपावली पर आतिशबाजी न कर केवल पांच दीपक जलाने का निर्णय लिया।
 
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One more killed..muslism gangs are attacking now and then...goverment is with them..hindus are really afraid now..

जागरण कार्यालय, शामली : मुजफ्फरनगर के बहावड़ी गांव के जंगल में गोली मारकर हुई शामली के अमन की हत्या के बाद उसके शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। बवाल की आशंका के डर से श्मशान घाट में भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात रही। पीड़ित परिजनों ने हत्यारोपियों को पकड़ने की मांग की। 1शनिवार को पंसारियान ब्लॉक रोड निवासी ढेवा जाति के दो युवक अमन व बबलू रेहड़े में क्रॉकरी का सामान लेकर गांवों में बेचने गए थे। दोपहर बाद लौटते वक्त बहावड़ी गांव के निकट जंगल में खेतों से निकलकर आए नकाबपोश बदमाशों ने गोली मारकर अमन को मौत के घाट उतार दिया, जबकि बबलू बाल-बाल बच गया था। हत्या के बाद पीड़ित परिजनों में आक्रोश फैल गया था और उन्होंने शहर के गुरुद्वारा तिराहे पर जाम लगा दिया। 1बड़ी मुश्किल से पुलिस ने मुआवजे का आश्वासन देकर पीड़ितों को शांत किया था। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। रविवार दोपहर को पोस्टमार्टम के बाद शव मोहल्ले में लाया गया और अंतिम संस्कार किया गया। बवाल की आशंका के चलते मौके पर भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात रही। पीड़ित परिजनों ने पुलिस से हत्यारोपियों को शीघ्र पकड़ने की मांग की। कोतवाली प्रभारी आरएन सिंह यादव ने बताया कि हत्यारोपियों की तलाश में पुलिस टीम को लगाया गया है और जल्द ही इसका खुलासा कर दिया
 
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[TD]Only 2-3 village had communal tension in the below list ..but muslims of many village have taken shelter..getting free food , money for marrying off tehir daugther, many on giving birth of baby child etc...few of them set their house ablaze themselves....few took away their assets with them and declared they were plundered...in laanc village, one killed his own daugther and threw her in mosque to get 10 lac of compensation..police later busted the case when villagers protested....and the one who wants to go back to their villages..madarsas peopel are forcing them to stay back..because madarasas are getting good aid from goverment..from many muslims organization and even from foreign..... khana, paisa, hathiyaars abhi kuch mil raha hai...kaam kuch hai nahi..ab yeh log gang banakar jagah jagah logo ko maar rahe hai... hindus are living in fera now..ek naya kashmeer banayegi gov. yaha

5 लाख में जमीन खरीदें या घर बनाएं

6सरकारी इमदाद को छलावा बता रहे दंगा पीड़ित16बोले-पांच लाख रुपये कम

जानसठ : सपा सरकार की दंगा पीड़ित के 1800 परिवारों को पांच लाख देने की घोषणा से क्षेत्र के लोगों में उबाल है। गोवर्धन पूजा के संयोजक विरेंद्र सिंह का तो यहां तक कहना है कि ये एक और दंगे की नींव रखी गई है।1सपा सरकार की 1800 परिवारों का पांच-पांच लाख रुपये देने की घोषणा से क्षेत्र के लोगों में रोष बन गया है। लोगों का कहना है कि पैसे का लालच क्षेत्र में एक और दंगा होने के कारण बन गए है। विरेंद्र सिंह का कहना था कि जिन क्षेत्रों में दंगा नहीं हुआ है इस बार पैसे के लालच में उस क्षेत्रों में भी दंगा होना निश्चित हो गया है। सरकार ने बिना सर्वे कराए 1800 परिवारों को इतनी धनराशि देने से सपा सरकार के मुस्लिम परस्त होने का सबूत मिल गया है। सरकार पर जौली कांड में फूंके ट्रैक्टरों को नए देने के लिए तो पैसा नहीं है फिर ये एक अरब रुपए कहां से आए। सरकार पर किसानों के बकाया पैसे देने के लिए नहीं है, पर खैरात बांटने के लिए पैसा ही पैसा है। सरकार मुस्लिमों की वोट के चक्कर में सरकारी धन का दुरूपयोग कर रही है। क्षेत्र के सतीश खटीक, दिनेश भटनागर, चंद्रप्रकाश, सुरेंद्र सिंह आदि का भी यहीं मानना है कि इस तरह से पैसा बाट कर सरकार एक और दंगा करना चाहती है। क्योंकि जिन क्षेत्रों के लोग सरकारी धन मिलने से वंचित रहे हैं। वो लालच ही इस बार दंगा करा सकता है।

‘सरकार ने रुपये बांट एक और दंगे की नींव रखी : वीरेंद्र

1निज प्रतिनिधि, कांधला : सांप्रदायिक दंगे में गांव से पलायन करने वाले लोगों को बसाने के लिए राज्य सरकार ने मकान के नाम पर पांच लाख रुपये देने की घोषणा की है। विस्थापित परिवारों के मकान बनाने के नाम पर केवल पीड़ितों के जख्मों पर मरहम रखने की बात कही है। पांच लाख रुपये की धनराशि से जमीन खरीदें या मकान बनाएं। 1कस्बे के ईदगाह में रह रहे विस्थापित रोजूदीन का कहना है कि सांप्रदायिक दंगों में हुई आगजनी में उसका करीब बारह लाख रुपये का नुकसान हुआ था। सरकार पांच लाख रुपये देकर विस्थापितों का मजाक कर रही है। फुगाना थाना क्षेत्र के गांव लिसाढ़ निवासी बिलाल का कहना है कि वह दो माह से राहत शिविरों में रह रहे हैं। दो माह बाद सरकार ने पांच लाख रुपये की घोषणा करके पीड़ितों के जख्मों पर मरहम लगाने का काम किया है। गांव डूंगर निवासी शौकीन का कहना है कि राज्य सरकार ने पांच लाख रुपये मुआवजे के नाम पर घोषणा कर मुस्लिमों का वोट हासिल करने का प्रयास किया है। इमरान निवासी एलम का कहना है कि राज्य सरकार ने मकान के नाम पर पांच लाख रुपये की घोषणा की है। जो बहुत ही कम है। रमाला थाना क्षेत्र के सूप निवासी जाहिद का कहना है कि पांच लाख रुपये में तो गांव में ही मकान नहीं मिलता है, जबकि ज्यादातर पीड़ित कस्बों में लगे राहत शिविर में रह रहे है। छपरौली थाना क्षेत्र के गांव रठौड़ा निवासी साजिद का कहना है कि गांव में उपद्रवियों ने उनका करीब बाईस लाख रुपये का नुकसान किया है। जबकि उन्हे मुआवजे के नाम पर मात्र पांच लाख रुपये की घोषणा की गई। वह भी पता नहीं मिलेंगे या नहीं। गांव लिसाढ़ निवासी रोशन का कहना है कि मकान के मुआवजे के नाम पर राज्य सरकार ने पीड़ितों के साथ न्याय नहीं किया है। पांच लाख रुपये मुआवजे के काफी कम है। पांच लाख रुपये में पीड़ित न तो घर ही बना सकता है। ओर न हीं कुछ काम कर सकता है, जबकि पीड़ितों का नुकसान बहुत ज्यादा हुआ है। 1ईदगाह में किस गांव के कितने पीड़ित1एलम-14, रठौड़ा-18, भनेड़ा-14, हेवा-6, कुरड़ी-11, कसेरवा-17, दाहा-7, सिलाना-3, सिसौली-15, भड़ल-2, डांगरौल-16, टीकरी- 4, भगवानपुर-4, लांक-50, बहावड़ी-175, भाज्जू-80, फुगाना-44, इटावा-8, सिंभालका-7, बुटराड़ी-8, गौरीपुर-6, रमाला-27, पुटठीधनोरा-11, डूंगर-100, तुगाना-16, लिसाढ़-168, नाला-100 ।1नोट- उक्त आंकडे ईदगाह के शिविर संचालकों के अनुसार हैं। 12


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कांधला के ईदगाह में विस्थापित लोग। >>>>>>>>>>>>>>जागरण
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[TD]बड़ौत : गत दिनों में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बादल पश्चिमी यूपी के त्योहारों पर मंडराने लगे हैं। दीपावली का त्योहार नजदीक है, लेकिन जनपद में न तो कोई ज्यादा खरीददारी कर रहा है और न ही बाजारों में ज्यादा रौनक है। गांव-गांव में पंचायतों का आयोजन कर त्योहार नहीं मनाने का निर्णय लिया जा रहा है।
1बिजरौल गांव में हुई पंचायत में वक्ताओं ने कहा कि गत दिनों हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद हर तरफ गम का माहौल है। प्रदेश सरकार भी निदरेष लोगों के खिलाफ झूठे मुकदमें कायम कर रही है। पंचायत में निर्णय हुआ कि इस बार कोई भी व्यक्ति दीपावली और भैयादूज का त्योहार नहीं मनाएगा। अध्यक्षता राधेलाल शर्मा और संचालन हरपाल सिंह ने किया। इस मौके पर चौधरी यशपाल सिंह, उपेंद्र प्रधान, जयपाल सिंह, हरवीर सिंह और सुभाष आदि मौजूद थे।

1उधर, बरवाला गांव में आयोजित पंचायत में ग्रामीणों ने दीपावली और भैयादूज का त्योहार नहीं मनाने का निर्णय लिया। पंचायत में चौ कबाड़ी सिंह, किसान नेता मुनेश बरवाला, जयकुमार, पुष्पेंद्र, लोकेश, शिवकुमार, महिपाल प्रधान, जगमेहर और सतपाल आदि मौजूद थे। उधर, दाहा के नांगल और गांगनौली गांव में भी ग्रामीणों ने बैठक कर दीपावली का त्योहार सादगी से मनाने का निर्णय लिया। इस मौके पर धर्मेद्र प्रधान, राजपाल शास्त्री, राजेंद्र, बिजेंद्र, चरण सिंह और कृष्णपाल आदि मौजूद थे। वहीं शबगा गांव में भी पंचायत कर त्योहार नहीं मनाने का फैसला लिया गया। पंचायत में वेदपाल पंवार, राजेंद्र, हरवीर और जितेंद्र आदि मौजूद थे। उधर, जिवाना गांव में भी त्योहार नहीं मनाने का निर्णय हुआ। इस मौके पर राममेहर, विषयपाल, महिपाल सिंह और सोहनवीर आदि मौजूद थे। वहीं सिरसली गांव के लोगों ने भी त्योहार नहीं मनाने का एलान कर दिया। इस मौके पर सतवीर सिंह, सतपाल प्रधान, ओम सिंह और रामकिशन आदि मौजूद थे। उधर, बासौली गांव में दीपावली को काला दिवस के रूप में मनाने का निर्णय हुआ। पंचायत में रगवीर सिंह, वेदपाल सिंह, सुखवीर सिंह, महावीर, रविंद्र तोमर, मनोज और कृपाल सिंह आदि मौजूद थे।
1सूप व किरठल में भी नहीं मनेगी दीपावली : रमाला : क्षेत्र के सूप और किरठल गांव में भी पंचायत आयोजित कर ग्रामीणों ने दीपावली का त्योहार नहीं मनाने का निर्णय लिया। ग्रामीणों ने एकजुट होकर कहा कि कोई भी व्यक्ति दीपावली पर मोमबत्ती नहीं बांटेगा और न ही पटाखे छोड़े जाएंगे। इस मौके पर प्रधानपति कृष्णपाल, चंद्रप्रकाश आचार्य, सुधीर प्रमुख, मनोज, देवेंद्र राठी, प्रदीप प्रधान, करण सिंह, राजपाल और विकास आदि मौजूद थे।बड़ौत : गत दिनों में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बादल पश्चिमी यूपी के त्योहारों पर मंडराने लगे हैं। दीपावली का त्योहार नजदीक है, लेकिन जनपद में न तो कोई ज्यादा खरीददारी कर रहा है और न ही बाजारों में ज्यादा रौनक है। गांव-गांव में पंचायतों का आयोजन कर त्योहार नहीं मनाने का निर्णय लिया जा रहा है। 1बिजरौल गांव में हुई पंचायत में वक्ताओं ने कहा कि गत दिनों हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद हर तरफ गम का माहौल है। प्रदेश सरकार भी निदरेष लोगों के खिलाफ झूठे मुकदमें कायम कर रही है। पंचायत में निर्णय हुआ कि इस बार कोई भी व्यक्ति दीपावली और भैयादूज का त्योहार नहीं मनाएगा। अध्यक्षता राधेलाल शर्मा और संचालन हरपाल सिंह ने किया। इस मौके पर चौधरी यशपाल सिंह, उपेंद्र प्रधान, जयपाल सिंह, हरवीर सिंह और सुभाष आदि मौजूद थे। 1उधर, बरवाला गांव में आयोजित पंचायत में ग्रामीणों ने दीपावली और भैयादूज का त्योहार नहीं मनाने का निर्णय लिया। पंचायत में चौ कबाड़ी सिंह, किसान नेता मुनेश बरवाला, जयकुमार, पुष्पेंद्र, लोकेश, शिवकुमार, महिपाल प्रधान, जगमेहर और सतपाल आदि मौजूद थे। उधर, दाहा के नांगल और गांगनौली गांव में भी ग्रामीणों ने बैठक कर दीपावली का त्योहार सादगी से मनाने का निर्णय लिया। इस मौके पर धर्मेद्र प्रधान, राजपाल शास्त्री, राजेंद्र, बिजेंद्र, चरण सिंह और कृष्णपाल आदि मौजूद थे।

वहीं शबगा गांव में भी पंचायत कर त्योहार नहीं मनाने का फैसला लिया गया। पंचायत में वेदपाल पंवार, राजेंद्र, हरवीर और जितेंद्र आदि मौजूद थे। उधर, जिवाना गांव में भी त्योहार नहीं मनाने का निर्णय हुआ। इस मौके पर राममेहर, विषयपाल, महिपाल सिंह और सोहनवीर आदि मौजूद थे।

वहीं सिरसली गांव के लोगों ने भी त्योहार नहीं मनाने का एलान कर दिया। इस मौके पर सतवीर सिंह, सतपाल प्रधान, ओम सिंह और रामकिशन आदि मौजूद थे। उधर, बासौली गांव में दीपावली को काला दिवस के रूप में मनाने का निर्णय हुआ। पंचायत में रगवीर सिंह, वेदपाल सिंह, सुखवीर सिंह, महावीर, रविंद्र तोमर, मनोज और कृपाल सिंह आदि मौजूद थे।

1सूप व किरठल में भी नहीं मनेगी दीपावली : रमाला : क्षेत्र के सूप और किरठल गांव में भी पंचायत आयोजित कर ग्रामीणों ने दीपावली का त्योहार नहीं मनाने का निर्णय लिया। ग्रामीणों ने एकजुट होकर कहा कि कोई भी व्यक्ति दीपावली पर मोमबत्ती नहीं बांटेगा और न ही पटाखे छोड़े जाएंगे। इस मौके पर प्रधानपति कृष्णपाल, चंद्रप्रकाश आचार्य, सुधीर प्रमुख, मनोज, देवेंद्र राठी, प्रदीप प्रधान, करण सिंह, राजपाल और विकास आदि मौजूद थे।

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Akhilesh Yadav playing communal card by announcing Rs 5 lakh for Muslims affected in Muzaffarnagar riots. None for Hindus!
Sickular party congress (Why Congress: Becuase SP is their team, Congress taken CBI case from Mulaa-yam) should instruct him to avoid such actions.
 
Bhai need of the hour is to be prepared for the worst. This incidence has led the community to unite, which is a good sign. Care should be taken our interests should not be harmed at any cost. Better be prepared than sorry.
 
Be careful

Bhai need of the hour is to be prepared for the worst. This incidence has led the community to unite, which is a good sign. Care should be taken our interests should not be harmed at any cost. Better be prepared than sorry.

Bhai need of the hour is to be prepared for the worst. This incidence has led the community to unite, which is a good sign. Care should be taken our interests should not be harmed at any cost. Better be prepared than sorry.

Advice to all brothers in Western UP.. Be Careful while venturing out on Bhai Dooj day.Rumours have it that something major is being planned against Jat boys who will venture out of their villages on Bhai Duj
So do not stop if unknown people stop you on way. Dont travel alone on bikes and be vigilant.

Camps me 18-18 lakh rupye kyu baante hai pata nahi

royalbulletin.com/?p=20211

दोपहर करीब ढाई बजे जब वे दोनों वापस लौट रहे थे तो बहावडी काबडौत मार्ग पर ब्रहमसिंह की ट्यूबवैल के पास गन्ने के खेत से नाकाबपोश पांच-छह युवक निकले और उन्होंने उन्हें तमंचे दिखाते हुए उनसे उनके नाम पूछे। अमन और बबलू ने अपने हाथ पर बने ओम दिखाये। इस पर हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी, जिससे अमन की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बबलू गंभीर रूप से घायल हो गया। बाद में हमलावर फरार हो गये। गोलियों की आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और घायल को शामली राजकीय चिकित्सालय पहुंचाया। घटना की जानकारी मिलने पर सीओ फुगाना पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और बदमाशों की तलाश में कापफी देर तक काम्बिंग की, लेकिन कोई सुराग नहीं लगा।
 
Advice to all brothers in Western UP.. Be Careful while venturing out on Bhai Dooj day.Rumours have it that something major is being planned against Jat boys who will venture out of their villages on Bhai Duj
So do not stop if unknown people stop you on way. Dont travel alone on bikes and be vigilant.

Camps me 18-18 lakh rupye kyu baante hai pata nahi

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दोपहर करीब ढाई बजे जब वे दोनों वापस लौट रहे थे तो बहावडी काबडौत मार्ग पर ब्रहमसिंह की ट्यूबवैल के पास गन्ने के खेत से नाकाबपोश पांच-छह युवक निकले और उन्होंने उन्हें तमंचे दिखाते हुए उनसे उनके नाम पूछे। अमन और बबलू ने अपने हाथ पर बने ओम दिखाये। इस पर हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी, जिससे अमन की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बबलू गंभीर रूप से घायल हो गया। बाद में हमलावर फरार हो गये। गोलियों की आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और घायल को शामली राजकीय चिकित्सालय पहुंचाया। घटना की जानकारी मिलने पर सीओ फुगाना पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और बदमाशों की तलाश में कापफी देर तक काम्बिंग की, लेकिन कोई सुराग नहीं लगा।
Don't wait to retaliate if anything of such sort happens.
 
What is going on in West U.P.? Hindus can not go outside lest Muslims attack them and Muslims are also being crushed and shot at (don't know if these news are communal or not :
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गागलहेड़ी (सहारनपुर)। सहारनपुर से देहरादून की तरफ जा रहे ट्रक ने दो बाइकों में टक्कर मार दी। इससे तीन लोगों की मौत हो गई। एक महिला घायल हुई है, जबकि एक चार साल का बच्चा बच गया है। हादसे से गुस्साए लोगों ने जाम लगा दिया। ट्रक में आग लगाने की भी कोशिश की गई।
सिरचंदी गांव निवासी अब्दुल सलाम (20) सोमवार को बाइक से गागलहेड़ी क्षेत्र के रसूलपुर पापड़ेकी गांव जा रहा था। वहां उसकी रिश्तेदारी है। बाइक पर उसकी मां कौसर भी बैठी थी। गागलहेड़ी-भगवानपुर लिंक मार्ग पर ढाला चौरा के पास देहरादून की तरफ जा रहे ट्रक ने उसकी बाइक में टक्कर मार दी। कौसर तो दूर जा गिरी लेकिन अब्दुल सलाम कुचल गया। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद ट्रक चालक ने एक और बाइक को टक्कर मार दी। इस बाइक पर शहजाद (35), उसकी पत्नी रेशमा (32) और बेटा अली राजा (4) थे। टक्कर से शहजाद और रेशमा ने मौके पर ही मौत हो गई। जबकि बच्चा दूर जाकर गिरा, जिससे उसकी जान बच गई। ट्रक भी एक पेड़ से टकराकर रुक गया। चालक हादसे के बाद फरार हो गया। शहजाद का परिवार उत्तराखंड के गांव सिरसोना में शादी समारोह में जा रहा था।
हादसे के बाद मौके पर ग्रामीणों ने जाम लगा दिया। सूचना पर सीओ सदर सुरेश पाल सिंह और पूर्व सांसद काजी रशीद मसूद के पौत्र शायान मसूद ने लोगों को आर्थिक मदद का आश्वासन देकर शांत कराया।
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मुजफ्फरनगर (ब्यूरो)।
खालापार निवासी हसन नवाजुद्दीन सोमवार की रात रामपुरम गेट से बाइक पर सवार होकर मीनाक्षी चौक की ओर से अपने घर लौट रहा था। इस बीच पीछे से बाइक पर सवार होकर आए दो युवकों ने उसे आवाज दी। हसन ने पीछे की तरफ देखा। हमलावरों ने उस पर फायर झोंक दिया। गोली हसन के पैर में लगी है। गंभीर अवस्था में उसे जिला चिकित्सालय से मेरठ के लिए रेफर कर दिया गया।

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जफ्फरनगर, जागरण संवाददाता। मुजफ्फरनगर बुधवार को फिर सांप्रदायिक आग में धधक उठा। दो गांवों के लोगों के बीच आमने-सामने की फायरिंग में महिला समेत चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई है जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हैं। डीआइजी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए हैं। इलाके में जबर्दस्त तनाव है। बुधवार शाम के वक्त भौराकलां थाना क्षेत्र के गांव मोहम्मदपुर राय सिंह निवासी रिटायर्ड फौजी राजेंद्र सिंह पत्नी रीना के साथ हुसैनपुर-खानपुर स्थित अपने खेत पर काम करने गए थे। वहां दर्जनभर नकाबपोशों ने उन पर हमला बोल दिया। मौके पर ही रीना की मौत हो गई। किसी तरह बचकर गंभीर रूप से घायल राजेंद्र गांव पहुंचे तो वारदात भीड़ असलहे लेकर हुसैनपुर के खेत की ओर दौड़ पड़ी।
बड़री संख्या में ग्रामीणों के आने की सूचना पर हुसैनपुर के अल्पसंख्यक समाज के ग्रामीण भी मोर्चाबंद हो गए। दोनों गांवों के लोगों के बीच जमकर संघर्ष व फायरिंग हुई। इसमें हुसैनपुर कलां के अमरोज, अजमल और मेहरबान के मरने की सूचना है।
डीआइजी समेत मुजफ्फरनगर और शामली जिले के आला अफसर भारी पुलिस बल के साथ मौके पर हैं। आसपास के जिलों से भी फोर्स मंगाया जा रहा है। इस बाबत कोई भी अधिकारी बात करने को तैयार नहीं है। क्षेत्र में जबरदस्त तनाव है।
मुझेड़ा हत्याकांड के तीन आरोपी जेल भेजे
मुजफ्फरनगर । मीरापुर पुलिस ने बुधवार को सात सिंतबर को हुए दंगे में नंगला मंदौड़ महापंचायत से लौटते हुए मुझेड़ा गांव में हुई दो लोगों की हत्या में वांछित तीन लोगों को जेल भेज दिया। तीन लोग पहले ही जेल जा चुके है।
इंस्पेक्टर अनिरुद्ध गौतम ने बताया कि सात सिंतबर को नंगला महापंचायत से ट्रैक्टर ट्राली में लौट रहे लोगों पर मुझेड़ा गांव के सामने भीड़ ने हमला कर मेरठ जिले के मोड़खुर्द निवासी योगेंद्र व विरेंद्र को मार डाला था। इसमें 29 लोग नामजद थे। पु
 
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