37 मुस्लिम परिवारों ने अपनाया हिंदू धर्म
अमर उजाला ब्यूरो
आगरा। कबाड़ का काम करने वाले 37 मुस्लिम परिवारों के करीब सौ लोगों ने सोमवार को विधिवत हवन-पूजन के साथ हिंदू धर्म अपना लिया। इनकी कलाई पर कलावा बांधने के बाद माथे पर तिलक लगाया गया। इनमें से अधिकांश मूलरूप से कोलकाता के हैं जो पिछले कई साल से देवरी रोड स्थित देव नगर के पीछे बस्ती में रह रहे हैं। इनमें से कुछ के पिता या दादा ने धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम धर्म अपना लिया था।
धर्म जागरण (राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रकल्प) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को देवरी रोड स्थित देव नगर के पीछे एक बस्ती में इस कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें बस्ती के 37 मुस्लिम परिवार हिंदू धर्म से जुड़े। झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोग तैयार होकर बुद्धि-शुद्धि यज्ञ के लिए पहुंचे। यहां पंडित मुरली मनोहर ने सबसे पहले मंत्रोच्चारण के साथ गंगाजल छिड़कर सभी का शुद्धिकरण कराया। अधिकांश लोग अपने पूरे परिवार के साथ मौजूद थे।
धर्मांतरण के बाद बस्ती के कमरे को मंदिर का स्वरूप दे दिया गया है। इसमें दुर्गा माता की मूर्ति के अलावा कई और भगवानों के कैलेंडर लगाए गए हैं। पूजा-पाठ का अन्य सामान भी उपलब्ध कराया गया है। बस्ती के अधिकांश लोग पश्चिम बंगाल से ताल्लुक रखते हैं। वहां दुर्गा माता के पूजन की ज्यादा मान्यता है। धर्म परिवर्तन करने वाले अब भगवान की आरती उतारेंगे। इसके लिए बजरंग दल के कार्यकर्ता एक महीने तक इन सभी लोगों को प्रशिक्षण देंगे। जिसमें पूजा-पाठ के साथ-साथ हिंदू धर्म के रीति-रिवाज सिखाए जाएंगे। इसमें विभिन्न आरती भी सिखाई जाएगी।
कार्यक्रम में मौजूद मुस्लिम लोगों का कहना था कि उनकी सभी धर्म में आस्था है। हिंदू धर्म की कुछ बातें उन्हें अच्छी लगीं। वहीं, कुछ लोगों का कहना था कि उनके पिता या दादा हिंदू थे। धर्मांतरण के बाद उन्होंने मुस्लिम धर्म अपना लिया था। वह हिंदू धर्म अपनाकर घर वापसी कर रहे हैं। अब इन लोगों के नाम बदलने की कवायद की जा रही है। धर्म जागरण के क्षेत्र प्रमुख राजेश्वर सिंह का कहना है कि कई मुस्लिम परिवारों ने हिंदू धर्म अपनाया है। इससे पहले ईसाइयों को हिंदू धर्म अपनाया था। जहां धर्म परिवर्तन हुआ है उस बस्ती का ठेकेदार इस्माइल है। उसकी बात सभी लोग मानते हैं। इस्माइल का कहना है कि हिंदू धर्म की जानकारी होने पर उसकी इससे जुड़ने की इच्छा हुई।
पहली बार मुस्लिमों का धर्मांतरण
आगरा (ब्यूरो)। शहर में पहली बार 37 मुस्लिम परिवारों का धर्मांतरण हुआ है। इससे पहले ईसाई परिवारों का धर्मांतरण कराया जाता रहा है।
धर्म जागरण के क्षेत्र प्रमुख राजेश्वर सिंह के अनुसार, वर्ष 1998 से आगरा में तीन बार ईसाइयों के धर्मपरिवर्तन कार्यक्रम हो चुके हैं। पिछले साल रामबाग क्षेत्र के फत्ते नगला में 350 ईसाइयों का धर्म परिवर्तन कराया गया था। इससे पहले कमला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल में दो बार ईसाई धर्मांतरण कार्यक्रम हो चुका है, जिसमें लगभग दो हजार से ज्यादा ईसाइयों का धर्मांतरण किया गया। उन्होंने बताया कि अलीगढ़, एटा, बदायूं, बरेली, कासगंज, फीरोजाबाद, शिकोहाबाद में हजारों ईसाइयों का धर्मांतरण करा चुके हैं। 1998 में एटा के जलाल गांव में पांच मुस्लिम परिवारों को हिंदू धर्म से जोड़ा था।
1998 से अब तक ईसाइयों का ही कराया धर्म परिवर्तन
बस्ती में बनाया मंदिर
धर्मांतरण के बाद बस्ती के कमरे को मंदिर का स्वरूप दे दिया गया है। इसमें दुर्गा माता की मूर्ति के अलावा कई और भगवानों के कलेंडर लगाए गए हैं। पूजा-पाठ का अन्य सामान भी उपलब्ध कराया गया है। बस्ती के अधिकांश लोग पश्चिमी बंगाल से ताल्लुक रखते हैं। वहां दुर्गा माता के पूजन की ज्यादा मान्यता है।
एक महीने देंगे प्रशिक्षण
धर्म परिवर्तन करने वाले अब तक नमाज ही पढ़ते आ रहे हैं। अब भगवान की आरती उतारेंगे। इसके लिए बजरंग दल के कार्यकर्ता एक महीने तक इन सभी लोगों को प्रशिक्षण देंगे। जिसमें पूजा-पाठ के साथ-साथ हिंदू धर्म के रीति-रिवाज सिखाए जाएंगे।
धर्म परिवर्तन
बमुश्किल चार फुट ऊंची झोपड़ी। सीधे खड़े हुए तो बांसों को बांधकर बनाई छत से सिर टकरा जाए। अंदर जगह इतनी कि दो लोग अंदर बैठ जाएं तो तीसरे को दरवाजे पर खड़ा रहना पड़ेगा। ऐसे में कहां अल्लाह को जगह दें और कहां भगवान को विराजमान करें। दो वक्त की रोटी जुटाने के लिए सुबह से शाम तक कचरे के ढेरों को खंगालने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं। इन 37 मुस्लिम परिवारों ने हिंदू धर्म तो अपना लिया, लेकिन क्यों? इसका जवाब कुछ मुस्लिमों के पास नहीं है। ज्यादा पूछने पर अधिकांश लोग ठेकेदार (जिस बस्ती में रहते हैं, उस बाड़े का ठेकेदार) की तरफ इशारा करते हुए झुग्गी-झोपड़ी में दरवाजे पर पैबंद लगा पर्दा डालकर अंदर चले गए। वहीं, कुछ लोग खुलकर धर्मांतरण को स्वीकार करते हुए हिंदू धर्म के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करने से नहीं चूके।
ईश्वर-अल्लाह सब बराबर
बस्ती में जहां नजर दौड़ाओ, वहां तक कचरा और कबाड़ा ही नजर आता है। इसी बीच कुछ जिंदगियां बस गुजर रही हैं। तन छुपाने के लिए महिलाओं की साड़ी या शूट में इतने पैबंद लगे हैं कि उसमें अब गुंजाइश ही नहीं बची। कहते हैं कि जितनी देर इबादत करेंगे, उतनी देर में एक किलो कबाड़ा बीन लेंगे, इससे कम से कम दो रुपये तो घर में आएंगे। जिसके लिए पाई-पाई मायने रखती हो, उसके लिए क्या ईद और दिवाली। इनके लिए सब बराबर हैं।
दो गज जमीन की जरूरत पर टिकी
धर्मांतरण की धुरी
अमर उजाला ब्यूरो
आगरा। दो गज जमीन की जरूरत पर धर्मांतरण की धुरी टिकी हो सकती है। देवरी रोड स्थित देव नगर के पीछे जिस बस्ती (एक बड़ा बाड़ा) के लोगों ने धर्मांतरण किया है। बस्ती का ठेकेदार इस्माइल है। इस बाड़े में लगभग चालीस परिवार रहते हैं। इस्माइल जीवन यापन के लिए कबाड़े के काम की तलाश में कोलकाता से पहुंचने वाले लोगों को वह रहने के लिए निशुल्क जगह उपलब्ध कराता है, जिसके बदले यह लोग ठेकेदार को कम रेट पर कबाड़ा देते हैं। ठेकेदार इस्माइल इस कबाड़े को कहीं और ज्यादा रेट पर बेचकर मुनाफा पाता है। यहां लोगों के लिए ठेकेदार के आदेश को ही सर्वोपरि हैं। यही वजह है कि धर्मांतरण के बारे में जब सलीमा से पूछा तो वह चुप्पी साध गई। बोली, मुझे नहीं पता, ठेकेदार से बात करो। हिंदू धर्म अपनाने वाले जिलाल ने भी यही जवाब दिया। धर्मपरिवर्तन पर ठेकेदार इस्माइल का कहना है कि सभी धर्म एक समान हैं। हिंदू धर्म के बारे में जब उसे जानकारी हुई तो इससे जुड़ने की इच्छा हुई।
धर्म परिवर्तन में कानूनी पेचीदगी
वरिष्ठ अधिवक्ता अचल शर्मा के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन करता है तो किसी लाभ के पद या कानूनी प्रक्रिया के लिए उसे इस संबंध में एक शपथपत्र देना होगा। साथ ही, धर्म परिवर्तन कराने वाले आचार्य या शास्त्री का बयान कोर्ट में कराना होगा। वोटर कार्ड में परिवर्तन के लिए भी उसे निर्वाचन आयोग में धर्म परिवर्तन के संबंध में शपथपत्र के साथ-साथ, धर्म परिवर्तन कराने वाले की तरफ से भी शपथपत्र दिलवाना होगा।
मेरे पिता मुस्लिम थे। अब मैं हिंदू धर्म अपना रहा हूं। सभी धर्मों में मेरी आस्था है। काम के चलते मैं नमाज भी नहीं पढ़ पाता था, अब देखो आरती कितनी उतार पाता हूं। -
हुमायूं, 40 वर्षीय
एक पहलू
•बस्ती में रहने वालों के लिए ठेकेदार का आदेश सर्वोपरि
बोले कल तक पढ़ते थे नमाज आज से उतारेंगे आरती
70 वर्षीय सुफिया बेगम का कहना है कि ऊपरवाला कोई भेदभाव नहीं करता। जाति-धर्म तो हम लोगों ने बना लिए हैं। पूरी जिंदगी अल्लाह की इबादत में सिर झुकाने वाली सुफिया कहती हैं कि अब वह भगवान की आरती उतारेंगी। बता दें कि यह सभी लोग छोटी-छोटी झुग्गी-झोपड़ी में परिवार सहित रहते हैं।
इस्माइल
कोलकाता में काली मां की विशेष आराधना होती है। यही सोचकर वहां से आए मुस्लिम परिवारों को काली माता की मूर्ति भेंट की गई।