जिन्होंने हिंदू धर्म को त्यागा...

जाकिर नाइक के मुह पर झन्नाटेदार तमाचा>>>>>
स्व0 मौलाना मुफ्ती अब्दुल कयूम जालंधरी संस्कृत ,हिंदी,उर्दू,फारसी व अंग्रेजी के जाने-माने विद्वान् थे।
मोलाना ने मुसलमानों के पूर्वजों पर भी काफी कुछ लिखा है । उनका कहना है कि इरानी"कुरुष","कौरुष"व अरबी कुरैश मूलत : महाभारत के युद्ध के बाद भारत से लापता उन २४१६५ कौरव सैनिकों के वंसज हैं, जो मरने से बच गए थे।
अरब में कुरैशों के अतिरिक्त"केदार"व"कुरुछेत्र"कबीलों का इतिहास भी इसी तथ्य को प्रमाणित करता है। कुरैश वंशीय खलीफा मामुनुर्र्शीद(८ १३-८३५) के शाशनकाल में निर्मित खलीफा का हरे रंग का चंद्रांकित झंडा भी इसी बात को सिद्ध करता है।
कौरव चंद्रवंशी थे और कौरव अपने आदि पुरुष के रूप में चंद्रमा को मानते थे। यहाँ यह तथ्य भी उल्लेखनीय है कि इस्लामी झंडे में चंद्रमां के ऊपर"अल्लुज़ा"अर्ताथ शुक्र तारे का चिन्ह,अरबों के कुलगुरू"शुक्राचार्य"का प्रतीक ही है। भारत के कौरवों का सम्बन्ध शुक्राचार्य से छुपा नहीं है।
अरब इतिहास के विश्वविख्यात विद्वान् प्रो० फिलिप के अनुसार २४वी सदी ईसा पूर्व में"हिजाज़"(मक्का-मदीना) पर जग्गिसा(जगदीश) का शासन था।२३५० ईसा पूर्व में शर्स्किन ने जग्गीसी को हराकर अंगेद नाम से राजधानी बनाई। शर्स्किन वास्तव में नारामसिन अर्थार्त नरसिंह का ही बिगड़ा रूप है। १००० ईसा पूर्व अन्गेद पर गणेश नामक राजा का राज्य था। ६ वी शताब्दी ईसा पूर्व हिजाज पर हारिस अथवा हरीस का शासन था। १४वी सदी के विख्यात अरब इतिहासकार"अब्दुर्रहमान इब्ने खलदून"की ४० से अधिक भाषा में अनुवादित पुस्तक"खलदून का मुकदमा"में लिखा है कि ६६० इ० से १२५८ इ० तक"दमिश्क"व"बग़दाद"की हजारों मस्जिदों के निर्माण में मिश्री,यूनानी व भारतीय वातुविदों ने सहयोग किया था। परम्परागत सपाट छत वाली मस्जिदों के स्थान पर शिव पिंडी कि आकृति के गुम्बदों व उस पर अष्ट दल कमल कि उलट उत्कीर्ण शैली इस्लाम को भारतीय वास्तुविदों की देन है।इन्ही भारतीय वास्तुविदों ने"बैतूल हिक्मा"जैसे ग्रन्थाकार का निर्माण भी किया था।
अत: यदि इस्लाम वास्तव में यदि अपनी पहचान कि खोज करना चाहता है तो उसे इसी धरा ,संस्कृति व प्रागैतिहासिक ग्रंथों में स्वं को खोजना पड़ेगा.

I had written along the same lines in my thread, " Missing links in Jat History".

RK^2
 
37 मुस्लिम परिवारों ने अपनाया हिंदू धर्म
अमर उजाला ब्यूरो
20141209a_00114100101.jpg


आगरा। कबाड़ का काम करने वाले 37 मुस्लिम परिवारों के करीब सौ लोगों ने सोमवार को विधिवत हवन-पूजन के साथ हिंदू धर्म अपना लिया। इनकी कलाई पर कलावा बांधने के बाद माथे पर तिलक लगाया गया। इनमें से अधिकांश मूलरूप से कोलकाता के हैं जो पिछले कई साल से देवरी रोड स्थित देव नगर के पीछे बस्ती में रह रहे हैं। इनमें से कुछ के पिता या दादा ने धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम धर्म अपना लिया था।
धर्म जागरण (राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रकल्प) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को देवरी रोड स्थित देव नगर के पीछे एक बस्ती में इस कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें बस्ती के 37 मुस्लिम परिवार हिंदू धर्म से जुड़े। झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोग तैयार होकर बुद्धि-शुद्धि यज्ञ के लिए पहुंचे। यहां पंडित मुरली मनोहर ने सबसे पहले मंत्रोच्चारण के साथ गंगाजल छिड़कर सभी का शुद्धिकरण कराया। अधिकांश लोग अपने पूरे परिवार के साथ मौजूद थे।
धर्मांतरण के बाद बस्ती के कमरे को मंदिर का स्वरूप दे दिया गया है। इसमें दुर्गा माता की मूर्ति के अलावा कई और भगवानों के कैलेंडर लगाए गए हैं। पूजा-पाठ का अन्य सामान भी उपलब्ध कराया गया है। बस्ती के अधिकांश लोग पश्चिम बंगाल से ताल्लुक रखते हैं। वहां दुर्गा माता के पूजन की ज्यादा मान्यता है। धर्म परिवर्तन करने वाले अब भगवान की आरती उतारेंगे। इसके लिए बजरंग दल के कार्यकर्ता एक महीने तक इन सभी लोगों को प्रशिक्षण देंगे। जिसमें पूजा-पाठ के साथ-साथ हिंदू धर्म के रीति-रिवाज सिखाए जाएंगे। इसमें विभिन्न आरती भी सिखाई जाएगी।
कार्यक्रम में मौजूद मुस्लिम लोगों का कहना था कि उनकी सभी धर्म में आस्था है। हिंदू धर्म की कुछ बातें उन्हें अच्छी लगीं। वहीं, कुछ लोगों का कहना था कि उनके पिता या दादा हिंदू थे। धर्मांतरण के बाद उन्होंने मुस्लिम धर्म अपना लिया था। वह हिंदू धर्म अपनाकर घर वापसी कर रहे हैं। अब इन लोगों के नाम बदलने की कवायद की जा रही है। धर्म जागरण के क्षेत्र प्रमुख राजेश्वर सिंह का कहना है कि कई मुस्लिम परिवारों ने हिंदू धर्म अपनाया है। इससे पहले ईसाइयों को हिंदू धर्म अपनाया था। जहां धर्म परिवर्तन हुआ है उस बस्ती का ठेकेदार इस्माइल है। उसकी बात सभी लोग मानते हैं। इस्माइल का कहना है कि हिंदू धर्म की जानकारी होने पर उसकी इससे जुड़ने की इच्छा हुई।

पहली बार मुस्लिमों का धर्मांतरण
आगरा (ब्यूरो)। शहर में पहली बार 37 मुस्लिम परिवारों का धर्मांतरण हुआ है। इससे पहले ईसाई परिवारों का धर्मांतरण कराया जाता रहा है।
धर्म जागरण के क्षेत्र प्रमुख राजेश्वर सिंह के अनुसार, वर्ष 1998 से आगरा में तीन बार ईसाइयों के धर्मपरिवर्तन कार्यक्रम हो चुके हैं। पिछले साल रामबाग क्षेत्र के फत्ते नगला में 350 ईसाइयों का धर्म परिवर्तन कराया गया था। इससे पहले कमला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल में दो बार ईसाई धर्मांतरण कार्यक्रम हो चुका है, जिसमें लगभग दो हजार से ज्यादा ईसाइयों का धर्मांतरण किया गया। उन्होंने बताया कि अलीगढ़, एटा, बदायूं, बरेली, कासगंज, फीरोजाबाद, शिकोहाबाद में हजारों ईसाइयों का धर्मांतरण करा चुके हैं। 1998 में एटा के जलाल गांव में पांच मुस्लिम परिवारों को हिंदू धर्म से जोड़ा था।
1998 से अब तक ईसाइयों का ही कराया धर्म परिवर्तन
बस्ती में बनाया मंदिर
धर्मांतरण के बाद बस्ती के कमरे को मंदिर का स्वरूप दे दिया गया है। इसमें दुर्गा माता की मूर्ति के अलावा कई और भगवानों के कलेंडर लगाए गए हैं। पूजा-पाठ का अन्य सामान भी उपलब्ध कराया गया है। बस्ती के अधिकांश लोग पश्चिमी बंगाल से ताल्लुक रखते हैं। वहां दुर्गा माता के पूजन की ज्यादा मान्यता है।
एक महीने देंगे प्रशिक्षण
धर्म परिवर्तन करने वाले अब तक नमाज ही पढ़ते आ रहे हैं। अब भगवान की आरती उतारेंगे। इसके लिए बजरंग दल के कार्यकर्ता एक महीने तक इन सभी लोगों को प्रशिक्षण देंगे। जिसमें पूजा-पाठ के साथ-साथ हिंदू धर्म के रीति-रिवाज सिखाए जाएंगे।
20141209a_00514100201.jpg


धर्म परिवर्तन
बमुश्किल चार फुट ऊंची झोपड़ी। सीधे खड़े हुए तो बांसों को बांधकर बनाई छत से सिर टकरा जाए। अंदर जगह इतनी कि दो लोग अंदर बैठ जाएं तो तीसरे को दरवाजे पर खड़ा रहना पड़ेगा। ऐसे में कहां अल्लाह को जगह दें और कहां भगवान को विराजमान करें। दो वक्त की रोटी जुटाने के लिए सुबह से शाम तक कचरे के ढेरों को खंगालने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं। इन 37 मुस्लिम परिवारों ने हिंदू धर्म तो अपना लिया, लेकिन क्यों? इसका जवाब कुछ मुस्लिमों के पास नहीं है। ज्यादा पूछने पर अधिकांश लोग ठेकेदार (जिस बस्ती में रहते हैं, उस बाड़े का ठेकेदार) की तरफ इशारा करते हुए झुग्गी-झोपड़ी में दरवाजे पर पैबंद लगा पर्दा डालकर अंदर चले गए। वहीं, कुछ लोग खुलकर धर्मांतरण को स्वीकार करते हुए हिंदू धर्म के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करने से नहीं चूके।
ईश्वर-अल्लाह सब बराबर
बस्ती में जहां नजर दौड़ाओ, वहां तक कचरा और कबाड़ा ही नजर आता है। इसी बीच कुछ जिंदगियां बस गुजर रही हैं। तन छुपाने के लिए महिलाओं की साड़ी या शूट में इतने पैबंद लगे हैं कि उसमें अब गुंजाइश ही नहीं बची। कहते हैं कि जितनी देर इबादत करेंगे, उतनी देर में एक किलो कबाड़ा बीन लेंगे, इससे कम से कम दो रुपये तो घर में आएंगे। जिसके लिए पाई-पाई मायने रखती हो, उसके लिए क्या ईद और दिवाली। इनके लिए सब बराबर हैं।
दो गज जमीन की जरूरत पर टिकी
धर्मांतरण की धुरी

अमर उजाला ब्यूरो
आगरा। दो गज जमीन की जरूरत पर धर्मांतरण की धुरी टिकी हो सकती है। देवरी रोड स्थित देव नगर के पीछे जिस बस्ती (एक बड़ा बाड़ा) के लोगों ने धर्मांतरण किया है। बस्ती का ठेकेदार इस्माइल है। इस बाड़े में लगभग चालीस परिवार रहते हैं। इस्माइल जीवन यापन के लिए कबाड़े के काम की तलाश में कोलकाता से पहुंचने वाले लोगों को वह रहने के लिए निशुल्क जगह उपलब्ध कराता है, जिसके बदले यह लोग ठेकेदार को कम रेट पर कबाड़ा देते हैं। ठेकेदार इस्माइल इस कबाड़े को कहीं और ज्यादा रेट पर बेचकर मुनाफा पाता है। यहां लोगों के लिए ठेकेदार के आदेश को ही सर्वोपरि हैं। यही वजह है कि धर्मांतरण के बारे में जब सलीमा से पूछा तो वह चुप्पी साध गई। बोली, मुझे नहीं पता, ठेकेदार से बात करो। हिंदू धर्म अपनाने वाले जिलाल ने भी यही जवाब दिया। धर्मपरिवर्तन पर ठेकेदार इस्माइल का कहना है कि सभी धर्म एक समान हैं। हिंदू धर्म के बारे में जब उसे जानकारी हुई तो इससे जुड़ने की इच्छा हुई।
धर्म परिवर्तन में कानूनी पेचीदगी
वरिष्ठ अधिवक्ता अचल शर्मा के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन करता है तो किसी लाभ के पद या कानूनी प्रक्रिया के लिए उसे इस संबंध में एक शपथपत्र देना होगा। साथ ही, धर्म परिवर्तन कराने वाले आचार्य या शास्त्री का बयान कोर्ट में कराना होगा। वोटर कार्ड में परिवर्तन के लिए भी उसे निर्वाचन आयोग में धर्म परिवर्तन के संबंध में शपथपत्र के साथ-साथ, धर्म परिवर्तन कराने वाले की तरफ से भी शपथपत्र दिलवाना होगा।
मेरे पिता मुस्लिम थे। अब मैं हिंदू धर्म अपना रहा हूं। सभी धर्मों में मेरी आस्था है। काम के चलते मैं नमाज भी नहीं पढ़ पाता था, अब देखो आरती कितनी उतार पाता हूं। -
हुमायूं, 40 वर्षीय
एक पहलू
•बस्ती में रहने वालों के लिए ठेकेदार का आदेश सर्वोपरि
बोले कल तक पढ़ते थे नमाज आज से उतारेंगे आरती
70 वर्षीय सुफिया बेगम का कहना है कि ऊपरवाला कोई भेदभाव नहीं करता। जाति-धर्म तो हम लोगों ने बना लिए हैं। पूरी जिंदगी अल्लाह की इबादत में सिर झुकाने वाली सुफिया कहती हैं कि अब वह भगवान की आरती उतारेंगी। बता दें कि यह सभी लोग छोटी-छोटी झुग्गी-झोपड़ी में परिवार सहित रहते हैं।
20141209a_00514100101.jpg

20141209a_00514100103.jpg

20141209a_00514100102.jpg

इस्माइल
20141209a_00514100106.jpg

कोलकाता में काली मां की विशेष आराधना होती है। यही सोचकर वहां से आए मुस्लिम परिवारों को काली माता की मूर्ति भेंट की गई।
 
The media has made a mountain out of a molehill by criticizing this conversion.

Kangressies and their Chappu (BSP and SP) have made a hue and cry about this conversion thereby forcing these recent converts to step back.

With Hindu politicians and media persons like these, do Hindus actually need outside enemies?????

37 मुस्लिम परिवारों ने अपनाया हिंदू धर्म
अमर उजाला ब्यूरो
20141209a_00114100101.jpg


आगरा। कबाड़ का काम करने वाले 37 मुस्लिम परिवारों के करीब सौ लोगों ने सोमवार को विधिवत हवन-पूजन के साथ हिंदू धर्म अपना लिया। इनकी कलाई पर कलावा बांधने के बाद माथे पर तिलक लगाया गया। इनमें से अधिकांश मूलरूप से कोलकाता के हैं जो पिछले कई साल से देवरी रोड स्थित देव नगर के पीछे बस्ती में रह रहे हैं। इनमें से कुछ के पिता या दादा ने धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम धर्म अपना लिया था।
धर्म जागरण (राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रकल्प) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को देवरी रोड स्थित देव नगर के पीछे एक बस्ती में इस कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें बस्ती के 37 मुस्लिम परिवार हिंदू धर्म से जुड़े। झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोग तैयार होकर बुद्धि-शुद्धि यज्ञ के लिए पहुंचे। यहां पंडित मुरली मनोहर ने सबसे पहले मंत्रोच्चारण के साथ गंगाजल छिड़कर सभी का शुद्धिकरण कराया। अधिकांश लोग अपने पूरे परिवार के साथ मौजूद थे।
धर्मांतरण के बाद बस्ती के कमरे को मंदिर का स्वरूप दे दिया गया है। इसमें दुर्गा माता की मूर्ति के अलावा कई और भगवानों के कैलेंडर लगाए गए हैं। पूजा-पाठ का अन्य सामान भी उपलब्ध कराया गया है। बस्ती के अधिकांश लोग पश्चिम बंगाल से ताल्लुक रखते हैं। वहां दुर्गा माता के पूजन की ज्यादा मान्यता है। धर्म परिवर्तन करने वाले अब भगवान की आरती उतारेंगे। इसके लिए बजरंग दल के कार्यकर्ता एक महीने तक इन सभी लोगों को प्रशिक्षण देंगे। जिसमें पूजा-पाठ के साथ-साथ हिंदू धर्म के रीति-रिवाज सिखाए जाएंगे। इसमें विभिन्न आरती भी सिखाई जाएगी।
कार्यक्रम में मौजूद मुस्लिम लोगों का कहना था कि उनकी सभी धर्म में आस्था है। हिंदू धर्म की कुछ बातें उन्हें अच्छी लगीं। वहीं, कुछ लोगों का कहना था कि उनके पिता या दादा हिंदू थे। धर्मांतरण के बाद उन्होंने मुस्लिम धर्म अपना लिया था। वह हिंदू धर्म अपनाकर घर वापसी कर रहे हैं। अब इन लोगों के नाम बदलने की कवायद की जा रही है। धर्म जागरण के क्षेत्र प्रमुख राजेश्वर सिंह का कहना है कि कई मुस्लिम परिवारों ने हिंदू धर्म अपनाया है। इससे पहले ईसाइयों को हिंदू धर्म अपनाया था। जहां धर्म परिवर्तन हुआ है उस बस्ती का ठेकेदार इस्माइल है। उसकी बात सभी लोग मानते हैं। इस्माइल का कहना है कि हिंदू धर्म की जानकारी होने पर उसकी इससे जुड़ने की इच्छा हुई।

पहली बार मुस्लिमों का धर्मांतरण
आगरा (ब्यूरो)। शहर में पहली बार 37 मुस्लिम परिवारों का धर्मांतरण हुआ है। इससे पहले ईसाई परिवारों का धर्मांतरण कराया जाता रहा है।
धर्म जागरण के क्षेत्र प्रमुख राजेश्वर सिंह के अनुसार, वर्ष 1998 से आगरा में तीन बार ईसाइयों के धर्मपरिवर्तन कार्यक्रम हो चुके हैं। पिछले साल रामबाग क्षेत्र के फत्ते नगला में 350 ईसाइयों का धर्म परिवर्तन कराया गया था। इससे पहले कमला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल में दो बार ईसाई धर्मांतरण कार्यक्रम हो चुका है, जिसमें लगभग दो हजार से ज्यादा ईसाइयों का धर्मांतरण किया गया। उन्होंने बताया कि अलीगढ़, एटा, बदायूं, बरेली, कासगंज, फीरोजाबाद, शिकोहाबाद में हजारों ईसाइयों का धर्मांतरण करा चुके हैं। 1998 में एटा के जलाल गांव में पांच मुस्लिम परिवारों को हिंदू धर्म से जोड़ा था।
1998 से अब तक ईसाइयों का ही कराया धर्म परिवर्तन
बस्ती में बनाया मंदिर
धर्मांतरण के बाद बस्ती के कमरे को मंदिर का स्वरूप दे दिया गया है। इसमें दुर्गा माता की मूर्ति के अलावा कई और भगवानों के कलेंडर लगाए गए हैं। पूजा-पाठ का अन्य सामान भी उपलब्ध कराया गया है। बस्ती के अधिकांश लोग पश्चिमी बंगाल से ताल्लुक रखते हैं। वहां दुर्गा माता के पूजन की ज्यादा मान्यता है।
एक महीने देंगे प्रशिक्षण
धर्म परिवर्तन करने वाले अब तक नमाज ही पढ़ते आ रहे हैं। अब भगवान की आरती उतारेंगे। इसके लिए बजरंग दल के कार्यकर्ता एक महीने तक इन सभी लोगों को प्रशिक्षण देंगे। जिसमें पूजा-पाठ के साथ-साथ हिंदू धर्म के रीति-रिवाज सिखाए जाएंगे।
20141209a_00514100201.jpg


धर्म परिवर्तन
बमुश्किल चार फुट ऊंची झोपड़ी। सीधे खड़े हुए तो बांसों को बांधकर बनाई छत से सिर टकरा जाए। अंदर जगह इतनी कि दो लोग अंदर बैठ जाएं तो तीसरे को दरवाजे पर खड़ा रहना पड़ेगा। ऐसे में कहां अल्लाह को जगह दें और कहां भगवान को विराजमान करें। दो वक्त की रोटी जुटाने के लिए सुबह से शाम तक कचरे के ढेरों को खंगालने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं। इन 37 मुस्लिम परिवारों ने हिंदू धर्म तो अपना लिया, लेकिन क्यों? इसका जवाब कुछ मुस्लिमों के पास नहीं है। ज्यादा पूछने पर अधिकांश लोग ठेकेदार (जिस बस्ती में रहते हैं, उस बाड़े का ठेकेदार) की तरफ इशारा करते हुए झुग्गी-झोपड़ी में दरवाजे पर पैबंद लगा पर्दा डालकर अंदर चले गए। वहीं, कुछ लोग खुलकर धर्मांतरण को स्वीकार करते हुए हिंदू धर्म के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करने से नहीं चूके।
ईश्वर-अल्लाह सब बराबर
बस्ती में जहां नजर दौड़ाओ, वहां तक कचरा और कबाड़ा ही नजर आता है। इसी बीच कुछ जिंदगियां बस गुजर रही हैं। तन छुपाने के लिए महिलाओं की साड़ी या शूट में इतने पैबंद लगे हैं कि उसमें अब गुंजाइश ही नहीं बची। कहते हैं कि जितनी देर इबादत करेंगे, उतनी देर में एक किलो कबाड़ा बीन लेंगे, इससे कम से कम दो रुपये तो घर में आएंगे। जिसके लिए पाई-पाई मायने रखती हो, उसके लिए क्या ईद और दिवाली। इनके लिए सब बराबर हैं।
दो गज जमीन की जरूरत पर टिकी
धर्मांतरण की धुरी

अमर उजाला ब्यूरो
आगरा। दो गज जमीन की जरूरत पर धर्मांतरण की धुरी टिकी हो सकती है। देवरी रोड स्थित देव नगर के पीछे जिस बस्ती (एक बड़ा बाड़ा) के लोगों ने धर्मांतरण किया है। बस्ती का ठेकेदार इस्माइल है। इस बाड़े में लगभग चालीस परिवार रहते हैं। इस्माइल जीवन यापन के लिए कबाड़े के काम की तलाश में कोलकाता से पहुंचने वाले लोगों को वह रहने के लिए निशुल्क जगह उपलब्ध कराता है, जिसके बदले यह लोग ठेकेदार को कम रेट पर कबाड़ा देते हैं। ठेकेदार इस्माइल इस कबाड़े को कहीं और ज्यादा रेट पर बेचकर मुनाफा पाता है। यहां लोगों के लिए ठेकेदार के आदेश को ही सर्वोपरि हैं। यही वजह है कि धर्मांतरण के बारे में जब सलीमा से पूछा तो वह चुप्पी साध गई। बोली, मुझे नहीं पता, ठेकेदार से बात करो। हिंदू धर्म अपनाने वाले जिलाल ने भी यही जवाब दिया। धर्मपरिवर्तन पर ठेकेदार इस्माइल का कहना है कि सभी धर्म एक समान हैं। हिंदू धर्म के बारे में जब उसे जानकारी हुई तो इससे जुड़ने की इच्छा हुई।
धर्म परिवर्तन में कानूनी पेचीदगी
वरिष्ठ अधिवक्ता अचल शर्मा के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन करता है तो किसी लाभ के पद या कानूनी प्रक्रिया के लिए उसे इस संबंध में एक शपथपत्र देना होगा। साथ ही, धर्म परिवर्तन कराने वाले आचार्य या शास्त्री का बयान कोर्ट में कराना होगा। वोटर कार्ड में परिवर्तन के लिए भी उसे निर्वाचन आयोग में धर्म परिवर्तन के संबंध में शपथपत्र के साथ-साथ, धर्म परिवर्तन कराने वाले की तरफ से भी शपथपत्र दिलवाना होगा।
मेरे पिता मुस्लिम थे। अब मैं हिंदू धर्म अपना रहा हूं। सभी धर्मों में मेरी आस्था है। काम के चलते मैं नमाज भी नहीं पढ़ पाता था, अब देखो आरती कितनी उतार पाता हूं। -
हुमायूं, 40 वर्षीय
एक पहलू
•बस्ती में रहने वालों के लिए ठेकेदार का आदेश सर्वोपरि
बोले कल तक पढ़ते थे नमाज आज से उतारेंगे आरती
70 वर्षीय सुफिया बेगम का कहना है कि ऊपरवाला कोई भेदभाव नहीं करता। जाति-धर्म तो हम लोगों ने बना लिए हैं। पूरी जिंदगी अल्लाह की इबादत में सिर झुकाने वाली सुफिया कहती हैं कि अब वह भगवान की आरती उतारेंगी। बता दें कि यह सभी लोग छोटी-छोटी झुग्गी-झोपड़ी में परिवार सहित रहते हैं।
20141209a_00514100101.jpg

20141209a_00514100103.jpg

20141209a_00514100102.jpg

इस्माइल
20141209a_00514100106.jpg

कोलकाता में काली मां की विशेष आराधना होती है। यही सोचकर वहां से आए मुस्लिम परिवारों को काली माता की मूर्ति भेंट की गई।
 
Last edited:
स्वाभिमानी हिंदू इस बात को बखूबी समझ चुके हैं कि एक विशेष संप्रदाय के लोगों को फलने-फूलने का मौका देकर वे भविष्य में अपने सर्वनाश की तैयारी कर रहे हैं। भांड मीडिया और तथाकथित सिकुलर गद्दार इस घटना पर ऐसे विलाप करने लगे, जैसे कमर में लठ लगने पर कुत्ता करता है, लेकिन यह तो एक आंधी की आहट मात्र है। हिंदुस्तान में गैर-हिंदुओं को 2-4 % से ज्यादा बढ़ने देना इस दुनिया की सुख-शांति और विकास के लिए बेहद जरूरी हिंदुओं के लिए आत्मघाती साबित होगा।
 
Bahut hi accha likha hai. Thanks for sharing your wisdom bhai.

पता नहीं, क्यों कुछ लोग हिंदू धर्म को ब्राह्मणों और बनियों का धर्म बनाने पर तुले हुए हैं। हिंदू धर्म में समय-समय पर महापुरुष पैदा होते रहे हैं, जिनमें क्षत्रिय, ब्राह्मण, वैश्य और शूद्र सभी शामिल हैं। हिंदू धर्म में समय-समय पर सुधार भी होते रहे हैं। अब यह वर्ण व्यवस्था उतनी प्रभावी नहीं रह गई है, जितनी कभी हुआ करती थी। छुआछूत, सती प्रथा इत्यादि कुरीतियों पर भी लगाम कसी गई है। रामायण में जब राम द्वारा शिव का धनुष तोड़े जाने पर लक्ष्मण-परशुराम संवाद है तो उसमें एक ब्राह्मण परशुराम को एक क्षत्रिय लक्ष्मण के हाथों उपहास का पात्र बनते दिखाया गया है। एक ब्राह्मण रावण को हिंदू धर्म में पापी, दुष्ट और अनाचारी खलनायक के तौर पर प्रस्तुत किया गया है, जिसका पुतला आज भी बुराई के तौर पर हर साल फूंका जाता है। ब्रह्मा के नाम पर देश में सिर्फ एक मंदिर है और उसमें भी कोई दिलचस्पी नहीं लेता। ब्राह्मणों को हमेशा एक दरिद्र नागरिक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। कोई भी किताब उठाकर देख लो, उसमें ब्राह्मणों के बारे में यही उल्लिखित होगा कि 'बहुत समय पहले की बात है। एक दरिद्र ब्राह्मण था'। वैश्यों को तो वर्ण व्यवस्था में सिर्फ शूद्रों से ऊपर रखा गया है।इसके बावजूद न जाने कैसे यह सोच कुछ लोगों के मस्तिष्क में घर कर गई है कि हिंदू धर्म तो ब्राह्मणों-बनियों का धर्म है। ब्राह्मणों-बनियों को साधुवाद है कि वे इस सबके बावजूद हिंदू धर्म की सेवा में जुटे हैं। यदि कोई ब्राह्मण किसी मंदिर की देखभाल करेगा तो स्वाभाविक है कि अपना गुजारा चलाने का प्रबंध भी वो उस मंदिर से ही करना चाहेगा। किसी को इस बात से भी नाराजगी है तो मत चढ़ाओ वहां रुपए-पैसे। हिंदू होने का मतलब मंदिरों में जाकर रुपए-पैसे चढ़ाना हरगिज नहीं है। हिंदू धर्म की सबसे ज्यादा शान तो क्षत्रियों ने बढ़ाई है। हिंदू धर्म के सबसे बड़े नायकों में से एक शिवजी के बारे में यह एक सर्वविदित तथ्य है कि जाटों की उत्पत्ति की शुरुआत उनसे हुई थी। हनुमान सदियों से जाटों के प्रिय इष्टों में से एक रहे हैं। राम तो प्रत्येक हिंदू के हृदय में बसते हैं।
जो जाट मुस्लिम नहीं हैं और ईसाई भी नहीं हैं तो ऐसे जाटों के रीति-रिवाज, तीज-त्यौहार, परंपराएं, नाम इत्यादि हिंदू धर्म के हैं, इसलिए ऐसे जाट यदि खुद को हिंदू मानते हुए झिझकते हैं तो फिर यह कोई अच्छी बात नहीं है। हम हिंदू न होते तो हमें 'कटवा' और 'मुल्ला' जैसे न जाने कैसे-कैसे नाम मिल जाते। सिख भी कोई हिंदुओं से अलग थोड़े ही हैं। वे तो बस ऐसे हैं, जैसे सरहद पर डटे फौजी लोग खुद को एक अलग कौम घोषित कर दें। हिंदू धर्म की रक्षा के लिए गुरु गोबिंद सिंह के कहने पर सिख हिंदुओं में से ही तो निकले थे। हिंदू धर्म ने यदि हमें एक पहचान दी है तो होना तो यह चाहिए कि हम इस महान धर्म को आगे बढ़ाने का प्रयास करें, लेकिन यदि हम ऐसा नहीं कर सकते तो कम से कम इसकी जड़ें काटने की तो न सोचें। वैसे जब देश में अंग्रेज काबिज थे तो बहुत से भारतीय लोग अंग्रेजों के समर्थक थे। बहुत से भारतीय लोग स्वतंत्रता आंदोलन से भी जुड़े थे।
यह देखकर बड़ी हैरानी होती है कि कुछ लोगों ने अपने नाम हिंदुओं वाले रखे हुए हैं, घरों में रीति-रिवाज, तीज-त्यौहार हिंदुओं वाले मनाते हैं, दूसरे लोग भी इस कारण उन्हें हिंदू समझते हैं, इसके बावजूद वे खुद को हिंदू कहते हुए झिझकते हैं।
 
स्वाभिमानी हिंदू इस बात को बखूबी समझ चुके हैं कि एक विशेष संप्रदाय के लोगों को फलने-फूलने का मौका देकर वे भविष्य में अपने सर्वनाश की तैयारी कर रहे हैं। भांड मीडिया और तथाकथित सिकुलर गद्दार इस घटना पर ऐसे विलाप करने लगे, जैसे कमर में लठ लगने पर कुत्ता करता है, लेकिन यह तो एक आंधी की आहट मात्र है। हिंदुस्तान में गैर-हिंदुओं को 2-4 % से ज्यादा बढ़ने देना इस दुनिया की सुख-शांति और विकास के लिए बेहद जरूरी हिंदुओं के लिए आत्मघाती साबित होगा।

Bhai Upender, are Hindus that weak that 2-4% of non-Hindus can cause panic attacks?
 
Bhai, History is the best teacher. India and Pakistan (including East Pakistan) were created on the basis of religious lines.

Since independence look at the condition and numbers of Hindus in Pakistan/Bangladesh and the condition and numbers of Muslims in India. I am sure you will get your answer in the introspection of these two above aspects.

Hindus are not weak, but they certainly have always tried to stand on the side of being politically correct even if it entails self-defeat.

Bhai Upender, are Hindus that weak that 2-4% of non-Hindus can cause panic attacks?
 
Bingo... well written, you said it all in a compact and impactful manner without any negativity.

It is a lesson learnt for us that we still should be fair and balanced, inclusive and not divisive, but must also be pragmatic to ask for RECIPROCITY by others, and not allow others to exploit it to our peril.


Bhai, History is the best teacher. India and Pakistan (including East Pakistan) were created on the basis of religious lines.

Since independence look at the condition and numbers of Hindus in Pakistan/Bangladesh and the condition and numbers of Muslims in India. I am sure you will get your answer in the introspection of these two above aspects.

Hindus are not weak, but they certainly have always tried to stand on the side of being politically correct even if it entails self-defeat.
 
But I thought Hindutva and Hinduism are a way of life and as mentioned repeatedly by RSS/VHP etc all Indians regardless of their religion are Hindus by culture. So what was the need for conversion?
 
वर्ण व्यवस्था तो अब भी प्रभावी हैं बस फर्क इतना हैं की शूद्र पढ़ने लिखने लगे जिससे उनमे जागृति आ रही हैं , और यहीं कारण हैं की मांझी जैसे दलित आज ब्राह्मण सत्ता को खुलेआम ललकार रहे हैं
और जो यह कहता हैं की हिन्दू धर्म ब्राह्मणो का धरम नहीं उसते बढ़ा मूर्ख धरती पर कोणी

यो वोहे उपेंद्र सै जो यहा कुछ लिखता , क्योंकि यहा लिखने मे आँख नहीं मिलानी पड़ती , और जब इससे आँख से आँख मिला कर बात की तो इसका जवाब था की राका भाई मैं क्या करू आरएसएस ने मेरा ब्रेन वाश कर रखा हैं !!
और सिर्फ उपेंद्र ही नहीं यहाँ जीतने भी शंख सै ये आमने सामने जिरह नहीं कर सकते यह मेरा दावा हैं , इनमे तो फोन पर भी जिरह करने की आसंग कोणी , इसलिए जीतने भी शंख सै किसे की भी प्रोफ़ाइल देख लो अगर उनमे इनके फोन नंबर भी लिखे मिल जा तो , एक आध को छोड़ कर ...
 
वर्ण व्यवस्था तो अब भी प्रभावी हैं बस फर्क इतना हैं की शूद्र पढ़ने लिखने लगे जिससे उनमे जागृति आ रही हैं , और यहीं कारण हैं की मांझी जैसे दलित आज ब्राह्मण सत्ता को खुलेआम ललकार रहे हैं
और जो यह कहता हैं की हिन्दू धर्म ब्राह्मणो का धरम नहीं उसते बढ़ा मूर्ख धरती पर कोणी

जनाब, आप जैसा समझदार, अनुभवी आदमी जब इस तरह की बातें करता है तो बहुत ही दुख होता है। प्रमाणों से या अच्छे तर्कों से साबित कर दो कि हिंदू धर्म ब्राह्मणों का धर्म है। यहां कुछ भी लिखने में किसी का क्या जाता है? ब्राह्मणों का ही क्या, चाहो तो हिंदू को मुसलमानों का धर्म लिख दो।

यो वोहे उपेंद्र सै जो यहा कुछ लिखता , क्योंकि यहा लिखने मे आँख नहीं मिलानी पड़ती , और जब इससे आँख से आँख मिला कर बात की तो इसका जवाब था की राका भाई मैं क्या करू आरएसएस ने मेरा ब्रेन वाश कर रखा हैं !!

आंख मिलाके या झुकाके बात करने जैसा कुछ है ही नहीं। मैंने कोई गुनाह थोड़े ही कर रखा है? आपको याद होगा कि जब कुछ साल पहले आपने मुझे मिलने के लिए गुड़गांव बुलाया था तो मैं टाल गया था। फिर आपने समर कादियान से दुबारा कहलवाया था तो मैं आया था। उस वजह से आपकी बात काटते हुए मुझे हिचक होती है, इसलिए ही मैं मिलने में हिचक रहा था। ऐसे ही समर कादियान के कहने पर भी मैं टाल गया था और जब उसने दुबारा कहा था तो मैं उससे मिला था। मैं 2-3 बार उससे मिला हूं और वो अनुभव कटु नहीं रहा, लेकिन किसी के साथ उठने-बैठने के कारण मैं अपनी सोच को तो नहीं बिगाड़ सकता। हालांकि इस साइट पर लिखने का कोई ज्यादा महत्व नहीं है, क्योंकि यहां लिखीं बातें मुझे तो लगता नहीं कि 300-400 से ज्यादा लोग पढ़ते होंगे, इसके बावजूद विचारों के आदान-प्रदान में तार्किकता तो होनी ही चाहिए। यदि यहां लिखी किसी झूठी/गलत बात से किसी एक व्यक्ति के भी जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ता है तो ऐसा नहीं होना चाहिए।
चूंकि यह एक सोशल नेटवर्किंग साइट है, अतः यहां अच्छे तर्कों एवं प्रमाणों से सामने वाले का मुंह बंद करने का प्रयास करना चाहिए, न कि अनर्गल बातों से। मैंने कभी नहीं कही कि आरएसएस ने मेरा ब्रेनवाश कर रखा है। मैंने तो यह कहा होगा कि 1990 के आसपास मैं 5-7 बार आरएसएस की शाखाओं में गया हूं और इस बात की मुझे बहुत ख़ुशी है, लेकिन तबसे मेरा आरएसएस से कोई वास्ता नहीं है, जिसकी मुझे कोई ख़ुशी नहीं। मेरी समस्या केवल यह है कि हिंदू धर्म का मुझ पर बहुत अहसान है और मेरे पूर्वज तो हिंदू थे ही, साथ ही जो अन्य हिंदू जाट हैं, वे भी हर तरह से अन्य दूसरे धर्मों को मानने वाले जाटों से बेहतर स्थिति में हैं। इसलिए मेरा फर्ज बनता है कि मैं हिंदू धर्म से विश्वासघात न करूं, बल्कि इसकी बेहतरी के लिए कुछ करूं। जिस पेड़ से मुझे छाया की प्राप्ति हो रही है, मैं उस पेड़ का अपमान क्यों करूं और उसकी जड़ें क्यों काटूं?

और सिर्फ उपेंद्र ही नहीं यहाँ जीतने भी शंख सै ये आमने सामने जिरह नहीं कर सकते यह मेरा दावा हैं , इनमे तो फोन पर भी जिरह करने की आसंग कोणी , इसलिए जीतने भी शंख सै किसे की भी प्रोफ़ाइल देख लो अगर उनमे इनके फोन नंबर भी लिखे मिल जा तो , एक आध को छोड़ कर ...

थोड़ा गहराई से सोचो तो आप तो हिंदू धर्म की सेवा मेरे जैसों से भी कहीं ज्यादा कर रहे हो। मुलायम सिंह यादव को घोर मुस्लिम परस्त माना जाता है, लेकिन आजम खान उसे मुस्लिमों का सबसे बड़ा दुश्मन बताता है। आजम खान बिल्कुल ठीक कहता है। मुलायम सिंह यादव के मुस्लिम परस्त व्यवहार से हिंदुओं में एकता की भावना प्रबल होती है और मुस्लिम विरोधी वातावरण तैयार होता है और चूंकि मुस्लिम हिंदुस्तान में हिंदुओं से काफी कम हैं, अतः नुकसान उन्हें उठाना पड़ता है। यदि मुलायम सिंह यादव मुस्लिम धर्म अपनाकर ऐसा करे तो फिर तो अलग बात है, लेकिन वह हिंदू धर्म भी नहीं छोड़ता, इसलिए वह अप्रत्यक्ष रूप से हिंदुओं को एकजुट करने का कार्य करता है, जो मुस्लिमों के लिए घातक है।
इसे और स्पष्ट तरीके से इस उदाहरण से समझिए : एक्स और वाई कबीलों में दुश्मनी है. एक्स कबीले का मिस्टर जेड अपने लोगों के बीच वाई कबीले की लगातार तारीफ़ करता है और एक्स कबीले को तुच्छ बताता है, साथ ही एक्स कबीले को छोड़ता भी नहीं। इससे सतर्क होकर एक्स कबीले के लोग एकजुट हो जाते हैं और गुस्से में वाई कबीले पर अपनी श्रेष्ठता साबित करते हैं। तो मिस्टर जेड इस प्रकार एक्स कबीले की भलाई के लिए ही कार्य करता है। आप भी तो ऐसा ही कुछ कर रहे हो। तो फिर आपसे बड़ा शंख कौन हुआ?
जिस तरह से आप हर किसी से फोन नंबर और पता मांग रहे हो, उससे तो ऐसा लगता है कि या तो आप उनसे फोन पर विनती करोगे कि वे अपनी जबान बंद कर लें या फिर आप उन्हें डरा-धमकाकर उनकी जबान बंद करने की सोच रहे हो। ये दोनों ही स्थितियां दुर्भाग्यपूर्ण हैं। बाकी आपकी मर्जी।
 
But I thought Hindutva and Hinduism are a way of life and as mentioned repeatedly by RSS/VHP etc all Indians regardless of their religion are Hindus by culture. So what was the need for conversion?

You thought quite right. All Indians should adopt this way of life. It gives mental freedom. So no Muslim, Christians, Budhists, Sikh or Jains. All are Hindu in India. All should adopt Hindu names and customs as it is just way of life.
 
You thought quite right. All Indians should adopt this way of life. It gives mental freedom. So no Muslim, Christians, Budhists, Sikh or Jains. All are Hindu in India. All should adopt Hindu names and customs as it is just way of life.

If Hinduism is a way of life then what does a name have to do with it? I can be called Michael Porter and still be a Hindu right? After all, its a way of life and is associated more with the philosophy rather than names and prescribed religions?
 
Another question, as Varna system is integral to Hinduism, what Varna or caste have these new converts been accommodated into?
 
INDIANS OF ALL RELIGION FOLLOW THE VARNA/CASTE SYSTEM.

Bhai saab, let us separate HINDU religion from INDIAN CULTURE. Verna system is integral to INDIAN CULTURE, not to Hindu religion, Vedo mein toh karm ke aadhar par varna likha hai, janam ke aadhar par nahi.


Another question, as Varna system is integral to Hinduism, what Varna or caste have these new converts been accommodated into?
 
Pyar se, sahi baat acche dhang se rakhi hai. Nice :)


समझदार, अनुभवी आदमी जब इस तरह की बातें करता है तो बहुत ही दुख होता है। प्रमाणों से या अच्छे तर्कों से साबित कर दो| विचारों के आदान-प्रदान में तार्किकता तो होनी ही चाहिए। अतः यहां अच्छे तर्कों एवं प्रमाणों से सामने वाले का मुंह बंद करने का प्रयास करना चाहिए, न कि अनर्गल बातों से।
जो अन्य हिंदू जाट हैं, वे भी हर तरह से अन्य दूसरे धर्मों को मानने वाले जाटों से बेहतर स्थिति में हैं। इसलिए मेरा फर्ज बनता है कि मैं हिंदू धर्म से विश्वासघात न करूं, बल्कि इसकी बेहतरी के लिए कुछ करूं। जिस पेड़ से मुझे छाया की प्राप्ति हो रही है, मैं उस पेड़ का अपमान क्यों करूं और उसकी जड़ें क्यों काटूं?
 
Another question, as Varna system is integral to Hinduism, what Varna or caste have these new converts been accommodated into?

It is not much different to Sikhism. As Sikhism denote a tag like ravidasi, chamar, gujjar, jat, baniya, bappa, kabirdasi, etc same way they would have done it here, I guess.
 
If Hinduism is a way of life then what does a name have to do with it? I can be called Michael Porter and still be a Hindu right? After all, its a way of life and is associated more with the philosophy rather than names and prescribed religions?

Good question howevere a name can be integral part of a particular way of life. A way of life represents a culture and how you name and on what names are based are part of culture. A language and literatures are probably most important part of a culture and they shape the opinions on which people name their kids. Michael Porter would be alien to this culture.
 
INDIANS OF ALL RELIGION FOLLOW THE VARNA/CASTE SYSTEM.

Bhai saab, let us separate HINDU religion from INDIAN CULTURE. Verna system is integral to INDIAN CULTURE, not to Hindu religion, Vedo mein toh karm ke aadhar par varna likha hai, janam ke aadhar par nahi.

True, all Indians follow a caste/class system but texts of no other religion apart from Hinduism detail and classify society in Varnas. I am not trying to show Hinduism in a negative light but stating things as I understand.

Manu smriti details and solidifies the varna/caste based differentiation. From what I understand Rig Veda mentions the Varnas as a fluid concept but it acquires more defined and hereditary status in the later Vedas.
 
It is not much different to Sikhism. As Sikhism denote a tag like ravidasi, chamar, gujjar, jat, baniya, bappa, kabirdasi, etc same way they would have done it here, I guess.

Sikhism doesn't denote a tag. Most Sikhs practicing it or we can generalize and say Sikhs do. There's a difference.

The goras converting to Sikhism in the West are not given any caste as there's no caste under the Granth sahib. But its different for Hinduism. There's an inherent varna/caste system in the religious texts of Hinduism which sanctions the caste system.
 
Back
Top