Will Honest Politics die if AAP loses Delhi Elections

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वैसे किसी ख़ास पार्टी का समर्थक या विरोधी होना बहस का अलग विषय है। एक समय था जब आप की लीक से हटकर कार्यशैली ने आम जनमानस में उम्मीद की किरण जगाई थी। लोगो को लगने लगा था शायद अब कांग्रेस और बीजेपी का विकल्प मिल गया है। परन्तु दिल्ली में अपनी पहली सरकार गठित करने के बाद इनके बचकाना और अदूरदर्शी फैसलों ने जनता का मोहभंग कर दिया।

दरअसल आप ने समाज के दो तबको पर सबसे ज्यादा असर डाला। एक है निम्न आय वर्गीय झुग्गी झोपडी में बसने वाला तबका जो समाज में उपेक्षित रहा है। इस तबके की शायद ही कभी किसी ने सुध ली होगी। इसी तबके ने आप को हाथो हाथ लिया।
दूसरा बुद्धिजीवी नौकरीपेशा वर्ग जो समाज में रुतबा हासिल करने के लिए छटपटा रहा था। उसने आप के जरिये अपनी राजनितिक आकांक्षाओ को अमलीजामा पहनाया। ज्यादातर आप उम्मीदवार समाज के उसी रिटायर्ड या नौकरीपेशा तबके से है।

जब मैं अरविन्द केजरीवाल के शुरुआती सफ़र पर नज़र डालता हूँ तो एक चीज़ साफ़ समझ आती है। उसकी राजनितिक शैली परम्परागत राजनीति से अलग रही है। वह लोगो को एक आम इंसान की तरह बात करता हुआ, खांसता हुआ दिखाई दिया। लोगो ने उससे एक अलग तरह का जुड़ाव महसूस किया। टीवी पर राजनितिक खबरों को देखते हुए अपने दांत पीसने वाले मध्यम वर्गीय तबके को जैसे उसने आवाज़ दे दी थी।

जो आभामंडल केजरीवाल ने अपने चारो तरफ बनाया था वह उसके एक गलत निर्णय ने झटके से तोड़ दिया।

अब उसकी राजनीति बदल चुकी है। वो उस परम्परागत राजनीति का हिस्सा बन चुका है जो पिछले कई सालो से कांग्रेस और बीजेपी करती आई है।
उसे भी अल्पसंख्यक वोटो की चिंता सताने लगी है। वो मीडिया से इंटरव्यू करते वक्त अपनी इमेज का ध्यान रखता है। उसे बैकग्राउंड में शहीदेआज़म भगत सिंह का फोटो चाहिए। लेकिन वो ऐसा देशभक्त है जो इतना तर्कशील है कि देश के एक हिस्से को रायशुमारी कराकर पडोसी देश को देने के लिए आमादा है। एक छोटी सी नीली कार कब एसयूवी कार बन गयी, वो मेट्रो ट्रेन कैसे एक झटके में परायी हो गयी कुछ पता ही नहीं चला। शायद उसका जमीर इतना कमजोर था कि उसने राजनीति के कीचड में बहुत जल्दी घुटने टेक दिए। अब उसे अल्पसंख्यक वोटो के लिए किसी मौलवी से अपील करवाना भी गलत नहीं लगता। हर चीज़ में पारदर्शिता का दंभ भरने वाले को हर तरीके से मिला चंदा मंज़ूर है। सादगी की मूर्ति कब आम से खास हो गयी पता ही नहीं चला।

दिल्ली चुनाव के नतीजें चाहे कुछ भी रहे पर इतना तय है कि न तो वो ईमानदारी न वो सच्चाई ना वो अच्छाई मिलेगी जिसकी कल्पना हम सभी ने अन्ना आन्दोलन के वक़्त की थी।

क्या इस आम आदमी को फिर कोई केजरीवाल मिलेगा जो अपनी ईमानदारी पर अडिग रहेगा। पता नहीं कब तक यह प्रश्न अनुत्तरित रहेगा।
 
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राजनीतिक नफे-नुकसान की परवाह किए बिना ईमानदारी और सच बोलने का चलन अरविंद ही लेकर आया है। इसे पिछले चुनाव में सबने पसंद भी किया क्योंकि तब लक्ष्य कांगेस को हराना था... पर अब एक साल में देश की राजनीति में बदलाब आया, सत्ता मे बदलाब हुआ, कई अच्छे कार्य हुए .. और अच्छा होने की उम्मीद की किरण-पुंज अभी भी विद्यमान है... कांग्रेस दूर दूर तक पता नही |तो इस बदली स्थिति "आप" ने भी अपने आप के बदला है, जिसमें सुर से सुर मिलाने पर आज कुछ लोगों का हाज़मा खराब हो सकता है.... साथ हे कुछ एकों को कोई न कोई सुर तो चाहिए ...... पर हकीकत मे ......"आपने" सभी तीसमारखाओं, का दम फुला कर रख दिया है बंदे में दम है..............

वह अलग बात है कि आजकल जैसे जैसे "दलाल पथ" (दिखावा, मार्केटिंग, काल्पनिक)की रौनक बढ़ती दिख रही है..... उसी तेजी से खेत-खलिहान और किसान( ईमानदारी, कार्यशीलता, वास्तविक) नेपथ्य मे जाता दिख रहा है....आज हमें आधुनिक ईमानदारी और देशभक्ति की नई खुराक "मीठी गोली" सी अच्छी लगती है, और गुड, गोबर और काड़ा, दादी की यादों के साथ ही ओझल हो रहे है..... हम अपनी नाक के लिए पोस्ट पर पोस्ट ठोक रहे है...
अन्ना का नाम लिखने से बात और पोस्ट का बजन बढ़ जाता है.... कल अन्ना ने अपने ब्लाग पर सरकार की खिचाई की है, और कहा है कि नया भूमि अधिग्रहण बिल किसान विरोधी है.....भूमी अधिग्रहण कायद्यामुळे कोणाचे भले होणार? ( भूमि अधिग्रहण बिल से किसी का भला होने वाला नही है...) लगता है अन्ना जी ......असली किसान नही है...विरोधियों भाषा बोल रहे है.... उन्हे पता नही है यह बिल विकासोन्मुखी है .... यदि अन्ना को अपना नाम बरक़रार रखना है तो किरन जी पाठ लेना चाहिए अथवा जाटलेंड पर आना चाहिए ....


http://annahazarethinks.blogspot.in/2015/02/blog-post.html
 
Bhai kuch bhi ho. Kezriwal ne to kamal hi kar diya. BJP ka aisa burahaal hua bechare saare ministers aur saari BJP delhi mei lagi padi hai. pata hai Delhi haare to UP, Bihar bhi gaye. Kezriwal ki popularity ko dekh kar to aab Nitish bhi dobara se Bihar ke CM banne ki tayari mei aa gaye hain. Jo ki ek dum sahi hai. Nahi to opposition parties ka koi role hi nahi reh jata politics mei.

kaafi maja aaya piche kuch dino mei Delhi ki election coverage ko dekh kar. khair jo bhi ho. ye to ab janta ko decide karna hai ki kaun badiya hai doosre se.

lekin haan, Kezriwal ne BJP ke ghutne tikwa diye is election mei, result chahe jo bhi. BJP stooped to the lowest level.
 
राजनीतिक नफे-नुकसान की परवाह किए बिना ईमानदारी और सच बोलने का चलन अरविंद ही लेकर आया है। इसे पिछले चुनाव में सबने पसंद भी किया क्योंकि तब लक्ष्य कांगेस को हराना था... पर अब एक साल में देश की राजनीति में बदलाब आया, सत्ता मे बदलाब हुआ, कई अच्छे कार्य हुए .. और अच्छा होने की उम्मीद की किरण-पुंज अभी भी विद्यमान है... कांग्रेस दूर दूर तक पता नही |तो इस बदली स्थिति "आप" ने भी अपने आप के बदला है, जिसमें सुर से सुर मिलाने पर आज कुछ लोगों का हाज़मा खराब हो सकता है.... साथ हे कुछ एकों को कोई न कोई सुर तो चाहिए ...... पर हकीकत मे ......"आपने" सभी तीसमारखाओं, का दम फुला कर रख दिया है बंदे में दम है..............

वह अलग बात है कि आजकल जैसे जैसे "दलाल पथ" (दिखावा, मार्केटिंग, काल्पनिक)की रौनक बढ़ती दिख रही है..... उसी तेजी से खेत-खलिहान और किसान( ईमानदारी, कार्यशीलता, वास्तविक) नेपथ्य मे जाता दिख रहा है....आज हमें आधुनिक ईमानदारी और देशभक्ति की नई खुराक "मीठी गोली" सी अच्छी लगती है, और गुड, गोबर और काड़ा, दादी की यादों के साथ ही ओझल हो रहे है..... हम अपनी नाक के लिए पोस्ट पर पोस्ट ठोक रहे है...
अन्ना का नाम लिखने से बात और पोस्ट का बजन बढ़ जाता है.... कल अन्ना ने अपने ब्लाग पर सरकार की खिचाई की है, और कहा है कि नया भूमि अधिग्रहण बिल किसान विरोधी है.....भूमी अधिग्रहण कायद्यामुळे कोणाचे भले होणार? ( भूमि अधिग्रहण बिल से किसी का भला होने वाला नही है...) लगता है अन्ना जी ......असली किसान नही है...विरोधियों भाषा बोल रहे है.... उन्हे पता नही है यह बिल विकासोन्मुखी है .... यदि अन्ना को अपना नाम बरक़रार रखना है तो किरन जी पाठ लेना चाहिए अथवा जाटलेंड पर आना चाहिए ....


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Anna's blog in english on the ordinance brought by the current government: http://annahazarethinks.blogspot.in/2015/02/land-acquisition-act-2013.html
 
AAP ne Imam Bukari ka support tukara diya. Bole ki Pakistan ke pm ko bhulne wala support nhi chiye.


BJP ne ram Rahim ke Pher padkar uska support manga.
 
भूमि अधिग्रहण के मामले मे यह सरकार किसानो का इससे ज्यादा नुकसान नहीं कर सकती थी | किसानो का दुर्भाग्य है कि इस कानून के परिपेक्ष मे कुछ लोग सरकार के साथ खड़े है | यह सही है कि किसानो को इस धोखे से बचने का रास्ता मिलना आसान नहीं है | किसान का कितना दुर्भाग्य है कि विकास के नाम पर उसको बली का बकरा बनाया जा रहा है और वह मिमियाए तो भी किसके सामने, क्या उनके सामने जिसके अच्छे दिनो के आश्वासन पर किसान ने वोट दिया ओर बदले मे चुपके से पेट पर लात मारदी या अपने देश के अन्य नागरिकों के सामने जिनको सरकार ने कोड़ियों के भाव भूमि देने का रास्ता दिया है |
कुछ भी हो किसान को अपना पक्ष रखने का हक है | इसके लिए देखते है किसान किस प्रकार तैयारियाँ करेगे, इक्कठे हो पाएगे या जाती, धर्म पार्टी राज्य मे बट कर बैठे रहेंगे |

धन्यवाद
 
It is cheers for you but for Local Jats of Delhi it will be disastrous , first the Jobs of Locals were taken away because of anti local policy of Congress , now AAP which headed by Baniya and dominated by persons from Poorab , Bihar will snatch the property of local Jats , to get the revenue they will not touch Baniya , like Mughal they will target the Local Jats properties, they will put heavy taxes on their property which is only their source of livelihood , Locals Jats of Delhi should prepare for the worst.


JIt, ibb to prachar karna bandh karde!
All exit polls suggest a AAP party Govt!

Cheers!
 
It is all politics of AAP. What Kejri was doing at Nizamu deen Darga few days back, being from Haryana he never visited any shrine but find time for Nizammudin Darga. Have u seen him visiting Gurgaon Mata temple / Beri Temple / Kalka Mata temple and others in Haryana.


AAP ne Imam Bukari ka support tukara diya. Bole ki Pakistan ke pm ko bhulne wala support nhi chiye.


BJP ne ram Rahim ke Pher padkar uska support manga.
 
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