Nanhi Pujarin: very simple poem by Majaz
(posting again as suggested by Jit)
एक नन्ही मुन्नी सी पुजारन
पतली बाहें, पतली गर्दन
भोर भये मंदिर आई है
आई नहीं है, माँ लायी है
वक़्त से पहले जाग उठी है
नींद भी आँखों में भरी है
ठोड़ी तक लट आयी हुई है
यूँही सी लहराई हुई है
आँखों में तारों सी चमक है...