एक बार रलदू की माँ उसके कमरे धोरे ते जावा थी...
उसने देखा की खाट पे चादर बदिया डाल्या विच री थी... अर सारा सोधा बदिया डाला पैक था...
उसने देख्या खाट पे एक लिफाफा पडया था... और लिखा माँ तेरे लिए इसमें कुछ है...
रलदू की माँ ने वो लिफाफा ठाया अर पड़ना सुरु कर दिया... दोनु हाथा में पकड़ के...
Ek kavita "इन्सानी कुत्ते"
Ek kavita "इन्सानी कुत्ते" gor te parhyo balko..
कोर्ट में एक कसूता मुकदमा आया
एक सिपाही एक कुत्ते नै बांधैं ल्याया
सिपाही नै जब कटघरे में आ कै कुत्ता खोल्या
कुत्ता रहग्या चुपचाप, मुँह-तैं कुछ ना बोल्या
...
नुकिले दाँदां में कुछ खून-सा नज़र आवै था
चुपचाप था...