काली घटा उमड़ती आवे ,
दिन मैं होगी रात जणू
रूसी सजनी , भी साजन तैं ,
सोचे कर्लयुं बात जणू
बूँद पड़ी सारा चो धू गया ,
आज कसूता मी बरसय
गित्वादे में गोस्से भीजे ,
इंधन अल्ला न्यारा होगया
रोटी पौन , आग बाले न ,
चूले ऊपर खडा होगया
पानी देख पर भूख भाज रही ,
आज कसूता मी बरसया
पशु पखेरू नाच उठे...