इस कविता के लेखक है "ज्ञानी राम शःत्री " जी है , इनका जनम जींद जिले के अलेवा गाव् में हुआ , इन्होने अनेक हरयाणवी रचनाये लिखी ...कहीं ये कविता पढ़ी थी अच्छी लगी तो यहाँ लिख रही हूँ ......
उथल पुथल मचगी दुनिया माह , निर्धन लोग तबाह होगये
कोए चीज़ न सस्ती मिलती, सबके उच्चे भा होगये
असली...