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    I was a hindu!!!!

    I don't know aapne "Buddhism" ko kyon daal liya is lekh mein, maine to uska jikra bhi nahin kiya but fir bhi daal liya hai to aapse jaanna chahunga ki aapne buddhism kitna padha hai? At least maine itna to buddhism ke baare mein jaroor jana hai ki jo yah 17 points hain inmen se most of point...
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    I was a hindu!!!!

    Hawa Singh Sangwan sir ki researches padhiye, "Asali Lutere Kaun" aur unki anya researches mein bhi yah baat unhonen batai hai.... aur mere khyal se jitna serious ho ke unhonen yah baat find out kari hogi, koi moorkh jat hi hoga jo unki research ko baseless bol dega.... unki research hai mera...
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    जाटों को 'चचनामा' में ‘चांडाल’ कहने के पीछे का

    Is duniya ke ander research ka principal yah hota hai ki aapse pahle jisne jo research kar rakhi ho usko base bana ke apni baat kahi jaaye aur wahi maine kiya hai..... jaise aap chaah rahe hain na ki nahin har koi apni research ke liye zero se saari history khangaale, aise to fir world mein naa...
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    जाटों को 'चचनामा' में ‘चांडाल’ कहने के पीछे का

    "Rajput" shabd na to "raja ke putra" aur na hi ek caste ke point of view se "mount aaboo" yagya se pahle use hua.... hua ho to thanks for bringing the text, scripture you have read.
  5. P

    जाटों को 'चचनामा' में ‘चांडाल’ कहने के पीछे का

    Which hindu scripture? Please bring the proof which you have read in this regard and making reason for your say.... thanks!
  6. P

    जाटों को 'चचनामा' में ‘चांडाल’ कहने के पीछे का

    2-3 baaten hain yahaan: 1) mere khyal se maine aapki baat ka jwaab ooper de diya hai, lekin aapko yah kahne mein to jhijhak nahin ki yah bhramak mat kahiye parntu doosri taraf aap itni si bhi mehnat karne ko ready nahin ki ek "Chachanama" book ko hi padh leven. Maine mere tathya ko...
  7. P

    I was a hindu!!!!

    और क्योंकि मुझे आजतक इन बातों के जवाब नहीं मिले, इसलिए मैंने मेरा धार्मिक-आध्यात्मिक-सामाजिक पहचान पत्र बनाया है| अगले कमेंट में दाल रहा हूँ इसकी एक प्रति| अब किसी जाट भाई में ज्ञान-तर्क क्षमता होवे तो मुझे कन्विंस करे कि मेरे भाई आप भटके हुए हो, यह लो आपकी सारी बातों के उत्तर और बने रहो "हिन्दू"|
  8. P

    I was a hindu!!!!

    यह बिंदु जाटों की लाइफ का कोड ऑफ़ कंडक्ट यानी कल्चर रहे हैं: 1) घर में लड़का होने पे "घंटी" नहीं अपितु "थाली" बजाना| 2) "हो गया मठ", "मर गया मठ", "मार दिया मठ" की कहावत आज भी जाटों के यहां होना| 3) सदियों से विधवा विवाह जाटों के यहां का होना| 4) जाट बहुल इलाकों में देवदासी प्रथा का ना होना| 5)...
  9. P

    I was a hindu!!!!

    जब 1931की जनगणना हुई थी, तब सर छोटूराम ने कहा था कि वो हिन्दू नहीं हैं| चाहें तो आर टी आई लगवा के पूछ लीजिये, ओरिजिनल रिकार्ड्स में आज भी उनका धर्म "आर्य" लिखा हुआ है "हिन्दू" नहीं|
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    जाटों को 'चचनामा' में ‘चांडाल’ कहने के पीछे का

    राजपाल जी थोड़ी मेहनत खुद भी कर लीजिये; मैंने सरदार प्रताप फौजदार और डी. आर. चौधरी जैसे महानुभावों का हवाला देते हुए बात लिखी है और आप पेज नंबर पूछ रहे हैं| इनकी भी बात का विश्वास नहीं होता तो फिर तो आपको चचनामा उठा के ही पढ़नी पड़ेगी| और पेज नंबर एक हो तो बताऊँ, आप चचनामा उठा के पढ़िए आपको उसमें कई...
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    जाटों को 'चचनामा' में ‘चांडाल’ कहने के पीछे का

    जाटों को 'चचनामा' में ‘चांडाल’ कहने के पीछे का जाटों को 'चचनामा' में ‘चांडाल’ कहने के पीछे का असली मर्म!: हरियाणा कहिये या खापलैंड कहिये, यहाँ एक जुमला है "चांडाल-चौकड़ी"; जो कि अमूमन ऐसे लोगों के समूह के लिए बोला जाता है जो आमभाषा में या तो "कढ़ी-बिगाड़" की श्रेणी में आते हैं या अपने हठ की...
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    जाट-जाटणी जो होवै तो सो कहलावै!

    जाट-जाटणी जो होवै तो सो कहलावै! जाट-जाटणी जो होवै तो सो कहलावै! जाट धर्म होवै तो सर छोटूराम कहलावै, जाट संत होवै तो धन्ना भगत कहलावै, जाट धम्म होवै तो बुद्ध कहलावै, जाटणी रण लेवे तो दादीराणी भागीरथी महारानी कहलावै, जाटणी स्वाभिमानी होवै तो दादीराणी समाकौर गठवाली कहलावै, जाटणी छत्रधारिणी होवै...
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    शर्मिला टैगोर, करीना कपूर, गौरी छिब्बर, रीन&#2

    शर्मिला टैगोर, करीना कपूर, गौरी छिब्बर, रीन&#2 शर्मिला टैगोर, करीना कपूर, गौरी छिब्बर, रीना दत्त, किरण राव: (Note: This note is basically for awaring the Jat youth and ofcourse aware people like us can only do it, doesn't matter if via email route) न्यूं बता द्यो मैनै, इनमें तैं कुणसी तो...
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    आज़ादी के बाद प्रथम "असहयोग आंदोलन" की घड़

    continue from post 1...... B यह आर्डिनेंस/बिल वापिस करवाना जरूरी क्यों? 1.यह भारतीय संविधान की उन तमाम धाराओं जैसे कि article 300a का उलंघन है जो देश के हर नागरिक को सम्पत्ति रखने का, उसको अपने मनमुताबिक बेचने-खरीदने का हक देती हैं (सिवाय सरकारी व् देश व्यापी कार्यों हेतु सिर्फ सरकार...
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    आज़ादी के बाद प्रथम "असहयोग आंदोलन" की घड़

    आज़ादी के बाद प्रथम "असहयोग आंदोलन" की घड़ आज़ादी के बाद प्रथम "असहयोग आंदोलन" की घड़ी!: प्रस्तावना: 1.नया संसोधित भूमि अधिग्रहण बिल/ऑर्डिनेंस: किसानों द्वारा व्यापारिक वर्गों से "सम्पूर्ण असहयोग आंदोलन” ही नए संसोधित भूमि अधिग्रहण बिल/ऑर्डिनेंस को वापिस करवाने का सबल रास्ता है| इस संकट की...
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    के बिगड़ै सै, देखी जागी

    के बिगड़ै सै, देखी जागी के बिगड़ै सै, देखी जागी: "के बिगड़ै सै, देखी जागी" जाट समाज की सबसे बड़ी आत्मघाती परिकल्पना जो "जाटड़ा और काटड़ा अपने को ही मारे", और "जाट-जाट का दुश्मन और जाट की छत्तीस कौम दुश्मन" जैसी मानसिक प्रवृतियों का मूल है| जब तक यह पहले वाली खत्म नहीं होगी, दूसरे वाली सदा कायम...
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    दलित-हरिजन-जाट और खाप:

    दलित-हरिजन-जाट और खाप: दलित-हरिजन-जाट और खाप: ऐसा टाइटल रखने का उद्देश्य: जाट और दलित के बीच अंटी पड़ी अलगाव की खाई को पाटना| हरियाणा में जो जाट बनाम एंटी-जाट का एक अंतहीन अखाड़ा बना खड़ा है, उसके घटकों को नरम करना और और दलित और जाट को सोचने की राह पर डालना कि क्या जाट वाकई ऐसे हैं कि दलित...
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    मुझे देश की डेवलपमेंट के लिए अनाज बोना है, क&a

    मुझे देश की डेवलपमेंट के लिए अनाज बोना है, क&a मुझे देश की डेवलपमेंट के लिए अनाज बोना है, क्या आप अपनी फैक्ट्री को हटाएंगे यहां से?: समाज में आजीविका के मुख्य संसाधन चार रहे हैं, 1. धर्म, 2. प्राइमरी व्यापार (यानी कि खेती, जो कि अभी तक आधिकारिक तौर पर व्यापार घोषित नहीं है, परन्तु अब इसको...
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    भारत रत्न का भी भगवाकरण

    Farmer and Indian Civil Honor System: There should be a proper reward and honor system in agriculture which should entail from root level to national level like for and in other working classes http://www.nidanaheights.com/choupal-civilian-honor.html
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    अजगर की फूट पर पनपती राजनीति

    continue from post 1: ........ विवेचना: तो आखिर इस अध्यादेश को जिसे पिछली यूपीए सरकार ने मात्र एक साल पहले ही पास किया था, इसको तोड़ने हेतु इस सरकार के पास इतना हौंसला कहाँ से आया? हौंसला आया अजगरों की आपसी फूट से| हौंसला आया अजगरों द्वारा सामूहिक ना बन अपने-अपने स्वार्थों की राजनीति करने...
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