कुछ सुखे जलपान हमारी बस्ती में।
सुपली भर है धान हमारी बस्ती में।
हवा देखकर आज यहाँ शर्मिंदा है
टूटे छप्पर छान हमारी बस्ती में।
मूँह में राम बगल में छुरी जो रखते वे
पाते हैं सम्मान हमारी बस्ती में।
पुतले रोज जलाते लेकिन डरते भी
रावण से भगवान हमारी बस्ती में।
फैशन में गुमराह हुए थे बच्चे...