एक बार की बात है हरियाने में बाढ़ आ गी ते
ताऊ अपना होका ठा के एक टीले पे जा कर
बैठ गया,हुक्का पीवे अर बाढ़ के नजारे लेन
लाग रह्या,ताऊ न देखा कोए आपणी भैंश
खोल के ले जान लाग रह्या है अर कोए
अपनी पीठ पे नाज़ की बोरी ठा ऐ भाज
रह्या है ,अर कोए आपणी सुन्दुकड़ी ने सिर पे
ले ऐ चाल रह्या है ,अर कोए
कपड़ा की...