लखमीचंद : हरियाणवी रचनाएँ
लेणा एक ना देणे दो दिलदार बणे हांडै सैं
मन मैं घुण्डी रहै पाप की यार बणें हांडैं सैं
नई-नई यारी लागै प्यारी दोष पाछले ढक ले
मतलब खात्यर यार बणें फेर थोड़े दिन में छिक ले
नहीं जाणते फर्ज यार का पाप पंक में पक ले
कैं तैं खाज्यां धन यार का ना बाहण बहू नै तक ले
करें...