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  1. B

    Shayri (Continued)

    एक नज़्म हर तरफ अपने को बिखरा पाओगे आइनों को तोड़ कर पछताओगे जब बदी के फूल महकेंगे यहाँ नेकियों पर अपनी तुम शरमाओगे सच को पहले लफ्ज़, फिर लब देंगे हम तुम हमेशा झूठ को झुठलाओगे फैलता जायेगा सहरा-ए-सुकूत दूर की आवाज़ बनते जाओगे सारी सिम्ते बेकशिश हो जायेगी घूम फिर कर फिर यही आ जाओगे 'रूह' की...
  2. B

    Whom to Vote in Haryana Assembly Elections, 2014

    May I have a single/practical logic behind your point of view.
  3. B

    Shayri (Continued)

    "जो भी आता है बताता है नया कोई इलाज बट न जाये तेरा बीमार मसीहाओं में"
  4. B

    Shayri (Continued)

    कुछ तो कर आदाब-ए-महफ़िल का लिहाज़, यार ! ये पहलू बदलना छोड़ दे.
  5. B

    Shayri (Continued)

    चुभें आँख़ों में भी और रुह में भी, दर्द की किरचें मेरा दिल इस तरह तोड़ो के आईना बधाई दे
  6. B

    Shayri (Continued)

    भूले हैं रफ़्ता-रफ़्ता उन्हें मुद्दतों में हम किश्तों में ख़ुदकुशी का मज़ा हमसे पूछिए आगाज़-ए-आशिक़ी का मज़ा आप जानिए अंजाम-ए-आशिक़ी का मज़ा हमसे पूछिए
  7. B

    Shayri (Continued)

    बस इक झिझक है यही, हाल-ए-दिल सुनाने में कि तेरा ज़िक्र भी आयेगा इस फ़साने में इसी में इश्क़ की क़िस्मत बदल भी सकती थी जो वक़्त बीत गया मुझ को आज़माने में
  8. B

    Shayri (Continued)

    "हुस्न तेरी इन्तिहा, इश्क़ मेरी इन्तिहा तू भी अभी नातमाम, मैं भी अभी नातमाम"
  9. B

    Shayri (Continued)

    Classic. Very Nice!
  10. B

    Shayri (Continued)

    कृष्ण बिहारी "नूर" की कुछ पंक्तियाँ पेशे ख़िदमत हैं: "बस उसकी मांग में सिंदूर भर के लौट आए हमारा अगले जनम का चुनाव ऐसा था फिर उसके बाद झुके तो झुके ख़ुदा की तरफ़ तुम्हारी सिम्त हमारा झुकाव ऐसा था सिम्त = ओर, तरफ ज़बां से कुछ न कहूंगा, ग़ज़ल ये हाज़िर है दिमाग़ में कई...
  11. B

    Shayri (Continued)

    "किस किस अदा से तूने, जलवा दिखा के मारा आज़ाद हो चुके थे, बन्दा बना के मारा पहले बना के पुतला, पुतले में जान डाली फिर उसको ख़ुद, मौत की सूरत में आ के मारा आँखों में तेरी ज़ालिम, छुरियाँ छुपी हुई हैं देखा जिधर को तूने, पलकें उठा के मारा ग़ुंचों में आ के महका, बुलबुल में जा के चहका इस को हँसा के...
  12. B

    Shayri (Continued)

    "अब मिलेंगे उसे तो खूब रुलाएंगे ‘फ़राज’ सुना है उन्हें रोते हुए लिपट जाने की आदत है"
  13. B

    Shayri (Continued)

    इलाही कैसी-कैसी सूरतें तूने बनाई हैं, हर सूरत कलेजे से लगा लेने के क़ाबिल है। ये दिल लेते ही शीशे की तरह पत्थर पे दे मारा, मैं कहता रह गया, ज़ालिम मेरा दिल है, मेरा दिल है । हज़ारों दिल मसल कर पाँवों से, झुँझला के फ़रमाया, लो पहचानो, तुम्हारा इन दिलों में कौन सा दिल है ।
  14. B

    Meri dadi ko maara, mere baap ko maara, shayad mujhe bhi maar de

    Welcome Dr. U r here after a long gap, if I remember. Anyway, thanx to be with us. Thanx also for Nice n positive comments.
  15. B

    Shayri (Continued)

    Singh Saheb! "न तुम होश में हो, न हम होश में हैं चलो मयकदे में , वहीं बात होगी"
  16. B

    Shayri (Continued)

    बेशक थोड़ी सी लंबी है, मगर ये नज़्म मुझे बहुत अच्छी लगी। Unfortunately इसके Writer का नाम भी मैं पता नहीं कर पाया। मगर हम इसका लुत्फ जरूर उठा सकते हैं। पेश है. . . . . "उठके कपडे बदल, बाहर निकल जो हुआ सो हुआ रात के बाद दिन, आज के बाद कल जो हुआ सो हुआ जब तलक सांस है, भूख है प्यास है ये ही...
  17. B

    Shayri (Continued)

    Kadian Saheb! Excellent! बहुत दिन बाद Exclusive चीज हाथ लगी है। "हुए इस कदर मुहज़्ज़ब, कभी घर का मुँह न देखा कटी उम्र होटलों में, मरे अस्पताल जाकर" मुहज्जब = सभ्य, शिष्ट, Civilized
  18. B

    Shayri (Continued)

    "बिना लिबास के आये थे इस जहाँ में एक कफ़न की ख़ातिर इतना सफ़र करना पड़ा"
  19. B

    Shayri (Continued)

    Dear Sir इतना ही खुशकिस्मत काफी हूँ कि ये मुझे समझ आते हैं और मेरे Collection में हैं। लिखना तो - तौबा-तौबा. और कई बार ये भी होता है कि जहां ये मुझे मिलते हैं वहाँ Writer का नाम नहीं दिया होता। और कई बार मैं खुद भी Writer का नाम न लिखने की भूल करता हूँ।
  20. B

    Shayri (Continued)

    अँधेरे को उजाले का, सुबह को रात का डर है, जिन्होंने मूंद ली आखें, उन्हें किस बात का डर है ? बहुत सच बोलता है ये, इसे जल्दी ज़हर दे दो, सियासत को ज़माने में फ़क़त सुकरात का डर है।
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