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  1. S

    Shayri (Continued)

    मैं जज्बाता के दलदल में धंसता जा रह्या सूं कहणा तो बहुत कुछ सै पर कह नही पा रह्या सूं तू दिल पै अपणे हाथ धर के खुद तै जवाब दे मैं जिकरा बार-बार किन बातां का ठा रह्या सूं कोए और स्यामी होता तो कर लेता फैंसला मुद्दत तै मैं तो अपणे आप तै टकरा रह्या सूं तैने दर्द किते दिखे सै तो मलहम बणके...
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