Gazals "The Finest Ever"

Tum Poocho............

Tum poocho or mai na batau, aise to halaat nahi,
Ek jara sa dil toota hai, Or to koi baat nahi !

Gum ke andhiyaare mey, tujhko apna saathi kyu samjhu,
Tu fir Tu hai, Mera to saya bhi marey saath nahi !

Tum poocho or mai na batau aise to halaat nahi..............

Kisko khabar thi, saanvle badal bin barse ud jaayenge,
Saavan aaya, lekin apni kismat mey barsaath nahi !

Ek jara sa dil toota hai or to koi baat nahi.....................

Toot gaya jab dil to fir ye, saans ka nagma , kya maane,
Goonj rahi hai kyu sahnaayi jab koi baraat nahi !

Tum poocho or mai na batau, aise to halaat nahi............


" Vo ek baat jo Moju-E-Guftgu banti !
Mile jo aap, Kambakht yaad hi na rahi !!"
 
Last edited:
Bahut hi umada....
Extremely beautiful Gazal, Nidhi. Thanks a lot for sharing it .... :) :) :)





Tum poocho or mai na batau, aise to halaat nahi,
Ek jara sa dil toota hai, Or to koi baat nahi !

Gum ke andhiyaare mey, tujhko apna saathi kyu samjhu,
Tu fir Tu hai, Mera to saya bhi marey saath nahi !

Tum poocho or mai na batau aise to halaat nahi..............

Kisko khabar thi, saanvle badal bin barse ud jaayenge,
Saavan aaya, lekin apni kismat mey barsaath nahi !

Ek jara sa dil toota hai or to koi baat nahi.....................

Toot gaya jab dil to fir ye, saans ka nagma , kya maane,
Goonj rahi hai kyu sahnaayi jab koi baraat nahi !

Tum poocho or mai na batau, aise to halaat nahi............


" Vo ek baat jo Moju-E-Guftgu banti !
Mile jo aap, Kambakht yaad hi na rahi !!"
 
Last edited:
Dagh Dehalavi

डरते हैं चश्म-ओ-ज़ुल्फ़, निगाह-ओ-अदा से हम
हर दम पनाह माँगते हैं हर बला से हम

माशूक़ जाए हूर मिले, मय बजाए आब
महशर में दो सवाल करेंगे ख़ुदा से हम


गो हाल-ए-दिल छुपाते हैं पर इस को क्या करें
आते हैं ख़ुद ख़ुद नज़र इक मुबतला से हम

देखें तो पहले कौन मिटे उसकी राह में
बैठे हैं शर्त बाँध के हर नक्श-ए-पा से हम
​

:) :)
 
डरते हैं चश्म-ओ-ज़ुल्फ़, निगाह-ओ-अदा से हम
हर दम पनाह माँगते हैं हर बला से हम

माशूक़ जाए हूर मिले, मय बजाए आब
महशर में दो सवाल करेंगे ख़ुदा से हम


गो हाल-ए-दिल छुपाते हैं पर इस को क्या करें
आते हैं ख़ुद ख़ुद नज़र इक मुबतला से हम

देखें तो पहले कौन मिटे उसकी राह में
बैठे हैं शर्त बाँध के हर नक्श-ए-पा से हम
​

:) :)

beautiful.......... :)
 
चल मेरे साथ ही चल

चल मेरे साथ ही चल ए मेरी जान -ए -ग़ज़ल
इन समाजों के बनाए हुए बंधन से निकल , चल


हम वहाँ जायें जहाँ प्यार पे पहरे ना लगें
दिल की दौलत पे जहाँ कोई लुटेरे ना लगें
कब है बदला ये ज़माना , तू ज़माने को बदल , चल
चल मेरे साथ ही चल ए मेरी जान -ए -ग़ज़ल


प्यार सच्चा हो तो राहें भी निकल आती हैं
बिजलियाँ अर्श से ख़ुद रास्ता दिखलाती हैं
तू भी बिजली की तरह गम के अंधेरों से निकल , चल
चल मेरे साथ ही चल ए मेरी जान -ए -ग़ज़ल


अपने मिलने पे जहाँ कोई भी उंगली ना उठे
अपनी चाहत पे जहाँ कोई दुश्मन ना हँसे
छेड़ दे प्यार से तू साज़ -ए -मोहब्बत -ए -ग़ज़ल , चल
चल मेरे साथ ही चल ए मेरी जान -ए -ग़ज़ल


पीछे मत देख ना शामिल हो गुनाहगारों में
सामने देख की मंजिल है तेरी तारों में
बात बनती है अगर दिल में इरादे हों अटल , चल
चल मेरे साथ ही चल ए मेरी जान -ए -ग़ज़ल
 
Main yeh soch kar us ke dar se uthaa tha


Main yeh soch kar us ke dar se uthaa tha
Voh rok le gi mujh ko, mana le gi mujh ko
Hawaaon mein lehraata aata tha daaman
Ke daaman pakad kar bithaa le gi mujh ko
Qadm is aandaaz se uth rahe the
Ke aawaaz de kar bulaa le gi mujh ko.

Magar us ne roka na mujh ko manaya
Na daaman hi pakda na mujh ko bithaaya
Na aawaaz hi di na mujh ko bulaaya
Main aahista-aahista badta hi aaya
Yahan tak ke us se juda ho gaya ...

-Poet : Kaifi Azmi
http://www.youtube.com/watch?v=Sfl2RVWhRRE
 
Aakhri waqt hai....

Nice ghazal sung by Munni Begum.

आ भी जा के रात ढलने वाली है
किसी गरीब की मैय्यत निकलने वाली है.....

आखरी वक्त है आखरी साँस है
ज़िन्दगी की है शाम आखरी आखरी
संगदिल आ भी आज अब खुदा के लिए
लब पे है तेरा नाम आखरी आखरी
आखरी वक्त है....

कुछ तो आसन होगा ऐडम का सफर
उनसे कहना तुम्हे धुन्थ्ती है नजर
न मगर खुदारा तू अब देर कार
दे दे उनको पयाम आखरी आखरी

तौबा करता हूँ कल से पिऊंगा नहीं
मैकशी के सहारे जिऊंगा नही
मेरी तौबा से पहले मगर सकिया
दे दे फिर एक जाम आखरी आखरी
आखरी वक्त है.....

मुझको यारों ने नहला के कफन दिया
दो घड़ी भी ना बीती के दफना दिया
कौन करता है ग़म टूटते ही ते दम
दिया इंतजाम आखरी आखरी
आखरी वक्त है.....

जीते जी कदर मेरी किसी ने ना की
ज़िन्दगी भी 'रजा' बेवफा हो गई
दुनिया वालो मुबारक ये दुनिया तुम्हे
कर चले हम सलाम आखरी आखरी
आखरी वक्त है...
 
कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है !​
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !!​
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है !​
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है !!​
​
मोहब्बत एक एहसासों की पावन सी कहानी है !​
कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है !!​
यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं !​
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है !!​
​
समंदर पीर का है अन्दर, लेकिन रो नही सकता !​
यह आँसू प्यार का मोती है, इसको खो नही सकता !!​
मेरी चाहत को दुल्हन बना लेना, मगर सुन ले !​
जो मेरा हो नही पाया, वो तेरा हो नही सकता !!​
 
बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जायेगी

बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जायेगी

लोग़ बेवजह उदासी का सबब पूछेंगे
ये भी पूछेगे की तुम इतनी परेशाँ क्यूँ हो
उंगलियाँ उठेंगी सूखे हुए बालों की तरफ़
इक नज़र देखेंगे गुज़रे हुए सालों की तरफ़
चूडियों पर भी कई तंज़ किए जायेंगे
कांपते हाथों पे भी फिकरे कसे जायेंगे


लोग़ जालिम हैं हर इक बात का ताना देंगे
बातों बातों में मेरा ज़िक्र भी ले आयेंगे
उनकी बातों का ज़रा सा भी असर मत लेना
वरना चहरे के तआसुर से समझ जायेंगे
चाहे कुछ भी हो सवालात ना करना उनसे
मेरे बारे में कोई बात ना करना उनसे


बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जायेगी
 
जब नहीं आए थे तुम तब भी तुम आए थे
आँख में नूर की और दिल में लहू की सूरत
याद की तरह धड़कते हुए दिल की सूरत

तुम नही आए अभी फ़िर भी तो तुम आए हो
रात के सीने में ताब के खंजर के तरह
सुबह के हाथ में खुर्शीद के सागर की तरह

तुम नही आओगे जब फ़िर भी तो तुम आओगे
जुल्फ दर जुल्फ बिखर जायेगा फ़िर रात का रंग
शब्-ऐ-तन्हाई में भी लुफ्त-ऐ-मुलाक़ात का रंग

आओ आने की करें बात के तुम आए हो
अब तुम आए हो तो में कोनसी शै नज़र करूँ
के मेरे पास सिवा मेहर-ओ-वफ़ा कुछ भी नही
एक दिल एक तमन्ना के सिवा के कुछ भी नहीं

एक दिल एक तमन्ना के सिवा के कुछ भी नहीं !!!
:) :) :)​
 
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तुम नही आओगे जब फ़िर भी तो तुम आओगे
जुल्फ दर जुल्फ बिखर जायेगा फ़िर रात का रंग
शब्-ऐ-तन्हाई में भी लुफ्त-ऐ-मुलाक़ात का रंग​

:) :)​

बहुत खुबसूरत लाजवाब !!!

जुल्फ दर जुल्फ बिखर जायेगा फ़िर रात का रंग​
 
यादों की तरह तुम आकर यूँ चले गए ,
फिर मेरी आँखों को रुला कर चले गए .

तुम ना हमारे थे और ना हो सकोगे कभी ,
बस यही गम हमको सताते चले गए .

ना करना मोहब्बत कभी किसी से यारों ,
यही बात हम सबको बताते चले गए .

हँसते थे तुमरे साथ जो , हम भी कभी ,
ये सोच कर ए जो आंसू , तो आते चले गए .

उनका गम ही अब हमारा हमसफ़र है सायद ,
चाह था हमने उन्हें और बस चाहते ही चले गए .
 
Great..

bahut hi sundar ghazal hai Shivram Ji, seedhe saade shabdon me sab kuch kah diya,
sachai kah di. mujhe is tarah ki ghazals pasand hain jinme saral shabdon me baat kahi gai ho.
aapka bahut bahut shukriya ise yahan post karne ke liye.

यादों की तरह तुम आकर यूँ चले गए ,
फिर मेरी आँखों को रुला कर चले गए .

तुम ना हमारे थे और ना हो सकोगे कभी ,
बस यही गम हमको सताते चले गए .

ना करना मोहब्बत कभी किसी से यारों ,
यही बात हम सबको बताते चले गए .

हँसते थे तुमरे साथ जो , हम भी कभी ,
ये सोच कर ए जो आंसू , तो आते चले गए .

उनका गम ही अब हमारा हमसफ़र है सायद ,
चाह था हमने उन्हें और बस चाहते ही चले गए .
 
Naushad

न मंदिर में सनम होते, न मस्जिद में खुदा होता
हमीं से यह तमाशा है, न हम होते तो क्या होता

न ऎसी मंजिलें होतीं, न ऐसा रास्ता होता
संभल कर हम ज़रा चलते तो आलम ज़ेर-ए-पा होता

घटा छाती, बहार आती, तुम्हारा तज़किरा होता
फिर उसके बाद गुल खिलते कि ज़ख्म-ए-दिल हरा होता

बुला कर तुमने महफ़िल में हमको गैरों से उठवाया
हमीं खुद उठ गए होते, इशारा कर दिया होता

तेरे अहबाब तुझसे मिल के भी मायूस लॉट गए
तुझे नौशाद कैसी चुप लगी थी कुछ कहा होता
:) :) :)​
 
कच्चे बखिए की तरह रिश्ते उधड़ जाते हैं
हर नए मोड़ पर कुछ लोग बिछड़ जाते हैं


यूँ हुआ, दूरियाँ कम करने लगे थे दोनों
रोज़ चलने से तो रस्ते भी उखड़ जाते हैं


छाँव में रख के ही पूजा करो ये मोम के बुत
धूप में अच्छे भले नक़्श बिगड़ जाते हैं


भीड़ से कट के न बैठा करो तन्हाई में
बेख़्याली में कई शहर उजड़ जाते हैं



"निदा फाज़ली "
 
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