netrapalsingh
New member
४ दिसम्बर को राजस्थान विधानसभा का चुनाव घोषित होगये है | सभी उम्मीदवार अपना अपना भाग्य आजमाने को तैयार बैठे है किसी भी दल का पूर्ण बहुमत नजर नही आ रहा है. राजस्थान में बीजेपी और कांग्रेस के अलावा कई छोटे दल भी है जैसे बहुजन समाज पार्टी , लोक्जन्तात्रिक पार्टी (रामविलास पासवान) लोकदल (अजीत) इंडियन लोकदल (चौटाला), इनमे बहुजन समाज पार्टी का हाथी काफी मजबूत मना जा रहा है | इसकी सीटे तो कम ही है पर ये पार्टी, किसी भी पार्टी का समीकरण बिगाड़ सकता है | कांग्रेस को तो इससे नुक्सान हो ही रहा है भारतीय जनता पार्टी भे इससे अछूती नही है | कहने का तात्पर्य यही है की राजस्थान में पूर्ण बहुमत किसी भी पार्टी को मिलने की संभावना कम ही नजर आ रही है | और जिस तरीके से टिकटों का वितरण हुआ है और जिस प्रकार का विरोध पार्टीयों में देखने को मिल रहा है उसे देख कर सभी पार्टियों की पोल खुल रही है भाई भतीजावाद, पुत्र प्रेम और रिश्तेदारी ने सबके आँखों पर पट्टी बाँध दी योग्य उम्मीदवारों को अनदेखा कर दिया गया है जिसका असर बीजेपी और कांग्रेस दोनों में दिख रहा है| कांग्रेस ने शीश राम ओला, रामनारायण चौधरी, परसराम मदेरणा, जगन्नाथ पहाडिया, पंडित नवल किशोर शर्मा, आदी कई दिग्गज नेताओ के पुत्रो और पुत्रियों एवं बालम जाखड के भांजे को टिकेट दिए है इनमे से श्री महिपाल मदेरणा पुत्र श्री परसराम मदेरणा ही ऐसे प्रत्याशी दिख रहे है जो जीतने की स्थिती में है, शीशराम ओला के पुत्र श्री ब्रजेन्द्र ओला तीन बार हर चुके है पर अबकी बार शीशराम जी ने करीब पच्चीस हजार वोट जो बीजेपी के थे उन्हें झुंझुनू से पिलानी विधान सभा में जुड़वाँ दिए है जिससे पिलनी विधान सभा सीट जो कांग्रेस की पक्की मानी जाती थी अब खतरे में पड़ गयी है शीशराम जे पुत्र के जीतने की संभावना बढ़ गयी है वही भारतीय जनता पार्टी के भंवर लाल शर्मा, घनश्याम तिवारी, स्वयं वसुंधरा, अपने अपने पुत्रो, पुत्रवधुवो को टिकेट दिलवाने के फेर में लगे है और कोई भी पार्टी परिवारवाद की परम्परा से अछूती नही है|
इस प्रकार की स्थिती को देखते हूए लगता है की चुनाव में अबकी बार काफी बागी उम्मेदवार भी निर्दलीय या किसी अन्य घटक दल के साथ चुनाव में खड़े होंगे और दोनों प्रमुख पार्टी कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के लिए मुसीबत खड़ी करेंगे| इनमे से ज्यादातर नेता बहुजन समाज पार्टी के टिकेट से भी खड़े होंगे और यही स्थिती दोनों प्रमुख दलों के लिए घातक सिद्ध हो सकती है|
दोनों दलों के प्रमुख नेता इस समस्या को हल करने की कोशिश में लगे हूए है| कांग्रेस के प्रमुख वयोवर्ध नेता परसराम जी मदेरणा दिल्ली में सोनिया से मिलने आ चुके है और दोनों मिलकर इस समस्या का हल ढूंढने में लगे है उधर मानीय श्री भैरों सिंह जी शेखावत वसुंधरा से तालमेल भिड़ा कर समस्या का हल खोज रहे है|
अगर बागीयों का यही हल रहा तो हो सकता है राजस्थान का भी वही हाल हो जो उत्तर प्रदेश का हुवा था, मुलायम, बीजेपी, कांग्रेस की जगह मायावती पूर्ण बहुमत के साथ मुख्य मंत्री बनी, वही दशा राजस्थान में भी हो सकती है1वैसे राजस्थान की राजनीती और यहाँ की जनता को समझना हर किसी के बूते की बात नही है यहाँ की जनता ने जहाँ बाहरी उम्मीदवारों बलराम जाखड, देवी लाल, अजय चौटाला, धर्मेन्द्र जैसों को चुनाव जिताया है वही राजस्थान के प्रसिद्ध उद्योगपती श्री कृषण कुमार बिरला और जयपुर के महाराजा कर्नल भवानी सिंह को चुनाव में वो शिकस्त दी की वे दुबारा चुनाव लड़ने की सोच भी नही सके | श्री कृषण कुमार बिरला तो राज्यसभा से संसद में पहुँच गए पर जयपुर महाराज तो चुनाव ही भूल गए|
नेत्रपाल सिंह चौधरी
इस प्रकार की स्थिती को देखते हूए लगता है की चुनाव में अबकी बार काफी बागी उम्मेदवार भी निर्दलीय या किसी अन्य घटक दल के साथ चुनाव में खड़े होंगे और दोनों प्रमुख पार्टी कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के लिए मुसीबत खड़ी करेंगे| इनमे से ज्यादातर नेता बहुजन समाज पार्टी के टिकेट से भी खड़े होंगे और यही स्थिती दोनों प्रमुख दलों के लिए घातक सिद्ध हो सकती है|
दोनों दलों के प्रमुख नेता इस समस्या को हल करने की कोशिश में लगे हूए है| कांग्रेस के प्रमुख वयोवर्ध नेता परसराम जी मदेरणा दिल्ली में सोनिया से मिलने आ चुके है और दोनों मिलकर इस समस्या का हल ढूंढने में लगे है उधर मानीय श्री भैरों सिंह जी शेखावत वसुंधरा से तालमेल भिड़ा कर समस्या का हल खोज रहे है|
अगर बागीयों का यही हल रहा तो हो सकता है राजस्थान का भी वही हाल हो जो उत्तर प्रदेश का हुवा था, मुलायम, बीजेपी, कांग्रेस की जगह मायावती पूर्ण बहुमत के साथ मुख्य मंत्री बनी, वही दशा राजस्थान में भी हो सकती है1वैसे राजस्थान की राजनीती और यहाँ की जनता को समझना हर किसी के बूते की बात नही है यहाँ की जनता ने जहाँ बाहरी उम्मीदवारों बलराम जाखड, देवी लाल, अजय चौटाला, धर्मेन्द्र जैसों को चुनाव जिताया है वही राजस्थान के प्रसिद्ध उद्योगपती श्री कृषण कुमार बिरला और जयपुर के महाराजा कर्नल भवानी सिंह को चुनाव में वो शिकस्त दी की वे दुबारा चुनाव लड़ने की सोच भी नही सके | श्री कृषण कुमार बिरला तो राज्यसभा से संसद में पहुँच गए पर जयपुर महाराज तो चुनाव ही भूल गए|
नेत्रपाल सिंह चौधरी
Last edited: