Foreign-made 'JELLI'

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dndeswal

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एक स्टोर में कुछ garden equipment पड़े थे, एक तो ऐसा नजर आया जैसे अपनी देसी जेली हो । पर ध्यान से देखा, उसको "Garden Fork" कहते हैं । बस, बिना सोचे समझे खरीद लाया । घरवाली टोकने लगी - के हो-ग्या तेरै, के करैगा इसका ? मैने कहा कुछ नहीं, ड्राइंग रूम में रखा रहेगा और अपनी देसी जेली की याद दिलाता रहेगा । मौका मिला तो भारत भी ले चलूंगा इसको ।

इसकी शक्ल ऐसी है - नीचे देखो फोटो में ।

आपके पास किसी देसी जेली का फोटो हो तो चिपका देना यहाँ ।

भाई जेली आळे जाट (अनिल सांगवान) - सुन रहा है ना ? तुम सारे टैक्नोक्रेट बने बैठे हो - एकाध बढिया डिजाइन बनाओ जेली का, इसे बनाओ और बेचो । अपने यहां देसी लुहार खत्म होते जा रहे हैं - लेकिन जेली की demand शायद कम नहीं हुई ।




Garden%20Fork%20$%2010.00%20Day%20Code%20HT422001%20copy.jpg




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Uncle ji, Namaskaar...!!

Ha ha ha ha... uncle ji... yoh sahi lyaaye aap toh ke..

Datto... iss weekend gaam mein jaan ka program sei mera... Jelli er Cho-singgi .. donuaa ki fottu chaippunga lya k... maharey nyaar aale obbrey mein kayi khaddi dekhi thee menne ...

Chaalu raakhiyo aap iss thread ne itney.... :rock
 
Desi Luhar

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हम अपने जाट होने पर इतराते हैं पर कुछ काम या हुनर ऐसे हैं जो कुछेक दूसरी जाति के लोगों के पास हैं, हमारे पास नहीं । इसीलिये कहते हैं कि गांव वही अच्छा जिसमें सभी जाति के लोग बसते हों । हमारे बुजुर्ग हल और तलवार के धनी थे, पर ये चीजें बनाता कौन था ? पहले कोई फैक्ट्री तो थी नहीं जो ये चीजें बना कर बाजार में उतार दे और हम खरीद लायें ।

देसी लुहार भी कमाल के थे, उनके हाथ में जादू था । कोयले की भट्ठी के पास बैठकर लोहे को तपाना और घण या हथोड़े से लाल-लाल लोहे को कूटकर हमारे लिए औजार बनाना । तभी से कहावत चली है कि सौ सुनार की, एक लुहार की - लोहा गर्म है, मार दो हथौड़ा ! जेली, फरसे, दरांती, संडासी, हल की कुश, बच्चों के खेलने के लिए लोहे का पहिया (अणदी), कुल्हाड़ी, कस्सी, गेंती, कसौला, बसौला, टहलवा, फावड़ा, बल्लम, दरवाजे की अरळी, तलवार, छुरे - और भी न जाने क्या क्या । जो लुहार और खात्ती राजदरबार में रखे जाते थे वे घोड़ों के रथ और यहां तक कि तोप भी बनाते थे । राजस्थान के गाडे-लुहार अभी तक नकचूंटी, चिमटे, छलनी, तवे, कढ़ाई, तांबे-पीतल के बर्तन, हुक्के की तली आदि बनाते आये हैं जिनसे गांव और शहरी लोगों की काफी जरूरतें पूरी होती हैं । घुमक्कड़ ठठेरे गांव-गांव घूमकर पीतल-तांबे के बर्तनों की मुरम्मत करते थे, वे अपने आप में एक चलती फिरती वर्कशाप थे । अब उनका बुरा हाल है, राजस्थान के गाडे-लुहार शहरों में सड़कों के किनारे डेरा लगाये आज भी देखे जा सकते हैं । उनको फिर से बसाना समाज और सरकार का फर्ज है ।

मेरे पड़ौसी गांव में एक मुसलमान लुहार रहता था । आगे-पीछे कोई न था । बड़े बताते थे कि उसके हाथ में जादू था । जैसे औजार वह बनाता था, वे कमाल की मजबूती वाले होते थे । सन् 1947 में जब जान के लाले पड़े तो उसने भी गांव छोड़ कर पाकिस्तान जाने का मन बनाया । पर गांव वालों ने उसे जाने नहीं दिया । वह काफी बूढ़ा हो गया था, काम भी उसके बस का नहीं था । गांव वालों ने उसको सहारा दिया, उसके बुढ़ापे में उसकी मदद की और उसने वहीं पर प्राण त्यागे ।

कारीगरों की कद्र हमारे बुजुर्ग करते थे, अब वह भावना नहीं रही । बहुत सारे कारीगर गांव छोड़कर शहरों में चले गये हैं । यह हालत अच्छी नहीं कही जा सकती ।

एक कारीगरों का सरकारी महकमा होता था जो अब खत्म हो गया है या जानबूझकर खत्म कर दिया गया है । पहले सड़कें ज्यादा चौड़ी नहीं होती थी, पर उनको खूब संभाल कर रखा जाता था, यह काम करते थे 'बाराहमासिया' । जहां कहीं सड़क में गढ़ा दिखाई दिया, उसमें तारकोल, रोड़ी आदि भरकर 'थेगली' लगा देते थे । सड़कों के पास एक डंडे पर लाल झंडी लगा देते थे और काम शुरू कर देते थे । दोनों तरफ की झाड़ियों को काट कर, घास को छील कर और पेड़ों की बढ़ी हुई टहनियों को काट कर रास्ते की संभाल करते थे । एकाध ड्रम तारकोल को सड़क के किनारे आग जलाकर गर्म करते थे और सड़कों की छोटी-मोटी मुरम्मत करते थे । दोनों तरफ हर मील पर जो पत्थर लगे होते थे, उन पर रंग करके लिखाई भी करते थे । पतली सी सड़क के दोनों तरफ का कच्चा रास्ता इतना साफ सुथरा होता था कि ट्रैक्टर आदि उस पर चल सकते थे और पशुओं के रेवड़ भी आसानी से उसी सड़क के किनारे चलते थे जिससे बसों आदि को दिक्कत नहीं आती थी । यह था उन 'बाराहमासियों' का कमाल ।

सड़क के ठेकेदारों ने वह महकमा ही खत्म करवा दिया क्योंकि वे बाराहमासिये मजदूर उनके रास्ते की सबसे बड़ी रुकावट थे । जब वे सड़क को टूटने ही नहीं देते थे, तो ठेकेदारों को मुरम्मत के ठेके कैसे मिलते ? आज नतीजा सामने है । सड़कें चौड़ी हो गई हैं पर उनके दोनों तरफ का कच्चा रास्ता खत्म हो गया है । 'मील के पत्थर' मिट्टी में दब चुके हैं, साइनबोर्ड कोई लगाता नहीं । सड़कों के बिल्कुल किनारे कांटेदार कीकर खड़ी हैं । कोई मोटरसाइकल पर जा रहा हो और पीछे से कोई बड़ा ट्रक आ जाये तो उसको साइड देना मुश्किल हो जाता है, कीकरों और झाड़ियों में कौन घुसे ? और बराबर में गहरे गढे हैं जो मौत का कुंआ साबित हो रहे हैं, रोजाना दुर्घटनायें हो रही हैं । छोटे कारीगरों के सफाये का नतीजा हम आज भुगत रहे हैं
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Iss taage mein aur bhi photu chep do bhai. Jaise Jelwa, Phala(kassi), phawada, bitoda, bunga, kothada(tubewell wala), khurpa, Daranti, Gandasa, Raith(woh dhaar tej karan aal), Raith(paani nikalne ki old machine), Baangad, Lath, Mogra, Musal arr jo bhi gaama ki yaad duwaniya ND si cheez :) may be mehs ka choth ott ti chorri ;):D

DND ji agar ho koe isse photu te share karna yaha please.
 
राम राम सबने,

जेळी कि फोटु देख्ल्यो...

घर गया था तब घर पर या ही पडी थी ... लकडी के सीन्गो वाळि थी नही... नही तो मजे आ ज्यान्दे आप सबने फोटु देख के ...

थोडी और फोटुआं भी ला राखी है मैने इस ALBUM में....
http://www.jatland.com/forums/album.php?albumid=726

राम राम,
मनोज
 
Ha ha ha ha chhabdda bhi paddya sei... side mein....!!!!

Laage sei Toodi aale obrey mein kheenchi sei ya fotu Manoj !!





राम राम सबने,

जेळी कि फोटु देख्ल्यो...

घर गया था तब घर पर या ही पडी थी ... लकडी के सीन्गो वाळि थी नही... नही तो मजे आ ज्यान्दे आप सबने फोटु देख के ...

थोडी और फोटुआं भी ला राखी है मैने इस ALBUM में....
http://www.jatland.com/forums/album.php?albumid=726

राम राम,
मनोज
 
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एक स्टोर में कुछ garden equipment पड़े थे, एक तो ऐसा नजर आया जैसे अपनी देसी जेली हो । पर ध्यान से देखा, उसको "Garden Fork" कहते हैं । बस, बिना सोचे समझे खरीद लाया । घरवाली टोकने लगी - के हो-ग्या तेरै, के करैगा इसका ? मैने कहा कुछ नहीं, ड्राइंग रूम में रखा रहेगा और अपनी देसी जेली की याद दिलाता रहेगा । मौका मिला तो भारत भी ले चलूंगा इसको ।

इसकी शक्ल ऐसी है - नीचे देखो फोटो में ।

आपके पास किसी देसी जेली का फोटो हो तो चिपका देना यहाँ ।

भाई जेली आळे जाट (अनिल सांगवान) - सुन रहा है ना ? तुम सारे टैक्नोक्रेट बने बैठे हो - एकाध बढिया डिजाइन बनाओ जेली का, इसे बनाओ और बेचो । अपने यहां देसी लुहार खत्म होते जा रहे हैं - लेकिन जेली की demand शायद कम नहीं हुई ।

Jelli ke poora gaam dekh lyo uncle ji

http://www.jatland.com/forums/album.php?albumid=735

Ek purana thread bhi yaad aa gya iska tala khol ke isne bhi le aao

http://www.jatland.com/forums/showthread.php?t=17714
 
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राम राम सबने,

जेळी कि फोटु देख्ल्यो...

घर गया था तब घर पर या ही पडी थी ... लकडी के सीन्गो वाळि थी नही... नही तो मजे आ ज्यान्दे आप सबने फोटु देख के ...

थोडी और फोटुआं भी ला राखी है मैने इस ALBUM में....
http://www.jatland.com/forums/album.php?albumid=726

राम राम,
मनोज



Bhai ye sab to jaato ki dharohar hai....ji nu kare hai aak ibhi gaam mein udke jaa luuu...

tahe dil se aapka aabhari hu..:)
 
राम राम भाई ,
या फोटू तो टांगली की sae ,
जेली क तो 2 सिंग होया kara भाई.........
 
Mast baat kari aapney bhi uncle ji...Per Aunty te dar nahi laagta aapney????
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एक स्टोर में कुछ garden equipment पड़े थे, एक तो ऐसा नजर आया जैसे अपनी देसी जेली हो । पर ध्यान से देखा, उसको "Garden Fork" कहते हैं । बस, बिना सोचे समझे खरीद लाया । घरवाली टोकने लगी - के हो-ग्या तेरै, के करैगा इसका ? मैने कहा कुछ नहीं, ड्राइंग रूम में रखा रहेगा और अपनी देसी जेली की याद दिलाता रहेगा । मौका मिला तो भारत भी ले चलूंगा इसको ।

इसकी शक्ल ऐसी है - नीचे देखो फोटो में ।

आपके पास किसी देसी जेली का फोटो हो तो चिपका देना यहाँ ।

भाई जेली आळे जाट (अनिल सांगवान) - सुन रहा है ना ? तुम सारे टैक्नोक्रेट बने बैठे हो - एकाध बढिया डिजाइन बनाओ जेली का, इसे बनाओ और बेचो । अपने यहां देसी लुहार खत्म होते जा रहे हैं - लेकिन जेली की demand शायद कम नहीं हुई ।




Garden%20Fork%20$%2010.00%20Day%20Code%20HT422001%20copy.jpg




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राम राम भाई...
जेळी चार और दो सीन्गों वाळी होया कर है।

तन्गळी तो १२-१३ सीन्गों वाळी होव स...
 
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