प्रायश्चित जरुरी है !
में समझता हूँ ,एक बार इस दलित महिला (मायावती जी) को इस सबसे ऊँची कुर्सी पर बैठा ही देना चाहिए!
जैसे यहाँ ऑस्ट्रेलिया में , प्रधानमंत्री केविन रुड ने सभी आस्ट्रेलियन की तरफ से, यहाँ के मूल निवासियों के प्रति सदियों तक चले भेद भावः और ज्यद्तियोंओ के लिए ओपचारिक रूप से माफ़ी मांगी! अमेरिका में भी ओबामा को राष्ट्रपति पद पर आसीन कर अमेरिकन जनता ने अश्वेत लोगो के प्रति सदियोंओ तक चली रंग भेद और शोषण के लिए माफ़ी मांगने जैसा काम किया है ! फिर क्यों नहीं हम भारत में भी हजारों सालों तक तिरस्कार और गुलामी भोग चुके दलित समाज को कुछ सान्तवना दें और एक दलित महिला को भारतीय राजनीती सबसे ऊँचे पद पर शुशोभित कर ये संकेत दे की जातिगत भेद भावके दीन अब खत्म हुए !
खैर,महीनो बाद इस तरह की चर्चा का हिस्सा बनना एक बेहद सुखद अनुभव है ! आर के जी ने सही फरमाया है कि इस चर्चा में जिस तरह से, इतनी संख्या में नए पुराने लोगों ने हिस्सा लिया है, जाटलैंड के पुराने दीनो कि याद दिला दी !
कर्नल जगमोहन, कर्नल तेवतिया जी,राजेंदर जी, शैलेंदर हुडा जी , राज राठी जी , सुमित दहिया , पूनमजी , जीत ठक्कर, रुपेंदर, गगन गोहनिया , सिद्धार्थ, विजय, समर, अनिल आदि मित्र कितनी ही चर्चओंओ का हिस्सा रहे हैं !
बहुत सारे नए और प्रतिभाशाली मित्र, ब्रह्म , दीपिका जी , सचिन बाल्यान,विवेक गठ्वाला आदि भी इस चर्चा का हिस्सा बने ! सुमित्रा हूडा जी , कर्नल देव दहिया जी, जितेंदर हूडा , दयानंद देशवाल जी आदि कुच्छ पुराने धुरंदर इस चर्चा का हिस्सा न बन सके ! जो भी हो इस तरह कि भागेदारी जाट लैंड के लिए बहुत शुभ संकेत है !
आशा है भविष्य में भी सभी मित्रगन इस्सी तरह हिस्सा ले, जाटलैंड को जिवंत बनाये रखेंगे !
भाई गुहांडी( शैलेंदर) आपके कार्टून वाकई मस्त हैं!
खुश रहो !