jindagi

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Tujhse naraz nahi zindagi haran hoon main, tere massom sawalon se pareshan hoon main.......................jine ke liye socha hi nahi dard sambhalne honge...............muskurae toh muskarane ke karz utarne honge!!!
 
Ye Zindagi hai ek jua kabhi jeet bhi kabhi haar bhi
yahan dushmano ki bheed mein mil jayenge tujhe yaar bhi
tu khelta ja khelta ja bajiyo pe bajiya
 
:rockjindagi bewafa hai ik din thukaraygi
maut mehbuba hai sth lekar jaygi


कभी ज़िन्दग़ी को हाथ से फिसलते देखा है?

कोई वज़ह नहीं कि जी न सकें,

हाथ में रखा जाम पी न सकें।
मजबूत हाथों के होते भी,
फिसलन की वजह से
कभी प्याले को हाथ से गिरते देखा है?

कभी ज़िन्दग़ी को हाथ से फिसलते देखा है?
 
apno ne sath chod dia
zandgi ne bhi muhk mod liye
kya pata kha ye zandgi kha le jaygi
per ek din asia jarur ayega jis din sth le jaygi

ज़िन्दगी की जंग में जाँबाज़ होना आ गया
मौत को तकिए के नीचे रख के सोना आ गया

ज़िन्दगी तेरे मदरसे में यही सीखा हुनर
मोम के धागे में अंगारे पिरोना आ गया

और तो होना था क्या इन मुश्किलों में दोस्तो!
पीठ पर चट्टान जैसा बोझ ढोना आ गया

बाद मुद्दत के गया था आज मैं भाई के घर
उसकी आँखें नम हुईं मुझको भी रोना आ गया.
 
कभी ज़िन्दग़ी को हाथ से फिसलते देखा है?

कोई वज़ह नहीं कि जी न सकें,
हाथ में रखा जाम पी न सकें।
मजबूत हाथों के होते भी,
फिसलन की वजह से
कभी प्याले को हाथ से गिरते देखा है?

कभी ज़िन्दग़ी को हाथ से फिसलते देखा है?


क्या कभी जिन्दगी को मौत से मिलते देखा है ?


क्या वजह है भंवरे को सब कुछ पता है .
की अन्दर जाऊंगा फूल के तो ये मेरी खता है .
तडफता रहता है रात भर मौत के इन्तेज़ार में
क्या उसकी तड़फ देखकर फूल को सुबह से पहले खिलते देखा है ?


क्या कभी जिन्दगी को मौत से मिलते देखा है ?
 
क्या कभी जिन्दगी को मौत से मिलते देखा है ?


क्या वजह है भंवरे को सब कुछ पता है .
की अन्दर जाऊंगा फूल के तो ये मेरी खता है .
तडफता रहता है रात भर मौत के इन्तेज़ार में
क्या उसकी तड़फ देखकर फूल को सुबह से पहले खिलते देखा है ?


क्या कभी जिन्दगी को मौत से मिलते देखा है ?

दाने तक जब पहुँची चिड़िया
जाल में थी
ज़िन्दा रहने की ख़्वाहिश ने मार दिया ।
 
ज़िन्दगी की जंग में जाँबाज़ होना आ गया
मौत को तकिए के नीचे रख के सोना आ गया

ज़िन्दगी तेरे मदरसे में यही सीखा हुनर
मोम के धागे में अंगारे पिरोना आ गया

और तो होना था क्या इन मुश्किलों में दोस्तो!
पीठ पर चट्टान जैसा बोझ ढोना आ गया

बाद मुद्दत के गया था आज मैं भाई के घर
उसकी आँखें नम हुईं मुझको भी रोना आ गया.

कहते है चार दिन की पर एक दिन की ही जिंदगानी है .
सुबह का बचपन और दोपहर की जवानी है .
शाम को बुडापा और फिर काली अँधेरी रात में
मौत के आगोश में सोकर दुनिया छोड़ जानी है .
 
दाने तक जब पहुँची चिड़िया
जाल में थी
ज़िन्दा रहने की ख़्वाहिश ने मार दिया ।

शुक्र है वो किसी ख्वाइश में तो मरी .
कुछ तो खवाइश दिल में लिए ही चले जाते है
 
शुक्र है वो किसी ख्वाइश में तो मरी .
कुछ तो खवाइश दिल में लिए ही चले जाते है


ख्वाहिशों को दिल में लेकर मरना जुर्म है
मरने वालों की आखिरी ख्वाहिश पूछते हैं
मौत की आगोश में जाने से पहले
वो भी ज़िन्दगी के लिए जूझते हैं
 
ख्वाहिशों को दिल में लेकर मरना जुर्म है
मरने वालों की आखिरी ख्वाहिश पूछते हैं
मौत की आगोश में जाने से पहले
वो भी ज़िन्दगी के लिए जूझते हैं


ना पूरी होने वाली ख्वाइश को साथ ले जाना ही भला है .
पूछते रहे लोग आखरी ख्वाइश नहीं बताना भी एक कला है .
ख्वाइश पूरी हो नही सकती बताने से भी इसीलिए तो वो जिन्दगी से चला है . .
 
Bhai ,

Ek dum superb ....mind blowing....

Anjali ji is also too good....


wish both of u best luck & loads of happiness......




ना पूरी होने वाली ख्वाइश को साथ ले जाना ही भला है .
पूछते रहे लोग आखरी ख्वाइश नहीं बताना भी एक कला है .
ख्वाइश पूरी हो नही सकती बताने से भी इसीलिए तो वो जिन्दगी से चला है . .
 
ज़िन्दगी की जंग में जाँबाज़ होना आ गया
मौत को तकिए के नीचे रख के सोना आ गया

ज़िन्दगी तेरे मदरसे में यही सीखा हुनर
मोम के धागे में अंगारे पिरोना आ गया

और तो होना था क्या इन मुश्किलों में दोस्तो!
पीठ पर चट्टान जैसा बोझ ढोना आ गया

बाद मुद्दत के गया था आज मैं भाई के घर
उसकी आँखें नम हुईं मुझको भी रोना आ गया.
jindgi ek khel hai

isse khelna ana chiye

haar gye to dunia tumpe hasegi

jeet gye to dunia tumse jalegi
 
Ye Zindagi hai ek jua kabhi jeet bhi kabhi haar bhi
yahan dushmano ki bheed mein mil jayenge tujhe yaar bhi
tu khelta ja khelta ja bajiyo pe bajiya
zandgi ke kiladi wo hote hai jo haar ke bhi haste hai

yahan dushmano ki bheed main bhi kya jane ki jarurt hai

yahan tho aapno main hi dushman mil jate hai
 
ek saheli ek paheli
ek safar ek manzil
ek maksad ek junoon
ek mazhab ek bhagwan
ek galti ek saza
ek pareeksha ek parinam
ek misal ek insaan
ek baazi ek baar
to be continued........zindagi
 
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