whatever happened to BEER..![]()
Heh heh heh heh....good one Abhimanyu!
whatever happened to BEER..![]()
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That's the only thing am scared of.![]()
But I believe good things come to those who wait..
Btw, u know what my dad said on New year's day - "Beta, Happy new year ... your time starts now!"
He gave me 2010 as deadline!
Let's see what destiny got for me in future ..![]()
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That's the only thing am scared of.![]()
But I believe good things come to those who wait..
Btw, u know what my dad said on New year's day - "Beta, Happy new year ... your time starts now!"
He gave me 2010 as deadline!
Let's see what destiny got for me in future ..![]()
Well...I was just referring to your peace and harmony thingy..
Not to scare you..but all good things do come to an end too...
....the Good things, love for life (live life king-size!), achieving self-contentment, satisfaction, finding joys in all (even smallest) of things, maintaining harmony & balance in that happy circle of life....never needs to come to an end!!!![]()
Thats the big question in my life .I donot know what exactly AIM is?
Kindly share your ideas here.
1.Be honest person
2.Be successful Manager,Doctor,Enginner or any professional
3.Be goos human being
4.Rich
5.Help others
6.Cheating,faurt,doing corruption etc
7.Gov Job
8.Making lot of gf
9........
number goes to 1/0
दोस्तों, इस दुनिया में बहुत से लोग अपने जीवन में अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए पूजा-भक्ति का भी सहारा लेते हैं. इस पोस्ट में मैं इसी विषय में अपने विचार जाहिर करना चाहता हूँ. मेरा मानना है कि जीवन में पूजा-भक्ति का भी अपना विशेष महत्त्व है. हम जिनकी पूजा-आराधना करते हैं, वे अपने समय के महामानव होते हैं. बहुत से लोग कहते हैं कि शिवजी, हनुमान, राम, कृष्ण, जिन्हें भगवान् के तौर पर पूजा जाता है, वे केवल काल्पनिक चरित्र हैं. मैं ऐसे लोगों से पूछना चाहता हूँ कि यदि ये काल्पनिक चरित्र हैं तो फिर अमेरिका, इंग्लैंड, रूस जैसे देशों ने अपने यहाँ ऐसे काल्पनिक चरित्र पैदा क्यों नहीं कर लिए? कोई ऐसे काल्पनिक चरित्र पैदा करके दिखाए. मैं ये जरूर मानता हूँ कि इनकी जीवनगाथाओं को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया गया है, लेकिन ये कहना कि ये काल्पनिक चरित्र हैं, सिवाय मूर्खता के और कुछ नहीं है. यदि कृष्ण नहीं हुए थे तो फिर गीता कौन लिख गया? गीता में जो बातें लिखी हैं, उन्हें कोई आम इंसान नहीं लिख सकता. यदि इंग्लैंड आज हैरी पोटर को भगवान के तौर पर पेश करे तो यह दुनिया इंग्लैंड पर हँसेगी और हैरी पोटर को भगवान नहीं मानेगी. सम्राट अकबर ने भी दीन-ए-इलाही धर्म चलाकर खुद को भगवान बनाने का प्रयास किया था. इसी प्रकार यदि शिवजी या राम को उस समय किसी ने झूठ-मूठ भगवान बनाकर प्रस्तुत किया होता तो उस समय का समाज इन्हें भगवान स्वीकार नहीं करता और ये पीढ़ी-दर-पीढ़ी आज तक लोगों के आराध्य ना बने होते.
दोस्तों, ये भगवान ऐसे लोग होते हैं जो अपने किसी जन्म में कोई बहुत ही बड़ी तपस्या करते हैं (उदाहरण के लिए मैंने कहीं पढ़ा था कि शिवजी ने अपना पिछला 95-100 साल का पूरा जीवन बिना किसी स्त्री से संबंध के बिताया था और अपने उस तप के कारण वे दिव्य शक्ति से लैस होकर इस धरती पर अवतरित हुए थे. कोई अपनी जिंदगी में ऐसा कुछ कर देगा तो वो हमारी तरह मामूली इंसान के रूप में तो जन्म नहीं लेगा). दोस्तों, ऐसे लोगों को इसलिए यह संसार भगवान मानकर पूजता है, जिसका लाभ भी इस संसार को मिलता है. पूजा करने का अर्थ है हम अच्छा बनने के लिए मेहनत कर रहे हैं. यदि हम कुछ दान करते हैं तो हमने कुछ त्याग किया. हम उस पैसे से मजा ले सकते थे, लेकिन हमने नहीं लिया और अपनी मेहनत का पैसा दान कर दिया. ऐसी बातों का लाभ मिलता है. इस दुनिया में फूलों भरा रास्ता चाहिए तो पहले काँटों पर चलना पड़ता है. फूलों पर चलकर फूलों भरा रास्ता नहीं मिलता है.
यह बात मैं एक बार फिर दोहरा दूं कि ये मेरे अपने विचार हैं और मेरी इच्छा किसी को भी सुधारने या शिक्षा देने की नहीं है.
Zodiac Signs, Eclypses Are Rubbish, 'What we are doing that is God's wish' This Thinking Is Rubbish
Friends, while getting to the aim of life we must contemplate over these issues. Some people think death is pre-fixed and destined[yes may be]. If someone dies while crossing a road or swimming or like that, mostly people (specially in India) say that his/her death was destined. It is quite a rubbish thinking. Actually all living being here have been given the fear of dying. If you moves your hand towards a butterfly or any bird, it will fly away. If you run behind any animal with some stick in your hand, the animal will run away. It is natural. All living beings have been given the fear of death, which means 'save yourselves if you can'. If there is firing somewhere and someone goes towards there he may die. If he doesn't go there, he is safe. If someone is wounded and taken to the hospital on time, he may be saved, but if not taken then he may die. Zodiac signs, eclypses have nothing to do with the lives of any living being here
[How not ??]
But it doesn't mean that all human beings' lives are not destined. If any person is in 'final birth'here and his/her time is up for earning the skills here, then destiny works, but that death shouldn't be accidental or torturing.
Well, some people believe whatever we are doing that is the wish of God [ Questionable ?? is there any except terrorists..brain washed]. If we are going to the brothel, it is the wish of God. If we are taking bribe, it is the wish of God. This belief is also absurd one. Friends whatever we do here, we are responsible for that. We have been given conscience. If we move ahead to do something wrong, our conscience warns us to not to do that, but if we ignore that, we are responsible for our deeds. So friends listen to you conscience before doing any such things to the others you don't want others to do with you.
जिन्हें भगवान् के तौर पर पूजा जाता है, वे केवल काल्पनिक चरित्र हैं. मैं ऐसे लोगों से पूछना चाहता हूँ कि यदि ये काल्पनिक चरित्र हैं तो फिर अमेरिका, इंग्लैंड, रूस जैसे देशों ने अपने यहाँ ऐसे काल्पनिक चरित्र पैदा क्यों नहीं कर लिए? कोई ऐसे काल्पनिक चरित्र पैदा करके दिखाए.
ये भगवान ऐसे लोग होते हैं जो अपने किसी जन्म में कोई बहुत ही बड़ी तपस्या करते हैं (उदाहरण के लिए मैंने कहीं पढ़ा था कि शिवजी ने अपना पिछला 95-100 साल का पूरा जीवन बिना किसी स्त्री से संबंध के बिताया था और अपने उस तप के कारण वे दिव्य शक्ति से लैस होकर इस धरती पर अवतरित हुए थे.
यह बात मैं एक बार फिर दोहरा दूं कि ये मेरे अपने विचार हैं और मेरी इच्छा किसी को भी सुधारने या शिक्षा देने की नहीं है.
ऊपर मेरी पोस्ट में मेरे 2 भाईयों ने जो पॉइंट खोजे हैं, मैं यहाँ एक-एक कर उनका जवाब देने का प्रयास करूंगा.
पहला पॉइंट है सभी की मौत पहले से भी नियत हो सकती है. इसका जवाब है कि यदि ऐसा है तो फिर ये अदालतें, जेल वगैरह क्यों खोलकर रखी हैं? यदि किसी ने किसी का खून कर दिया है तो मरने वाले की मौत तो पहले से ही तय थी. फिर खूनी ने उसे मारकर क्या गलती कर दी और खूनी को क्यों सजा दी गई? लेकिन कानून बनाने वालों ने भी सोचा कि नहीं ऐसा नहीं है कि सबकी मौत पहले से ही तय है. यदि मेरी यह बात गलत है तो फिर कानून बनाने वालों को भी गलत कहो. सबकी मौत पहले से तय है, यह भारत में इतनी गलत अवधारणा है कि इसी सोच के चलते न जाने कितने लोग यहाँ असमय अपनी जान गंवाते हैं.
दूसरा पॉइंट है राशियों और ग्रहण इत्यादि से जुड़ा हुआ. इसके बारे में मेरा ये कहना है कि यदि इनका किसी जीव की जिंदगी से कुछ लेना-देना है तो फिर भारत में ही क्यों है? अमेरिका, कनाडा या इंग्लैंड जैसे देशों में लोगों की जिंदगी में कुछ आपदा आती है या कुछ ख़ुशी आती है तो वे तो नहीं कहते कि ऐसा 'ग्रह की चाल' या ग्रहण से हुआ है. हकीकत में वे तो इन बातों के विषय में जानते भी नहीं हैं. इसका मतलब इस दुनिया में अरबों लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें ग्रह राशियों और ग्रहण से कुछ भी लेना-देना नहीं है, फिर भी उनकी जिंदगी में अच्छे-बुरे परिवर्तन आते हैं. इसका मतलब तो साफ़ है कि लोगों की जिंदगी में परिवर्तन का ग्रह राशियों और ग्रहणों से कुछ भी लेना-देना नहीं है. अगर ग्रह राशियों और ग्रहणों का इंसान की जिंदगी पर कुछ फर्क होता तो जो इनके दिग्गज हैं, यानि ब्राह्मण, वे तो फिर जिंदगी में कभी दुखी ही न होते. वे तो ग्रहों को अपने वश में करने का हुनर जानते हैं.
तीसरा पॉइंट है जन्म के संबंध में. इसके बारे में मैं तो यही कहूँगा कि यदि कोई सोचता है कि यहाँ जिंदगी बस एक ही बार मिलती है तो उन्हें उनकी सोच मुबारक हो. एक इंसान सुख-दुःख सहते हुए पूरे 80 -90 साल की जिंदगी यहाँ बिताता है और एक इंसान 35 -40 साल की उम्र में ही जिंदगी का सबसे अच्छा समय बिताकर यहाँ से चला जाता है. जिसने 80 -90 साल की जिंदगी यहाँ बिताई, उसे उसका कुछ भी इनाम नहीं मिलेगा और जो बस जवानी का आनंद लेकर यहाँ से चला गया, उसे कुछ भी खामियाजा नहीं भुगतना पड़ेगा. अगर यह दुनिया ऐसी है तो फिर इस दुनिया को बनाने वाला भी बेवक़ूफ़ ही है. लेकिन काश कि ऐसा होता. ऐसा बिलकुल भी नहीं है. एक इंसान जन्म से ही प्रतिभावान है, संपन्न है, जबकि एक जन्म से ही कुरूप और बुद्धू, ऐसा क्यों हुआ? ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि जो जन्म से ही प्रतिभाशाली है, उसने पिछले जन्म में कड़ी मेहनत की हुई है और जो जन्म से ही परेशान है वो कुछ बुरा करके मरा हुआ है. जो पिछले जन्म की मेहनत की वजह से सचिन तेंदुलकर बना, उसे लोगों ने कहा इस पर तो भगवान् की विशेष कृपा है. अरे भाई, वो भगवान की कृपा नहीं है, वो उसकी पिछले जन्म की मेहनत है, जिसका उसे फल नहीं मिल सका था.
तीसरा पॉइंट है हम जो भी करते हैं वो भगवान की इच्छा होती है. ऐसा बिलकुल भी नहीं है और यह सोच किसी के भी जीवन के लिए बेहद घातक है. यदि कोई इंसान घर में ही पड़ा रहता है और कुछ भी नहीं करता उसके कानों में कोई दिव्य आवाज नहीं आती कि चल उठ, कुछ कर. इसी प्रकार यदि कोई इंसान कुछ अच्छा या बुरा करता है तो भी उसके कानों में कोई आवाज नहीं आती कि ऐसा कर या मत कर. बस जमीर जरूर थोडा सा चेताता है. तो फिर इस बात का क्या मतलब हुआ कि भगवान हमसे कुछ करवा रहा है. यह तो खुद को धोखे में रखने वाली बात हो गई. कहावत भी है कि भगवान सिर्फ उनकी मदद करता है जो अपनी मदद खुद करते हैं. अब या तो इस कहावत को बकवास कहो या फिर इस सोच को कि जो भी हम करते हैं वो भगवान कि इच्छा होती है. भगवान को जो इंसान और अन्य जीवों से करवाना है, उसके लिए मजबूरी बनाई हुई है. भगवान चाहता है कि यहाँ सब लोग मेहनत करें, उसके लिए पेट बनाया हुआ है. कुछ न कुछ तो करना ही पड़ेगा.
एक पॉइंट था शिवजी, कृष्ण इत्यादि को लेकर. इनके विषय में जो मुझे कहना था वो तो मैं ऊपर कह ही चुका हूँ. यहाँ जो मैं कहना चाहूँगा वो यह है कि शिवजी अपनी एक बहुत तपस्या वाली जिंदगी के बल पर भगवान बने थे और जिस जन्म में वे शिवजी बने थे तब वे मरे नहीं थे, इसीलिए उन्हें मृत्युंजय भी कहा जाता है. पार्वती भी अपनी किसी पुरानी तपस्या की वजह से शिवजी की पत्नी बनी थी और वे भी मरी नहीं थी. इसीलिए शिवलिंग को पूजा जाता हैं और पार्वतियोनी को भी. इसी प्रकार कृष्णजी विष्णु के अवतार थे, विष्णु और लक्ष्मी अपने जन्म में मरे नहीं. ये जो अवतार सिस्टम है इसके लिए कई और बातें समझनी पड़ेगी, वो फिर कभी. दरअसल इस दुनिया के सिस्टम में यह बात भी शामिल है की जब-जब भी यहाँ लोग अपना रास्ता भटकने लगेंगे तो उन्हें कोई सही रास्ता दिखाने वाला आएगा. पिछली बार तो कृष्णजी आये थे, अब पता नहीं कौन कब आएगा. मुझे तो लगता नहीं है कि अब कोई आएगा.
Bhai sahab! I don't believe that someone who ever born never died and became a God. I have nothing to do with your beliefs neither i appreciate it nor i criticise. I am with mine. But If u still insist , prove your vishnu, shivji ideology I will aceept it. Otherwise. let me live with mine faiths and you will with yours.
अब एक बात ये कि मुझे शादी करा लेनी चाहिए तो मैं बता दूं कि मेरा कुछ प्रेम कहानी का चक्कर चला हुआ है. जिनसे मैं प्यार करता हूँ उनका नाम प्रीति है. वे भी पिछले 12 साल से ऐसे ही घर में बैठी हैं. वो एक लम्बी कहानी है. मैं शादी करूंगा तो केवल उन्हीं से.
I appreciate your resolution bhai sahab!
आखिर में मैं यह कहना चाहूँगा कि मैं अपनी जिम्मेदारी बिलकुल समझता हूँ. अगर कोई सोचता है कि ये बाते मैंने अपने आप बना ली या कहीं से पढ़ ली तो वो गलत सोचता है. इसके बावजूद यदि किसी को मेरी बातें बकवास लगती है तो वो इन्हें नज़रअंदाज कर दे
How did you enlighten of shivji and vishnu theory? I guess either you have read it somewhere or someone has told you. If something else , plz let me know.
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Bhai sahab! I don't believe that someone who ever born never died and became a God. I have nothing to do with your beliefs neither i appreciate it nor i criticise. I am with mine. But If u still insist , prove your vishnu, shivji ideology I will aceept it. Otherwise. let me live with mine faiths and you will with yours........................
Bhai sahab! I don't believe that someone who ever born never died and became a God. I have nothing to do with your beliefs neither i appreciate it nor i criticise. I am with mine. But If u still insist , prove your vishnu, shivji ideology I will aceept it. Otherwise. let me live with mine faiths and you will with yours.
Please carry on this thinking. I repeat almost everytime in my posts that if anybody finds something rubbish then leave it. A lot of guys in this world don't think that abovementioned gods haven't born ever. They like such posts. It may be possible that your thinking is right, but neither you nor I can prove my point if evidences are concerned. So better we keep our thoughts to ourselves.
दरअसल इस दुनिया के सिस्टम में यह बात भी शामिल है की जब-जब भी यहाँ लोग अपना रास्ता भटकने लगेंगे तो उन्हें कोई सही रास्ता दिखाने वाला आएगा. पिछली बार तो कृष्णजी आये थे, अब पता नहीं कौन कब आएगा. मुझे तो लगता नहीं है कि अब कोई आएगा.
It may be a pretty interesting read for you. Vishnu incarnated again almost 300 years back. here is the link
http://en.wikipedia.org/wiki/Swami_Narayan

अगर यहाँ धरती पर कुछ अच्छा नहीं करोगे तो 'वहां' पछताओगे
'जीवन का लक्ष्य' नामक शीर्षक से जो यह थ्रेड शुरू किया गया था, इसके लिए अपनी इस पोस्ट में मैं अपनी तरफ से तमाम शेष बातें समेटने का प्रयास करूंगा. अगर कोई यह सोचता है कि यह धरती तो अपने आप ही बन गई और इस दुनिया में कोई नियम-कायदे नहीं हैं तो उन्हें ऐसा सोचने का पूरा अधिकार है. सबको अपना जीवन अपनी मर्जी से अपनी शर्तों के मुताबिक़ जीने का अधिकार है. मैंने तो इस थ्रेड में बिना किसी को कोई शिक्षा देने के उद्देश्य से लिखना शुरू किया था, इसलिए जैसा मैं सोचता हूँ वो लिख रहा हूँ और इस पोस्ट में जो बातें मैं समझता हूँ कि मेरी तरफ से बतानी शेष रह गई थीं, उन्हें बता रहा हूँ.
दोस्तों, जैसा कि मैं पहले भी कह चुका हूँ यह धरती एक ट्रेनिंग सेंटर है. यहाँ हम कुछ हुनर सीखने आते हैं. यहाँ हम आते ही सीधे इंसान नहीं बन जाते. जिस प्रकार एक बीज होता है, फिर पौधा और फिर वो एक पेड़ बनता है, उसी प्रकार इस दुनिया का जो सबसे छोटा जीव है वो बीज है, ये पशु-पक्षी बीच की स्टेज और इंसान पेड़ है. जब एक बार कोई इंसान बन जाता है तो वो वापस कोई पशु या पक्षी नहीं बनता. वो यहाँ दिए गए समय में जितना भी हुनर अपने अंदर बना पाता है, उसका मजा लेने के लिए स्वर्ग चला जाता है. यह स्वर्ग भी एक प्लेनेट है. वहां न तो गंदगी है, न ही कोई दुःख. वहां दुःख है तो बस यही कि जो लोग यहाँ ज्यादा अच्छा कुछ नहीं कर पाते तो वे वहां जाकर थोड़ा परेशान हो जाते हैं कि ये कितनी अच्छी जगह है, लेकिन हम इसका पूरा मजा नहीं ले पा रहे हैं, क्योंकि हमारे अंदर ज्यादा हुनर नहीं हैं. दोस्तों ये हुनर बस इस धरती पर ही कमाए जा सकते हैं, स्वर्ग में इन्हें बढाने का कोई तरीका नहीं है. इसलिए जब तुम यहाँ पर हो तो तुम्हारे पास मौका है कुछ अच्छा करने का, जिससे तुम स्वर्ग में जाकर पछताओ ना. इस संदर्भ में एक उदाहरण प्रस्तुत है, वो यह कि यदि यहाँ किसी ने खेती में मेहनत की है तो स्वर्ग में पेड़ पर खाने की चीज तो खुद ही लगेगी, लेकिन उसे तोड़ पायेगा केवल वही इंसान, जिसने यहाँ धरती पर खेती में मेहनत की होगी. वहां खिलाड़ी भी हैं, वहां कलाकार भी हैं, वहां बुद्धिमान भी हैं, अगर वहां कुछ नहीं है तो वो है दुःख, बीमारी, गंदगी, प्रदूषण वगैरह. दोस्तों, जो लोग यहाँ कोई बहुत बड़ा कुछ प्रदर्शन करके दिखाते हैं, जैसे कि शिवजी-पार्वती या विष्णु-लक्ष्मी तो वे यहाँ से बिना मरे ही सीधे स्वर्ग जाते हैं और उनका जीवन भी हम आम लोगों के जीवन से बहुत लंबा होता है. जब हम स्वर्ग छोड़ते हैं तो हमारे मुंह से यही निकलता है कि ये इतनी शानदार जगह है कि यहाँ हम बार-बार आना चाहेंगे, चाहे इसके लिए हमें कुछ भी करना पड़े. चाहे हमें सूअर बनाकर गंदगी क्यों ना खिलाओ, चाहे हमें खच्चर बनाकर हमारी पीठ पर कोड़े ही क्यों ना बरसवाओ, चाहे हमें गरीब आदमी बनाकर हम पर कितने ही जुल्म क्यों ना ढाओ, हम यहाँ स्वर्ग में फिर आना चाहेंगे. और दोस्तों, इस धरती पर जीवन इतना कठिन है कि हम कहने लगते हैं कि कौन है जो हमें यहाँ पैदा कर देता है. हमें यहाँ जिंदगी नहीं चाहिए, हमें यहाँ से बचाओ, भाड़ में गया स्वर्ग. यही इन दोनों जगहों की खासियत है. नरक इस ब्रह्मांड में कहीं भी नहीं है.
तो जीवन का लक्ष्य है अपने अंदर ज्यादा से ज्यादा हुनर बनाना जो कि केवल कड़ी मेहनत, अच्छे कर्मों और तपस्या से ही संभव है. कभी- कभी किसी हादसे में किसी व्यक्ति को कोई गंभीर कष्ट मिल जाता है, जैसे कि किसी एक्सिडेंट वगैरह में तो उन्हें भी अपने इस शारीरिक या मानसिक कष्ट का अच्छा फल कभी ना कभी जरूर मिलता है.
तो इस संदर्भ में यदि कुछ मुझे 'रह गया' प्रतीत होगा तो मैं वो लिखूंगा, नहीं तो मेरी तरफ से यह विषय पूरा हुआ. मैं बिलकुल भी स्वर्ग होकर नहीं आया हूँ, लेकिन जितनी भी बातें मैंने इस पोस्ट में लिखी हैं, उनमें एक तर्क है और उनके सच होने की वजह नज़र आती है. बाकी सबकी अपनी-अपनी सोच है.
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