vivekbhaarteeya
Banned
Hi friends, Here I am starting a new thread Signatures of JL Members, as there are many members whose signatures say some thing interesting/ explosive/ hot-blooded/ inexpressible/ philosophical....
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For the sake of starting here I am quoting the signature of Ojus
ये signature मुझे एक बावली गीदड़ी की कहानी की याद दिलाते है जो मैंने डॉ. सत्यव्रत सिद्धान्तालंकार जी के किसी ग्रन्थ में पढ़ी थी, कहानी कुछ ऐसे है की ये दुनिया, खासकर गृहस्थ, है क्या?
एक बार एक आदमी जंगल में घूम रहा था तो उसके पीछे एक बावली गीदड़ी पड़ गी| बेचारा इधर उधर भागता रहा पर गीदड़ी उसके पीछे पीछे , वो आदमी एक पेड़ का चक्कर काटने लगा और चक्कर काटते काटते आदमी ने हिम्मत करके उस गीदड़ी के कान पकड़ लिए | अब गीदड़ी के कान तो पकड़ लिए पर अब छोड़े तो गीदड़ी काटेगी, बेचारा बड़ा परेशान कि अब क्या करूं ? इस पकड़म पकड़ाई में उसकी शर्ट कि जेब में से पैसे निकल कर गिर गए थे | इतने में एक आदमी उधर से गुजरा तो उसने देखा कि एक आदमी गीदड़ी के कान पकडे खड़ा और गीदड़ी के मुहं के पास पैसे पड़े हैं, उसने पूछा भाई यो क्या माजरा ? तो पहले वाला आदमी कहण लगा के भाई यो गीदड़ी पैसे देवे पर इसके लिए इसके कान पकड़ने पड़ें | ये सुनकर दूसरा आदमी भी गीदड़ी के कान पकड़ने को उतावला हो जाता है | पहले वाला दूसरे को गीदड़ी के कान पकडवा देता है और अपने पैसे उठा कर कह्न्ने लगा भाई यो गीदड़ी पैसे वैसे कुछ ना देती बस काटे ही काटे , और तुझे भी अगर इस से पीछा छुड़ाना तो किसी को इसके कान पकडवा देना | तो भाइयो ये जो दुनिया है यो एक बावली गीदड़ी है और हर बाप अपना पीछा छुड़ाने को इसके कान अपने बेटे को पकड़वा देता है |
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For the sake of starting here I am quoting the signature of Ojus
Don't know why a man want to have kids ? No necessity
ये signature मुझे एक बावली गीदड़ी की कहानी की याद दिलाते है जो मैंने डॉ. सत्यव्रत सिद्धान्तालंकार जी के किसी ग्रन्थ में पढ़ी थी, कहानी कुछ ऐसे है की ये दुनिया, खासकर गृहस्थ, है क्या?
एक बार एक आदमी जंगल में घूम रहा था तो उसके पीछे एक बावली गीदड़ी पड़ गी| बेचारा इधर उधर भागता रहा पर गीदड़ी उसके पीछे पीछे , वो आदमी एक पेड़ का चक्कर काटने लगा और चक्कर काटते काटते आदमी ने हिम्मत करके उस गीदड़ी के कान पकड़ लिए | अब गीदड़ी के कान तो पकड़ लिए पर अब छोड़े तो गीदड़ी काटेगी, बेचारा बड़ा परेशान कि अब क्या करूं ? इस पकड़म पकड़ाई में उसकी शर्ट कि जेब में से पैसे निकल कर गिर गए थे | इतने में एक आदमी उधर से गुजरा तो उसने देखा कि एक आदमी गीदड़ी के कान पकडे खड़ा और गीदड़ी के मुहं के पास पैसे पड़े हैं, उसने पूछा भाई यो क्या माजरा ? तो पहले वाला आदमी कहण लगा के भाई यो गीदड़ी पैसे देवे पर इसके लिए इसके कान पकड़ने पड़ें | ये सुनकर दूसरा आदमी भी गीदड़ी के कान पकड़ने को उतावला हो जाता है | पहले वाला दूसरे को गीदड़ी के कान पकडवा देता है और अपने पैसे उठा कर कह्न्ने लगा भाई यो गीदड़ी पैसे वैसे कुछ ना देती बस काटे ही काटे , और तुझे भी अगर इस से पीछा छुड़ाना तो किसी को इसके कान पकडवा देना | तो भाइयो ये जो दुनिया है यो एक बावली गीदड़ी है और हर बाप अपना पीछा छुड़ाने को इसके कान अपने बेटे को पकड़वा देता है |