piush_tomar
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आप एक नहीं, जितनी चाहे बातें कहो.
जाट जाति अन्य जातियों की आँखों में शुरू से ही शूल की तरह चुभती रही है. क्या आप मेरे को यू.पी. के किसी क्षेत्र का नाम बता सकते हो, जिसके बारे में लिखा जाता हो कि ये दलित बहुल क्षेत्र है या ठाकुर बहुल, बनिया बहुल, ब्राह्मण बहुल या यादव बहुल क्षेत्र. ऐसा केवल जाटों के विषय में लिखा जाता है-'जाट बहुल क्षेत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश' या 'देश का संपन्न क्षेत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश'. इसीलिए सभी इनके खिलाफ रहते हैं या यूं कहें कि इनसे चिढ़ते हैं. अजित सिंह ने कभी यू.पी. की राजनीति में ज्यादा दिलचस्पी ली ही नहीं, नहीं तो अभी तक ये पक्का वहाँ सत्ता में आ चुका होता. अन्य जातियों ने कुछ फायदा नहीं उठाया, वे आज भी वहीं हैं, जहां कभी थीं.
तोमर जी ये गुलामियत नहीं है, सम्मान है. ऐसे में मैं कहूं कि यूरोपियन देशों और अमेरिका वाले आज तक इज्राइल में जन्मे ईसा मसीह को अपना भगवान मानकर पूजते रहे हैं तो वे उसके गुलाम हो गए तो इस बात में कोई दम नहीं है. वो गुलामियत नहीं है, सम्मान है. बागपत क्षेत्र के लोग अजीत सिंह को इसलिए जितवाते हैं, क्योंकि उसके पिता चौ. चरण सिंह ने अपने समय में जाटों के नाम को प्रसिद्ध बनाया था. उससे पहले जाट महान तो थे, लेकिन उनका कहीं नाम नहीं था. उस वजह से वहाँ के लोगों में चरण सिंह के प्रति एक विशेष प्रकार का सम्मान पैदा हो गया. उसका फायदा अजित सिंह को मिल रहा है. अगर अजीत सिंह बहुत ज्यादा बुरा आदमी होता तो वहाँ से इसका सफाया हो जाता, लेकिन ये ज्यादा बुरा आदमी नहीं है. इसके बावजूद एक बार इसको वहाँ से बाहर का रास्ता भी दिखा दिया गया था. कल को यदि कोई और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों का और जाटों का नाम रोशन करता है तो उसके प्रति भी वहाँ के लोगों के दिलों में ऐसा ही सम्मान पैदा हो जाएगा, लेकिन पहले कुछ करके दिखाया जाना चाहिए. बिना किसी ख़ास वजह के अजित सिंह को हरवाना और उसकी जगह किसी और को केवल इसलिए जितवा देना कि अजित सिंह को जितवाते-जितवाते बहुत समय हो गया तो ये बात कुछ अप्रासंगिक सी बात लगती है. किसी और नेता को जितवाकर भी कुछ नहीं मिलने वाला. मिलेगा तो तभी जब जाट लोग मेहनती बने रहेंगे और अपने कर्मों को ठीक रखेंगे. इतने सारे ब्राह्मण और ठाकुर प्रधानमंत्री हुए हैं, इसके बावजूद भारत में कोई क्षेत्र ऐसा नहीं है, जिसके बारे में ये कहा जा सके कि यहाँ के ब्राह्मणों और ठाकुरों ने देखो कितनी तरक्की कर ली. है तो बताओ? और मेरे ख्याल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोग नेता बदलने और दूसरी पार्टी को समर्थन देने के लिए तैयार हो जाएंगे, लेकिन कोई कुछ करके तो दिखाए. कुछ नया एजेंडा लाए, कुछ प्रदर्शन करे, मेहनत करे, संघर्ष करे, तब कुछ बात बनेगी. ग्राम प्रधान तक बनने के लिए इतना तगड़ा कंपीटिशन होता है, सांसद और मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री बनने के लिए कितना कुछ करने की जरूरत होनी चाहिए, आप अंदाजा लगा सकते हैं.
so u agreed on that He can join hand with BSP, BJP or congress but you as a voter need to stick with him only ..he can change his stand on every 5 years but you cant...can u justify or comment on his alliance with BJP in 2009 election and than after that Jayant chaudhary reached in farukhabad for supporting Mualyam's Bahu dimple...what you will say about when he reached to mayawati home at delhi for supporting her for PM seat
Asked whether his party would support Mayawati for Prime Ministership, Ajit Singh said, "She had emerged as an important leader in recent times.