जुकर मन्ने पहलम बताई थी ,मेरा एक काका थानेदार था ,एर ऊ की एक आदत थी बीडी पीवन की | वो जब भी आंदा ,एक पुडा (जिह में लगभग १५-२० बण्डल आया करें ) आपनी गेल लिया करदा | एर दिन में ५-६ बण्डल बीडी पी जांदा | कदे -कदे कई दिन डट जांदा ,एर रोहतक नि जा पान्दा, तोह मेरे ताहि कह के ने, एर दुकाना आली गाल माह तें , एक घनश्याम (शरणार्थी )बाणिया था ऊ की दूकान पर तें ,पुडा मांगा लिया करदा |ऊ बाणीये धोरे मेरे काका का खता चाल्या करदा | तो मेरा काका २२ नंबर की बीडी पीया करदा ,जो नोरमल बीड़ियाँ तें लांबी हो सें ( इब्बी आवें सें अक नि बेरा ना ) . ऊ की दूसरी आदत थी ,बीडी के दो शूट्टे मार कें, बागा दिया करदा | जयां तें बीडी का उपरला भाग माडा सा जल्या करदा | मेरे काका के नाम का एक चोबारा था | वो ओस्से में आपणा सामान वगेरा धरया राख्या करदा ,एर उस्से में लोट मार्या करदा | में वे शुट्टे मारी होई बीडी कट्ठी कर लिया करदा | मेरे कई गाल के बीडी पिव्निये दोस्त ,वे माड़ी जली होई बीडी मंगा के पीया करदे | एर मेरे कई काम मुफ्त में कर दिया करदे, बदले में |
एक बे घनश्याम बाणिया मेरे ताहि बोल्या अक तेरा काका इन्नी बीडी पीवे से , तू क्यों नि पिन्दा | में बोल्या मन्ने जरूत ना स | तोह घनश्याम ने मेरे ताहि एक आईड़िया दिया,, अक जब तेरा काका चाल्या जा तो तू बचे होए बण्डल मेरे ताहि दे दिया कर ,ऊ क के याद रहवे गे ,अक कितने रह रे थे ,एर में तन्ने चीजो दे दूंगा | मन्ने हाँ भर ली | एर एक दिन पूरा महनत का ला कें मन्ने वो पुडा तैयार कर लिया | एर दो दिन पाछे ऊ ताहि बोल्या ,अक एक पूरा बण्डलआँ का पुडा बच रया स ,ल्याऊं के | वो बोल्या लिया | में एर मेरा दोस्त सुरेंदर पोंच्गे घनस्याम की दूकान पे एर ऊ ताहि पुडा पकड़ा दिया | चीजो खाई दोनुआ ने, एर कम्पा -कोला पि ली, एर डांका आये |
दो तीन दिन पाछे में ऊ की दूकान आगे क जावन लाग्र्या था ,लूकता -२ (मन्ने बेरा था अक इब्ब ताहि पोल खुल गी होगी )| एर घनश्याम ने में देख लिया, एर भाज्या मेरी गेल, गाल बकदा | ------ओये खोते दिया | ----ओये तेनु शर्म नि आई | -----बूढ़े नु स्तान्दा हे |--- तेरे प्यो नु ,----तेरी माँ नु ,----तेरी धी नु ,एर बेरा ना घनी वार ताहि भोंक्दा रह्या | में के थयाऊ था ऊ के ,भज गया |
( मन्ने वो पुडा पि होड़ी बीड़ियाँ ते भर के बनाया था ,एर इस्से चक्कर में एक दिन पहलम किस्से बन्दे ने ,जिह ताहि ऊ ने वे बीडी बेचीं थी ,ऊ का सामान गाल में बागा दिया था, चोरी करवान के चक्कर में घनश्याम घणा घाटा खा बेठ्या )