albaadi baalkaan key kissey.

bhai ravinder, itni tauli khatam kyukar hogi sari albaad......aur aan de bhai..........arr bhai ek baat aur, gaon ke balkaan ne te albaad karan ka tame milja thaa.....bechare shahar ke balkan ne ke pata albaad karan ka........bus tu lagyaa rah......

bas ho li khatam ,aaglaa pannaa koni bharey shaayad , issaa laagey se deepak ak tu thak liyaa padh-padh ke.
 
जुकर मन्ने पहलम बताई थी ,मेरा एक काका थानेदार था ,एर ऊ की एक आदत थी बीडी पीवन की | वो जब भी आंदा ,एक पुडा (जिह में लगभग १५-२० बण्डल आया करें ) आपनी गेल लिया करदा | एर दिन में ५-६ बण्डल बीडी पी जांदा | कदे -कदे कई दिन डट जांदा ,एर रोहतक नि जा पान्दा, तोह मेरे ताहि कह के ने, एर दुकाना आली गाल माह तें , एक घनश्याम (शरणार्थी )बाणिया था ऊ की दूकान पर तें ,पुडा मांगा लिया करदा |ऊ बाणीये धोरे मेरे काका का खता चाल्या करदा | तो मेरा काका २२ नंबर की बीडी पीया करदा ,जो नोरमल बीड़ियाँ तें लांबी हो सें ( इब्बी आवें सें अक नि बेरा ना ) . ऊ की दूसरी आदत थी ,बीडी के दो शूट्टे मार कें, बागा दिया करदा | जयां तें बीडी का उपरला भाग माडा सा जल्या करदा | मेरे काका के नाम का एक चोबारा था | वो ओस्से में आपणा सामान वगेरा धरया राख्या करदा ,एर उस्से में लोट मार्या करदा | में वे शुट्टे मारी होई बीडी कट्ठी कर लिया करदा | मेरे कई गाल के बीडी पिव्निये दोस्त ,वे माड़ी जली होई बीडी मंगा के पीया करदे | एर मेरे कई काम मुफ्त में कर दिया करदे, बदले में |

एक बे घनश्याम बाणिया मेरे ताहि बोल्या अक तेरा काका इन्नी बीडी पीवे से , तू क्यों नि पिन्दा | में बोल्या मन्ने जरूत ना स | तोह घनश्याम ने मेरे ताहि एक आईड़िया दिया,, अक जब तेरा काका चाल्या जा तो तू बचे होए बण्डल मेरे ताहि दे दिया कर ,ऊ क के याद रहवे गे ,अक कितने रह रे थे ,एर में तन्ने चीजो दे दूंगा | मन्ने हाँ भर ली | एर एक दिन पूरा महनत का ला कें मन्ने वो पुडा तैयार कर लिया | एर दो दिन पाछे ऊ ताहि बोल्या ,अक एक पूरा बण्डलआँ का पुडा बच रया स ,ल्याऊं के | वो बोल्या लिया | में एर मेरा दोस्त सुरेंदर पोंच्गे घनस्याम की दूकान पे एर ऊ ताहि पुडा पकड़ा दिया | चीजो खाई दोनुआ ने, एर कम्पा -कोला पि ली, एर डांका आये |

दो तीन दिन पाछे में ऊ की दूकान आगे क जावन लाग्र्या था ,लूकता -२ (मन्ने बेरा था अक इब्ब ताहि पोल खुल गी होगी )| एर घनश्याम ने में देख लिया, एर भाज्या मेरी गेल, गाल बकदा | ------ओये खोते दिया | ----ओये तेनु शर्म नि आई | -----बूढ़े नु स्तान्दा हे |--- तेरे प्यो नु ,----तेरी माँ नु ,----तेरी धी नु ,एर बेरा ना घनी वार ताहि भोंक्दा रह्या | में के थयाऊ था ऊ के ,भज गया |

( मन्ने वो पुडा पि होड़ी बीड़ियाँ ते भर के बनाया था ,एर इस्से चक्कर में एक दिन पहलम किस्से बन्दे ने ,जिह ताहि ऊ ने वे बीडी बेचीं थी ,ऊ का सामान गाल में बागा दिया था, चोरी करवान के चक्कर में घनश्याम घणा घाटा खा बेठ्या )
 
हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा............ संयोगवश म्हारे गाम (Jhojhu Kalan) में भी एक बाह्मण की दूकान स ...उसका नाम भी घनश्याम स ( "घडस्याम" कह्य करे लोग उस ने )....... वोह एक आँख का काना स..... उस ने भी भोत से बालक बिगाड़े गाम ने....... उन् केने घर तें चोरी के "दाने" मंगवा के उन ने बीडी सिगरेट बेच्या करदा..... एब्ब तो बेर नहीं जीवे स आक मर लिया.......... लेकिन सारा गाम गाल दिया करता उस ने आक म्हारे बालक बिगाड़ दिए ........


जुकर मन्ने पहलम बताई थी ,मेरा एक काका थानेदार था ,एर ऊ की एक आदत थी बीडी पीवन की | वो जब भी आंदा ,एक पुडा (जिह में लगभग १५-२० बण्डल आया करें ) आपनी गेल लिया करदा | एर दिन में ५-६ बण्डल बीडी पी जांदा | कदे -कदे कई दिन डट जांदा ,एर रोहतक नि जा पान्दा, तोह मेरे ताहि कह के ने, एर दुकाना आली गाल माह तें , एक घनश्याम (शरणार्थी )बाणिया था ऊ की दूकान पर तें ,पुडा मांगा लिया करदा |ऊ बाणीये धोरे मेरे काका का खता चाल्या करदा | तो मेरा काका २२ नंबर की बीडी पीया करदा ,जो नोरमल बीड़ियाँ तें लांबी हो सें ( इब्बी आवें सें अक नि बेरा ना ) . ऊ की दूसरी आदत थी ,बीडी के दो शूट्टे मार कें, बागा दिया करदा | जयां तें बीडी का उपरला भाग माडा सा जल्या करदा | मेरे काका के नाम का एक चोबारा था | वो ओस्से में आपणा सामान वगेरा धरया राख्या करदा ,एर उस्से में लोट मार्या करदा | में वे शुट्टे मारी होई बीडी कट्ठी कर लिया करदा | मेरे कई गाल के बीडी पिव्निये दोस्त ,वे माड़ी जली होई बीडी मंगा के पीया करदे | एर मेरे कई काम मुफ्त में कर दिया करदे, बदले में |

एक बे घनश्याम बाणिया मेरे ताहि बोल्या अक तेरा काका इन्नी बीडी पीवे से , तू क्यों नि पिन्दा | में बोल्या मन्ने जरूत ना स | तोह घनश्याम ने मेरे ताहि एक आईड़िया दिया,, अक जब तेरा काका चाल्या जा तो तू बचे होए बण्डल मेरे ताहि दे दिया कर ,ऊ क के याद रहवे गे ,अक कितने रह रे थे ,एर में तन्ने चीजो दे दूंगा | मन्ने हाँ भर ली | एर एक दिन पूरा महनत का ला कें मन्ने वो पुडा तैयार कर लिया | एर दो दिन पाछे ऊ ताहि बोल्या ,अक एक पूरा बण्डलआँ का पुडा बच रया स ,ल्याऊं के | वो बोल्या लिया | में एर मेरा दोस्त सुरेंदर पोंच्गे घनस्याम की दूकान पे एर ऊ ताहि पुडा पकड़ा दिया | चीजो खाई दोनुआ ने, एर कम्पा -कोला पि ली, एर डांका आये |

दो तीन दिन पाछे में ऊ की दूकान आगे क जावन लाग्र्या था ,लूकता -२ (मन्ने बेरा था अक इब्ब ताहि पोल खुल गी होगी )| एर घनश्याम ने में देख लिया, एर भाज्या मेरी गेल, गाल बकदा | ------ओये खोते दिया | ----ओये तेनु शर्म नि आई | -----बूढ़े नु स्तान्दा हे |--- तेरे प्यो नु ,----तेरी माँ नु ,----तेरी धी नु ,एर बेरा ना घनी वार ताहि भोंक्दा रह्या | में के थयाऊ था ऊ के ,भज गया |

( मन्ने वो पुडा पि होड़ी बीड़ियाँ ते भर के बनाया था ,एर इस्से चक्कर में एक दिन पहलम किस्से बन्दे ने ,जिह ताहि ऊ ने वे बीडी बेचीं थी ,ऊ का सामान गाल में बागा दिया था, चोरी करवान के चक्कर में घनश्याम घणा घाटा खा बेठ्या )
 
wah bhai ravinder...maja aa gya....bhai itne din kade luk raa thaa?

जुकर मन्ने पहलम बताई थी ,मेरा एक काका थानेदार था ,एर ऊ की एक आदत थी बीडी पीवन की | वो जब भी आंदा ,एक पुडा (जिह में लगभग १५-२० बण्डल आया करें ) आपनी गेल लिया करदा | एर दिन में ५-६ बण्डल बीडी पी जांदा | कदे -कदे कई दिन डट जांदा ,एर रोहतक नि जा पान्दा, तोह मेरे ताहि कह के ने, एर दुकाना आली गाल माह तें , एक घनश्याम (शरणार्थी )बाणिया था ऊ की दूकान पर तें ,पुडा मांगा लिया करदा |ऊ बाणीये धोरे मेरे काका का खता चाल्या करदा | तो मेरा काका २२ नंबर की बीडी पीया करदा ,जो नोरमल बीड़ियाँ तें लांबी हो सें ( इब्बी आवें सें अक नि बेरा ना ) . ऊ की दूसरी आदत थी ,बीडी के दो शूट्टे मार कें, बागा दिया करदा | जयां तें बीडी का उपरला भाग माडा सा जल्या करदा | मेरे काका के नाम का एक चोबारा था | वो ओस्से में आपणा सामान वगेरा धरया राख्या करदा ,एर उस्से में लोट मार्या करदा | में वे शुट्टे मारी होई बीडी कट्ठी कर लिया करदा | मेरे कई गाल के बीडी पिव्निये दोस्त ,वे माड़ी जली होई बीडी मंगा के पीया करदे | एर मेरे कई काम मुफ्त में कर दिया करदे, बदले में |

एक बे घनश्याम बाणिया मेरे ताहि बोल्या अक तेरा काका इन्नी बीडी पीवे से , तू क्यों नि पिन्दा | में बोल्या मन्ने जरूत ना स | तोह घनश्याम ने मेरे ताहि एक आईड़िया दिया,, अक जब तेरा काका चाल्या जा तो तू बचे होए बण्डल मेरे ताहि दे दिया कर ,ऊ क के याद रहवे गे ,अक कितने रह रे थे ,एर में तन्ने चीजो दे दूंगा | मन्ने हाँ भर ली | एर एक दिन पूरा महनत का ला कें मन्ने वो पुडा तैयार कर लिया | एर दो दिन पाछे ऊ ताहि बोल्या ,अक एक पूरा बण्डलआँ का पुडा बच रया स ,ल्याऊं के | वो बोल्या लिया | में एर मेरा दोस्त सुरेंदर पोंच्गे घनस्याम की दूकान पे एर ऊ ताहि पुडा पकड़ा दिया | चीजो खाई दोनुआ ने, एर कम्पा -कोला पि ली, एर डांका आये |

दो तीन दिन पाछे में ऊ की दूकान आगे क जावन लाग्र्या था ,लूकता -२ (मन्ने बेरा था अक इब्ब ताहि पोल खुल गी होगी )| एर घनश्याम ने में देख लिया, एर भाज्या मेरी गेल, गाल बकदा | ------ओये खोते दिया | ----ओये तेनु शर्म नि आई | -----बूढ़े नु स्तान्दा हे |--- तेरे प्यो नु ,----तेरी माँ नु ,----तेरी धी नु ,एर बेरा ना घनी वार ताहि भोंक्दा रह्या | में के थयाऊ था ऊ के ,भज गया |

( मन्ने वो पुडा पि होड़ी बीड़ियाँ ते भर के बनाया था ,एर इस्से चक्कर में एक दिन पहलम किस्से बन्दे ने ,जिह ताहि ऊ ने वे बीडी बेचीं थी ,ऊ का सामान गाल में बागा दिया था, चोरी करवान के चक्कर में घनश्याम घणा घाटा खा बेठ्या )
 
म्हारे गाम में बडबेरियाँ के घने बाग़ सें | घंखरे आपने बागाँ नु ठेके पे दे दिया करदे | गाम तें १ की. मी. पे एक बाग़ था ४-५ किल्ल्यां माँ के | वो एक रोहतक के सेनी ने ठेके पे ले राख्या था | म्हारी तिकड़ी (में ,सुरेंदर एर नरेंदर ) कदे-कदाऊ ऊ सेनी धोरे चाले जांदे ,बेर खावन के मारे | हाम १५-१६ साल के हो लिए थे एर इस उम्र के बालक अल्बाद घणी कर्या करें | तोह वो हामने आपनी जाती की वीरता की बात बतान्दा | अक हाम उस्से-कुस्से सेनी कोणी ,हाम राजपूत सेनी सां ,हाम फलाने राजा की संतान सां ,म्हारो रोहतक में तूती बोले स ,एर हाम नु कर दयां एर ऊँ कर दयां | में बोल्या मखा भाई हाम ने तोह, ई ताहि आज ताहि किम्मे ना कही स ,एर योह इस्सी-२ धमकान आली बात क्यों कर स | हाम चाकू तलवार राखाँ सां , भेड़ दे सी ने मार दिया कराँ | असल में जितने बेर बिकते ,ऊ के पिस्से ऊ धोरे रह्या करदे एर वो ई बात तें डर्या करदा ,अक कदे कोए खोस ना ले जा | ऊँ भो वो मरियल सा,छोटा सा था, एर हाम तीनु ६ फीट के लव लाग्न लागरे थे ,एर मेरे ख्याल में वो म्हारे जावन तें डर्या करदा |
उनकी रोज सांझ ने खच्चर रेहड़ी आया करदी ,एर जीतने बेर बच जांदे ,२-३ या चार बोरी ,ऊ ने एर ऊ के पिस्स्याँ ने, ऊ का भाई ले जांदा | एक दिन ,वारी सांझ सी ने ,ऊ का भाई अन्धेरा होए पाछे लिकड़ा रेहड़ी ले कें | एर दो ढाई की.मी जा लिया, जब हामने घेर लिया ढाठे मार के | एर ऊ की २ बोरी बेरां की खोस ली, एर खेताँ में कोठड़े में ले जा के गेर दी | फेर कई दिन ताहि हामने एर म्हारी गाल के बाल्कां ने मुफ्त के बेर खाए |
२-३ दिन पाछे हाम सेनी धोरे फेर गए तोह वो मुंह लटकार्या था | हामने बुझी ,अक रे सेनी के होया ,तू दुखी सा लागे स | वो बोल्या अक थारे गाम में बाग लेवन का फेदा कोणी | कोए दीन- धरम ना रह्या | मेरा भाई लूट लिया २ दिन पहलम | हाम बोले वा थारी तलवार,राजपूती शान एर चाक़ू छुरी कित धरी रह गी |
 
रविंदर जी जो लोग घना बोले हैं ना बे तो सबसूं पेला ही लूट जावे और आपरी बात पढके मने एक कहावत याद आगी:
थोथा चना बाजे घना
 
[मेरे बड्डे दादा का छोट्ला छोरा मेरा काका थानसिंह ( जिह की सानी में मन्ने गार्या रलाई थी , एर जिह के बाजरे के डाम्चे के मन्ने जेवड़ी बाँध के मुफ्त में डिब्बे बज्वाएय थे ) वो-ए काका थान सिंह | ऊ का एर मेरा बैर सा होरा था | वो काम चोर था | ऊ का बड़ा भाई सिख था ,वो गुरदवारयाँ में पड्या रह्या करदा | यो किम्मे उलटा काम कर देंदा तोह ,मेरी काकी मेरे बाबु तह केंदी , अक रमिंदर(वा मन्ने नु-ए कह्या करदी ) के बाबु एक बे इह के काका ने धमकाइये | मेरा बाबु बड़ा था ,जयां तें ऊ की जिम्मेदारी थी | एर जा वो महारा किम्मे नुक्सान कर देंदा ,एर मेरा बाबु धमका देंदा तोह मेरी काकी लड़न आ जांदी , अक तम तोह म्हारा घर उजाड़ना चाहो सो थारी नजर धरती पे स( किब्बे-२ वो घर छोड़ के भज जाया करदा) | तोह म्हारा
किम्मे नुकसान कर भी देंदा ,तोह मेरा बाबु ना धम्कान्दा अक खाम खा सर हो ज्यां गे |
म्रेरे बाबु ने मेरी ड्यूटी ला राखी थी, अक स्कूल की छुट्टी पाछे रोज खेताँ में जाणा, एर आधे पट्टे का हरया (खरपतवार ) पाड्न्ना | उने में ,म्हारे कोठड़े के सहारे, नाली में कट्ठा कर कें गेर आया करदा, एर फेर मेरा बाबु उने ठा लायान्दा | योह कामचोर काका , सांझ नु ,जब में चल्या जांदा घरां ,तो आपने रह्डू में मेरा पाड्या होया हरया गेर कें डाकां आंदा | मेरे बाबु ने में धमकाया भी, अक तू हरया कोणी पाड़ कें आया ,झूठ बोले स | तोह मन्ने उनके गंडासे धोरे पड्या होए हरया दिखाया ,अक यो काम इस्से का कर्या होड़ स, एर यो तो सारा दिन कोठड़े में सूत्या पड्या रह स ,ईपे बूझो इनने कद हरया पाड्या | पर सिद्ध करें पाछे भी राड़ के डर तें ,मेरा बाबु थानसिंह तें किम्मे कोणी कंदा |मन्ने थान सिंह तें बदला लेवन की पलान बनाई अक यो जित भी फंस्ग्या उथे-ए इह तें बदला लेणा स |
म्हारा रात का ओसरा होया करदा जाड्यां में पानी का | १.५ घंटा थानसिंह का पहलम एर १.५ घंटा म्हारा पाछे | मेरा बाबु दिन में नाके -बंधे कर जाया करदा जुकर में कम तें कम हांगे में काम कर सकूं (जब में ११-१२ साल का था, एर मेरे बाबु की रत की शिफ्ट होया करदी )| थानसिंह की आदत थी अक वो लुगाई के (मेरी काकी ) के डर तें पानी पे तोह आ जांदा पर कदे थम्ब -डोली कोणी दिया करदा खेत में ,एर एक नाके पानी दिया करदा | एर किल्ला जिन्ना भर जांदा उतना-ए बाह के बो दिया करदा | उअह के कई किल्ले आये साल बिना बोये रह जांदे | तो एक रात वो आपना पानी काट कें ,एर जा सोया कोठड़े में | उनने बेरा था अक रविंदर टेम पे आवेगा, एर आप काट ले गा ,एर वारी आया तो उसका फेदा था | में तोह बदले के चक्कर में था, एर ऊ की गेल की गेल पोंच लिया खेत में, एर जुकर वो कोठड़े में जा कें सोया ,मन्ने पानी तोड़ दिया | म्हारे खेत माडे ढल्मा पड़े थे | ऊका २०-२५ खाट वारा में हांडया होया पाणी भी उतर के म्हारे खेत में आ लिया | एर डेढ़ घंटे पाछे में भी कोठड़े में जा कें, मेरे काका नु ठा कें बोल्या ,अक काका में आ लिया, एर पाणी काटू सूँ , मेरा काका बोल्या ,ठीक स कट ले | एर फेर जा बताई अक पाणी तोह पहलम तें -ए टूट रया स | तडके-तड़क फेर मेरी काकी ने धर कें लिया धार पे थानसिंह , एर निरी गाल बाकि थान सिंह ताहि | योह काण्ड मन्ने दो बे दोहराया थान सिंह गेल, फेर मेरी काकी ऊह की गेल मजदूर खंदान लागी ,जब उह का पेंडा छुट्या मेरी अल्बाद तें |
 
म्हारे ४-५ किल्ले मेरे दादा ने नहर विभाग आल्याँ ताहि किराए पे दे राखे थे| जब सी हरयाने नहर एर नाली पक्की करण का कार्यक्रम चाल रया था | क्युओंकी उन् में रेही हो री थी ,एर कीमे ख़ास पैदावार ना होवे थी | उनके सामान में सीमेंट के बंधे , पाइप ,एर नाली के तले के बिछान के स्लेब ढालन के सांचे थे | आधे किल्ले में सीमेंट के गोदाम थे | मतलब यो स अक पूरी फेक्ट्री खड़ी कर राखी थी | ऊड़े पहलम ४-५ साल तोह म्हारे गाम का एक बुधा चमार रूखाली रह्या करदा | जब तो हामने कोए तकलीफ ना होई | वो रिटाएर होए पाछे ,एक मदीने का चमार आग्या ड्यूटी देवन | वो देखन में तो कती सुथरा लाम्ब्बा जाट लागे था ,बड्डी-२ धोळी मुन्छ्या आला | वो रिटायर फोजी था एर हमेशा क़ानून की बात करें जाया करदा | ऊ में कई कलाकारी भी थी | वो पत्रे की रंगीन फुलझड़ी बनाया करदा | म्हारे गाम की एर मदीने की छोरी जब दुस्सर ले कें जाया करदी तो ऊ की फुलझड़ी भी ऊ में होया करदी
| उन् सान्च्या के काबले (नट-बोल्ट) भी पड़े थे ,.जो कई टन होंगे, एर खुल्ले में पड़े-पड़े जंग खावन लागरे थे | हाम गर्मियां में उन् नटआँ की आइसक्रीम खाया करदे | एक नट २५०-३०० ग्राम का होंदा होगा, तो हामने २-३ आइस क्रीम मिल जांदी | ई मदिन्वाल ने आंदे क़ानून की दुवाही दे कें ,एर म्हारी आइस क्रीम बंद कर दी | मने कही अक आप फुलझड़ी बणा के बेचो ,एर मुर्गी पालो ,यो के कानूनी स | वो बोल्या छोरा तू घणा बोले स | पर मन्ने ठान ली अक यो सुधारणा भी स एर आइस क्रीम भी खाणी सें |
उंने उड़े २५-३० मुर्गी भी पाल राखी थी | एर कई दडबे बणा राखे थे ,जिन के वो रात नु सांकल ला दिया करदा | उड़े रात ने जंगली कुत्ते आ जाया करदे ,एर कदे-कदे ऊ की मुर्गी ठा ले जांदे , जा कोए बहार रह गी हो तो | यो था भी बड़ा डरपोक ,जा रात नु ई ने कोए सुते नु ठावे , एर जान पिछान का भी हो, तो आपने कमरे के किवाड़ कोणी खोल्या करदा ,डरदा | खाम खा का चोकीदार बणा राख्या था |मन्ने एक रात नु ई के दडबे की सांखल खोल दी | कई मुर्गी आगले दिन तडके तें पहालम कुत्ते ठा ले गे | थोड़े दिन पाछे इहने मुर्गी पालनी-ए छोड़ दी | ईह गेल्याँ और दो तीन अल्बाद करी थी ,वे आगली पोस्टां में बताऊंगा |
 
Last edited:
म्हारी पछीत में एक घर लागे था | उनका छोरा नया-२ जवान होया था | माड़ी मोटि पहलवानी भी करण लाग्या था | एर चोडी टांग कर कें चाल्या करदा जानू तोह इब्ब हग दे गा | जब सीक कम्पीटीशन की रागनिया का घणा जोर चाल ऱ्या था | एर इस्से -२ नए-२ गाबरू देशी टेपरिकोर्डर (घणे बड्डे-२ साइज के ) विदेशी भाव तें खरीद कें एर छात्यां पे धर कें बजाया करदे | सारे गाम में साबत दिन रोला माच्या रेंदा | इस छोरे तें कई बे कही अक भाई बालक रोवे सें ,इतना खुड्का ना कर्या करें, तन्ने सुननी सें तोह, आपने घर ने धर कें बजा ले ,पड़ोसियां नु तंग ना करे | पर योह मान्या कोणी | ऊ में हांगा पाट्या जा था | ऊ के बाबू ताहि कही अक भाई इहने समझा ले | ऊ का बाबू बोल्या , हाम ने कई बे कह ली, पर मानदा कोणी, हाम भी तंग होरे सां इह खुडके तें | घणा बोलाँ गे तोह ,किम्मे खा पी जा गा ,एक यो ए रह रया स ( ऊ का बड्डा भाई धमकाइयें पाछे भाज गा था ,एर इब्ब ताहि उका बेरा कोणी पाट्या था ,कई साल पाछे भी ) | जयां तें मन्ने सोची ,अक कदे यो म्हारे सर हो जा, इह का होर किम्मे इलाज करना पडेगा |
वो किते भी जांदा तो ऊ टेप नु छात पे-ए बाज्दा छोड़ जाया करदा | में जब मुंबई में डिप्लोमा करण लाग्र्या था एर मन्ने इलेक्ट्रोनिकास के बारे में थोड़ी बहोत जानकारी हो गी थी | जब सांझ सी के ने वो जोहड़ पे मेन्ह्स्या नु पानी पयावन गया, तोह में छत पे चढ़ ग्या ,एर उस टेप के दोनु स्पीक्रां में सेक्रेऊ ड्राईवर घुसेड दिया | वो जब उलटा आया तोह वो टेप भुंडी ढाल बिरड़ावन लाग्र्या | गाम में -ए दूकान थी ,दे कें १००-२०० रपिये ठीक करवा लाया | एर फेर आपने बाबु गेल्याँ लड्या भुंडी ढाल ,अक तन्ने क़र्या स यो काम और तो किस्से की हिम्मत कोणी होवे | २-३ दिन होगे फेर वो-ए रोला माच्णा सुरु होगया | मखा इबके इस्सा बंदोबस्त करूंगा ,अक यो समरे भी कोणी गा | फेर मोका लगदे मन्ने ऊअह में पाणी गेर दिया | जब जा कें पांडा छुट्टया , फेर ऊह के बाबु ने दुसरा टेप ना लेवन दिया |
 
में जब मुंबई में डिप्लोमा करण लाग्र्या था एर मन्ने इलेक्ट्रोनिकास के बारे में थोड़ी बहोत जानकारी हो गी थी |

जब सांझ सी के ने वो जोहड़ पे मेन्ह्स्या नु पानी पयावन गया, तोह में छत पे चढ़ ग्या ,एर उस टेप के दोनु स्पीक्रां में सेक्रेऊ ड्राईवर घुसेड दिया |

फेर मोका लगदे मन्ने ऊअह में पाणी गेर दिया |

Bhai Ravinder saari baat thik sain...Ye jo kaam aapne karein hain ye to bina electronics ki jaankari tai bhi ho jaate aak ni :D
 
Bhai Ravinder saari baat thik sain...Ye jo kaam aapne karein hain ye to bina electronics ki jaankari tai bhi ho jaate aak ni :D

Samjhya nahi tu..
Ravinder bhiasaab ne nyu btayi se ke un-ne "Electronics" te diploma kar rakhya se, kade koe sa aade sochta ho ak "plastic" jisi trade te karke baithe ho! :rock




PS : Er je yu nyu likh deve hai ak "manne uske JFET er MOSFET uda diye", fer bhi to manne hai "electronics" aali baat :D
 
Bhai Ravinder saari baat thik sain...Ye jo kaam aapne karein hain ye to bina electronics ki jaankari tai bhi ho jaate aak ni :D

haan bhai ho to jaande,par jih ne jaankaari s wo pakkaa kaam karegaa,er binaa jankaari ke bhi kai maanas tang the par unne to koni karyaa yo kaam.pahalam to latth maaran tein siwaay aur kimme naa aayaa kardaa lokaan nu.
 
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