Honey, Its all about love: Romantic Pyar ke Nyare Nyare Kisse

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deepak bhai sabki privacy dekhni padi..
na te sabne bahut najdeek te jaanu hun..
jya taayi naam na likhe..
iste faltu ke privacy chaho ho mere te..

bhai anirudh tanney post tey ghani naa likh raakhi par tu jaaney ghanaa s.par aapas ki bahas laa ke ,kissey kaa koye nuksaan naa kariyo.err tanney post 420 aaley ke bare me kai baat to kati sahi kah di ,saachi baat
 
deepak bhai sabki privacy dekhni padi..
na te sabne bahut najdeek te jaanu hun..
jya taayi naam na likhe..
iste faltu ke privacy chaho ho mere te..


Bhai meri post ka wo "privacy" wala hissa sare JL members ke liye tha..
Mera ishara aap ki tarf nahi tha. Aapne acha kiya ye post likh kar. Shayad ab thodi savdhani barte members is dhaage me kuch likhte time :)
 
Malik Saab kasuti [B]"Sansani"[/B] faila di JL pe aapki is post ne.

Bhai kise dusre ki private life ke bare me kuch nahi likhna chiaye online forums me. Duniya padhe se bhai.
Apni life ki privacy jitni dekhte ho, utni hi dusro ki life ki bhi samjho.

sansani hahahaha , chain se sonaa he to jaag jaao.
kissey ki khulley mey naa udaao.
neend nahi aayegi raaton mey
bhed khull jaayengey baat baaton mey
 
Fellow members,

Though the thread starter had requested me to close this thread 3-4 days back by sending a PM but i thought that you guys are keeping it going so there is no harm in waiting for some more days.

Though "LOVE" itself is the feeling above all emotions and pure so its not at all possible to start and end this discusson pertaining to love, but still all of you gave it a good try and took active part in a way most suitable to your wishes and thoughts and views.

Some took a bold step by posting their own experiences of love, some took a highway and shared about others who were close in their lives, keeping the privacy in mind it was all in good taste and healthy discusson. Despite a strong opposition this thread touched a post count of nearly 270, which is all due to efforts of active members and need an applause:) I'm thanking you all on behalf of the thread starter and closing this thread. In case if you feel this topic needs more discusson a new thread can be started.
 
Last edited:
:)

yeh thread khol to diya magar itni chuppi hain yahan.....jisne khulwaya woh hi kuch kahe.....Bring it back to some life.:):)

hahahhahahahhahhaha sahi kaha Shibani ji....... ab to yaha sanata chaya hua hai............
ab jab fir se ye thread re open hui hai to kuch ache k liye hui hai......isliye ab fir se yaha apne apne exp. share karo, daro mat.

Congratulations everyone
 
Last edited:
प्यार का इजहार या अभिवयक्ति कुछ खास सब्दों या वाक्यों तक ही सिमित नहीं होती !
रविंदरजीत भाई ने इस चर्चा की अपनी एक पोस्ट में, अपने निजी अनुभव लिखते हुए, इस विचार को बड़े ही मार्मिक ढंग से स्पष्ट किया था !
इन सब के इलावा, हमारे सामाजिक परिवेश का, हमारे रिश्तों पर ,हमारी भावनाओं की अभिवयक्ति पर बहुत प्रभाव रहता है !
हमारी ग्रामीण जीवनशैली, रिश्ते नाते और मान मर्यादा , बहुत हद तक हमारी अभिवयक्ति को संचालित भी करते हैं और मर्यादित भी !
एक जैसे हालात में ,एक ठेठ देहाती पत्नी और एक आधुनिक पत्नी की अभिवयक्ति की तुलना कीजिये !
एक कहेगी, "डार्लिंग बहुत देर करदी" ! दूसरी कहेगी," अनपुत्ते घनी वार करदी"
सयुंक्त परिवार में ताऊ, ताई को आने का संकेत खंखार(by coughing) कर दे देता है !
प्यार की अभिवयक्ति में, कभी-२ हावभाव भी शब्दों का स्थान ले लेते हैं !

इस सम्बन्ध में मुझे बचपन का एक वाकया याद आ रह है
उम्र में करीब दस साल बड़ा मेरा एक पडोसी भतीजा नेवी में कार्यरत था ! विवहा के कुछ दिन बाद डयूटी पर चला गया था !
एक साल बाद घर आया था ! वो साल (घर का बड़ा कमरा ) के बीच में एक पीढ़े (स्टूल) पर बैठा था ! घर की औरतों और बच्चों ने उससे घेरा हुआ था !
सभी कुछ न कुछ सवाल कर रहे थे ! वह अनमने भाव से जवाब दे रह था ! शायद उसका ध्यान उनके सवालों पर नहीं था ! बीच -२ में नजर इधर २ घुमा कुछ ढूंढने का प्रय्तन करता !
तभी, लम्बा घूँघट ताने उसकी पत्नी ने प्रवेश किया ! कमरे के एक कोने में दीवार का सहारा ले खड़ी हो गई! उसके चेहरे पर एक खास चमक लिए, मुस्कान उभर आई ! ! पत्नी ने प्रतिउत्तर में थोडा शिर झुका दिया ! शायद घूँघट में, प्रसन्नता से आंखे चमक रही थी , चेहरा दमक रह था ! एक वर्ष के विरह की पीड़ा छू मन्त्र हो गई थी ! शारीरिक न सही आत्मिक मिलन हो गया था !
बाद में मेरे उस भतीजे से प्रेरित हो में भी नाविक बन गया था ! हमारे बीच घनिष्ठता बढ़ गई थी ! मैंने उसके विवशता भरे इस सांकेतिक मिलन के विषय में उससे बात भी की थी!
मेरे गाँव की इस तरह की कुछ और घटनाएं भी मुझे याद हैं !

सत्यपाल
 
प्यार का इजहार या अभिवयक्ति कुछ खास सब्दों या वाक्यों तक ही सिमित नहीं होती !
रविंदरजीत भाई ने इस चर्चा की अपनी एक पोस्ट में, अपने निजी अनुभव लिखते हुए, इस विचार को बड़े ही मार्मिक ढंग से स्पष्ट किया था !
इन सब के इलावा, हमारे सामाजिक परिवेश का, हमारे रिश्तों पर ,हमारी भावनाओं की अभिवयक्ति पर बहुत प्रभाव रहता है !
हमारी ग्रामीण जीवनशैली, रिश्ते नाते और मान मर्यादा , बहुत हद तक हमारी अभिवयक्ति को संचालित भी करते हैं और मर्यादित भी !
एक जैसे हालात में ,एक ठेठ देहाती पत्नी और एक आधुनिक पत्नी की अभिवयक्ति की तुलना कीजिये !
एक कहेगी, "डार्लिंग बहुत देर करदी" ! दूसरी कहेगी," अनपुत्ते घनी वार करदी"
सयुंक्त परिवार में ताऊ, ताई को आने का संकेत खंखार(by coughing) कर दे देता है !
प्यार की अभिवयक्ति में, कभी-२ हावभाव भी शब्दों का स्थान ले लेते हैं !

इस सम्बन्ध में मुझे बचपन का एक वाकया याद आ रह है
उम्र में करीब दस साल बड़ा मेरा एक पडोसी भतीजा नेवी में कार्यरत था ! विवहा के कुछ दिन बाद डयूटी पर चला गया था !
एक साल बाद घर आया था ! वो साल (घर का बड़ा कमरा ) के बीच में एक पीढ़े (स्टूल) पर बैठा था ! घर की औरतों और बच्चों ने उससे घेरा हुआ था !
सभी कुछ न कुछ सवाल कर रहे थे ! वह अनमने भाव से जवाब दे रह था ! शायद उसका ध्यान उनके सवालों पर नहीं था ! बीच -२ में नजर इधर २ घुमा कुछ ढूंढने का प्रय्तन करता !
तभी, लम्बा घूँघट ताने उसकी पत्नी ने प्रवेश किया ! कमरे के एक कोने में दीवार का सहारा ले खड़ी हो गई! उसके चेहरे पर एक खास चमक लिए, मुस्कान उभर आई ! ! पत्नी ने प्रतिउत्तर में थोडा शिर झुका दिया ! शायद घूँघट में, प्रसन्नता से आंखे चमक रही थी , चेहरा दमक रह था ! एक वर्ष के विरह की पीड़ा छू मन्त्र हो गई थी ! शारीरिक न सही आत्मिक मिलन हो गया था !
बाद में मेरे उस भतीजे से प्रेरित हो में भी नाविक बन गया था ! हमारे बीच घनिष्ठता बढ़ गई थी ! मैंने उसके विवशता भरे इस सांकेतिक मिलन के विषय में उससे बात भी की थी!
मेरे गाँव की इस तरह की कुछ और घटनाएं भी मुझे याद हैं !

सत्यपाल
hmmmmmmmm bahut badiya explanation sir ji..........
gaam me joint family me ab bhi yehi hota hai, sabhi k aapsi prem k karan bahut din o baad jab koi apna aata hai to sabhi use ghair lete hain.
biwi ko to side he pakadni padti hai.
Mere pados me bhi ek bhai tha, vo bhi army me tha, uskhi shadi hogi.
shadi hoyi pache usne vapas duity pe jana pada aur wife ghar chodni padi parents ki seva k liye.
shadi k baad kitt ghane din rukya ja se, vo bhi dakki Pune te har Saturday raat ne by air aa liya karta.
uska yo sang ghar ka ne 2-3 mahine to dekha, fir uska babu bola bhai isne tu apni gail e leja hum to apni seva khud kar lenge, jitni salary tane mile hai uste jyda tu is dhore aan jaan me laga de se.
jab pache vo saal me ek be aaya kare vo bhi usne sath le kar.
 
चाल पड्या -चाल पड्या , तागा चाल पड्या ,खुल्वानिया भी आ लिया.
 
शादी का धोखा :---
में ,अपने ,अपने दोस्तों के ,जाण पिछान आल्याँ के प्यार,प्यार में धोखा ,शादी में धोखा अर न्यारे- न्यारे रंग बिरंगे किस्से लिखूंगा ,पढ़ते जाओ |

एक मेरा दोस्त था ,मेरा बेच मेट | आड़े मुंबई में डिप्लोमा करदी हाण उने घणे मजे लिए | वो मन्ने अलुणा कह्या करदा एक यो तो किम्मे करदा-ए कोणी| फेर वो तो मर्चेंट नेवी में चाल्या गया एर मन्ने सरकारी नोकरी पकड़ ली | कई सालाँ पाछे वो मन्ने एक दिन मार्केट में फेट ग्या | ऊह गेल्याँ दो भुंडे से बालक एर एक भुंडी सी लुगाई | में बोल्या भाई या जतनी तो ना लाग्दी | वो बोल्या अक फेर सांझ ने मिल्यांगे एर में आपणी कहाणी सुनाऊंगा |

सांझ सी नु हाम बैठ गे एक बियर बार में ,एर उहने सुनाई फेर आप बीती :-
या जो भाभी आज तन्ने देखि स या मेरी दूसरी स, एर जाटनी कोणी | या मेरे स्कूल के बेच मेट की साली स | एर जब मेरा तलाक होगया ,पहल्डी तें, जब हाम सेलिब्रेट करण खातर एक एयर फोर्स के ओफ्फिसर मेस में कट्ठे होए थे (उसका स्कूल मेट पायलेट था )| तो उसने आप्नी साली का रिश्ता मेरे तें कर्वान की बात चलाई | तो मन्ने हाँ कह दी एर या आई |इब्ब आगे सुण:-

"मेरे भाई ने आपने बेच मेट दोस्त की बेबे देख ली थी मेरी खातर(ऊह का भाई करनल था आर्मी में)| छोरी आले माडल टाउन रोहतक के थे | में बियाह करवा के एर आपणी बियाहता नु गेल्याँ ले आया आड़े मुंबई में अक मन्ने जहाज में चढ़न में कई दिन लाग ज्यां गे ,इतने आपां होटल में रह्ल्यांगे ,फेर तू वापस आ जाइये | भाई ,में तो रोज चाल्या जांदा कम्पनी में , उहने होटल के कमरे पे एकली छोड़ के | एर बेरे तें कह जांदा अक मेडम नु किम्मे चाहवे तो पोंचा दिए एर ख़याल राखिये,| में ऊह बेरे तें ५० रपिये दे देंदा रोज ,टिप के | तीन चार दिन पाछे बेरे नु बताई अक साहब आपके जांदे-ए ,आप की मेडम धोरे १० नम्बर आला बन्दा आज्या स | भाई मेरे पायां तले तें धरती खिसक गी | मन्ने ऊह बेरे तें कही अक आगले दिन में जाऊंगा एर दूर खडा हो जाऊंगा एर जब वो बन्दा आ ज्या तो तू मन्ने इशारा कर दिए | में आजाऊंगा | उस तें पहलम मन्ने सांझ सी नु टाह ला कें वो बन्दा भी देख लिया था | था अपना कोए लोकल-ए | शकल तें-ए बेरा पाट ग्या था |
आगले दिन पलान के अनुसार में उस के कमरे के भीतर बड़दे-ए माड़ी वार पाछे पोंच्ग्या | एर दोनु रंगे हाथ पकडे गए | मन्ने पुलिस बुलान की धमकी दी अक साची-साची बता दो के चक्कर स | फेर लुगाई ने हाँ भर ली अक यो मेरा पडोसी स अर हाम प्यार कराँ सां | एर म्हारे घर्क्याँ ने धिन्ग्ताने मेरा बियाह तेरी गेल्याँ कर दिया | में तो ईह नु-ए चाहू सूँ |
मन्ने भाई जब्बे उनके घरां फोन कर दिया एर नु कह दी अक थारी छोरी आपने प्रेमी की गेल्याँ आवन लागरी से रिसीव कर लियो | एर मन्ने जिब्बे तलाक का मुकदमा कर दिया | कसूती बात तो या थी अक जिस ट्रेन में हाम आये उस्से में वो प्रेमी भी आया | म्हारे पाछे-पाछे टेक्सी में म्हारे होटल में भी आके रूक ग्या |फेर महारा मुकदमा तीन साल चाल्या | फेर पाँच लाख पे समझोता होया एर मेरा पेंडा छूटग्या |

वाह रे फ़िल्मी कहाणी | मन्ने फेर उस पे घणा तरस आया |
 
andhaa payaar -----

मेरा एक बेच मेट था आड़े मुंबई में | वो मद्रासी ईसाई था | कसूता काला भूषंड| एर मोटा ,जाणु हो झोट्टा| महारा होस्टल कोलाबा में था जो की गेट वे ऑफ़ इन्ड्या के लव-ए था | घने बालक सांझ सी नु उडे हांडअन चाले जांदे ,टेम पास करण खातर | उडे उसकी दोस्ती होगी किस्से जर्मनी की बुढ़िया की गेल | वा पचास अक साल की रही होगी | वा २-३ मिन्हे आड़े-ए रूक गी एर उसका पासपोर्ट ,वीसा सब किम्मे बनवा के गेल लेगी | जब २०-२२ साल का रह्या होगा वो ,एर उह ने तो आपणी पढ़ाई भी बीचाले-ए छोड़ के एर बूढी प्रेमिका की गेल जर्मनी जांदा रह्या | प्यार करण की कोए उम्र नि होंदी | इति सिधम |
 
Last edited:
Aap ke pass bade kisse hain Ravinder ji.....dhal dhal ke hain....badhiya...pyar ke nyare nyare roop...

शिबानी जी ,प्यार अपने आप में बहुत कुछ समेटे हुए हे | ये सब जानते हैं पर परिभाषा अपनी-अपनी होती हे |

प्यार के होते हैं,
अनेक रूप |
कहीं दुःख दर्द ,
कहीं गहरा मरज |
कहीं दर्द की दवा ,
कहीं ओपरी हवा |
कहीं घुप अंधियारा ,
कहीं खीली धूप|
............प्यार के अनेक रूप |
 
प्यार के होते हैं
अनेक रूप |
कहीं माँ का आँचल ,
कहीं प्रेमिका चंचल ,
कहीं बहन की राखी ,
कहीं में और साकी ,
कहीं बच्चों का दुलार ,
कहीं बाप की फटकार ,
प्यार ब्रह्म सवरूप ,
प्यार के अनेक रूप |
 
इस किस्से में घणा मजा सा ना स ,पर वो नु कह्या करें ना , अक "लव अट फस्ट साईट "उस में फिट बेठे स | मेरे तें २-३ बेच सीनियर एक छोरा आड़े मुंबई में एक दंदा के हस्पताल में दांद पड़वान गया | वो वाराणसी का भैया था एर जात का भामण | ऊह के आगे एक छोरी खड़ी थी लेण में | इब्ब यो हस्पताल था डेंटल कोलेज | आड़े जांच पड़ताल करण में-ए इन्नी ठाआं हंडा दे सें , अक आधा दिन तो लिकड़े जा | वा छोरी भी उड़े लवे-ए किस्से कोलेज में पढ़े थी | एर वा भी वाराणसी की भामनी लिक्ड़ाई| बेरा ना के उक चूक लागी ,वे दोनु तो आपणे-आपणे दांद पडवा के , एर सीधे गए वकील धोरे एर बियाह खातर कोर्ट मेरज की अप्लिकेसन दे दी | २ मिन्हा में बियाह होगा | पर म्हारे इन्स्तितुत का नियम स अक इतनी पढ़ाई पूरी नि हो ले गी इतने बियाह नि करवा सकदे | तो वो छोरा पास आऊट होंदे-ए एर ले आया आपनी बन्नो ने | जब दोनुआ के घरक्याँ नु बेरा पाटया | जब आखरी में में उन् तें फेटया था , तो वे सुखी थे तीन बालकां की गेल्याँ |
 
Ravinder ye pakau types farzi soude na bagave aade:D Kimme real life content ho to ger:p KOye na mai likhungi kaal tame lagya to
andhaa payaar -----

मेरा एक बेच मेट था आड़े मुंबई में | वो मद्रासी ईसाई था | कसूता काला भूषंड| एर मोटा ,जाणु हो झोट्टा| महारा होस्टल कोलाबा में था जो की गेट वे ऑफ़ इन्ड्या के लव-ए था | घने बालक सांझ सी नु उडे हांडअन चाले जांदे ,टेम पास करण खातर | उडे उसकी दोस्ती होगी किस्से जर्मनी की बुढ़िया की गेल | वा पचास अक साल की रही होगी | वा २-३ मिन्हे आड़े-ए रूक गी एर उसका पासपोर्ट ,वीसा सब किम्मे बनवा के गेल लेगी | जब २०-२२ साल का रह्या होगा वो ,एर उह ने तो आपणी पढ़ाई भी बीचाले-ए छोड़ के एर बूढी प्रेमिका की गेल जर्मनी जांदा रह्या | प्यार करण की कोए उम्र नि होंदी | इति सिधम |
 
Ravinder ye pakau types farzi soude na bagave aade:D Kimme real life content ho to ger:p KOye na mai likhungi kaal tame lagya to

sunita koochh bhi farzi soudaa ni s, manney pahalam=a kha di thi, hogaa sab sachaa ibb tanney farzi laagey s ,to me ke karoon.ibb paachhaley 15-20 saal me koon kit jaa liyaa,beraa naa , ni tanney fatwaa dendaa saaryaan tein, sabootaan khaatar.
 
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