सुनीता जी, में आपके विचारों से बहुत हद तक सहमत हूँ !
कह नहीं सकता, इस तरह के विरोध का कितने लोग समर्थन करेंगे या इस विरोध का विरोध करेंगे !
मेरी निजी राय है कि, पोशाक का चुनाव, किसी भी लड़की/ महिला का निजी मामला हो सकता है !
एक नजरिया है , खूबसूरती देखने वाले क़ी आँखों में होती है, उसी तरह अश्लीलता भी देखने वाले क़ी आँखों में होती है !
अतः मामला, पहनने वालों, उनके घर वालों और देखने वालों पर ही छोड़ देना चाहिए!
मेरा यह भी मानना है कि अगर हमारी खापों के नेता इसी तरह लोगों कि निजी जिन्दगी में हस्ताक्षेप करते रहेंगे, तब वह दिन दूर नहीं जब हमारी खाप वयवस्था से लोगों का विश्वाश पूरी तरह उठ जायेगा !
खुश रहो !