ravinderjeet
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"यदि जाट बिगड़ जाए , तो उस्से भगवान् ही काबू कर सकता हे |"----------------------डा. रिशले
"यदि जाट बिगड़ जाए , तो उस्से भगवान् ही काबू कर सकता हे |"----------------------डा. रिशले
"चितोड़ ,उदयपुर ,नेपाल तथा महाराष्ट्र में गहलोत जट्टों का राज था | भाप्पा रावल ,महाराणा प्रताप ,छत्रपति शिवाजी तथा नेपाल के राणा वंश नरेश सभी जाट योधा थे |"------इतिहासकार महिपाल आर्या
रविंदरजीत भाई, पहले तो मैं आपकी शोध और श्रम के लिए आपका धन्यवाद करना चाहता हूँ , आप काफी योगदान कर रहे हैं जाटलैंड पर , एक अच्छी बात है i इसके साथ ही आपसे असहमत होने के लिए क्षमा चाहूँगा i हमारे देश में स्कूलों के पाठ्यक्रम में हमने यह पढ़ा था कि महाराणा प्रताप एक राजपूत राजा थे और छत्रपति शिवाजी एक मराठा शूरवीर I महीपाल आर्य जी की इस सनसनीखेज जानकारी ने तो वाकई आश्चर्यचकित कर दिया है i इस पर यकीन करना मुश्किल है. उससे भी बड़ा आश्चर्य हमारे जाटलैंड के विद्वान सदस्यों की सोची समझी चुप्पी पर भी है. सिवाए प्रशांत भाई के किसी ने भी इसपर सवालिया निशान नहीं लगाया i शायद उनकी आवाज़ रविंदर जीत भाई के रुतबे के बोझ के नीचे दब चुकी है i लेकिन यह रवैया गलत है i आपसी सम्बन्ध, भाईचारा और दोस्ती अपनी जगह है परन्तु पंचायत में आदमी को निर्भीकता के साथ अपने दिल की मानते हुए स्पष्ट, सच्ची बात कह देनी चाहिए i"चितोड़ ,उदयपुर ,नेपाल तथा महाराष्ट्र में गहलोत जट्टों का राज था | भाप्पा रावल ,महाराणा प्रताप ,छत्रपति शिवाजी तथा नेपाल के राणा वंश नरेश सभी जाट योधा थे |"------इतिहासकार महिपाल आर्या
उससे भी बड़ा आश्चर्य हमारे जाटलैंड के विद्वान सदस्यों की सोची समझी चुप्पी पर भी है. शायद उनकी आवाज़ रविंदर जीत भाई के रुतबे के बोझ के नीचे दब चुकी है i लेकिन यह रवैया गलत है i आपसी सम्बन्ध, भाईचारा और दोस्ती अपनी जगह है परन्तु पंचायत में आदमी को निर्भीकता के साथ अपने दिल की मानते हुए स्पष्ट, सच्ची बात कह देनी चाहिए i
विपिन, यह सही बात है कि हम में से अधिकांश सदस्य किसी भी पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया लेखक से अपने व्यक्तिगत संबंधों और जाटलैंड पर उसके कद से प्रभावित होकर करते हैं i और इसका एक कारन गुटबाजी और असुरक्षा की भावना है i काफी लोग कुछ सदस्यों के आक्रामक प्रतिकार और उपहास उड़ाने की प्रवृति से घबराकर लिखना ही छोड़ देते हैं. I मैं भी कोई महात्मा नहीं हूँ और इन कमियों का शिकार हूँ. आओ हम सब प्रयत्न करें अपनी कमियों को दूर भगाने की ताकि हमारी इस वेब-साईट की छवि बेहतर बन सके और समुदाय की प्रतिष्ठा बढे ihahaha are you serious vp shaheb?!
Thats why you are the most liked member on jatland.
विजयपाल जी ,आतिश ,उप्पेंदर एवम प्रशांत जी , जी में कोई इतिहासकार नहीं हूँ , हाँ इतिहास में मेरी रूचि बहुत हे और में ऐसी पुस्तके पढ़ते रहता हूँ | ये धागा जेसा की मेने पहले भी कहा था ,क्या उचित हे और क्या अनुचित ये सिद्ध करने के लिए नहीं चलाया था | जो भी मेने यहाँ लिखा हे वो अनेक जगहों पर अनेकों बार उधृत हुआ हे | इन् सब की वास्तविकता और सत्यता का में पर्तिपादन नहीं करता | मेरे विचार से ये इतिहासकारों की बहस का विषय हे | दूसरी बात जो वि.पि. जी ने कही हे की "जो इतिहास हमें स्कूल ,कालेज में पढ़ाया गया हे " के विषय में ,में ये कहता हूँ की क्या वि.पि. जी उसको सत्य मानते हैं | रोमिला थापर जेसे भाड़े के टट्टुओं दवारा लिखा हुआ इतिहास तो आप सही मानते हैं जो की आधुनिक भाट हैं और पिछले ५००० हजार साल के विभिन्न काल में विभिन्न लोगों दवारा जट्टों के बारे में अगर कुछ सकारात्मक लिख दिया गया उसका आप विरोध करते हैं | आप को इतिहास में पढ़ाया गया हे कि दिल्ली पर तोमरों का ९०० साल तक शाशन था | पर कहीं भी लिखा कि वे जाट थे | दिल्ली के चारों और तोमरों के २००-३०० गावं आज भी हैं जिनमे से मुट्ठी भर अपने आप को राजपूत कहने लग गये | अगर सच्चा इतिहास लिखा गया होता तो आज जो इतनी सारी पुस्तकें बाजार में आती हैं और हर ५-६ महीने में किसी ना किसी पुस्तक पर प्रतिबंध लगाना पड़ता हे सच्चाई को छुपाने के लिए , ये ना करना पड़ता | पंजाब केसरी ने एक लेखों कि सीरिज चलाई थी कुछ साल पहले "झूठे लोग-झूठा इतिहास " उसमे आपके सकूल कालेज में पढाये जाने वाले इतिहास कि बखिया उधेडी गई थी | अगर आप का इतिहास सच्चा हे तो उसमे ये क्यों नहीं पढ़ाया गया :-रविंदरजीत भाई, पहले तो मैं आपकी शोध और श्रम के लिए आपका धन्यवाद करना चाहता हूँ , आप काफी योगदान कर रहे हैं जाटलैंड पर , एक अच्छी बात है i इसके साथ ही आपसे असहमत होने के लिए क्षमा चाहूँगा i हमारे देश में स्कूलों के पाठ्यक्रम में हमने यह पढ़ा था कि महाराणा प्रताप एक राजपूत राजा थे और छत्रपति शिवाजी एक मराठा शूरवीर I महीपाल आर्य जी की इस सनसनीखेज जानकारी ने तो वाकई आश्चर्यचकित कर दिया है i इस पर यकीन करना मुश्किल है. उससे भी बड़ा आश्चर्य हमारे जाटलैंड के विद्वान सदस्यों की सोची समझी चुप्पी पर भी है. सिवाए प्रशांत भाई के किसी ने भी इसपर सवालिया निशान नहीं लगाया i शायद उनकी आवाज़ रविंदर जीत भाई के रुतबे के बोझ के नीचे दब चुकी है i लेकिन यह रवैया गलत है i आपसी सम्बन्ध, भाईचारा और दोस्ती अपनी जगह है परन्तु पंचायत में आदमी को निर्भीकता के साथ अपने दिल की मानते हुए स्पष्ट, सच्ची बात कह देनी चाहिए i
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