jat duniyaa ki najar mey

"यदि जाट बिगड़ जाए , तो उस्से भगवान् ही काबू कर सकता हे |"----------------------डा. रिशले
 
"मेने १९६७ से पहले भारत की यात्रा करने से पहले इतिहास के विभिन्न पहलुओं का अध्यन किया और पाया की जाट भारत से मध्य एशिया और मध्य यौरोप तक रहते हैं | वे अलग-अलग देशों में अलग-अलग नामों से जाने जाते हैं | और वे भाषाएं भी अलग-अलग बोलते हैं | लेकिन उनका निकास एक ही हे |"--------------------------रुस्सी इतिहासकार के.ऍम सेफकुदरात
 
"राजा गज (इनको जाट राजा के रूप में जाना जाता हे ) ने गजनी के पास वर्तमान में अफगानिस्तान में बामियान के पास बुध का विश्व परशिध स्तूप बनवाया जिसे तालिबानियों ने सन २००१ में संसार के सभी देशों की परवाह ना करते हुए दाइनामाइत से उड़वा दिया |"----------इतिहासकार डा. ख़ुशी राम रावत
 
"यदि जाट बिगड़ जाए , तो उस्से भगवान् ही काबू कर सकता हे |"----------------------डा. रिशले

chalo koye to hai kaabu karan aala jaatan nai..
 
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"चितोड़ ,उदयपुर ,नेपाल तथा महाराष्ट्र में गहलोत जट्टों का राज था | भाप्पा रावल ,महाराणा प्रताप ,छत्रपति शिवाजी तथा नेपाल के राणा वंश नरेश सभी जाट योधा थे |"------इतिहासकार महिपाल आर्या
 
"मकोड़ा ,घोड़ा और जठोडा (जाट ) pakdne पर कभी नहीं छोड़ते |"------चोधरी ओमप्रकाश पतरकार
 
"आज भी काबुल चिल्ला रहा हे ,बंद करो फाटक रंजीतसिंह आ रहा हे "-----------गायक चोधरी इस्वर सिंह गहलोत
 
"जट्टों का इतिहास देख लें |बड़ा ही गोरव पूर्ण इतिहास हे |इतना गोरव पूर्ण की वेसा इतिहास खोजना मुश्किल हो जाए | इतिहास कारों ने इस्से इतना तोड़ मरोड़ कर लिखा हे की जिसे शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल हे | क्या यह सब महज इतिफाक हे ?----पंजाब केसरी (२५.०९-२००२ ) झूठा इतिहास -झूठे लोग लेख में
 
"चितोड़ ,उदयपुर ,नेपाल तथा महाराष्ट्र में गहलोत जट्टों का राज था | भाप्पा रावल ,महाराणा प्रताप ,छत्रपति शिवाजी तथा नेपाल के राणा वंश नरेश सभी जाट योधा थे |"------इतिहासकार महिपाल आर्या

I object to this statement. This is sole distortion of history, Ravinder jeet singh you are doing a great work but please recheck the authenticity of what you are writing
 
"चितोड़ ,उदयपुर ,नेपाल तथा महाराष्ट्र में गहलोत जट्टों का राज था | भाप्पा रावल ,महाराणा प्रताप ,छत्रपति शिवाजी तथा नेपाल के राणा वंश नरेश सभी जाट योधा थे |"------इतिहासकार महिपाल आर्या
रविंदरजीत भाई, पहले तो मैं आपकी शोध और श्रम के लिए आपका धन्यवाद करना चाहता हूँ , आप काफी योगदान कर रहे हैं जाटलैंड पर , एक अच्छी बात है i इसके साथ ही आपसे असहमत होने के लिए क्षमा चाहूँगा i हमारे देश में स्कूलों के पाठ्यक्रम में हमने यह पढ़ा था कि महाराणा प्रताप एक राजपूत राजा थे और छत्रपति शिवाजी एक मराठा शूरवीर I महीपाल आर्य जी की इस सनसनीखेज जानकारी ने तो वाकई आश्चर्यचकित कर दिया है i इस पर यकीन करना मुश्किल है. उससे भी बड़ा आश्चर्य हमारे जाटलैंड के विद्वान सदस्यों की सोची समझी चुप्पी पर भी है. सिवाए प्रशांत भाई के किसी ने भी इसपर सवालिया निशान नहीं लगाया i शायद उनकी आवाज़ रविंदर जीत भाई के रुतबे के बोझ के नीचे दब चुकी है i लेकिन यह रवैया गलत है i आपसी सम्बन्ध, भाईचारा और दोस्ती अपनी जगह है परन्तु पंचायत में आदमी को निर्भीकता के साथ अपने दिल की मानते हुए स्पष्ट, सच्ची बात कह देनी चाहिए i
 
मैं वी.पी. सिंह जी से सहमत हूं. बल्कि मैं तो यह कहना चाहूंगा कि इस थ्रेड में जो बातें कही गई हैं, उनमें से अधिकतर बकवास हैं. बग़दाद में जट्ट, फलाने में जट्ट, महाराणा प्रताप जाट, शिवाजी जाट...ऐसा प्रतीत होता है, जिस पुस्तक से रविन्द्रजीत सिंह बलहारा इस थ्रेड में ये तथाकथित विद्वानों के विचार लिख रहे हैं, वह एक बकवास पुस्तक है. वर्तमान में मुख्य रूप से बहुलता में जाट यदि कहीं हैं तो वे हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान में हैं. कुछ हद तक पंजाब में भी कहे जा सकते हैं, बशर्ते कि वे खुद हमारे साथ (हिंदू जाटों के साथ) मिलना चाहते हों. पाकिस्तानी जाटों और मुस्लिम जाटों को समझा-बुझाकर खुद में मिलाने की जरूरत है. ऐसा लगता है कि संबद्ध पुस्तक जाटों का मजाक उड़ाने के लिए काल्पनिक विचारों पर आधारित है. यदि ऐसा है तो इस पुस्तक में लिखने वालों को यही संदेश (तर्क पर आधारित) दिया जाना चाहिए कि वे इस स्थिति में नहीं हैं कि जाटों का मजाक उड़ा सकें. जाटों में तमाम खूबियां हैं- वे दुर्दांत योद्धा हैं, मेहनतकश किसान हैं, विश्व चैंपियन खिलाड़ी हैं, दबंग हैं, संपन्न नागरिक हैं, आकर्षक हैं, सफलतम राजनीतिज्ञ हैं, उनके जोर वाले अपने राज्य/क्षेत्र हैं...उनमें तमाम खूबियां हैं, जो विश्व की किसी भी अन्य जाति में नहीं हैं...इस दुनिया में कोई भी आ जाए...चाहे कोई सरदार हो, चाहे मुसलमान या ईसाई...कोई आ जाए और तर्क के आधार पर महान जाटों के मुकाबले की खूबियां गिनाकर दिखाए...
 
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उससे भी बड़ा आश्चर्य हमारे जाटलैंड के विद्वान सदस्यों की सोची समझी चुप्पी पर भी है. शायद उनकी आवाज़ रविंदर जीत भाई के रुतबे के बोझ के नीचे दब चुकी है i लेकिन यह रवैया गलत है i आपसी सम्बन्ध, भाईचारा और दोस्ती अपनी जगह है परन्तु पंचायत में आदमी को निर्भीकता के साथ अपने दिल की मानते हुए स्पष्ट, सच्ची बात कह देनी चाहिए i

Hahaha Are you serious VP Shaheb?!

Thats why you are the most liked member on Jatland.
 
hahaha are you serious vp shaheb?!

Thats why you are the most liked member on jatland.
विपिन, यह सही बात है कि हम में से अधिकांश सदस्य किसी भी पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया लेखक से अपने व्यक्तिगत संबंधों और जाटलैंड पर उसके कद से प्रभावित होकर करते हैं i और इसका एक कारन गुटबाजी और असुरक्षा की भावना है i काफी लोग कुछ सदस्यों के आक्रामक प्रतिकार और उपहास उड़ाने की प्रवृति से घबराकर लिखना ही छोड़ देते हैं. I मैं भी कोई महात्मा नहीं हूँ और इन कमियों का शिकार हूँ. आओ हम सब प्रयत्न करें अपनी कमियों को दूर भगाने की ताकि हमारी इस वेब-साईट की छवि बेहतर बन सके और समुदाय की प्रतिष्ठा बढे i
 
@Ravinder: adhiktaar post is thread mai..kaati jhooth arr mangharant kahani laage hain..kripya karke aap apni kitab or jahan se ye utha kar likh rahe ho..cross check karooo ki ye sach hai ya jhooth..
 
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रविंदरजीत भाई, पहले तो मैं आपकी शोध और श्रम के लिए आपका धन्यवाद करना चाहता हूँ , आप काफी योगदान कर रहे हैं जाटलैंड पर , एक अच्छी बात है i इसके साथ ही आपसे असहमत होने के लिए क्षमा चाहूँगा i हमारे देश में स्कूलों के पाठ्यक्रम में हमने यह पढ़ा था कि महाराणा प्रताप एक राजपूत राजा थे और छत्रपति शिवाजी एक मराठा शूरवीर I महीपाल आर्य जी की इस सनसनीखेज जानकारी ने तो वाकई आश्चर्यचकित कर दिया है i इस पर यकीन करना मुश्किल है. उससे भी बड़ा आश्चर्य हमारे जाटलैंड के विद्वान सदस्यों की सोची समझी चुप्पी पर भी है. सिवाए प्रशांत भाई के किसी ने भी इसपर सवालिया निशान नहीं लगाया i शायद उनकी आवाज़ रविंदर जीत भाई के रुतबे के बोझ के नीचे दब चुकी है i लेकिन यह रवैया गलत है i आपसी सम्बन्ध, भाईचारा और दोस्ती अपनी जगह है परन्तु पंचायत में आदमी को निर्भीकता के साथ अपने दिल की मानते हुए स्पष्ट, सच्ची बात कह देनी चाहिए i
विजयपाल जी ,आतिश ,उप्पेंदर एवम प्रशांत जी , जी में कोई इतिहासकार नहीं हूँ , हाँ इतिहास में मेरी रूचि बहुत हे और में ऐसी पुस्तके पढ़ते रहता हूँ | ये धागा जेसा की मेने पहले भी कहा था ,क्या उचित हे और क्या अनुचित ये सिद्ध करने के लिए नहीं चलाया था | जो भी मेने यहाँ लिखा हे वो अनेक जगहों पर अनेकों बार उधृत हुआ हे | इन् सब की वास्तविकता और सत्यता का में पर्तिपादन नहीं करता | मेरे विचार से ये इतिहासकारों की बहस का विषय हे | दूसरी बात जो वि.पि. जी ने कही हे की "जो इतिहास हमें स्कूल ,कालेज में पढ़ाया गया हे " के विषय में ,में ये कहता हूँ की क्या वि.पि. जी उसको सत्य मानते हैं | रोमिला थापर जेसे भाड़े के टट्टुओं दवारा लिखा हुआ इतिहास तो आप सही मानते हैं जो की आधुनिक भाट हैं और पिछले ५००० हजार साल के विभिन्न काल में विभिन्न लोगों दवारा जट्टों के बारे में अगर कुछ सकारात्मक लिख दिया गया उसका आप विरोध करते हैं | आप को इतिहास में पढ़ाया गया हे कि दिल्ली पर तोमरों का ९०० साल तक शाशन था | पर कहीं भी लिखा कि वे जाट थे | दिल्ली के चारों और तोमरों के २००-३०० गावं आज भी हैं जिनमे से मुट्ठी भर अपने आप को राजपूत कहने लग गये | अगर सच्चा इतिहास लिखा गया होता तो आज जो इतनी सारी पुस्तकें बाजार में आती हैं और हर ५-६ महीने में किसी ना किसी पुस्तक पर प्रतिबंध लगाना पड़ता हे सच्चाई को छुपाने के लिए , ये ना करना पड़ता | पंजाब केसरी ने एक लेखों कि सीरिज चलाई थी कुछ साल पहले "झूठे लोग-झूठा इतिहास " उसमे आपके सकूल कालेज में पढाये जाने वाले इतिहास कि बखिया उधेडी गई थी | अगर आप का इतिहास सच्चा हे तो उसमे ये क्यों नहीं पढ़ाया गया :-
१) जवाहरलाल नेहरु के दादा ने (जो उस समय दिल्ली के दरोगा थे ) दिल्ली के चांदनी चोक में बल्लभगढ़ के राजा नाहर सिंह को अंग्रेजों के कहने पर फांशी दी थी |(राजा नाहर सिंह स्वतंतरता सेनानी थे )
२) मुंबई के गेटवे ऑफ़ इंडिया पर (जो कि बिरटेन के राजा जार्ज पंचम के स्वागत में बनाया गया था ) उनकी स्वागत कमिटी कि अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरु के बाप ने कि थी |
३) भारत का राष्ट्र गान वास्तव में रविंदर नाथ टेगोर ने जार्ज पंचम के स्वागत में गाया था जिसके बदले में उनको नोबेल पुरस्कार मिला (जार्ज पंचम उस समय नोबेल पुरस्कार कमिटी के अधयक्ष थे )| आज भी हम उस महान राजा का गुणगान कर के अपने आप को धन्य एवम देशभग्त समझते हैं |
४) सरदार भगत सिंह एवम अन्य को गांधी कि हामी भरने के बाद ही फांशी दी गई थी |
५) जिन्ना के प्रधानमंत्री पद कि दावेदारी ठोकने पर ही नहरू कि जिद्द पर पाकिस्तान बनाया गया था |
६) गांधी ने " मेरी लाश पर पाकिस्तान बनेगा " कि उद्घोस्ना करने पर और पाकिस्तान बनने पर आत्महत्या क्यों नहीं कि ?
ये सब सत्य बातें आप को आप के स्कूल कालेज के इतिहास में क्यों नहीं पढ़ाई गई ?
 
"जाट शुद्ध आर्यों कि जाती हे |"------- राणा अली हसन चोहान (पकिस्तानि लेखक )
 
"में जाट जाती में पैदा होकर गोरव का अनुभव करता हूँ|"---------अभिनेता धरमेंदर सिंह देओल
 
"जाट इतिहास कोई भंगेडियों , भगोड़ों ,व् भाड़े का इतिहास नहीं ,यह सच्चे वीरों का इतिहास हे |"-------हवा सिंह सांगवान
 
"Julius Caesar, Alexander the Great and Napolean Bonaparte were Jats" .....Ch. Zile Singh Sangwan

I also believe that all the brave people in world history had a Jat lineage.

Disclaimer: Please don't ask for any proof as I have forgotten the name of the book. Moreover, I do not take any responsibility of the veracity/authenticity of this information. All rights reserved.
 
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