इन जैसे स्वयंभू महात्मा लोगो के भक्तो की बढती भीड़ जनता की अंध श्रद्धा की परिचायक है. महती आश्चार्य की बात है की लोग सामान्य जीवन के कार्य कलापों में तो बुद्धि का प्रयोग करते हैं परन्तु धर्म के विषय में अपनी आँखें बंद कर लेते हैं. हमारे देश का इतिहास इस बात का साक्षी है कि देश की लम्बी गुलामी के लिए ये धर्म गुरु ही जिम्मेदार हैं. कुछ भक्त तो इस हद तक पागल हैं कि साधारण सी बातों में भी गुरु की कृपा को ही उत्तरदायी मानते हैं. और ये दुष्ट गुरु उनके गाढ़ी कमाई के पैसे से सब सुख सुविधा लाभ करते हैं. ऊपर से मंच पर बैठकर जनता को बताते हैं कि धन तो एक साधन मात्र है परन्तु खुद उस साधन को बखूबी प्रयोग करते हैं. जनता को अकर्मण्य बनाने में इनकी मुख्य भूमिका है. अशिक्षित लोगो को अगर छोड़ भी दें तब भी साक्षर(उन्हें सुशिक्षित नहीं कहूँगा) लोगो का एक बड़ा समूह इनका अनुगामी है. जैसा रवींद्र जीत जी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि सचिन जो एक महान खिलाडी है, वो साईं गुरु का भक्त इसलिए है कि वो धर्म भीरु है. ये बात सही है. उसके महान खिलाड़ी होने के लिए उसका परिश्रम जिम्मेदार है ना कि साईं बाबा का आशीर्वाद. अपने अपने क्षेत्र की महान हस्तियों को देखकर भी लोग प्रेरित होते हैं इन गुरु जनों के अनुसरण के लिए. जब तक जनता स्वयं जागरूक नहीं होती और अपने विवेक का सही प्रयोग नहीं करती, इन बाबाओ की आंधी को कोई नहीं रोक सकता.....