Jaat Ka Dharam Kya Hai ?

पंजाब व हरयाणा में पंडित चुप्पी साधे रहते है
क्योकि वे जानते है की बकवास करते ही उनका सत्कार लट्ठ से होगा

हा राजस्थानी जाटो का शोषण व ख़राब हालत ज़रूर तर्क पूर्ण लगता है
क्योंकी वहा राजपूतो और पंडितो की संधि है
व ग्रामीण जाट अपने गौरवशाली इतिहास से अंजान है
इसीलिए धर्म के नाम पर पंडितो की कही किसी भी बकवास पर चुप्पी साध लेते है

भाइयो का अपमान देख दिल दुखता है
 
और यार हनुमान को मानने से भी तो आप किसी पंडित के देवता की आराधना कर रहे हो | सारे हिन्दू केवल जाट नहीं है, और फिर हनुमान को तो गुज्जर भी मानते है , यादव भी मानते है, बिहारी भी मानते है | तो इसका मतलब है आप इस सब के सब की जय जयकार कर रहे हो |

भाई आप तो पता नहीं क्यों गोल-मोल बात करते हो. हनुमान को शिवजी का अवतार माना जाता है और शिवजी को ये सारी दुनिया जाट कहती है. ब्राह्मणों का अपना देवता ब्रह्मा है, जिसे कोई नहीं पूछता. गुरु नानक (बेदी) को ग्रंथि वगैरह पूजते हैं तो मैं आपको ये थोड़े ही कह रहा हूं कि आप ग्रंथियों को पूज रहे हैं. गुरु नानक एक गैर-जाट खत्री पंजाबी थे, इसलिए सिख धर्म को मानने वाले सभी जाट एक खत्री पंजाबी के नीचे आ गए. हनुमान को मानकर जाट किसी भी जाति विशेष के नीचे आएंगे, क्योंकि या तो हनुमान को शिवजी का अवतार होने के कारण एक जाट कहा जा सकता है अन्यथा उनकी कोई जाति ही नहीं है.

दूसरी बात ये तो आपकी भूल है, मुझे नहीं पता की मुसलमान जाट कितने तरक्की पर हैं, पर सरदार जाट तो हर क्षेत्र में न. १ हैं | और तो और आप हिन्दू धर्म के महान जाटों जी संख्या देख लो और सरदार जाटों की देख लो, सरदार जाट ही आगे हैं | सरदार जाटों ने विदेशों में जाकर भी अपने झंडे गाड़े हैं | पंजाब कृषि प्रधान राज्य है जहाँ तो बस जाटों का ही दबदबा है, फिर हरयाणा में भी अम्बाला, करनाल, सिरसा, यमुनागर, कुरुक्षेत्र, पंचकुला में तो जाट सरदार, हिन्दू जाटों से अधिक हैं और सब के सब समृद्ध भी हैं | ये नहीं है के हरयाणा के जाट सरदार पिछड़े हुए हैं, अगर आप ने कभी ये जिले भर्मण न करे हो तो जरुर करो और देखो, सचाई अपने आप पता चल जाएगी |

भाई आप जी रहे हो हसीन ख़्वाबों की दुनिया में और आप अपनी बात के पक्ष में कोई सबूत भी नहीं देते, लेकिन मैं आपको हर बात का सबूत दूंगा. मुसलमान जाटों की तो बात ही छोड़ दो, क्योंकि वे तो बस मुसलमान बनकर रह गए हैं और बतौर जाट उनकी पहचान नष्ट होती जा रही है, चाहे पाकिस्तान हो या भारत. इसका कारण यह है कि उनमें कोई ऐसी बड़ी हस्ती पैदा नहीं होती जो विश्व स्तर पर चर्चा में आए और दूसरों को पढ़ने को मिले कि फलां हस्ती जाट है.
अब आपका ये दावा कि सरदार जाट हर क्षेत्र में नं. 1 है, इस बात में भी कोई दम नहीं है. बताओ किस चीज में नं. 1 है. पूरे पंजाब में सरदार जाटों में आज तक एकाध को छोड़कर कोई भी हस्ती विश्व स्तर की नहीं हुई.
 
दिल्ली का सुशील कुमार एक विश्व चैंपियन पहलवान है और विश्व चैंपियन बनने वाला भारत का अभी तक का एकमात्र पहलवान है.
Sushil Kumar created history when he became the first Indian to win a gold medal at FILA 2010 World Wrestling Championships held in Moscow on 12 September 2010. Link
हरियाणा का विजेन्द्र कुमार विश्व का नं. 1 मुक्केबाज है (75 कि. ग्रा. भार वर्ग में) और ऐसा करने वाला भारत का एकमात्र मुक्केबाज है.
In September 2009, the International Boxing Association (AIBA) announced Vijender as the top-ranked boxer in its annual middle-weight (75 kg) category list. He topped the list with 2800 points. Link
वीरेन्द्र सहवाग जैसा क्रिकेटर सरदार जाटों में कोई भी नहीं हुआ है. नवजोत सिंह सिद्धू वीरेन्द्र सहवाग की तुलना में बहुत पीछे है.
कुशलपाल सिंह (डी.एल.एफ. प्रमुख) विश्व के नं. 1 रियल एस्टेट डिवेलपर हैं और कुछ समय पूर्व विश्व के 8वें सबसे अमीर व्यक्ति रह चुके हैं. बताओ कौन सरदार जाट आज तक उनके जितना अमीर हुआ है?
एक हिंदू जाट चौ. चरण सिंह के अलावा कोई भी जाट आज तक भारत के प्रधानमंत्री पद तक नहीं पहुंचा है.
सबसे ज्यादा गेंहू उत्तर प्रदेश में पैदा होता है और इस साल केंद्र सरकार ने खाद्यान्न उत्पादन के मामले में उत्तर प्रदेश को पंजाब के साथ संयुक्त विजेता घोषित किया है. इसका मतलब पंजाब खेती में भी नं. 1 नहीं है.
The state of Uttar Pradesh produces the most wheat in India, accounting for 35 percent of India’s total wheat production. The state of Punjab is the second largest producer of wheat in India, producing 22 percent of the nations total wheat production. Link
Punjab & U.P. Joint Winner of Krishi Karman Award for 2010-2011
भारत में सबसे ज्यादा ग्रामीण करोड़पति हरियाणा में हैं, ना कि पंजाब में. Link

अभी और कई तुलनाएं तो मैंने की ही नहीं हैं, अन्यथा सरदार जाट हिंदू जाटों के कहीं आस-पास भी फटकते नजर नहीं आएंगे.http://sites.google.com/site/dagarbusinesscentre/home-1/important-facts-about-haryana
 
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हां कुछ चीजों में पंजाब नं. 1 जरूर है. पंजाब अमली-नशेड़ियों के मामले में नं. 1 है.
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पंजाब के लगभग 1 लाख युवक गैरकानूनी तरीके से विदेश में बसने की कोशिश के कारण बाहर जेलों में नारकीय जीवन जी रहे हैं.
Over one lakh Punjabi youths are behind bars in foreign countries and face deportation. Link

आप की बात बड़ी, जरुर देखा होगा, तो इस से ये लगता है की जाटों को शिक्षा बड़ी जरुरत है | सबसे बड़ी बात यह है की किसी विशेष धर्म से जुड़ कर जाट भी संकीर्ण हो गए है, आप कोशिश कर रहे हो की सब हिन्दू हो जाओ मेरे जैसे कोशिश कर रहे है की सिख बन जाओ | न आप मेरी बात मानोगे न मैं आपकी मानुगा |

भाई बात तो उसकी मानी जानी चाहिए, जिसके साथ सबूत हों. मैंने ऊपर साबित कर दिया कि जो हिंदू जाट हैं वे सरदार और मुसलमान जाटों से बहुत आगे हैं. ऐसे में यदि हमारे मुसलमान और सरदार जाट भाई भी हिंदू जाट बन जाते हैं तो उनके लिए अच्छा होगा. पहले वे हिंदू जाट ही तो थे. हिंदू जाट से अलग होकर वे नष्ट होने के कगार पर पहुंच गए हैं.


इसके साथ ही जाट जाति को विश्व भर में पंजीकृत कराया जाये जिसमे उसके कुछ खास गुण और समानताये राखी जायें, ताकि वक़्त आपने पर जाट जाट के काम आ सके और जाट जाति का अस्तित्व बच सके |
इसका एक ही हल है अगर कोई हिन्दू जाट को, जाति के आधार पर बुरा बोलता है या जाट सिख को कोई खत्री ये बोलेगा की तेरा गुरु एक खत्री है उसको पूजता है मतलब हमारी जय जयकार करता है (जैसा हमारे साथ तो आज तक ऐसा नहीं हुआ) | तो उठो कब काम आएगा एक भाई दुसरे के, आर दिखा दो कैसे अपनी बात मनवाने के लिए हरयाने के जाट पंजाब तक और पंजाब के जाट हरयाने में खलबली मचा सकते हैं | क्यों एक भाई के बारे में बुरा सुनते हो | इकठे हो कर उसको मिटा दो | अन्ना की तरह का आन्दोलन चलाओ, पता भी चले दुनिया को के जाट अभी सक्रीय है |

भाई हिंदू जाट को तो कोई भी कुछ नहीं बोलता...उनका तो कोई जवाब ही नहीं है...ब्राह्मण तो बेचारे भारत के दबे-कुचले लोग हैं, वे क्या जाटों को नीचा दिखाएंगे. रही बात जाट सिखों की तो अभी आम समाज में अधिकतर लोगों को ये पता ही नहीं है कि सिख धर्म के 10 के 10 गुरु गैर-जाट थे. जिन्हें पता है, वे सामने वाले को किलसाने से नहीं चूकते. अब जो ऐसा कहेगा हम उसे मारने दौड़ेंगे तो ये कोई समस्या का हल थोड़े ही है. किस-किस का मुंह बंद करोगे? वो तो आप पगड़ी नहीं बांधते नहीं तो भाई सरदार होना तो किसी सजा से कम नहीं है (कम से कम दिल्ली में तो). यहां तो कोई भी पगड़ी बांधने वाला सरदार यदि ज्यादा उछलता है तो सामने वाले से उसे ये सुनने को मिलता है कि लगता है फिर 84 वाला कांड करना पड़ेगा.

भाई आप हनुमान को मानते रहो, मैं नानक को मानता रहूँगा | इब किसी जाट को गोरी पसंद है किसी को देसी छोरी पसंद है | जब आप जाट एकता की बात करोगे तो सब के सब जाट इकठे हो जायेंगे |
भाई हिंदू होने का मतलब यह हरगिज नहीं कि हमें तो धार्मिक कर्मकांड करने ही पड़ेंगे. ये तो बस इतनी सी बात है कि मेरी हिंदू धर्म में आस्था है और मैं हिंदू धर्म का सम्मान/समर्थन करता हूं. वैसे मैं शिवजी और श्रीराम से ज्यादा प्रभावित हूं, लेकिन हनुमान और अन्य हिंदू देवी-देवता भी मुझे बहुत पसंद हैं. मुझे तो गुरु नानक या मुहम्मद साहब से भी कोई वैर नहीं है. बाकी सभी जाट इकट्ठे हो जाएं तो इससे तो बढ़िया कुछ होगा ही नहीं.
 
भाइयो, जाट का धर्म वो होना चाहिए, जिसे अपनाकर जाट तरक्की करें, जाटों को कोई नीचा न दिखा सके और ऐसा एक ही धर्म है 'हिंदू'. मुस्लिम और सिख जाट पहले हिंदू ही थे... आओ भाइयो उन्हें वापस हिंदू बनने के लिए प्रेरित करें...मुसलमान बनकर 'कटवा' शब्द इनाम के रूप में मिलता है. क्या सिख बनकर '84 के दंगों के शिकार' का तमगा लेना चाहते हो?
 
भाइयो, जाट का धर्म वो होना चाहिए, जिसे अपनाकर जाट तरक्की करें, जाटों को कोई नीचा न दिखा सके और ऐसा एक ही धर्म है 'हिंदू'. मुस्लिम और सिख जाट पहले हिंदू ही थे... आओ भाइयो उन्हें वापस हिंदू बनने के लिए प्रेरित करें...मुसलमान बनकर 'कटवा' शब्द इनाम के रूप में मिलता है. क्या सिख बनकर '84 के दंगों के शिकार' का तमगा लेना चाहते हो?
हिन्दू धर्म की आज तक खुद की तरक्की हुई नहीं तो जाट कौम की क्या ख़ाक करेगा |
रही 1984 की बात उसमे इन बाह्मणों ने जाट को जाट से क़त्ल करवाया , रोला ब्राह्मण का पूंछ में आग लगा ली हनुमाना ने | पहले 1984 की नौबत क्यों आई उसके बारे में पढले और उसका जिम्मेवार कौन था यह जान ले उसके बाद कुछ लिखना यहाँ |
अगर जाति आधार पर ही गुरु देवी देवताओ को मानना हैं तो पहले अपने हिन्दू देवी देवताओ की सबूत के साथ जात बताओ जिनको आप मानने की कह रहे हो |
 
हां कुछ चीजों में पंजाब नं. 1 जरूर है. पंजाब अमली-नशेड़ियों के मामले में नं. 1 है.
आपके हिन्दू धर्म का देवता शिवजी तो खुद इन भांग धतुरा आदि नाशो की पैरवी करता हैं उसके सारे भगत नाथ पंथ ,अघोरी पंथ , नागा पंथ आदि के मोढ़े बाबा नशे में धुत पड़े मिलेंगे | खुद नशे में पड़े हैं समाज को ख़ाक दिशा देंगे ऐसे धर्म के लम्बरदार |
 
अभी और कई तुलनाएं तो मैंने की ही नहीं हैं, अन्यथा सरदार जाट हिंदू जाटों के कहीं आस-पास भी फटकते नजर नहीं आएंगे.

क्यों नाज के बल की हाके स | कितने सिक्ख जाट की गिनती करू ...
आज़ादी के बाद जब देश के सबसे पहले मंत्रिमंडल का गठन हुआ तो उसमे किसी हिन्दू जाट को जगह नहीं मिली , मिली तो एक सिक्ख जाट को , सरदार बलदेव सिंह को रक्षा मंत्री बनाया गया | वो भी उनको जाट होने की वजह से कम सिक्ख होने की वजह से तवज्जु दी गई थी |
सरदार दारा सिंह ने कुश्ती में नाम किया |
जाटों में पहला परमवीर चक्र जीतने वाला सिक्ख जाट शेखों था |
सिनेमा जगत में जाट कौम का नाम करने वाला सबसे पहला जाट धर्मेन्द्र एक सिक्ख जाट हैं |
हाकी की टीम में तो था ही सिक्ख जाटों का कब्ज़ा |
कनाडा तो हैं ही आधा सिक्ख जाटों का | वाहा पर आपके कुशन पाल के मुकाबले का बिल्डर सिक्ख जाट बोब ढिल्लों |
सिक्ख जाट और खालसा पंथ को मजबूत करने वाला महराजा रणजीत सिंह जिसका कभी काबूल तक राज था |
शहीद-ऐ-आज़म भगत सिंह का आदर्श सिक्ख जाट करतार सिंह शराबा |
ऐसे कितने नाम गिनाऊ ,फहरिस्त छोटी पड़ जाएगी |
यहाँ मुद्दा धर्म का हैं और यह हकीक़त हैं की सिक्ख धर्म में जाटों ने ज्यादा तरक्की की हैं उनकी विश्व सत्र पर एक अलग पहचान हैं | दुनिया में इंसान अलग पहचान के लिए जीता हैं रेवड़ में तो भेड़ बकरिया चलती हैं |
जो धर्म आज खुद हिन्दुस्तान में ही सिमट गया और सिमटता जा रहा हैं वो हमारी कौम की क्या ख़ाक तरक्की करेगा |
पहले इन बातो पर विचार करना की आपके इस सुन्दर हिन्दू धर्म के सिमटने के क्या कारण हैं कौन इसका जिम्मेवार हैं और क्यों हैं |
 
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हिन्दू धर्म का पोल पटीला ::

हिन्दू धर्म की सम्पुर्ण पोल बुद्ध, महावीर व पतंजलि जैसे लोगो ने खोल दी थी
बुद्ध का जन्म राज परिवार में हुआ था, परन्तु जीवन के सत्य की ख़ोज में वो सब छोड़ चल दिया
अपनी राह पर बुद्ध को हजारो साधू-संत मिले व वे श्रेष्ठ से श्रेष्ठ ज्ञानी पंडित के आधीन हुए

उन्होंने कठोरे से कठोरे तपस्या की, शरीर की सीमओं तक उपवास किया, परन्तु कुछ भी हाथ न लगा!
न कोई सिद्धि, न कोई दिव्य शक्ति, कुछ भी नहीं !!!
बुद्ध ने अच्छे से अच्छे ज्ञानी पंडित की अकल ठिकाने लगा दी
जो कुछ भी कहा गया सब किया, परन्तु कुछ भी हाथ न लगा
अंततह गुरु भी बुद्ध को छोड़ भागने लगे

और इससे ब्रामानो को भय लगने लगा, वे घबरा गये
उनके पाखंड का भांडा फूटने लगा
तोह उन्होंने बुद्ध को भगवान कह कर, हिन्दूकुश से दूर Tibet भगा दिया

हिन्दू धर्म इस दुनिया का सबसे पाखंडी व सबसे भोतिकवादी धर्म है
''आज तक दुनिया में हजारो करोडो लोग धार्मिक हुए, परन्तु कुछ ही ईश्वर को प्राप्त हुए
कुछ 10 -15 लोग है, हम उंगलियों पर गिन सकते हैं''
इसे धर्म की सफलता नहीं कहेंगे, इसे दुर्घटना कहते है
ये वो लोग है जो गुर्घटना वर्ष धर्म की चपेट में आने से बच गये, सो अल्लाहित हुए!

अगर आप अपने आस पास कोई बोहोत मूढ़ आदमी देखे तोह समज जाना की वो धार्मिक है
 
जाट इतने डरपोक न हैं के 84 ते डर का सही चीज़ न गलत बतान लग जां गे | खून देका सिंची हुई कौम ते बड़े बड्या की पाटा है | फेर विद्रोह करना ही जाटों का धर्म है | किसे पंडत की ढाल मंत्तर पढ़ का भूत न भगाते जाट | पिछले १००० साल ते हिंदुस्तान गुलाम है, कभी मुसमानो का, कभी अंग्रेजों का कित थे बड़े बड़े क्षत्रिय तब | आर पंजाब मा नशे सरकार न जान बुझ का फैलाये थे, ताकि कोई शेर सर न उठा सके |
 
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बिना सबूत के तो भाई कुछ भी बांडे जाओ यहां. यहां विश्व स्तर के सौद्दों का जिक्र हो रहा है. कोई सबूत हो तो दो, ना तो क्यूं भलोओ हो...
 
Bhai Uppu..kyu laag le ho ek doosre nai samghaan..koon kiski maane hai ;)..jisnai jo badiya laage wo follow kar lo buss..baat khatam.
 
It was Sword of these Sikhs(mainly JATS) which arrested rapid pace of muslim religion in northern areas otherwise many of these so called Hindu Jats might have been offering Namaj in masjid these days.What a thankless people.

Topic is What is the religion of Jats and discussion should be focused on that only.
 
भाइयो, जाट का धर्म वो होना चाहिए, जिसे अपनाकर जाट तरक्की करें, जाटों को कोई नीचा न दिखा सके और ऐसा एक ही धर्म है 'हिंदू'. मुस्लिम और सिख जाट पहले हिंदू ही थे... आओ भाइयो उन्हें वापस हिंदू बनने के लिए प्रेरित करें...मुसलमान बनकर 'कटवा' शब्द इनाम के रूप में मिलता है. क्या सिख बनकर '84 के दंगों के शिकार' का तमगा लेना चाहते हो?
लाखनमाजरा. वर्षो से लाखनमाजरा में रह रहे एक मुस्लिम परिवार ने मंदिर में हवन-यज्ञ किया और हिंदू धर्म अपना लिया। ग्रामीणों ने परिवार को जाट समुदाय का राठी गोत्र दिया है। गांव निवासी राजबीर सिंह का परिवार वर्षो से गांव में रह रहा है।
उसका कहना है कि उसके दादा गफूर ने उन्हें बताया था कि पहले वे भी हिंदू धर्म मानते थे, लेकिन औरंगजेब के अत्याचारों से तंग होकर उनके पूर्वजों ने मुस्लिम धर्म ग्रहण किया था। बाद में कई बार मन में टीस उठी कि दोबारा से हिंदू धर्म ग्रहण कर लें।
यहां तक कि उसने अपने बच्चों की शादी भी हिंदू समुदाय में की हैं, लेकिन विधिवत तौर पर हिंदू धर्म ग्रहण नहीं किया था। उसके बच्चों की शादी में गंगोली के जाटों ने भात भरा था। उसने ग्रामीणों को कई बार हिंदू धर्म अपनाने के लिए अपने मन की बात रखी।
ग्रामीणों ने भी उसकी भावनाओं को समझा। इसके लिए श्रीराम मंदिर में उसको पगड़ी बांधकर हिन्दू धर्म में शामिल कर लिया। मंदिर के पुजारी भान शर्मा ने वैदिक रीति रिवाज के साथ पूरे परिवार को हिंदू धर्म ग्रहण करवाया।
इस मौके पर गांव निवासी पंडित राजेंद्र, सत्यवान, बल्लू शर्मा, बलवान नंबरदार, रामफल, सुरेश कुमार, दयानंद, बारू, बसाऊ राम, बाजेराज सहित दर्जनों ग्रामीण भी मौजूद थे। पुजारी भान शर्मा ने कहा कि राजबीर सिंह के परिवार को ग्रामीणों की सहमति से जाट समुदाय का राठी गोत्र दिया गया है।http://www.bhaskar.com/article/HAR-...slim-to-hindu-caste-rathi-2370672.html?HF-11=
 
हिन्दू धर्म का पोल पटीला ::

हिन्दू धर्म की सम्पुर्ण पोल बुद्ध, महावीर व पतंजलि जैसे लोगो ने खोल दी थी
बुद्ध का जन्म राज परिवार में हुआ था, परन्तु जीवन के सत्य की ख़ोज में वो सब छोड़ चल दिया
अपनी राह पर बुद्ध को हजारो साधू-संत मिले व वे श्रेष्ठ से श्रेष्ठ ज्ञानी पंडित के आधीन हुए

क्या आप बताने का कष्ट करेंगे कि बुद्ध ने कहाँ पर शिक्षा ग्रहण की? बुद्ध को तो संस्कृत की व्याकरण का भी ज्ञान नहीं था और उसने लाखों वर्ष पुराने वेदों को गडरियों के गीत घोषित कर दिया. महाशोक !
बुद्ध से बड़ा नास्तिक आज तक कोई दूसरा पैदा नहीं हुआ. अहिंसा का ऐसा पाठ पढाया कि अशोक जैसा महान योध्धा युद्ध छोड़कर बुद्ध की शरण में चला गया और देश का अधः पतन वहीं से शुरू हुआ. जब देश को संगठित कर मजबूत बनाने की जरूरत थी तब लोग बुद्ध की शरण में चले गए . ये तो हुई बुद्ध की बात.
महावीर के सिद्धांत भी बोद्ध धर्म से ज्यादा अलग नहीं थे., परन्तु जैन धर्म से मूर्तिवाद का अवतार हुआ और तथाकथित हिन्दू धर्म के ठेकेदारों ने देश में मूर्तिपूजा की बाढ़ लगा दी.

आपने पतंजलि का नाम भी सूची में जोड़ दिया. क्या आपको पता है कि पतंजलि कौन थे और उनकी वैदिक धर्म को देन क्या है?? पतंजलि योगाचार्य थे और "योगदर्शन" उन्ही की देन है.


माना कि हिन्दू धर्म में कुछ बुराइयाँ आ गयी हैं परन्तु उसके हजारो सालो के अस्तित्व को नाकारा नहीं जा सकता. कुछ स्वार्थी तथाकथित ब्राह्मणों ने मूर्तिपूजा, जन्मपत्री, गृहकलेश इत्यादि को डालकर इसकी जटिलता को बढ़ा दिया है और कुछ हद तक दूषित भी कर दिया है. परन्तु क्यों भूलते हो कि हमारे पास अभी भी वेद, उपनिषद, दर्शन और गीता जैसे महान ग्रन्थ हैं. योग और आयुर्वेद भी इसी की देन है.
अगर आप अपने आस पास कोई बोहोत मूढ़ आदमी देखे तोह समज जाना की वो धार्मिक है

आपने लिखा कि जो सबसे मूढ़ दिखे वो धार्मिक है, अब कृपा करके आप मुझे धर्म और धार्मिक मनुष्य के लक्षण तो बताएं. तभी तो हम इस निष्कर्ष पर पहुँच सकते हैं कि क्या वास्तव में धार्मिक मनुष्य मूढ़ होते हैं. चलो एक छोटा सा संकेत देता हूँ, धर्म का पहला लक्षण- धृति है जिसका मतलब है धैर्य, अब आप मुझे बताएं कि क्या धैर्यवान मनुष्य मूर्ख होते हैं?
 
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It was Sword of these Sikhs(mainly JATS) which arrested rapid pace of muslim religion in northern areas otherwise many of these so called Hindu Jats might have been offering Namaj in masjid these days.What a thankless people.

Topic is What is the religion of Jats and discussion should be focused on that only.

Narender, what about battle of panipat, who was fighting muslims before guru Govind singh made khalsa, were monks fighting ? What was the religion of khalsas before they become sikhs, If we agree to your baseless version that jats became budh than what was the religion of jats before that, did all jats become budh, Is there any budh jat available anywhere in India,

Why unnecessarily we are comparing jats of different religion, when they are jats than the blood/jins has to be same, yes area, circumstances, training, bringingup in the family, education, experience etc do effect the personality traits.

One side most of us agree that hidu is not religion, it was never so, it is very liberal way of life, but slowly occupied the colum of religion, but good thing is that it allows to follow any religious practices. Thus, we can follow jat practices and be hindus, we must try to dominate hindu society if we can, is anybody stopping us. There are already many problem in life why are we interested to impose more restrictions/create problems of religion, Religion has always ristricted our progress and spoiled the peace in the society.

If at all there is any requirement of having seperate religion for jats than why not jat religion, certainly than we can invite jats from other religions to comeback to jat religion.

My personal view is that as in the past jats remained away from these religious practices/Dhongs, it will be batter if we donot waste our energy on this useless matter, we must work for unity and education of jats that will give you good life, good place in the society, etc.Further we must revive our traits, transfer to our new generation, improve bringingup of children, develop spiritual aducation, develop the infrastructure and educate our people on various practices in life so that dependency on Pandits can be removed.
 
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Narender, what about battle of panipat, who was fighting muslims before guru Govind singh made khalsa, were monks fighting ? What was the religion of khalsas before they become sikhs, If we agree to your baseless version that jats became budh than what was the religion of jats before that, did all jats become budh, Is there any budh jat available anywhere in India,
पानीपत की तीनो लड़ाई तख़्त-ओ-ताज के लिए थी न के किसी धर्म की हिफाजत के लिए | खालसा पंथ की नीवं ही हिन्दू धर्म को बचाने के लिए रखी गई थी | वो अलग बात हैं के उस वक़्त इस खालसा पंथ का साथ भी भारी तादाद में सिर्फ जाटों ने दिया | क्या और जातियों में हिन्दू नहीं थे या सिर्फ जाटों के हिन्दू धर्म को ही खतरा था |
रही बौद्ध धर्मी जाट होने की बात तो हमारे एक बहुत बड़े जाट इतिहासकार बौद्ध धर्मी जाट हैं | आपने भी शायद उनकी किताब पढ़ी होंगी |
 
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