Haryanvi Paheliyaan (Part 1)

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ya को बात होई .. .. yo to secenerio hoya ... issak to haam ne bhi bera thaa .. haam to sochaan thee koi cheej hondi hogi....

भाई या पुराणी पहेली स बड्डे बुड्ढयाँ पे सुणी थी | इब्ब जिस्सी भी थी छाप दी |
 
ना मा, ना दादी, ना नानी किसतै बूझूं
दुखती रग पै पां धर दिया
जा कोना बताता

सुनील जी , या त आपने भोत दुःख भरी बात कह दी .
loss of human being is always an irrepairable one.
पर दुखी मतना होवे.
ये जिंदगी के खेल नुए चाले जा स .
 
र सुनील क्यूँ दुखी होवे स बेटा |अर में रहा तेरा काका बतानीया |

बात या स अक पहलम गाल की लुगाई कट्ठी हो के ने सूत कात्या करदा | जो सूत दिन में कात्या जांदा उह ने ते धूपिया कह्या करदे अर जो सूत रात ने कात्या जांदा उह ने रतोडा |
 
इह का जबाब स :-


सारे गामां में लड़की, गोबर ,खाती सें |सें अक नहीं |



 




इब्ब अगली का बताओ :-
इस्सी चिड़िया का नाँ बताओ ,जिह के सर पर पैर |
 
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