Reason for less woman presence on Jatland.com.

I check who associates with whom (from the "like" option) in posts. Even if one doesn't comment directly, he/she is showing preference and hence communicating.


सावधान ,वैधानिक चेतावनी :- कई माणस आँख मीच के ने लुगाइयां की पोस्ट लाइक कर्या करें, चाहे पाछले तीन चार साल की उनकी पोस्ट देख ल्यो ,उन् ने विचाराँ ते कोए मतलब नि होंदा |
 
सावधान ,वैधानिक चेतावनी :- कई माणस आँख मीच के ने लुगाइयां की पोस्ट लाइक कर्या करें, चाहे पाछले तीन चार साल की उनकी पोस्ट देख ल्यो ,उन् ने विचाराँ ते कोए मतलब नि होंदा |

Ek bai udharan sa diye...? Akk nyu e generalize kar diya..jo jee mai aaya wo likh diya..
 
तीन कारण और भी हैं औरतों के जाटलैंड पर कम आने के I
१. औरतें रूठ बहुत जल्दी जाती हैं और फेर उनको मनाना बहोत मुश्किल होता है I काफी सारी महिलायें रूठ कर चली गई हैं और जब तक जाटलैंड के Administrator उनको मनाएंगे नहीं वे नहीं आयेंगी I
२. जो ऊंची शिक्षा ग्रहण कर लेती हैं वे या तो बहुत उदार और महान बन जाती हैं या फिर बहुत ज्यादा घमंडी और snobbish I बीच का रास्ता उनको पसंद नहीं इसलिए घमंडी और snobbish महिलाएं मध्यम और निम्न वर्गीय जाटों से कोई सरोकार रखना पसंद नहीं करती I और जाटलैंड पर बहुतायत उन्ही लोगों की है जो मध्य या निम्न श्रेणी में आते हैं (उनके हिसाब से). यानि classy नहीं हैं I
३. स्वभावत : अधिकांश महिलायें हाँ में हाँ मिलवाना पसंद करती हैं , अगर आप ने उनकी बात काटने की कोशिश की यानि उनकी हाँ में हाँ नहीं मिलाई तो वे फेर बहुत जल्द किनारा कर लेती हैं
 
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तीन कारण और भी हैं औरतों के जाटलैंड पर कम आने के I
१. औरतें रूठ बहुत जल्दी जाती हैं और फेर उनको मनाना बहोत मुश्किल होता है I काफी सारी महिलायें रूठ कर चली गई हैं और जब तक जाटलैंड के Administrator उनको मनाएंगे नहीं वे नहीं आयेंगी I
२. जो ऊंची शिक्षा ग्रहण कर लेती हैं वे या तो बहुत उदार और महान बन जाती हैं या फिर बहुत ज्यादा घमंडी और snobbish I बीच का रास्ता उनको पसंद नहीं इसलिए घमंडी और snobbish महिलाएं मध्यम और निम्न वर्गीय जाटों से कोई सरोकार रखना पसंद नहीं करती I और जाटलैंड पर बहुतायत उन्ही लोगों की है जो मध्य या निम्न श्रेणी में आते हैं (उनके हिसाब से). यानि classy नहीं हैं I
३. स्वभावत : अधिकांश महिलायें हाँ में हाँ मिलवाना पसंद करती हैं , अगर आप ने उनकी बात काटने की कोशिश की यानि उनकी हाँ में हाँ नहीं मिलाई तो वे फेर बहुत जल्द किनारा कर लेती हैं

वि पि जी ये आपकी कल्पना है या अनुभव?

जाटलैंड कोई खेल नहीं है जहाँ मंदक(Admins.) रूठे हुए को मनाने का काम करे और न ही ये पर्दर्शित करना की उच्च शिक्षित जाट अपने से निचे या मध्य वर्गीय जाट से किसी भी प्रकार से उत्तम है ...रही बात हाँ में हाँ मिलाने की ......तो अगर आप बिना सहमत हुए किसी की बात में हाँ मिलाते है तो उसमे आप का कोई अप्रतस्य मतलब है ...जो एक जाट को शोभा नहीं देता!


आज कल जो लिंग भेद की चर्चा जोरो पर है .......उसे कोई भी वर्ग समझ नहीं पा रहा है! शायद यही कारण की आज का युवा इतना अयस्त व्यस्त है !
 
वि पि जी ये आपकी कल्पना है या अनुभव?

जाटलैंड कोई खेल नहीं है जहाँ मंदक(admins.) रूठे हुए को मनाने का काम करे और न ही ये पर्दर्शित करना की उच्च शिक्षित जाट अपने से निचे या मध्य वर्गीय जाट से किसी भी प्रकार से उत्तम है ...रही बात हाँ में हाँ मिलाने की ......तो अगर आप बिना सहमत हुए किसी की बात में हाँ मिलाते है तो उसमे आप का कोई अप्रतस्य मतलब है ...जो एक जाट को शोभा नहीं देता!


आज कल जो लिंग भेद की चर्चा जोरो पर है .......उसे कोई भी वर्ग समझ नहीं पा रहा है! शायद यही कारण की आज का युवा इतना अयस्त व्यस्त है !
अक्षय, मेरे विचार अनुभव और कल्पना दोनों का सम्मिश्रण है i
जाटनियां के नखरे निराले हों सै i :)
थोडा अनुभव तो होगया होगा ??
 
akshaymalik84;283180 [/SIZE said:
मेरा लेखिका से एक प्रशन है की आपने अपनी कितनी महिला मित्रों को जाटलैंड का सदस्य बनने के लिए प्रेरित किया?

Two. Both are reluctant.
 
ha ha ha...v.p sir ji, slowly u r getting on track
i hv observed lot of diffrnce in ur 1st and last post on this thread...:)
 
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Ek bai udharan sa diye...? Akk nyu e generalize kar diya..jo jee mai aaya wo likh diya..
रहन दे नाम उघाड़ना ठीक कोणी , किते तेरा नाम आ गया तो के मूंह दिखावेगा समाज में ;)
 
Please share your views.
उर्मिला जी एक आधे सवाल का जवाब आप भी दे दिया करो .....
आप भी निर्रे सवाला ने तोड़ राखे सो
:)
 
ha ha ha...v.p sir ji, slowly u r getting on track
i hv observed lot of diffrnce in ur 1st and last post on this thread...:)

डॉ. साहब, आज तै एक दूसरे (live in Relationship) आले ताग्गे पै मेरा इतना कडवा तजुर्बा हो रह्या सै कि महिलाओं के प्रति मेरे विचार जमा पलटी खा गे i एक महिला प्राध्यापिका नै तडके तडके इसा लेक्चर पिलाया जिसने मेरी आँख खोल दी i महिलाओं के प्रति अवांछनीय सहानुभूति शायद हमारे अन्दर की किसी मानवीय कमजोरी का द्द्योतक है i हमें लिंग के आधार पर गुणवत्ता से समझौता नहीं करना चाहिए i मैंने अक्षय मालिक की बातों पर गौर कर लिया होता तो बहुत ठीक था i खैर देर आये दुरुस्त आये i मै अपने गुनाह का इकरार करता हूँ कि मैंने भी लाल लुगड़ी देख के बहोत से like के खटके दबा दिए थे I नादान था I
 
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डॉ. साहब, आज तै एक दूसरे (live in relationship) आले ताग्गे पै मेरा इतना कडवा तजुर्बा हो रह्या सै कि महिलाओं के प्रति मेरे विचार जमा पलटी खा गे i एक महिला प्राध्यापिका नै तडके तडके इसा लेक्चर पिलाया जिसने मेरी आँख खोल दी i महिलाओं के प्रति अवांछनीय सहानुभूति शायद हमारे अन्दर की किसी मानवीय कमजोरी का द्द्योतक है i हमें लिंग के आधार पर गुणवत्ता से समझौता नहीं करना चाहिए i मैंने अक्षय मालिक की बातों पर गौर कर लिया होता तो बहुत ठीक था i खैर देर आये दुरुस्त आये i मै अपने गुनाह का इकरार करता हूँ कि मैंने भी लाल लुगड़ी देख के बहोत से like के खटके दबा दिए थे i नादान था i



आज ते आप ने भोत हंसा दिया विजयपाल जी | इस्सी सरल ,सादी, साची बात कह दी आप ने | आप भी म्हारे बर्गे मोलड सो |
 
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आज ते आप ने भोत हंसा दिया विजयपाल जी | इस्सी सरल ,सादी, साची बात कह दी आप ने | आप भी म्हारे बर्गे मोलड सो |

रविंदर जी सही कहा इब एक ताग्गा मोल्लड़ की परिभाषा पर भी शुरू करया जा सके स |
 
रविंदर जी सही कहा इब एक ताग्गा मोल्लड़ की परिभाषा पर भी शुरू करया जा सके स |


राणा जी मोलड की परिभाषा ते मन्ने काल "हरयाणवी बोली और उसके अनोखे शब्द " आले तागे में गेर दी थी |
 
राणा जी मोलड की परिभाषा ते मन्ने काल "हरयाणवी बोली और उसके अनोखे शब्द " आले तागे में गेर दी थी |

रविन्देर्जी वा त मानने पढ़ ली थी अर सही मायने मे वा मेरे ताही कती नई और ज्ञानवर्धक थी |हो सके स दुसरे सदस्य कीमे और
कहना चाहते हों | आड़े त मौका मिलना चाहिए विचारां का बीज बिखेरन् का |
 
फेर तै भाई विजय किसै स्याणी मास्टरणी तै फेट ग्या. ना तै आजकाल इसे मास्टर-मास्टरणी घाट ऐ रहरै सै


एक महिला प्राध्यापिका नै तडके तडके इसा लेक्चर पिलाया जिसने मेरी आँख खोल दी
 
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उर्मिला जी एक आधे सवाल का जवाब आप भी दे दिया करो .....
आप भी निर्रे सवाला ने तोड़ राखे सो
:)

After reading the feedback (including the deleted derogatory posts towards me and woman in general, of this thread) I have come to the conclusion that rustic type woman are hardly ever attacked here. Unfortunately, many such woman don't have access to computers due to their rural location. It is the City bred (call them english speaking for convenience) participants that many Jat men (educated ones) have difficulty with as their ego get rubbed on the wrong side, especially if the woman is smart and good looking too (most Jaatnis are!!!). I get Private Messages through this forum (I am sure other female members too) focussing on my physical appearance or asking me personal questions that are too personal - and when I don't reply, I see that person turning against me in various threads! ha ha ha!! It is a fool proof recipe for sourness that leads to personal attacks.

Jat men expect women to have a 'toned down' personality with them, which many educated woman don't have. On the contrary, many such woman have a mind of their own, which they do not hesitate to share. I post in so many threads, but there are hardly any of my replies that have "like" button turned on. But whoever challenges my views, is mostly liked by many other men.

By the way, many Jat men (educated ones) also don't have social skills when it comes to dealing with city bred, educated woman. This also creates problems.

On the whole, it is a challenging, many times a harsh place for woman. Hence their participation is less.
 
Go get a life please.

There was a thread, a poll may be where it was asked whether we should put a like button or not on JL just like FB and other social networking sites. Most of members opt for like button option but i said in one of post that it may hurt too. That's what happening here.

Coming to thread, you are the first members who came out in open and talk about this like and for that matter unlike stuff. Isn't it conveying something? You seems more bothered about people liking post against your OPINION (not you).

Less women members........you can not convince your friends to join this forum. That's perfectly fine but still .....There are some female members here who are appreciated by other members. They earned it.

Few months back when you re-start posting again i thought you might bridge the gap between this man and women issue but you yourself fall in this trap.
 
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