dekhiyo kde khud bhi badal jao
भाई दहिया साहब, बदलाव तो प्रकृति का नियम सै, आदमी नै भी इसके हिसाब तैं ढलना पड़े सै, पर म्हारे हाथ में सिर्फ दृष्टिकोण को ढालना है बाकी काम पृकृति का है I
पर या साची बात सै महिला अल्बाद करण मै घाट कोन्या जै मौका मिल ज्य़ा तो I मैं जाटलैंड पर 2002 मैं आग्या था,(कुछ दिन सक्रिय ना रह्या तो नाम कट गया और फेर दुबारा 2006 मैं नाम लिखवाया ) मेरा यह अनुभव रहा है कि जाटलैंड पर मेरी जो ragging शुरू शुरू में हुई उसमे एक दो महिला का भी हाथ था I